शायद आप सभी #मरकज़ वाले पूरे षड्यंत्र को भूल चुके हैं,
आप सभी की याददाश्त फिर से ताजा करता हूँ क्योंकि मार्च से लेकर अक्टूबर तक इतनी घटनाएं घट चुकी हैं कि ये पूरा षड़यंत्र गायब ही हो गया है😠
इस साज़िश को अब भी समझ सको तो समझो नहीं तो आग अपने घर तक पहुँचने का इंतज़ार करो। 😠😠😠
1. मरकज़ शुरू हुआ था 13 मार्च को दिल्ली में। 
2. कुल 3400 जमाती इकट्ठा हुए थे जो कि देश के अलग अलग भागों से एवं विदेशों से आए थे इनमें विदेशी भी शामिल थे। 
3. विदेशी टुरिस्ट वीज़ा लेकर आते हैं और मरकज़ में शामिल हो जाते हैं। मरकज़ ख़त्म होने के बाद भी वापस नहीं जाते 😠😠😠
बल्कि देश के अलग अलग हिस्सों में फैल जाते हैं और मस्जिदों में छुप जाते हैं। 
4. 20 मार्च तक कुछ जमाती वापस अपने इलाक़ों में पहुँच जाते हैं। और कुछ लगभग 2000 से ऊपर लाक्डाउन लागू होने के कारण अपने टार्गेट इलाक़ों तक नहीं पहुँच पाते और भंडाफोड़ हो जाता है। 
➡अब क्रॉनॉलोजी समझिए⬅
यदि लाक्डाउन नहीं होता तो 24मार्च तक सभी जमाती अपने टार्गेट इलाकों में होते।
25मार्च से नवरात्रि शुरू हो गयी थी भारत के सभी मंदिर खचाखच भरे होने चाहिये थे।
इनको पूरी उम्मीद थी की हिंदू नवरात्रि में तो मंदिरों में इकट्ठा होगा ही।इतना सख़्त लाक्डाउन और उसका इतना सख़्त पालन होगा ।
इसकी इन्होंने उम्मीद तक नहीं की थी। 
अगर ये वायरस नवरात्रि के दौरान टार्गेट पर फैलाया जाता तो लगभग कितने हिंदू संक्रमित होते,शायद मरने वालों की करोड़ों में तादाद होती। 
क्या भारत सरकार इतने संक्रमित लोगों को हैंडल कर पाती, क्या सबका टेस्ट और इलाज हो पाता?
कितने हिंदू मरते???
शायद करोड़ों अब आप कहेंगे की क्या सिर्फ़ हिंदू मरते मुसलमान ना मरते। 
तो भाई इतिहास गवाह हैं तर्क और सवाल सिर्फ़ हमारे पढ़े लिखे लिबरल सेक्युलर ही करते हैं। 
मुसलमान चाहे कितना भी पढ़ा लिखा क्यूँ ना हो (90%) मुसलमान मौलवी साहब के फ़तवे को सर माथे लगाकर दिलो जान से मानता है।😠😠😠
एक फ़तवा आना था मस्जिदों से कि अल्लाह का हुक्म है की इस बला से बचने के लिए आप सब अपने घरों में ही रहें और फिर मजाल है कोई आपको बाहर मिल जाता। पुलिस और प्रशासन को इतनी मशक़्क़त करने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती।

