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saket suryesh @saket71
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सीता (श्री राम से)- हे नाथ, क्या हमारे चौदह वर्ष पश्चात लौटने पर नगरवासी प्रसन्न नहीं हैं? नगर मे ऐसा सन्नाटा क्यों है स्वामी?
श्रीराम- हे वैदेही, सर्वप्रथम तो आप हमें स्वामी कह कर हमारी फ़ेमिनिस्ट छवि ना ख़राब करें। नगर वासी प्रसन्नतावश पटाखे फोड़ रहे थे, सब अंदर हो गए हैं।
सीता: हे प्रभु, क्या इसी चिंता मे आपने रथ नगर सीमा के बाहर रोक लिया है?

श्री राम: नहीं देवि, नगर मे प्रवेश से पूर्व रथ का पीयूसी करवाना अनिवार्य है। घोड़े से भी एफिडेविट बनवाना होगा कि घोड़ा हमारी सवारी बन कर भी आपातकाल के अंदर कैरियर बनाने वाले पत्रकारो की भाँति प्रसन्न है।
सीता : परंतु क्या इस देरी से कुमार भरत चिंतित न हो जाएँगे?
श्रीराम: हे सीते, अब भरत की चिंता के निवारण हेतु मेनका द्वारा जेल तो ना भेजे जाएँगे। सुना है नगर ने मटर की भारी क़िल्लत के कारण वरिष्ठ मंत्री भी ख़ाली घूम रहे हैं, किसी को जेल मे डाल कर ख़बरों मे आने का प्रयास कर रहे है
प्रभु बोले- हे देवि, काश रावण ने भी विभीषण को छीलने को मटर दे दी होती तो शायद लंका विनाश से बच ही जाती। बड़े बड़े साम्राज्य मंत्रियों को व्यस्त रख कर ही पतन से बचे रहे हैं। पता नहीं मटर के अभाव मे अयोध्या का क्या होगा?
सीता जी बोलीं: हे प्रभु, क्या हम उसी महल मे रहेंगे, जिसमें आपका जन्म हुआ था?

प्रभु बोले: हे सीते, हमारा बँधन मॉल और तिरपाल से इतर है। नगर न्यायाधीश के अनुसार हमारा रिवर फेसिंग प्लाट डिस्प्यूट मे चला गया है, सो कुछ काल तिरपाल के रोमांटिक वातावरण मे रहेंगे।
सीता माँ को शँकित देख प्रभु बोले- हे देवि, इस व्यवस्था से न्यायाधीश महोदय के अनुसार चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात आपको ऑक्वार्ड नही लगेगा। जस्ट लाईक दंडकारण्य लगेगा। नगर मे विकास आ चुका है, सो आपको यूज़्ड टू भी होने का समय मिलेगा। न्यायधीश को भी निर्णय लेने का समय मिलेगा।
वैदेही समझी नही- किंतु महाराज, दशरथ नरेश के वनवास से लौटे पुत्र के निवास से महती क्या समस्या है जिस पर विद्वान न्यायधीश व्यस्त हैं?

प्रभु बोले- हे वैदेही, संसार मे और भी समस्याएँ हैं। मसलन मोतीचूर लड्डू का उचित व्यास क्या हो? शासन की उपेक्षा के कारण ही पेठा बेढंगा हुआ पड़ा है।
प्रभु बोले- देवि क्या आपको उचित लगेगा कि आगरा की भाँति अयोध्या भी बेढँगी मिठाई से जाना जाए। यह अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न है जिसपर न्यायालय व्यस्त हैं। हमें वैसे भी लोक प्रचार से दूर रहना है। राम सेतु की गिलहरी को मीडिया हम पर केस करने को प्रेरित कर रहा है।
प्रभु अचानक ग़ायब हो गए। सीता माता ने चिंतित हो कर लक्ष्मण से पूछा- हे लक्ष्मण, प्रभु अचानक कहाँ चले गए?
लखन बोले- प्रभु नगर की नई देवी को नारियल चढ़ाने गए हैं ताकी उनका जायदाद का मामला जल्दी निपटे। हनुमान को लाल देह देख कर कॉम्युनिस्ट जेएनयू ले गए है, और वीसी बना दिए गए हैं।
“किंतु यह देवि कौन है जिसकी कृपा स्वयं प्रभु चाह रहे है, और नारियल चढ़ा रहे हैं, पता तो करो लखन?”

लखन पता करने गए और कुछ घँटो पश्चात वापस आए। होंठों पर गीतों की गुनगुनाहट लिए लखन से माता ने पूछा कौन हैं वह नगर देवी।

लक्ष्मण लजाते हुए बोले- माता, उमराव जान अदा।
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