𝐌𝐚𝐫𝐲𝐚𝐦 𝐋𝐢𝐲𝐚𝐪𝐮𝐞𝐭 𝐇𝐮𝐬𝐬𝐚𝐢𝐧 Profile picture
•••𝐈 𝐚𝐦 𝐚 𝐬𝐢𝐥𝐞𝐧𝐭 𝐩𝐞𝐧, 𝐌𝐲 𝐬𝐢𝐥𝐞𝐧𝐜𝐞 𝐢𝐬 𝐚 𝐫𝐞𝐯𝐨𝐥𝐮𝐭𝐢𝐨𝐧•••

Aug 9, 2021, 18 tweets

कल जो पोस्ट रह गई थी वो आज बाकि पोस्ट कर रही हूं वक़्त निकाल कर पढ़ने की कोशिश करें।

👉 मैंने दो साल पहले एक आर्टिकल #टिकटॉक_और_बेहया_मुसलमान में जब ये लिखी थी कि आज इस्लाम के बेशुमार दुश्मन ख़ुद मुसलमानों के घरों में पल रहे हैं तब बहुत से लोगों को बुरा लगा था__/ 1/17

मगर आज वो ही लोग परेशान हैं कि पता नहीं कब और कौन लड़की उनके आस पास से मुर्तद हो जाये, अभी तो आपने चंद शादियाँ और शादी के लिए दिए गए सिर्फ़ चंद रजिस्ट्रेशन फॉर्म देखे हैं मगर इस से अलग शिर्क के हामियों के साथ अय्याशी करती हुई मुस्लिम लड़कियों की तादाद सैकड़ों हज़ारों नहीं

बल्कि लाखोँ करोड़ों में जा पहुंची है और उनको रोक पाने की कोई एक पहल दूर दूर तक दिखाई नहीं देती हैं,
और ये हमारी इज्तेमाई नाकामी है जिसमें हमारे मदारिस, उलेमा ए दीन, हमारा मुआशरा, हमारे वालिदैन और ख़ुद हम पूरी तरह ज़िम्मेदार हैं।
और ये बेग़ैरत लड़कियाँ हमारी नाकामी से निकली

हुई वो कालिख हैं जो अल्लाह ने हम सब के मुँह पर पोत दी है क्योंकि हम इसी के लायक़ थे,हम दुनिया के वो निकम्मे और बहानेबाज़ मुसलमान हैं जिनके पास अपनी ज़िम्मेदारी और अमल से बचने के हज़ारों बहाने हैं और हर नाकामी के लिए ख़ुद को बेक़सूर साबित करने के भी,

अगर दीन के नाम पर हमारे पास अब कुछ बचा है तो वो सिर्फ़ दिखावा और ढोंग है।

👉 कॉलेज यूनिवर्सिटीयों,पार्कों, रेस्टोरेंटों, सिनेमा हॉलों, बियर बारों, गली मोहल्लों, मेले और बाज़ारों में और इंटरनेट पर बेहयाई करते हुए अपनी क़ौम के नौजवानों को देख कर एहसास होती है कि जैसे इनका दीन,

ईमान, आख़िरत और ख़ुदा सब कुछ एक हराम रिश्ते में समा गया है और उस हराम रिश्ते के बिना इनकी ज़िन्दगी का तसव्वुर करना भी नामुमकिन है,
क़ौम के नौजवानों पर हराम रिश्तों का ऐसा भूत सवार है कि ख़ुद अपने दीन और अपने ख़ुदा के हुक्मों को अपने पैरों तले रौंद रहे हैं,

आज इन हरामख़ोरों ने हिजाब/पर्दा जैसे पाकीज़ा लिबास को बेहयाई और अय्याशी करने के लिए दुनिया की नज़र से बचने का सबसे आसान ज़रिया बना दिया है, दुनिया का कोई बदतरीन अमल ऐसा नहीं जो आज हिंदुस्तानी मुसलमानों से दूर हो और इसके बावजूद हम काफ़िर और दुश्मने इस्लाम उन ग़ैर इस्लामी लोगों

को बताते हैं जो इतनी बेहयाई और दीन की बेहुरमती करने की हिम्मत भी नहीं कर सकते... क्या ख़ुद दीन की इतनी बेहुरमती और हमारे किरदारों में इतनी बेहयाई के बाद भी हमको किसी काफ़िर और दुश्मने इस्लाम की ज़रूरत बाक़ी रह गई है।