समझ में तो आ ही गया होगा प्लान क्या था 😠😠😠
लेकिन #मोदीजी ने इतना सख़्त लाक्डाउन कर दिया
इनको बिल्कुल उम्मीद नहीं थी और अब प्लान फ़्लॉप हो गया था और सब के सब सारे जमाती बन गए भस्मासुर।
अब छिपेंगे तो कोरोना,बाहर आए तो सरकारी एजेन्सी सच तो क़बूलवा ही लेगी😠
इसलिए अस्पताल भी नहीं जाना चाहते थे।😠इलाज इस वजह से नहीं कराते थे
अभी भी कुछ पढ़े लिखे सेकूलरों को ये कपोल कल्पना ही लगेगी। जब तक उनका खुद का घर ना जल जाए तब तक #मोदीजी का विरोध ही उनके लिए अंतिम सत्य है। और जब जल जाए तो सरकार तो बचाएगी ही नहीं तो सरकार दोषी उसपर भी बवाल कर ही देंगे।
#कांग्रेस #ISI और #जाकिर के गठबंधन का एक मात्र एजेंडा था😠
किसी भी कीमत पर #मोदीजी को सत्ता से बेदख़ल करना
#मोदीजी को भारतीय जासूसी संस्थाओं ने अलर्ट कर दिया था
नवरात्रि में ये थूक जेहादी मंदिर मंदिर घूम के कोरोना फैलाना चाहते थे
#मोदीजी और #अजित_डोभालजी और बाघ की तरह घूरने वाले #अमितशाहजी बहुत शातिर शिकारी हैं🙏
उन्होंने क्रॉस प्लान रचा
और 
इन जेहादियों का पूरा प्लान तहस-नहस कर दिया गया
मोदीजी ने नवरात्रि से पहले ही लॉक डाउन की घोषणा कर दी और इनको मस्जिदों में कैद कर दिया,तो समझ में आया ये हजारों तबलीगी जमात वाले मरकजों और मस्जिदों से ही क्यों मिल रहे थे

रेल बंद, हवाई जहाज बंद,बस बंद
अब ये भाग भी नहीं सकते थे
थूकलिगी आतंकियों ने कोरोना का शुरुआती संक्रमण ले लिया था
यह एक सप्ताह बाद बुखार बना देता था
और 14 दिनों बाद पूर्ण घातक हो जाता था
सांस बंद होने लगती थी
आदमी जोर जोर से हांफने और छटपटाने लगता था
थूकलिगी जेहादी जहाँ बंद हुए
वहाँ 14 दिन बाद सांस लेने में हांफने लगे थे।
बिलबिला के मरने लगे और सरकारी हॉस्पिटलों में पहुंचने लगे थे। जिस -जिसने इनको अपने घरों में छिपाया वो भी संक्रमित हुए थे।
हिन्दुओं पर इनका वार खाली निकल गया था, इनका कारतूस ठुस्स बोल गया था😠😠😠
ये अब खुद मर रहे थे और इसलिए इनके बचाव के लिए विपक्षी नए नए राग अलाप रहे थे😠😠😠
अब इनके इलाके हॉटस्पॉट थे।
जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदने चले थे
अपने खोदे गड्ढों में हांफ रहे थे और जगह-2 बुरी हालत में पाए जा रहे थे😠
इतना होने पर भी विपक्षियों को सिर्फ राजनीति करने की सूझ रही थी😠
इन्होंने साथ देने के बजाए सिर्फ गंदी राजनीति की😠

अब दोषी कौन था फैसला कीजिए?

• • •

Missing some Tweet in this thread? You can try to force a refresh
 

Keep Current with Badal Saraswat

Badal  Saraswat Profile picture

Stay in touch and get notified when new unrolls are available from this author!

Read all threads

This Thread may be Removed Anytime!

PDF

Twitter may remove this content at anytime! Save it as PDF for later use!

Try unrolling a thread yourself!

how to unroll video
  1. Follow @ThreadReaderApp to mention us!

  2. From a Twitter thread mention us with a keyword "unroll"
@threadreaderapp unroll

Practice here first or read more on our help page!

More from @badal_saraswat

16 Oct
6 वर्षों से पहले व 6 वर्षों के बाद-जो मुझे ज्ञात नही था - जो मुझे पता चला* *ध्यान से अंत तक पढ़िये👇👇👇
मात्र 6 वर्ष पहले मैं भी एक सामान्य व्यक्ति था,मुझे भी औरो की तरह नेहरू, गांधी, गांधी परिवार तथा हिन्दू मुस्लिम भाई भाई जैसे नारे अच्छे लगते थे।*😠😠😠

मगर.....☝☝☝
इन 6 वर्षों में मुझे कुछ ऐसे सत्य पता चले जो हैरान करने वाले थे।

1. सोशल मीडिया से मुझे यह पता चला कि "पत्रकार" निष्पक्ष नही होते। वे भी किसी खास विचारधारा से जुड़े होते हैं।😠😠😠

2. लेखक, साहित्यकार भी निष्पक्ष नही होते। वे भी किसी खास विचारधारा से जुडे होते है।😠😠😠
3. साहित्य अकादमी, बुकर, मैग्ससे पुरस्कार प्राप्त बुद्धिजीवी भी निष्पक्ष नही होते।😠

