#थ्रेड:-परफॉर्मेंस यानि प्रदर्शन

15वीं शताब्दी में परफॉर्मेंस शब्द की उत्प्त्ति हुई,तब किसी ने सोचा न होगा की समय के साथ कर्णप्रिय लगने वाला ये शब्द रोजमर्रा जिंदगी में इतनी अहम भूमिका निभायेगी की सुख-दुख,अनुकूल-प्रतिकूल,धनात्मक- ऋणात्मक जैसी परिस्थितियों का अनुभूति स्वतः होगा।।
मुझे याद है,बचपन का वो दिन जब 15अगस्त की प्रतियोगिता की तैयारी हेतु हमलोग दिन-रात भाषण की तैयारी करते थे,क्या गजब का जोश रहता था,सभी सहपाठी प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करना चाहते था,लगता हीं नहीं था,कोई द्वितीय आना चाहता हो।
लगता था ज़िंदगी में बस सभी फ़र्स्ट आने के लिये पढ़ रहे,अब मैं और मेरे घनिष्ठ मित्र दोनों में बस 19-20 का फासला था,किसी क्लास में मैं प्रथम आया तो उसके घर में मातम छा जाता था,जबकि मेरे घर में लड्डू बंटते थे।किसी में कभी वो आया तो फिर मेरे घर में भी मातम छा जाता था।
लगता था,मानों हमारे साथ हमारे अभिभावकों के बीच भी प्रतियोगिता चल रही हो,दिखावा का,पाखंड का,सोशल स्टेटस का,हर कोई बस परिणाम चाहता,परिश्रम से किसी को कोई मतलब नहीं।तभी बच्चों की हालत भी प्रेशरकुकर के समान रहती,जो सदैव बढ़ती उम्र के साथ दवाब बढ़ता चला जाता है,जो आगे खतरनाक बन जाता।
आज बैंकिंग जॉब में भी वही चल रहा,बस टारगेट,टारगेट और टारगेट,हर चीज का टारगेट,उसमें ये नहीं देखा जाता कि आपकी मेहनत कितनी है,आप किन परिस्थितियों में आपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे,ये कोई नहीं जानना चाहता,बस अच्छा रिपोर्ट चाहिए,वो भी उसमें जिसका कैंपेन चल रहा हो।
मतलब अगर साहब ने कहा कि बचत खाता,आवास ऋण और गवर्नमेंट बिज़नेस पर फ़ोकस करनी है तो केवल उसी का रिपोर्ट व्हाट्सएप्प पर भेजनी है।अब मान लीजिये,आज आपने 5करोड़ फिक्स्ड डिपॉजिट जुटाया, लेकिन संयोगवश बचत खाता नहीं खुला,तो आपका उक्त दिन का प्रदर्शन अत्यंत ख़राब या शून्य माना जायेगा।।
आज थर्ड पार्टी प्रोडक्ट बेचना बैंकरों का सबसे प्रमुख कार्य हो गया है।वज़ह प्रधान कार्यालय स्तर से कॉरपोरेट दवाब,आलम ये रहता कि बीमा कंपनियां उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों हेतु इंसेंटिव्स से लेकर आकर्षक गिफ़्ट इनाम स्वरूप रखते,जिससे पूरा करने के लिये ब्रांच स्तर पर दवाब बनाया जाता।
महीने में सभी के दो लॉगिन दे रखे जाते,चाहे SBI लाइफ हो या म्यूच्यूअल फण्ड या LIC पॉलिसी या नॉन लाइफ,उक्त दिन केवल और केवल उक्त प्रोडक्ट को बेचने हेतु सुबह 9बजे व्हाट्सएप्प पर मैसेज छोड़ी जाती है,फिर दिन में तीन-चार पर अंचल कार्यालय द्वारा फॉलोअप किया जाता है।
