किसान क्यों सड़क पर है बहुत आसानी से समझ आ सकता है
हरियाणा और पंजाब ऐसा राज्य है जहाँ पर गेहूँ व चावल समेत कुछ फ़सलों के सरकारी रेट है सरकार हो या व्यापारी सबको तय रेट के हिसाब से किसान की फ़सल ख़रीदनी ही होती है
अब ये सिस्टम पुरे देश में नही है देश के अन्य भाग में 1/N
सरकारी रेट न होने के कारण गेहूँ 800-1000 प्रति Q बिकता है लेकिन सरकारी रेट 1800 प्रति Q है
इसलिए हरियाणा व पंजाब के किसान फ़सल का अच्छा दाम ले पाते है क्योंकि सरकारी रेट तय है
लेकिन अब मोदी सरकार एक बिल के ज़रिए पुरे देश की मंडी सबी किसानो के लिए खोलना चाहते है 2/N
इस बिल के ज़रिए कोई भी किसान कहीं भी फ़सल बेच सकता है लेकिन सरकारी रेट पर नही बल्कि जो व्यापारी चाहेगा
अब जब UP का व्यापारी 8 रुपए किलो गेहूं ले रहा है तो हरियाना का व्यापारी 20 रुपए क्यों देगा ?
सरकारी रेट ख़त्म करके फ़सल का दाम व्यापारी तय करेंगे तो किसान का फ़ायदा होगा ? 3/N
अब समझिए किसान का फ़ायदा होगा या नुक़सान
प्याज़ आलू की फ़सल का सरकारी रेट तय नही है मंडी में बोली के अनुसार व्यापारी तय करता है सबको पता है की जब आलू व प्याज़ की फ़सल किसान के हाथ से आती है तो 2-3 रुपय किलो होती है लेकिन व्यापारी के गोदाम से आता है तो 20-25 रुपए हो जाती है N/4
इसी तरह अब उन्ह फसलों के साथ भी वैसा ही होगा जिनका सरकारी रेट सरकार ने तय किया हुआ है
उदाहरण देखिए
अभी MH में प्याज़ की फ़सल आ रही है सरकार ने निर्यात पर रोक लगा दी
उस से डिमांड कम हो गयी लेकिन सप्लाई ज़्यादा इस से रेट कम होने शुरू हो गए अब व्यापारी कम दाम पर ख़रीद लेंगे N/6
ख़रीद कर स्टॉक करेंगे जब किसान के पास से फ़सल ख़त्म हो जाएगी
सरकार निर्यात से रोक हटा लेगी सप्लाई बढ़ जाएगी रेट बढ़ जाएगे तो व्यापारी अपना माल बजार में उतार कर मुनाफ़ा कमाएँगे
अब मोदी सरकार हर फ़सल से सरकारी रेट हटा रही है तो चुप मत बैठो किसानो का साथ दो 🤝😑👏🏻
बिल में सबसे ख़तरनाक बात
कोई व्यापारी आपकी ज़मीन को 5 साल के लिए ठेके पर लेता है लेकिन पैसे के लेन देन में कुछ लफड़ा हो गया तो किसान कोर्ट नही जा सकते , area का SDM या DC मामले को देखेगा
बाक़ी आप ख़ुद समझदार हो फ़ैसल क्या होगा #IStandWithFarmers
किसान की बेटी की शादी है पैसा आधी रात को आढ़ती दे देगा
बीज ,खाद ,डीज़ल ,शादी किसी भी चीज़ के लिए पैसा चाहिए तो आढ़ती देगा क्योंकि उसको पता है फ़सल मेरे पास ही आनी है लेकिन किसान को तसल्ली होती है की सरकारी रेट से कम आढ़ती ख़रीद नही सकता
लेकिन क्या ये तसल्ली व्यापारी दे सकेगा ?
कहा जा रहा है की किसान कभी भी कैसे भी कही भी अपनी फ़सल को बेच सकता है
क्या छोटा किसान के बस की बात है की वो अगर उसकी फ़सल की बोली कम लगे और वो फ़सल उठा कर फिर से घर ले आए ?
जिसके पास ख़ुद के साधन नही क्या वो किराए के ट्रेक्टर को हर दिन बाज़ार के सकेगा ?
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