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जेएनयू के हरामखोरों के खिलाफ कार्रवाई से अधिक जरूरी है, उनको बढ़ावा देनेवाले बुद्धिपिशाचों को दंड मिलना.

#Thread

ओम थानवी और उन जैसों के नाम खुला पत्र,
आप जैसे तथाकथित बुद्धिजीवी, जो देश को तोड़नेवालों के साथ खड़े हों, किसी भी सामान्य बुद्धि वाले के आदरणीय हो नहीं सकते
प्रिय होने का सवाल ही नहीं, इसलिए यह पत्र बिना संबोधन के ही है। यह पत्र आपकी उस बेतुकी बयानबाजी और झूठ के खिलाफ है, जो आपने जेएनयू के उन देशद्रोही लौंडों के पक्ष में लिखा है, जिनमें से एक तो लड़की छेड़ने का अभियुक्त था और बाकायदा दंड भी भर चुका है। अब आपके झूठ का विखंडन---
मीडिया का एक हिस्सा (जिसमें आप, पंडित रवीश कुमार, उर्मिलेश यादवा आदि-इत्यादि शामिल हैं और यह बड़ा हिस्सा है), देशद्रोहियों को राजद्रोही बताकर कानूनी पेचीदगी पर बात करता है। यह सीधे तौर पर एक व्यक्ति पीएम के विरोध के नाम पर देश का विरोध है।

भारत की एक प्रतिष्ठित संस्था है-
सीएफएसएल। उसने बाकायदा दर्जन भर वीडियो को सही माना है। ये वही वीडियो हैं, जिनमें भारत की आजादी तक जंग होने के नारे लगे, भारत के टुकड़े होने तक की कामना व्यक्त की गयी और जिहादी आतंकी के साथ आपका पोस्टर-ब्वॉय भी था।
सज्जन कुमार को 33 साल बाद सज़ा मिली।
साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित को तो आपकी सरकार ने कई वर्षों तक जेल में रखा (आपका लड़की छेड़नेवाला लौंडा तो बाहर है, महिला सम्मान पर भाषण दे रहा है) और आप भी जानते हैं, कि कितने लोग ट्रायल के नाम पर हमारी जेलों में सड़ रहे हैं। ‘सबूत’ हरेक तरह से जांच के बाद लगाए गए हैं,..
आप लोगों के डर से। जी हां, आप लोगों के डर से, आखिर 60 वर्षों में नेहरू से लेकर मौनमोहन तक, आप लोगों ने ऐसा इको-सिस्टम जो बनाया है। ये सरकार भी तो आप लोगों से ही डरी न- आपके मालिक राहुल से लेकर साथी डी राजा और केजरीवाल तक पहुंचे थे जेएनयू, याद है न। यह कानून का राजनीतिक इस्तेमाल .
, डर के मारे हर तरह से फुलप्रूफ सुरक्षा के बाद चार्जशीट दाखिल करना है, ताकि आप जैसे बुद्धिपिशाच फिर कोई हंगामा न करें (हालांकि, आप लोग तो जस्टिस सीकरी से लेकर सीएफएसएल तक पर सवाल उठाते हैं, जो भी आपके मन के मुताबिक न हो, उसपर।)
आप लोग इतने दोहरेपन से भरे बुद्धिपिशाच हैं कि सड़क पर का आदमी तो आपलोगों की बकवास सुनकर जब्र ही न कर पाएगा। ज़रा बताइए थानवी जी कि ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशाल्लाह-इंशाल्लाह’ या ‘भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी, जंग रहेगी’ या ‘तुम कितने अफजल मारोगे, हर घर से अफजल निकलेगा’ या ..
’ –किस तरह से सरकार का विरोध है, किस तरह से आप लोगों के चिर-शत्रु नरेंद्रमोदी नीत सरकार का विरोध है? देश की सर्वोच्च अदालत ने अफजल को फांसी दी थी, वह भी संसद पर हमले के आरोप में- उसके खिलाफ नारेबाजी, अफजल को शहीद ठहराना, ये सब सरकार का विरोध है, भारत के टुकड़े करने की मंशा ..
रखना सरकार की मुखालफत है?
ठीक है, आप जैसे वामपंथियों-कांग्रेसियों के लिए झूठ बोलना विशेषाधिकार है, लेकिन इतने मत गिर जाइए कि आप व्यक्ति-विशेष का विरोध करते-करते देश का ही विरोध करने लगें, देश के ही टुकड़े चाहने लगें।
गोकि, आप लोगों के पतन की कोई सीमा नहीं फिर भी
आपका तो कतई नहीं
साभार - स्वामी व्यालोक ।
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