|| Bhāratavarṣa || Profile picture
पदं हि सर्वत्र गुणैर्निधीयते : Good qualities would leave their impression everywhere, It gets noticed even when it is not highlighted. || ॐ नमः शिवाय || 🍁

Sep 18, 2020, 6 tweets

अंग्रेजी का रिलीजन शब्द सनातन धर्म से थोड़ा भिन्न है रिलीजन से विश्वास का भाव सूचित होता है और विश्वास परिवर्तित हो सकता है l किसी को एक विशेष विधि में विश्वास हो सकता है और वह इस विश्वास को बदल कर दूसरा ग्रहण कर सकता है लेकिन सनातन धर्म उस कर्म का सूचक है जो बदला नहीं जा सकता l

उदाहरणार्थ ना तो जल से उसकी तरलता विलग की जा सकती है ना अग्नि से ऊष्मा विलक की जा सकती है ठीक इसी प्रकार जीप से उसके नित्यकर्म को विलग नहीं किया जा सकता, सनातन धर्म जीव का शाश्वत अंग है एवं जब हम सनातन धर्म के विषय में बात करते हैं तो हमें श्रीपाद रामानुजाचार्य के प्रमाण को मानना

चाहिए कि उसका ना तो आती है ना अंत जिसका आदि और अंत ना हो वह सांप्रदायिक नहीं हो सकता क्योंकि उसे किसी सीमा से नहीं बांधा जा सकता जिसका संबंध किसी संप्रदाय से होता है, सनातन धर्म को भी सांप्रदायिक मानने की भूल करेंगे किंतु यदि हम इस विषय पर गंभीरता से विचार करें और आधुनिक विज्ञान

के प्रकाश में सोचें तो हम शायद ही देख सकते हैं कि सनातन धर्म विश्व के समस्त लोगों का ही नहीं अपितु ब्रह्मांड के समस्त जीवो का है l

Source - Shreemad Bhagwad Geeta
Bhaktivedant book trust

Share this Scrolly Tale with your friends.

A Scrolly Tale is a new way to read Twitter threads with a more visually immersive experience.
Discover more beautiful Scrolly Tales like this.

Keep scrolling