~ दस नम्बर...
"लीजिए श्रीमान यही वो कालोनी है जिसकी मैं बात कर रहा था, सब कुछ वैसा जैसा आपको सूट करे...सूट नया लिया लगता है अपने, जूता बहुत जच् रहा है साथ में...हाँ तो मैं आपको कालोनी के बारे में बता रहा था - बस स्टॉप गेट से बाहर निकलते ही...
१० मिनट चलेंगे तो मेट्रो स्टेशन प्रपोज़द है, अन्दर ही पार्क है, और पूरी तरह सेफ एंड गार्डेड, CCTV और सिक्योरिटी गार्ड भी है"
"कैसे हो चाचा?"
"कैसा हूँ...बेटा उम्र निकल गयी अब तो बस जान निकलनी बाक़ी है, यहाँ कोई चोर भी तो नहीं आता...
आता तो लड़-वड कर मर-वर जाता तो शायद इनाम-विनाम से चार पैसे मिल जाते घर वाली को...छोडो अपनी सुनाओ, कैसा चल रहा है धन्धा?"
"चाचा सब ठीक, भाई साहब को मकान दिखाना था, दस नम्बर की चाबी दो और वो नौ नम्बर खाली हुआ क्या?"
"मर गया, मर गया"
"मर गया... क्या कह रहे हो चाचा?"
"अर्रे...मच्छर मर गया, कब से परेशान कर रहा था, ख़ून पी रखा था, एक घंटे से इस मच्छर ने...और...नौ नम्बर वाली ने तो किराया बड़ा दिया और तीन साल का इक्स्टेन्शन भी ले लिया है...ये लो चाबी"
"चलिए साहब, किराया दस हज़ार, एक महीने का मेरा कमिशन और तीन महीने का अड्वैन्स किराया"
"ये कालोनी यहाँ सबसे ज़्यादा डिमांड में रहती है, कोई आ जाए तो जाता नहीं इतनी जल्दी और पड़ोस तो आपका बहुत ही अच्छा है, सारा मोहल्ला मरता है उसके स्टाइल पर...
टी-वी में काम करती है, ज्यादातर चुप रहती है अब, पहले ऐसा नहीं था, लेकिन हाँ पहले कोई था उसका अपना, बहुत चहकते थे नौ और दस नम्बर मिल कर...फिर पता नहीं क्या हुआ एक दिन अचानक ही चला गया, उधर वो निकला और इधर इनकी ख़ुशी, महक अचानक एक दिन दबे पाँव ये मोहल्ला छोड़ कर चली गयी"
"लेकिन एक बात की तारीफ़ कह लीजिए या यूँ कहे आज भी अपने प्यार पे भरोसा है, सिर्फ़ चाचा से बात करती है कभी कभी...उन्हीं को बता रही थी...वो एक दिन आएगा ज़रूर....और जब भी घर पर होती है बस एक ही गाना गाती और बजाती रहती है....वो क्या है गाना"
"मन कस्तूरी रे...ऐसा कुछ, हाँ आख़िर में...बात हुई ना पूरी रे"
(कोई तो बात है जो शायद अधूरी रह गयी दोनो की, सारा मोहल्ला भी दुआ करता है की वो आ जाए, ना जाने कहाँ गया वो, क्यूँ गया...ब्लडी हेल्ल)
"हाँ हाँ आप ही को सुन रहा हूँ, १० नम्बर, १० हज़ार, १ महीना आपका, ३ महीना अड्वैन्स और ९ नम्बर में कोई है जो हो के भी नहीं है...ठीक सुना ना मैंने?"
"क्या बात है, आप ने तो कमाल कर दिया, कान नए लगवाए है या आज ही साफ़ करवाए है?"
