जमीनी हक़ीक़त से कतई जुदा है ये फरमान। अत्याचार की पराकाष्ठा है ये फरमान। यूनियन के मुँह पे तमाचा है ये फरमान। 5-5 लाख की कैश रिटेंशन लिमिट में वे ब्रांचें चल रहीं हैं जहां एक ही KCC 25 लाख का है, एक ही दिन में 20 लाख कैश उठ जाता है, दिन में 200 कैश वाउचर निकलते हैं। @IOBIndia
और उन पांच लाख में भी पचास हज़ार तो RBI द्वारा जबरदस्ती थमाए हुए कॉइन्स होते हैं, 50 हजार सोइल्ड और म्युटिलटेड नोट होते हैं 2 लाख 5-10-20-50 के नोट होते हैं। ऊपर से कस्टमर नखराले। कॉइन्स नहीं लेंगे, छोटे नोट नहीं लेंगे, पुराने नोट तो भूल ही जाओ। बचता क्या है? झुनझुना!!!
इससे ज्यादा कैश तो ब्रांच के बगल के पान वाले के गल्ले में मिल जाएगा। जब ऊपर के अधिकारीयों को बोलो कैश रिटेंशन लिमिट बढ़ाने को तो बोलते हैं कि लिमिट बढ़ाने के लिए RBI की परमिशन चाहिए। तो लो न परमिशन !!! केवल थर्ड पार्टी प्रोडक्ट्स का कमीशन खाने बैठे हो क्या ऊपर?
दो स्टाफ की ब्रांच को तो दिन में 36 लॉगिन डे गिना देते हो, डेढ़ सौ का स्टाफ रख के भी खुद से इतना सा काम भी नहीं होता?? इनका कहना है कि बड़े कैश वाले कस्टमर को अगले दिन बुलाओ। तब तक करेंसी चेस्ट से कैश मंगवा लो।
जैसे कस्टमर तो इतना सीधा है की बिना कुछ बोले चला जाएगा और चुपचाप अगले दिन आ जाएगा? 5 लाख के लिए भी अगर कस्टमर को दो दिन चक्कर कटवाओगे तो कौन कस्टमर खाता रखेगा ब्रांच में? और जैसे करेंसी चेस्ट वाले तो एक फोन में ही कैश भेज देते हैं।
अगर किसी कारणवश अगले दिन कैश नहीं आया या फिर थोड़ा लेट आया और कस्टमर सुबह 10 बजे हाजिर हो गया तब क्या करोगे? और मान लो अगर कैश आ गया और कस्टमर नहीं आया फिर तो लिमिट एक्ससीड कर गयी, मारो जॉइंट कस्टोडियन की जेब पे डाका।
जॉइंट कस्टोडियन का सैलरी खाता ना हुआ गरीब की जोरू हो गयी, कोई भी चिकोटी काट लेता है। अपनी जीभ से ऊपर वालों की तशरीफ़ और जूते चाट के चमका के प्रमोशन और बैक ऑफिसेस में पोस्टिंग पाने वालों क्या पता ब्रांचें कैसे चल रही हैं?
@IOBIndia अगर रत्ती भर भी शर्म बची हो तो किसी गन्दी नाली के बदबूदार मच्छरदार चुल्लूभर पानी में डूब मरो या फिर ये तुगलकी फरमान वापिस लो।
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