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Jul 19, 2020, 6 tweets

PBSs के नुक़सान:
1. गरीब भी खाता खुला सकता है। वो दिन भर बैंक की पासबुक ही प्रिंट करता रहेगा, फिर कमाएगा कब? प्राइवेट बैंक अच्छे हैं। ना गरीब खाता खुलवा पाएगा ना बैंक के चक्कर लगाने पड़ेंगे।

2. गरीब किसान को KCC ज्यादातर PSB ही देते हैं। ना PSB होंगे ना किसान लोन के चक्कर में पड़ेगा।
3. छोटे दुकान वालों को MUDRA भी PSB hi देते हैं। MNC's के टाइम में क्या ही जरूरत छोटे दुकानदारों की। ये मरेंगे तभी तो वॉलमार्ट जैसी कंपनियां आएंगी।

4. 12 और 330 रुपए वाला बीमा भी PSB hi करते हैं। गरीब को क्या जरूरत बीमे की? एक तो पहले ही गरीब, उसमें से भी प्रीमियम काट लो। और वैसे भी बीमे की रकम के चक्कर में बेटे ने बाप का मर्डर कर दिया तो? सस्ते बीमे से गरीबों में क्राइम बढ़ सकता है। नो PSB, नो सस्ता बीमा।

5. बच्चों की छात्रवृत्ति के खाते भी PSB ही खोलते हैं। इतनी कम उम्र में बच्चों को रुपए पैसे के मामले में उलझना ठीक नहीं।
6. गावों में Financial Literacy Camp भी PSB ही चलाते हैं। गावों का आदमी अगर समझदार हो गया तो रिश्वत नहीं देगा। वोट भी सोच समझकर देगा। फिर नेताओं को कौन पूछेगा।

7. PSB वालों के हजार नियम होते हैं। वो जरूरी नहीं की मिनिस्टर के एक फोन पे loan दे ही दें। प्राइवेट वालों का हिसाब अलग हैं।
8. अगर गावों में बैंक पहुंच जाएंगे तो ब्याजखोर साहूकारों का धंधा चौपट हो जायेगा। इससे बेरोजगारी बढ़ सकती है।

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