"चलिए आगे बढ़िये...देख कर सुबह सुबह भीड़ होती है बालकोनी में, यहाँ...ज़िंदगी दरवाज़ों पर जैसे नाच रही हो...ध्यान से आगे काँच टूटा पड़ा है, लग ना जाए"
"कैसे हो भाई, आज गाना नहीं सुनाओगे, सुनाओ और थोड़ा सा रास्ता बनाओ, साहब को मकान दिखाना है, फिर घर जाना है...आज इतवार है और बीवी का जन्मदिन है, भूलने का नाटक करूँगा, और फिर प्यार का इज़हार...चलो गाना गाओ यार"
> "ये लो मेरा सुनते जाओ और बाक़ी दरवाज़ों पे कान लगाओ"..."जब लाइफ़ हो आउट ओफ कंट्रोल होंठों को कर के गोल"
> "पप्पू...होंठ बाद में गोल कर लियो पहले दीवार में होल कर, कील ठोक, कपड़े सुखाने की रस्सी टांगनी है...और बालटी में पानी भर दे"
>"गीज़र ख़राब है, पानी गैस पे गरम होगा आज, और सुनो आज दुकान जाते हुए गैस वाले को सिलेंडर बोल देना, नौ दिन हो गए लिखवाए हुए"
>"आज सुबह से छाती में हल्का सा दर्द हो रहा है, गैस है शायद, थोड़ा टहल लूँ शायद आराम मिले, आज इतवार है क्लिनिक भी बंद होंगे, कल तो बिलकुल समय नहीं होगा, परसों जाऊँगा किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाऊँगा"
>"सुनो परसों क्या है? परसों, परसों, परसों नौ तारीख़ और शनिवार है बोलो, क्या मेरा शनि भारी होने वाला है?"
"हो सकता है, बंटी का रिज़ल्ट जो आना है"
>"रिज़ल्ट रिज़ल्ट, कोई रिज़ल्ट नहीं मिलता तुम्हें समझाने का, अब माँ बाबूजी की तो उम्र निकल गयी, तुम ही प्यार से बात कर लिया करो"
> "सुबह छत पर बुलाया था...आयी नहीं तुम, प्यार को प्यार से देखने का मन था मेरे प्यार, जान आज शाम का क्या प्रोग्राम है, मूवी देखने चलें?"
>"तो ठीक है फिर, शाम को प्रोग्राम पक्का, चिकन हम ले आएँगे, और तू शराब...चखना उसी वक़्त ख़रीद लेंगे, मिलते है ९ बजे हम, तुम और जाम...अच्छा हाँ, बीयर ठंडी मिली तो पकड़ लियो"
>"पराँठे ठंडे खाओगे या गरम?"
"ठंडे कौन खाता है श्रीमती जी?"
"वोही जो बाज़ार से गरम लस्सी लाता है श्रीमान"
"कोई मौक़ा ना छोड़ना ताना देने को"
लो फिर, एक और...आज लेट आने का बहाना अभी लेने को, रहने दो चलो जाओ, प्याज़ के पकोड़े बनाए है, ख़ुद खाना सेक्रेटेरी' को मत खिलाना"
>"बाबूजी प्याज़ ख़त्म हैं, शाम को सैर करने मण्डी चले जाना, प्याज़ और कोई दो चार सब्ज़ी पकड़ लाना"
"ले आऊँगा बहू"...
(सारी उम्र निकाल दी कमाने, पड़ाने में, बची खुची सब्ज़ी लाने में निकाल दूँगा, ना जाने कन्धा मिलेगा या पैदल ही जाऊँगा वहाँ भी)
>"पैदल चलिए, अब मार्केट यहीं तो है, गाड़ी क्या करनी है, थोड़ा पैदल भी चल लिया करो, अदरक हो गए हो, जहाँ देखो वहीं से बड़ रहे हो, थोड़ा कंट्रोल करो नहीं तो टेम्पो ख़रीदना पड़ेगा"
>"और मत करो तुम कंट्रोल, तुम्हारा क्या...कुछ हो गया तो पापा मुझे मार देंगे"
> "छोटे देंगें दो कान के नीचे, कह रहे है, आज के बाद अगर हमसे ऊँची आवाज़ में बात की तो"
>"ऊँची है बिल्डिंग लिफ़्ट मेरी बंद है...अब गाओ तुम <ह> से गाओ"
"हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते"..."अब तुम <ए> से गाओ"
"एक मैं और एक तू है"
>"तू नहीं बोलते बेटा, बोलो आप कैसे हो...तू गंदे बच्चे बोलते है"
>"गंदे कपड़े वॉशिंग मशीन में डाल दिया करो, दो ही हाथ हैं मेरे...सब कुछ नहीं कर सकती, कुछ तो काम अपने आप भी कर लिया करो"
>"आज अपने आप, बिना अलार्म, बिना किसी के उठाए उठ गए जनाब, सब ठीक तो है, तबियत ठीक है ना...१३ साल का रीकॉर्ड तोड़ दिया आपने तो"
>"और ये छक्का...इसी के साथ शृंखला जीत कर भारत ने एक नया रेकॉर्ड क़ायम किया है...भारत लगातार ११ मैंचों में जीत हासिल करने वाला पहला देश बन गया है"
>"देश भर में सिर्फ़ एक ही सवाल उठ रहा है, क्या कभी सच का पता चलेगा या इस बार भी हिरन ने ख़ुद को गोली मार ली
शायद ग़रीब और जानवर में कोई फ़र्क़ नहीं है, दोनो का ना अपनी ज़िंदगी पे इख़्तियार है और ना मौत पर, पेट भरने को सारी उम्र निकल देते है और फिर एक दिन किसी का भोजन बन जाते है
कहीं जाना नहीं मिलते है एक छोटे से ब्रेक के बाद"...
