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A Happy Loner educating himself to push the Human Race forward.

Jun 26, 2021, 31 tweets

ASIA'S BIGGEST ROBBERY ??? in INDIA

In Current #Bihar ????? 🙄

Are your mad ????? 🤣

Where the financial capital of India ? MUMBAI !!! Then ? 😅

📌 Thread #BettiahRaj

सन् 1990 दशहरा का दिन, जवाहरात खाना के आस पास दशहरा मेला के लिया लगे लाउड स्पीकर ।

दूसरे दिन करते दशहरा क्यूं ?
बिलकुल क्योंकि इतना धन चोरी करने में पूरे 10दिन लगे । 2 फीट की कंक्रीट, फिर 1 फीट की लोहे की चादर को काट कर ऊपर छत से गए थे चोर, जिनका कोई आता पता नही ।

कितना मूल्य की चोरी हुई ?

कोई पुख्ता आकलन मौजूद नहीं ,अगर जितना बचा गया और जैसे आम लोग कहते है उसे ये पता लगता है की करीब 300- 500 करोड़ की वास्तु चोरी हुई, आज 2021 के हिसाब से 2800-3500 करोड़ का मूल्य बनाता है वो

ना जाने कितने हीरे से भरे ड्रम, सोना के सिक्के से भरे बक्शे ।

चांदी, पन्ना, देवी देवताओं की प्राचीन मूर्तियां , सोने की घड़ियां और बात जाने क्या क्या था ।

राजा रानी के सोने हीरे से लदे ढेरो पोशाक और साड़ियां ।
उस वक्त BBC में इसे प्रसारित किया था , CBI से जांच करवाई गई । मगर कही कोई नतीजा ना निकाला ।

चोरी का पता कैसे चला ?

पहले बेतिया राज का मैनेजर एक IAS अधिकारी होता था जो स्टेट का राजस्व देखता था govt के लिया और हेड करता था । बिहार परिषद के अध्यक्ष इसको हेड करता है as Court of Wards !

फिर चोरी के वक्त के IAS बाबू रमाकांत सिंह ने जब नए अधिकारी सत्यवेम प्रसाद को चाबियां +

दी तो नए बाबू ने माना करदिया । कहा पहले चेक करेगे फिर अधिकार लेगे चाबियों पर

फिर जब तीन लोहे की दरवाजों का खजाना कमरा खुला तो सूरजर की रोशनी ऊपर से आरही थी , तब सभी को मालूम हुआ की चिड़िया दाना नहीं पूरा खेत ही चुग ले गई है । अंदर शराब और कटर मशीन थी, जिसने ये कहा जा सकता है +

चोर पार्टी अंदर बहुत दिन तक रहेंगे हो जो अनुमानित दशहरा के दस दिन होगे ।

तो ऐसे समाप्त हुई एशिया की सबसे बड़ी चोरी की कहानी ।

फिर चोटी मोटी चोरियां होती रही है महल और अन्य भवनों में, जिसपर पुलिस ने करवाई भी की है ।

फिर अब बात आती है की थे कौन ये लोग जिनका इतना सारा धन संपदा थी ।

ये थे बेत्तिया राजघराना, पूर्वी भारत का दूसरा सबसे बड़ा जमींदार राज्य । शाह जहां के ज़माने से राज करते हुए आ रहें ये घराना ने अंग्रेजो के साथ भी अपने राज्य पर राज किया ।

इसके आखिरी राजा थे - हरेंद्र किशोर सिंह ।

ब्रिटिश अध्यानन से 1620 में इस राज की नींव महाराज उग्रसेन सिंह ने रखी, जिसके पूर्वज मुगल के दरबार सहलाकर हुए करते थे ।

यही बेत्तिया नाम के पिछले का रहस्य पता चलता है ।

Bettiah - Benttiah - Bante(Cane) plant

उग्रसेन के लड़के राजा गज सिंह हुए, जिन्हे शाह जहां से राजा की उपाधि मिली, जिन्हे अगली पीढ़ियों ने 1729 तक बेत्तिया राज पर एक मशक राज किया बिना कोई विदाद के ।

फिर अंग्रेज और कोलकात्ता के मुगल गवर्नर बिन अल कासिम ने बेतिया फोर्ट पर हमला किया 1761 में

फिर अंग्रेजो ने हमला किया ।

उस वक्त राजा थे राजा जुगल किशोर सिंह, अंग्रेजो से लड़े और हार गए ।

ब्रिटिश ने इनको कंपनी रूल में ही राजघराने को चलाने को कहा । इस वक्त बेतिया में मिशनरी और धर्म परिवर्तन बहुत हुआ । फोर्ट भी मिशनरी को दे दिए ब्रिटिश ने। फोर्ट के बाहर सैकड़ों एकड़ ज़मीन और चर्च बनाए गए ।

ये हरा हुआ राजा कंपनी रूल के अंदर क्या ही कर सकता था । मिशनरी ने पूरे एस्टेट में पाव फैलाया । राजा धुरूप सिंह ने पहले अंग्रेजी व्यापारियों से दोस्ती हुई सन् 1740 में,फिर राजा ने इटालियन मिशनरी को भी न्योता दे डाला अपने राज में । राजा ने उन्हें अपनीर रानी के इलाज के लिया बुलाया था

राजा धुरुप सिंह के लड़के जिन्होंने अंग्रेज से लड़े थे राजा जुगल किशोर सिंह उन्होंने मिशनरी पर थोड़ी बहुत लगाम लगाई मगर अंग्रेज ने उनको और दबाया और फिर राजा बने राजा राजेंद्र किशोर सिंह जो अंग्रेजो के समर्थक थे या बोले कोई और चारा नही था ।