अब हर ब्रांच में मार्केटिंग या स्पेशलिस्ट अफसर तो होते नहीं,अधिकांश ब्रांच 3स्टाफ़ वाले होते,जिसमें से 2 दैनिक बैंकिंग कार्य में व्यस्त होते,बचा मैनेजर उसकी हालत धोबी का कुत्ता वाली होती,न घर का न घाट का!वो कभी SIP तो कभी LIC तो कभी SBI Life बेचने की जद्दोजहद करता,अंत में असफलता।
कभी कभी तो लोग डर से प्रोडक्ट की मिस-सैलिंग तक कर देते,सोचिये परफॉर्मेंस के नाम पर किस हद तक मन-मस्तिष्क में हावी हो जाते की लोग उल्टी-सीधी काम शुरू कर देते ताकि शाम को व्हाट्सएप्प रिपोर्टिंग में साहब से प्रशंसा मिले न कि नक्कारा या नालायक का तमगा।इससे कल को साख जोखिम हो सकती।
लेकिन किसे फ़र्क पड़ता, सबको बस परफ़ॉर्मर चाहिए, अब वो कैसे,किस तरह,क्यूँ, किस प्रकार किया कौन जानना चाहता,बस डाटा चाहिए ताकि वाहवाही मिले।कभी कभी तो आलम ये रहती थी कि जिसकी पहुंच जितनी,उसको उतनी सटीक सूचना मिलती थी,कुछ पता कर लेते थे कि कैम्प कब है,बस उसी दिन को टारगेट करना है।
वरना आपको अगले दिन नक्कारा और नालायक कहा जायेगा।अब शाखा प्रबंधक के तौर पर आपके बेहतर प्रदर्शन अनेक फैक्टर पर निर्भर करता है।जैसे लोन का सैंक्शन करना हो,अब शाखाओं की रिटेल हो या एमएसएमइ हो,पॉवर सीमित कर दिये गये हैं,उससे ज्यादा के लोन प्रोसेसिंग सेन्टर भेजे जायेंगे।
अब प्रोसेसिंग सेन्टर कितने दिनों में लोन सैंक्शन करता है,उसपे आपके ब्रांच का क्रेडिट टिका है।अब अगर वहाँ TAT मेंटेन नहीं हुआ तो दुष्परिणाम होंगे।उसी तरह डिपॉजिट का टारगेट,फ्रंट डेस्क ऑफिसियल पर निर्भर करता है।कुल मिलाकर कहे,जब तक टीम कंट्रीब्यूट नहीं करेगी,बेहतर प्रदर्शन असम्भव‼️
लेकिन आज भी सरकारी बैंकों में अंचल प्रमुखों या क्षेत्रीय कार्यालय प्रमुखों द्वारा अपने अंचल के अधीनस्थ शाखाओं पर गहन अध्ययन कर उपयुक्त कदम उठाने के बज़ाय, जिस तरह शाखा प्रबंधकों को डरा-धमकाकर उलजुलूल काम करवाये जाते,जो नहीं किया उसे सर्वाधिक निशाना बनाते!उसे छुट्टी तक नहीं मिलती।
भरी सभा में बेइज्जती कि जाती,निकम्मे,नालायक,बेशर्म,नक्कारा, अकर्मक,बेकार,बैंक पर बोझ जैसे शब्दों से रिव्यु मीटिंग में गाली दी जाती है।वहाँ दुःशासन की तरह चिर हरण होता है,अगर इतनी हूटिंग से भी मन न भरा तो वहाँ से सर्वाधिक दूर अन्यत्र राज्य में सर्वाधिक बेकार ब्रांच में पोस्टिंग।
लेकिन किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता,बस आप गुज़र गये,सभी RIP लिख कर भूल जायेंगे,कल फिर किसी नये को वहाँ बैठाया जायेगा,परफ़ॉर्मर की कहानी सुनाई जायेगी फिर परफॉर्मेंस के नाम पर उसका शिकार।ये कभी नहीं कहा जायेगा कि गलत लोन न करना,कभी TPP मिस-सेल न करना।वरना परफॉर्मेंस का संगीत कैसे⁉️

• • •

Missing some Tweet in this thread? You can try to force a refresh
 

Keep Current with DESI 🅱️ANKER

DESI 🅱️ANKER Profile picture

Stay in touch and get notified when new unrolls are available from this author!

Read all threads

This Thread may be Removed Anytime!

PDF

Twitter may remove this content at anytime! Save it as PDF for later use!

Try unrolling a thread yourself!

how to unroll video
  1. Follow @ThreadReaderApp to mention us!

  2. From a Twitter thread mention us with a keyword "unroll"
@threadreaderapp unroll

Practice here first or read more on our help page!

More from @idesibanker

17 Sep
थ्रेड:-#सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों की निजीकरण यानि निजी हाथों में बिक्री सही है।

देश की आर्थिक स्थिति जर्जर हो गयी,जीडीपी (-23.9%) हो गई,विगत 45वर्षों में सर्वाधिक बेरोजगारी,नई नौकरियाँ मिलनी तो दूर,लोगों की लगी हुई नौकरियां जा रही,अभी हाल हीं में मंडल जी से बात हुई थी।
1/2
देश के प्रमुख निजी बैंक में बड़े रौबदार पद पर थे,जब से कोरोना हुआ,ड्यूटी वर्क फ्रॉम होम आवंटित कर दिया,3माह नहीं हुये घर से काम किये,रात में 9बजे मेल आयी,मोबाइल का नोटिफिकेशन देखा,अवाक रह गये, बड़े-बड़े और मोटे-मोटे अक्षरों में लिखा था,

"You are Fired from this Job"

2/n
बेचारे पूरी रात सो नहीं पाये,15साल इस कम्पनी को दिया था,अच्छी खासी तनख्वाह थी,दो-दो लोन लिये थे,अब कैसे चुकायेंगे,बच्चों का पालन पोषण कैसे होगा,जैसे अनगिनत सवाल,मन में उत्तपन्न हो रहे थे,यही सवाल बदरुआ और सरोज जैसे लाखों-करोड़ों युवाओं के मन में उठ रहा था।
3/n
Read 26 tweets
12 Sep
थ्रेड-#क्षेत्रीय_ग्रामीण_बैंक

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को एक अध्यादेश के प्रावधानों के तहत सि0 1975 और आरआरबी अधिनियम,1976 को पारित कर स्थापित किया गया था,ताकि कृषि और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों को पर्याप्त बैंकिंग और क्रेडिट सुविधा मिले।
1/n
@GraminBankers @DFS_India
@DiaryBanker
उन्होंने इसे नरसिंह समिति की सिफारीश के तहत इंदिरा गांधी की सरकार के कार्यकाल के समय लागू किया गया क्यूकि उस समय 70 प्रतिशत भारत के लोग गरीबी की रेखा से नीचे थे । क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की विकास की प्रक्रिया सन 2 अक्टूबर 1975 में शुरु हुई थी।
2/n
देश का पहला क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक,प्राथमा बैंक थी,जिसकी अधिकृत पूंजी 5करोड रुपए थी। और सन 2 अक्टूबर 1976 में और 5 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंको की शुरूआत हुई जिसकी अधिकृत पूंजी 100 करोड थी । क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और प्रायोजक बैंक के स्वामित्व थे।
3/n
Read 10 tweets
11 Sep
#अंधेर_नगरी_चौपट_राजा

एक राज्य में सालों बाद एक बहुत बड़ा परिवर्तन हुआ।बटेश्वर राजा बने।चारों और प्रजा में खुशियाँ ही खुशियाँ थी,आखिर उन्होंने शक्तिशाली पार्टी को शिकस्त दी थी।और क्या कारगर रणनीति थी,मजहब और विकास साथ-साथ,तभी जन मायाजाल में फंस एकतरफा समर्थन देने को विवश थे।
1/n
गोदी मीडिया,पेशेवर कुशल रणनीतिकार और ऊपर से बटेश्वर का आक्रामक प्रचार ने चुनाव में सबसे पुरानी और शक्तिशाली पार्टी के हार सुनिश्चित करने हेतु बाँकी बची कसर भी पूरी कर दी थी।एक नया करिश्मा हुआ था,पार्टी से लेकर गोदी मीडिया ने बटेश्वर को राजा नियुक्त करने अनुशंसित कर दिया था।
2/n
पार्टी के भीतर भी पुराने दावेदारों ने विरोध के स्वर दिखाये थे,लेकिन वो ज्यादा दिन चले नहीं, अंत में सभी ने बहुमत से बटेश्वर को राजा घोषित कर दिया।
बटेश्वर राजा तो बन गये,लेकिन उन्हें इतनी बड़ी राज्य चलाने का दूर-दूर तक कोई अनुभव न था,अब कैसे चलाएं राज्य‼️
3/n
#StopPrivatisation
Read 18 tweets
30 Aug
🔵बैंकिंग तो सागर है,फिर भी #कुछ_महत्वपूर्ण_टिप्स

