बौधायन भारत के प्राचीन गणितज्ञ और शुल्ब सूत्र तथा श्रौतसूत्र के रचयिता थे।
ज्यामिति के विषय में प्रमाणिक मानते हुए सारे विश्व में यूक्लिड की ही ज्यामिति पढ़ाई जाती है।
मगर यह स्मरण रखना चाहिए कि महान यूनानी ज्यामितिशास्त्री यूक्लिड से पूर्व ही भारत में कई रेखागणितज्ञ ज्यामिति के महत्वपूर्ण नियमों की खोज कर चुके थे, उन रेखागणितज्ञों में बौधायन का नाम सर्वोपरि है। उस समय भारत में रेखागणित या ज्यामिति को शुल्व शास्त्रभी कहा जाता था।
बौधायन के सूत्र वैदिक संस्कृत में हैं तथा धर्म, दैनिक कर्मकाण्ड, गणित आदि से सम्बन्धित हैं। वे कृष्ण यजुर्वेद के तैत्तिरीय शाखा से सम्बन्धित हैं। सूत्र ग्रन्थों में सम्भवतः ये प्राचीनतम ग्रन्थ हैं। इनकी रचना सम्भवतः ८वीं-७वीं शताब्दी ईसापूर्व हुई थी।

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More from @sharma_Deepak45

15 Oct
अक्षरधाम मंदिर गुजरात राज्य के गांधीनगर में स्थित है। यह मंदिर गुजरात के प्रमुख तथा प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। यह भक्ति, वास्तुकला, कलाकार्यों ओर प्रदर्शनियों का एक दुर्लभ संयोग है।
यह मंदिर 'स्वामीनारायण संप्रदाय' द्वारा बनवाया गया था।

मंदिर 32 मीटर ऊंचा, 73 मीटर लंबा और 39 मीटर चौड़ा है।

भगवान स्वामीनारायण को समर्पित इस मंदिर का निर्माण 6000 गुलाबी बलुआ पत्थरों से हुआ है। स्वामीनारायण की मूर्ति इस मंदिर की सैद्धांतिक मूर्ति है।
इस प्रसिद्ध मंदिर के निर्माण में कहीं भी इस्पात या सीमेंट का इस्तेमाल नहीं हुआ है।

अक्षरधाम मंदिर के प्रथम तल में स्थित 'हरी मंडपम' मंदिर का सबसे पवित्र स्थल है। भगवान स्वामीनारायण और उनके अनुयायियों की मूर्तियां यहां स्थापित हैं।

मंदिर के बगीचे और फव्वारे बेहद आकर्षक हैं।
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15 Oct
नरसी मेहता जी का जन्म भूमितलाजा गांव जूनागढ़,गुजरात (गुजराती: નરસિંહ મહેતા; 15वीं शती ई.) गुजराती भक्तिसाहित्य की श्रेष्ठतम विभूति थे उनके कृतित्व और व्यक्तित्व की महत्ता के अनुरूप साहित्य के इतिहासग्रंथों में "नरसिंह-मीरा-युग" नाम से एक स्वतंत्र काव्यकाल का निर्धारण किया गया है
जिसकी मुख्य विशेषता भावप्रवण कृष्णभक्ति से अनुप्रेरित पदों का निर्माण है। पदप्रणेता के रूप में गुजराती साहित्य में नरसी का लगभग वही स्थान है जो हिंदी में सूरदास का। वैष्णव जन तो तैणे कहिए जे पीड पराई जाणे रे' पंक्ति से आरंभ होनेवाला सुविख्यात पद नरसी मेहता का ही है।
नरसी ने इसमें वैष्णव धर्म के सारतत्वों का संकलन करके अपनी अंतर्दृष्टि एवं सहज मानवीयता का परिचय दिया है। नरसी की इस उदार वैष्णव भक्ति का प्रभाव गुजरात में आज तक लक्षित होता है।
पुष्टिमार्ग में नरसी को "वधेयो" माना जाता
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9 Oct
#तारकेश्वर_मंदिर_कर्नाटक
शिव को समर्पित एक हिंदू मंदिर
तारकेश्वर मंदिर की शिल्पकला और वास्तुकला को जब आप स्वयं अपनी आंखों से देखते हैं तो यह किसी सपने से कम नहीं प्रतीत होता इतनी अद्भुत कारीगरी
हजारों साल पूर्व जब यूरोप के कबीले अपनी मांद में बैठकर आग जलाना सीख रहे थे
उसी समय भारतीय आर्किटेक्चर अपनी कला का लोहा मनवा रहे थे

तारकेश्वर मंदिर हावेरी जिले के हंगल शहर कर्नाटक में स्थित एक बहुत ही लोकप्रिय मंदिर है।
इस मंदिर में भी भगवान शिव की मूर्ति स्थापित है इसी वजह से इस मंदिर का नाम भोलेनाथ तारकेश्वर के नाम से जाना जाता है यह मंदिर भी अपनी आकर्षक के लिए काफी जाना जाता है यहां की दीवार,स्तंभ और छत को चालुक्य शैली के रुप में सजाया गया है यहां की नक्काशी देखने लोग दूर-दूर से यहां आते हैं।
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7 Oct
हिन्दू सिक्ख ..

दशमेश पिता गुरू गोविंद सिंह जी सैनिको में उत्साह भरने के लिये जो भाषण देते थे, उनका संग्रह 'चंड़ी दी वार' कहलाता है । उसमें लिखे दोहे पर सेक्युलर गौर करें :-
मिटे बाँग सलमान सुन्नत कुराना ।
जगे धमