सन 1905 में ब्रिटिश हुकूमत के लॉर्ड कर्जन ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को कमजोर करने के लिए कुटिल चाल चली । सन 1950 की जून में उसने असम में एक मुस्लिम लोगों के गुट से बात करके यह प्रस्ताव रखा कि प्रशासनिक कारणों से बंगाल सुबह का बंटवारा जरूरी है। 1/n
#रक्षाबंधन
#एकताकासूत्र
मुस्लिम बहुतायत वाले असम, सिलहट व बंगाल के पूर्वी हिस्से को हिंदू बहुल उड़ीसा, बिहार और पश्चिमी बंगाल से अलग किया जाए । यह हुक्म 1905 की अगस्त में जारी किया गया और बंटवारा अक्टूबर 1905 से प्रभावी होना था ।
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संयोग से तिथि श्रावण मास की पूर्णिमा में पड़ी और इस बंटवारे के प्रस्ताव के धुर विरोधी गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने रक्षाबंधन के पर्व को ब्रिटिश हुकूमत को एक कठोर संदेश देने में सहयोग करने की सोची।
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उन्होंने इस दिन सभी हिंदू और मुस्लिमों को एक दूसरे की कलाई पर राखी बांधने की अपील की क्योंकि कुछ ब्रिटिश हुकूमत के हाथों में खेलने वाले लोगों के अलावा एक बड़ा बहुमत दोनों समुदायों का विभाजन नहीं चाहता था ।
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इसलिए टैगोर की अपील को भारी जनसमर्थन मिला और इस रक्षाबंधन को पहली बार एक हिंदू त्योहार से आगे बढ़कर सामाजिक आंदोलन के रूप में प्रयोग किया गया,जब देश के हिंदुओं और मुसलमानों ने एक दूसरे को राखी बांधी थी और एकता का वचन लिया था।
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*1905 पढ़ा जाय
*सूबे का
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