4. फिल्मों के नाम पर एक खास विचारधारा को बढ़ावा दिया जाता है। बालीबुड का सच पता चला।😠

5. हिन्दू धर्म को सनातन धर्म कहते हैं और देश का नाम हिंदुस्तान है, क्योंकि यह हिंदुओं का इकलौता देश है।😠
Read 15 tweets
15 Oct
यूपी में दलित-सवर्णों को😠
गुजरात में पटेल-सवर्णों को😠
राजस्थान में जाट-गुर्जर को😠
हरियाणा में जाट-दलित को😠
कर्नाटक में लिंगायत-सवर्णों को😠
महराष्ट्र में मराठा-दलित को😠
हर राज्य में अपनी सुविधाअनुसार वो #विपक्षी😠 अपने मोहरे बदलते हैं😠😠😠
#काँग्रेस_के_कुकर्म 😠😠😠
वो बखूबी जानते हैं सत्ता कैसे हासिल की जाती है😠
एक को दूसरे हिन्दू से लड़वाकर बस सत्ता ही पाना एकमात्र लक्ष्य है😠
आप सभी थोड़ा सोचिए यदि #SocialMedia नहीं होता तो
इनके नैरेटिव कैसे सेट होते,कोई भी नहीं समझ पाता😠
जैसे की 70 सालों में कोई नही समझ पाया इनको😠
कितने झूठ बोले हैं😠
राजनैतिक महत्वाकांक्षा से सजे तमाम प्रोपेगंडा को आम जनता अब समझ रही है और बहुत से तो समझे ही नहीं😠
क्योंकि उन्हें तो सिर्फ गुलामी ही करनी है जिंदगी भर😠😠😠 सिर्फ अपने निजीस्वार्थ के लिए गिरे हुए हैं😠😠😠
जानते सब कुछ हैं लेकिन मजाल है उफ्फ तक निकल जाए😠😠😠
Read 5 tweets
15 Oct
यह Thread @C_M_P17 चाचाजी की मदद और जानकारी से लिखा हुआ है🙏🙏🙏 बस मैंने इसे Thread का रूप दिया है
एक करतूत जो छुपा रुस्तम मुल्लागांधी की ही थी, जो हमेसा अनजान बनने का ढोंग करता था😠😠😠
1920 के साल में दो किताबे भारत के सम्पूर्ण मस्जिदों से वितरित करने का कार्य एकदम चरम पर था। Image
2- किताब का नाम था "कृष्ण तेरी गीता जलानी पड़ेगी" और दूसरी किताब का नाम था -उन्नीसवीं सदी का लंपट महर्षि"
दोनों किताबे भगवान श्रीकृष्ण हमारे हिंदू धर्म से जुड़ी हुई थी। आज की ही तरह उस वक्त भी हमारे सारे देवी देवताओं की बेहद अश्लीलता से बनाई गई चित्रों के साथ लिखी हुई थी😠😠 Image
3- अब शुरू होता है मुल्ला गांधी का दोगलापन,
ये मुल्ला गांधी सब जानता था,गांधी ने यह बात हिंदुओ क़े आस्था और श्रद्धा से जुडी हुई होने के बावजूद भी गांधी ने इसे
*अभिव्यक्ति की आजादी का नाम देकर इस बात को वही छोड़ दिया इस बात पर अपना मत रखा कि भारत मे सबको अपना मत रखने का अधिकार है।
Read 7 tweets
15 Oct
#वो_मुगल_सम्राट_जो_भीख_मांगकर #अपना_गुज़ारा_करता_था
#बहादुर_शाहजफ़र 😠 को जिन किताबों में #महान घोषित किया गया है वह पुस्तकें #निजीस्वार्थ😠 को देखते हुए लिखी गयी हैं,ये तो पहले भी कह चुका हूं #वामपंथी_विचारधारा_के_चाटुकार_इतिहासकारों 😠ने #काँग्रेस😠 के कहने पर सब झूठ ही लिखा था
#वास्तविक_सच्चाई
आप स्कूलों की किताबों को छोड़ जब #बहादुरशाहजफ़र का बाकी इतिहास पर दृष्टि डालेंगे तो पता चलेगा कि यह सम्राट अपनी मौत से इतना डर गया था कि वह अंग्रेजों से जान की भीख मांग रहा था आप जफ़र का सफरनामा पढ़ें और फिर खुद फैसला करें कि ये महान कैसे,क्यों,किसलिये😠 बनायागया
इसके जीवन के अंतिम अध्याय पर जरा दृष्टि दौडायें