✔️सर्वप्रथम आप अपने पद,और बैंक द्वारा निर्धारित कार्यों को जानें।

✔️ऑफिस आर्डर को अच्छी तरह पढ़ें।

✔️ब्रांच के डेली रिपोर्ट खोलकर बिज़नेस रिपोर्ट पर एक नजर डालें।

✔️कैश में काम करते हैं तो नियमित कैश रिपोर्ट जरूर चेक करें।
1/n
▶️ऑपेरशन में काम करने वाले कैश इंचार्जों या वॉल्ट टेलर के लिये विशेष नसीहत नियमित रूप से कैश ड्रावर बन्द करने के समय ड्रावर की सम्भव हो तो प्रिंट निकाल कर जरूर फ़ाइल करें।

⏩बेट मनी समय समय पर बदलते रहें।

⏭️अगर कैश रेमिटेंस हो तो उसे गोपनीय तरीके से करें।

2/n
👉कैश रेमिटेंस सम्बन्धी बैंक के दिशा निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करे।

👉रेमिटेंस के लिये अगर निजी गाड़ी का इस्तेमाल करते हैं तो उसे बदलते रहें!

👉रेमिटेंस में कभी भी एक ही गाड़ी का प्रयोग न करें,अन्यथा लूट,डकैती या अनहोनी होने की स्थिति में आपके विरुद्ध हो सकता है।
3/n
Read 13 tweets
29 Aug
#थ्रेड
आदरणीय प्रधानमंत्री @narendramodi को एक बैंकर द्वारा लिखा खुला पत्र!!

महोदय,

निवेदन यह है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण करना समस्या का समाधान नहीं है, निजीकरण से वास्तविक समस्या छिप जायेगी। 
1/n
#SavePSBs
#stopprivatisationofbanks
@ravishndtv @idesibanda
बैंकों के राष्ट्रीयकरण के बाद भी निजी क्षेत्र के बैंक दीवालिया हुए थे और उनका सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों में विलय किया गया था।

सरकारी बैंकों की समस्या प्रशासन और नियामक ढाँचे में व्याप्त विसंगतियों के कारण है।
#stopprivatisationofbanks
#SavePSBs
@narendramodi @NITIAayog
2/n
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण के बजाए दीर्घकालीन ढांचागत सुधार किये जाने की जरूरत है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की समस्या केवल प्रभावी व कठोर विनियमन की कमी की है।
#SavePSBs
#stopprivatisationofbanks
@narendramodi @DFS_India @aiboc_in @Bankers_United
@SonuSood
3/n
Read 15 tweets
24 Aug
#आत्मकथा
#सरकारी_बैंककर्मी

🔶वर्षों से देश के कोने-कोने में एक वित्तीय सिपाही की तरह तैनात होता हूँ,चाहे लद्दाख का समुद्रतल से 10310 फीट ऊंचाई पर स्थित ब्रांच हो या अंडमान निकोबार द्वीप या हिमाचल प्रदेश का पहाड़ी क्षेत्र या छत्तीसगढ़ का जंगली क्षेत्र‼️
1/n
@idesibanda @PMOIndia
आज तक कभी न अस्वीकार किया,सदैव फ़र्ज़ के लिये तैयार,हर मुश्किलों को झेला है,चाहे भाषाओं की समस्या हो या खुद को जगह के अनुकूल बनाना हो,सदैव ईमानदारी से प्रयास किया।
मेरे लिये जाने का समय फ़िक्स है,लेकिन आने का कोई निश्चित समय नहीं,डूबते सूर्य का दर्शन संयोग से नसीब होता।
2/n
शुरू शुरू में लगता था,ये कौन सी दुनिया है??जहाँ हम पत्थर बन चुके हैं,जिसका कोई भावना हीं नहीं,लेकिन अब आदत सी हो गयी है,क्यूँकि जब सभी मुर्दे बने हों,वहाँ जिंदा इंसान भी चंद दिनों में मुर्दे बन जाते,सच्चाई यही है कि बैंककर्मचारियों का कोई वर्क लाइफ संतुलन नहीं है।
3/n
Read 15 tweets

Did Thread Reader help you today?

Support us! We are indie developers!


This site is made by just two indie developers on a laptop doing marketing, support and development! Read more about the story.

Become a Premium Member ($3/month or $30/year) and get exclusive features!

Become Premium

Too expensive? Make a small donation by buying us coffee ($5) or help with server cost ($10)

Donate via Paypal Become our Patreon

Thank you for your support!

Follow Us on Twitter!