#GDPTruth
यह जो जीडीपी का आंकड़ा आपको बताया जा रहा है उससे पता चलता है कि वर्तमान भारत सरकार और भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिकता नागरिकों का जीवन है न कि अर्थशास्त्र.
बड़ा आसान था कि भारत सरकार बिना लॉक डाउन लगाए, बिना अपनी आमदनी को प्रभावित किए, जनता को उसके हाल पर छोड़ देती और अपनी व्यापारिक गतिविधियां बनाए रखती. तब जीडीपी तो शायद 8 या 10 को छू जाता लेकिन कोरोना से मौत के गाल में करोड़ों लोग समा चुके होते.
याद रखें कि अब से 100 बरस पहले 1918 में ऐसी ही एक महामारी आई थी जिसमें तब भारत में एक करोड़ लोग मरे थे जबकि उस समय भारत की कुल जनसंख्या सिर्फ 20 करोड की थी । कल्पना करें कि यदि मौत की वही दर आज होती तो 130 करोड़ की जनसंख्या में अब तक कितने लोग मर चुके होते।
ऐसा जीडीपी किस काम का जिसमें जनता अपना जीवन ही गवा दे। मनमोहन सिंह जी के समय में जीडीपी के आंकड़े ठीक-ठाक है लेकिन आप खुद बताएं कि क्या आप महंगाई से भ्रष्टाचार से त्रस्त नहीं थे??
सोचिए पिछले 6 महीने से सरकार ने अपने कल कारखाने बंद कर रखे हैं, रेलवे बंद कर रखा है, अर्थात अपनी कमाई के सारे रास्ते सरकार ने सिर्फ इसलिए बंद कर दिया है कि उसके नागरिकों को करोना न लगे।
इतनी जबरदस्त बंदी के बावजूद सरकार सुनिश्चित कर रही है कि महीने में दो बार राशन बांटा जाए जिसमें एक बार फ्री है।
इस महामारी के काल में भूख से एक भी मौत नहीं हुई है।
नौकरियां गई हैं, क्योंकि आर्थिक गतिविधियां ठप की गई हैं लेकिन इस जन कल्याणकारी सरकार की पहली प्राथमिकता नागरिकों की जान बचाना थी अन्यथा वह भी अमेरिका की तरह अपने आर्थिक गतिविधियां जारी रख सकते थे।
अतः आप लोग जीडीपी की किताबी बातों पर ना जाएं और अपने आसपास के चीजों को देखकर ही फैसला करें कि यह सरकार क्या अपनी तिजोरी भरने के लिए काम कर रही हैं या आपके भले के लिए अपनी तिजोरी खाली कर रही है।
वैसे भी विपक्ष हर 15 दिन में कोई ना कोई मुद्दा लेकर आ जाता है जो अगले 10 दिन में धराशाई हो जाता है।
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