सरकारी नौकरी का घमंड धूमिल होना शायद ठीक ही रहे, क्योंकि ज़्यादातर वोटर बिना सरकारी नौकरी के है वो यही सोचेगा ।
जोगी सरकार के नए फैसले जिसमें सरकारी नौकरियां 5 वर्ष के कॉन्ट्रैक्ट पर दिए जाने की बात है, का समर्थन इसलिए अधिक हो रहा है ।
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मगर गहराई से देखिए तो इसका अर्थ यह है कि , अगर सरकार बदलती है तो दूसरी पार्टी की सरकार ,पुराने कर्मचारियों का कांट्रेक्ट शायद ही रिन्यू करेगी क्योंकि उसके हिसाब से पुराने कर्मचारी पुरानी सरकार की पार्टी के होंगे और उसे अपनी पार्टी के लोग सरकारी खर्च पर रखने होंगे ।
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जनता के पैसे का दोहन ,अपनी राजनैतिक पिपासाओं के लिए, और तंत्र में निर्बाध रूप से सबसे निचले लेवल तक तानाशाही चलाने की चाभी है ये ।
अभी ,कभी कभार कोई ईमानदार कर्मचारी या अधिकारी संविधान का हवाला देकर गलत सरकारों के गलत फैसलों के खिलाफ बोल देता है ,रोक लगा देता है 3/4
मगर नए फैसले से सरकार की जी हुज़ूरी एक मात्र मानदंड रह जाएगी नौकरी आगे चलाने का ।
ऐसे क्रांतिकारी कदम देश को दिन दूना रात चौगुना बर्बाद कर रहे हैं ।
आने वाली पुश्तों का भविष्य धूमिल है ।
तंत्र ही भ्रष्ट हो तो तंत्र में कैसे चुनाव ,क्या न्याय , कैसा तर्क वितर्क ? 4/4
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