आपको पता चलेगा कि बहादुर शाह जफ़र एक ऐसा मुगल शासक था जो सम्राट कहलाने के लायक भी नहीं था
क्या इस्लाम में शराब पीने वाले को धर्म से जोड़ा गया है?
नाम बहादुर रखने से कोई भी बहादुर नहीं बन जाता😠
बहादुरी भरे कार्य भी करने पड़ते हैं😠
Read 14 tweets
14 Oct
सोचने वाली बात है कि #नास्तिक केवल हिंदू ही क्यों होते हैं? मुस्लिम या ईसाई क्यों नहीं?
आज ये सवाल Tweet के माध्यम से बड़े बाबूजी @Sabhapa30724463 जी🙏 ने पूछा
जवाब तो बहुत पहले मिल गया था मुझे
लेकिन आज सवाल को बाबूजी ने जब हम सभी से पूछा तो आज सबको बताना भी जरूरी है,पूरा पढ़िए👇 Image
इसकी शुरुआत तब हुई जब हमारे वेद,पुराण,ग्रंथो से मुगलो को आपत्ति थी और उन्हें इस्लाम को जबरन कुबूल करवाना था,इस्लाम का प्रचार किस प्रकार हुआ आप सभी परिचित हैं अब शुरुआत करते हैं एक अंग्रेज जो भारतीय संस्कृति से बहुत प्रभावित हुआ। जब उसे लगा की भारतीय संस्कृति तो बहुत उच्च है तो ☝
उसने सबको खत्म करने का जिम्मा #विलियम_हंटर ने लिया और जर्मन के संस्कृत जानकार #मैक्समूलर को जब #विलियम_हंटर की कमेटी के कहने पर वैदिकधर्म के आर्य ग्रंथों को बिगाड़ने का जिम्मा सौंपा गया तो उसमे मनु स्मृति, रामायण, वेद,महाभारत के चरित्रों को बिगाड़ कर दिखाने का भी कार्य किया गया।
Read 11 tweets
14 Oct
यदि हमारे पूर्वज युद्ध हारते ही रहे,तो हम 1200 साल से जिंदा कैसे हैं?
हम 1200 सालों से हिन्दू कैसे बने हुए हैं?
हमारे पूर्वजों की भूम आजतक प्रायः वैसी ही क्यूँ है?
और उसी चौहद्दी को पुनः हासिल करने को हम प्रतिबद्ध क्यूँ है?
आजकल लोगों की एक सोच बन गई है कि राजपूतों ने लड़ाई तो की Image
लेकिन वे एक हारे हुए योद्धा थे,जो कभी अलाउद्दीन से हारे, कभी बाबर से हारे,कभी अकबर से,कभी औरंगज़ेब से
क्या वास्तव में ऐसा ही है?
यहां तक कि समाज में भी ऐसे कईं राजपूत हैं,जो महाराणाप्रताप,पृथ्वीराजचौहान आदि योद्धाओं को महान तो कहते हैं,लेकिन उनके मन में ये हारे हुए योद्धा ही हैं
महाराणाप्रताप के बारे में ऐसी पंक्तियाँ गर्व के साथ सुनाई जाती हैं
"जीत हार की बात न करिए,संघर्षों पर ध्यान करो"
"कुछ लोग जीतकर भी हार जाते हैं,कुछ हारकर भी जीत जाते हैं
असल बात ये है कि हमें वही इतिहास पढ़ाया जाता है,जिनमें हम हारे हैं,क्योंकि हमारा मनोबल कम हो
Read 20 tweets

Did Thread Reader help you today?

Support us! We are indie developers!


This site is made by just two indie developers on a laptop doing marketing, support and development! Read more about the story.

Become a Premium Member ($3/month or $30/year) and get exclusive features!

Become Premium

Too expensive? Make a small donation by buying us coffee ($5) or help with server cost ($10)

Donate via Paypal Become our Patreon

Thank you for your support!

Follow Us on Twitter!