>"ब्रेक मारी, लगी नहीं, सड़क गिली थी और शायद ब्रेक ढीली और गया मेरा स्कूटर शर्मा जी की गाड़ी में...वो तो अच्छा हुआ शर्मा जी स्टेशन जाने को लेट हो रहे थे, बाल बाल बचा, लगा था हुआ सुबह सुबह महाभारत का पाठ आज तो"
>"आज से शाम को लेट आऊँगा, एक और टयूशन मिल गयी है, और जाना भी थोड़ा दूर है, लंच के साथ रात का खाना भी पैक कर देना, ट्रेन में ही खा लूँगा, पैसे और वक़्त दोनो बचेंगे...जो बचेगा काम आएगा, छोटी की टयूशन फ़ीस के लिए"...
(अजीब मज़ाक़ करती है ज़िंदगी सारी दुनिया को पड़ाता हूँ और अपनी बेटी को समय नहीं दे पता हूँ....चलो हलवाई अपनी मिठाई ख़ुद कहाँ खाता है)
>"खाना खाता नहीं, शराब छोड़ता नहीं, क्या करूँ मैं तेरा, कमा कमा के थक गयी हूँ और तुझे कोई मतलब नहीं तेरी माँ जिये या मरे...बस और बस पीने से मतलब"
"पड़ोसी कैसे लगे आपको?...कहे देता हूँ इस कालोनी की बात ही अलग है"
"लीजिए यही है आपका दस नम्बर...एक बात तो मैं आपको पूछना ही भूल गया, आप खाने और कमाने के लिए क्या करते हैं?
शक्ल सूरत से तो आप भी किसी मॉडल से कम नहीं लगते, पहले भी कितने आए, लेकिन हमने किसी को दस नम्बर दिखाया नहीं"
हम भी चाहते है की कोई सिंगल हैंडसम सा लड़का ही रहे वहाँ, शायद ख़ुशी लौट आएं"
"कहानियाँ लिखता हूँ"
"अच्छा, फिर तो मज़ा आ जाएगा, मुझे कहानियों का बचपन से बहुत शौक है...लेकिन सिर्फ सुनने का, पड़ा लिखा थोड़ा कम हूँ ना...कभी सुनाओ अपनी लिखी कोई अच्छी सी कहानी...शुरू से अंत तक"
"बिलकुल, शुरुआत तो तुम सुना ही चुके हो, अंत सुन लो…सच्ची कहानी है, आपबीती"
"नौ नम्बर वाला मेरा छोटा भाई था, परसों कैन्सर से लड़ते लड़ते हार गया, नहीं चाहता था कि आपकी मैडम की ज़िंदगी ख़राब हो, इसलिए चला गया, एक दिन, चुपचाप, अचानक, दबे पाँव, अकेला, अकेले मरने के लिए"...
"चार पैसे भी जोड़े थे उसने, अपने सपनो को पूरा करने के लिए...मरने से पहले...सपना तो कोई पूरा ना हुआ, अपना ही पूरा हो गया"
"मैं आया था, कुछ दिन बग़ल में रह जान पहचान कर उसे ये बात बताने की हिम्मत जुटाऊँगा"
अब ना होगा मुझसे, आप दे दीजिएगा खबर और कह दीजिएगा, वो उसकी आँखो में देख कर मर नहीं पाता, हो सके तो माफ़ कर देगी और अपनी बची हुई उम्मीद आज साफ़ कर देगी"
"और उससे मेरे बारे में कुछ ना कहना, कोई कहानी बना लेना और मेरा नम्बर प्लीज़ अपने मोबाइल से हटा देना"
#Kahani #HindiStory
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