👉 सर से पावँ तक अय्याशियों नशे और बेहयाई में डूबे क़ौम के

इन नौजवानों से अगर शादी करने को कहा जाए तो तमाम दुनिया की जिम्मेदारियां अपने सर पर गिना देंगे लेकिन अपनी हवस मिटाने को ये किसी कूड़ा बीनने वाली से या किसी गटर साफ़ करने वाले से भी मुँह काला करने में देर नहीं लगाते, शादी के नाम पर इनको अपनी औक़ात से पचास गुना ज़्यादा हराम का माल

चाहिए, हूर जैसे लड़का लड़की चाहिए भले ही अपनी शक्ल किसी जानवर से भी बदतर हो, यानी आज हमारे पास जाइज़ और हलाल काम करने को हज़ारों शर्तें हैं लेकिन हरामकारी करने को कोई बंदिश नहीं है😢😢

👉 एक वक़्त था जब रूस सुपर पॉवर था और उसने अपने यहाँ इस्लाम पर पाबन्दी आयत कर दी,

मुस्लिम मर्दों को चुन चुन कर मार दिया गया, क़ुरआन और मस्जिदों को शहीद कर दिया, इस्लाम की हर निशानी मिटा दी गई और मुस्लिम औरतों को उनका मज़हब बदल कर अपनी ग़ुलाम बना कर रख लिया गया लेकिन अल्लाह ने उन्ही ग़ुलाम औरतों से ऐसा काम लिया कि उनकी परवरिश और ग़ुलामी के ज़रिए उन ज़ालिमों के

बच्चों के दिलों में ईमान की हरारत पैदा कर दी जिनके बाप दादाओं ने रूस से इस्लाम का नामो निशान मिटा दिया था और एक दिन उसी ज़ालिम रूस से टूट कर, 6,7 इस्लामी मुल्क वजूद में आये।
मगर ये सब इसलिए मुमकिन हुआ कि ज़ुल्म और मजबूरियों ने उन ग़ुलाम औरतों का ज़ाहिरी मज़हब और हुलिया तो बदल

दिया था मगर उनके दिलों से जज़्बा ए ईमानी को न निकाल सका.. मगर इस दौर की ये बदकिरदार लड़कियाँ जो शिर्क के हामियों के बिस्तर गर्म करती फिर रही हैं अगर ये उनसे शादी भी न करें तब भी क्या ये कोई ईमान का हामी पैदा कर पाएंगी नहीं बल्कि इनकी कोख से शैतान के हामी ही पैदा होंगे,

और अल्लाह करे के इनकी कोखें बंजर निकले जिस से ये अपने जैसी हराम और शिर्क में डूबी हुई नस्लें पैदा न कर सकें।

लेकिन इन बेग़ैरत लड़कियों के कारनामे आज उन बुज़ुर्गाने दीन की रूहों को कितनी तक़लीफ़ पहुँचाते होंगे जिन्होंने अपनी अगली नस्लों तक ईमान की दौलत पहुंचाने को अपनी खुशियों

की, मासूम बच्चों की, अपने जान ओ माल की क़ुर्बानियां दी थीं।

👉 सुनो ऐ हवस परस्तों हराम कुफ़्र और शिर्क की ख़ातिर तुम जो आज ईमान से फिर रही हो उस हराम की दौलत, जिस्म की हवस, और ऐशो आराम की उम्र सिर्फ़ 30,40 बरस है उसके बाद तुमको वापस उसी रब की तरफ़ जाना है तुमको जवानी का नशा

उतर जाने के बाद एक एक साँस का हिसाब देना होगा, भले ही तुम 30,40 बरस बाद मर जाओ लेकिन तुमको अपनी कोख से निकली हुई नस्ल के उस आख़िरी शख़्स की आख़िरी सांस तक का हिसाब देना होगा जो तुम्हारी हवस और हरामकारी से शिर्क और कुफ़्र के बीच ज़िन्दगी गुज़ारेगी।

इसलिए तुम्हारी शिर्क में मुब्तिला एक एक साँस पर लानत, तुम्हारी हराम में डूबी हुई ज़िन्दगी पर लानत, तुम्हारी आने वाली नस्लों पर लानत और तुम पर बेशुमार लानत, बेशुमार लानत..?

__/ आज फिर पोस्ट लंबी हो जाने के कारण मैं बाकि पोस्ट यानी आखिरी पोस्ट कल कर दूंगी।
#Stop_Bhagwa_love_trap

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