1857 की लड़ाई जब पूरा भारत लड़ रहा था तब बेतिया राज ने अंग्रेजो का समर्थन किया था । मिशनरी हावी थी । राजा ने खुद अपने दरबार में लोगो को धर्म परिवर्तन के लिया उत्साहित किया ।

फिर आए आखिरी राजा, राजा हरेंद्र किशोर सिंह ।
इनकी दो बीवियां हुई और निसंतान चल बसे । Knight की उपाधि दी

जब 1893 में इनका स्वर्गवास हुआ, तो उस वक्त Lt.Gen बंगाल खुद बेतिया आए थे ।

पहली रानी श्यो रत्न कुंवर थी, जिनका स्वर्गवास 1896 हुए ।
इन दोनो मौत के पीछे एक दो कंट्रोवर्सी कहानियां भी जुड़ी है जिसके पात्र है राजा हरेंद्र की बहन मूंगा देवी और कुछ अंग्रेज अधिकारी ।

पहली रानी के मरने के पश्चात दूसरी रानी जानकी कुंवर को अंग्रेजी अधिकारी द्वारा पागल और अयोग्य साबित किया गया जिसमें एक क्रिश्चियन मेड का भी हांथ था और उसी साल 1897 बेतिया राज की सारी संपत्ति कोर्ट ऑफ वार्ड में घोषित कर दी गई ,जिसे आज बिहार परिषद(रेवेन्यू बोर्ड) देखता है ।

रानी जानकी कुंवर 1954 तक जीवित रही बहुत कम कंट्रोल था राजकाज पर अब इनका ।
अधिकारी देखते जमीन का ब्योरा और सरकार को राजस्व पहुंच जाता था ।

कहते थे बेत्तिया राज क़रीब 4200 kmsq का हुआ करता था कभी पूरी NCT दिल्ली से करीब 4 गुना बड़ा । फिर दो विभाजन भी हुए और सरकारें बदली ।

आज इस राज को कोर्ट ऑफ वार्ड में तब तक रहना पड़ेगा जब तक कोई वारिश ना आए और अब 125 साल बाद बहुत मुश्किल है ये बात

आज बिहार सेवा के अधिकारी इस एस्टेट को मैनेज करते है

अभी भी काग़ज़ काग़ज़ पर कभी 15000 एकड़ है पूरे हिंदुस्तान में, करीब नई दिल्ली(पूरी दिल्ली नही) से 1.5 गुना बड़ा

आधी से ज्यादा पर गैर लोगो का कब्जा है । और खुद आज के बेतिया जिला में भिन्न भिन्न प्रकार के नेताओं और बहुबलियो द्वारा धीरे धीरे कब्जा होते रहा है केस बनाते गया ।

अब बस कुछ आमजन के जुबान पर रह गया बेतिया राज का स्वर्णिम इतिहास ।

खंडार बन चुका ये भवन जहा आज भी कुछ 16वी शताब्दी के सामान रखे हुए है । अंदर से ये भवन पूरा जगल और जर्जर हो चूका है ।

Credit : @ArchiveOfIndia
Glorious past of #Bettiah Raj

जिस फोर्ट का ऊपर जिक्र हुआ था 1761 के हमले, वो तो आज गायब होचुका है कोई निशान नहीं उस फोर्ट का बस आप ऊपर पहले चित्र में पैलेस जैसे को देख सकते है

ये रहा महारानी जानकी कुंवर अस्तपाल जिसे बाद में मेडिकल कॉलेज बेतिया के साथ जोड़ दिया गया ।

जर्जर हालत है, सरकार इसे ठीक कर रही है

आज का DM वेस्ट चंपारण का निवास पहले asst मैनेजर, बेतिया राज का निवास हुआ करता था ।
अंग्रेज भी अधिकारी बन यह रह चुके है ।

आज का बेत्तिया जिला सर्किट हाउस आज़ादी से पहले गेस्ट हाउस के काम आता था । Both tweet pic credit @nildeoreIAS जी

आज की MJK कॉलेज, कभी बेत्तिया राज के मैनेजर का निवास हुआ करता था ।

ये 17वी शताब्दी का महल है । महाराज दिलीप सिंह ने बनवाया था । फिर अंग्रेजो ने इसको 1897 के बाद फॉरेस्ट रेंज ऑफिस बना कर रखा और बाद में आज़ादी के बाद 1955 से 1972 तक प्रखंड ऑफिस और निवास रहा । भूकंप के कारण बिलकुल जर्जर होचूका है और मरम्मत का आभाव है ।

Correction :

युगल (जुगल) किशोर सिंह के पिता नही, नाना थे धुरूप सिंह । धूरूप सिंह की दो बेटियां थी,बेटे नही इसलिए उन्होंने अपने बेटी के लड़के को राजा गद्दी दी ।

- राजा उग्रसेन सिंह
- राजा गज सिंह
- राजा दलीप सिंह
- राजा धुरूप (ध्रुब) सिंह

यहां तक ये कश्यप गोत्र के जेठोरिया ब्राह्मण थे ।

राजा धुरूप सिंह की दो बेटियां हुई, बेटे नही
- राजकुमारी बेंगा बाबूई जिनका विवाह बाबू रघुनाथ सिंह, एक भूमिहार ब्राह्मण से हुई ।

जिनके पुत्र राजा युगल(जुगल)किशोर सिंह ने आगे राज गद्दी संभाली
- दूसरी पुत्री राजकुमार चिंगा बाबुई

- राजा युगल किशोर सिंह
- राजा बीर किशोर सिंह
- महाराज आनंद किशोर सिंह बहादुर
- महाराज नवल किशोर सिंह बहादुर
- महाराज हरेंद्र किशोर सिंह बहादुर

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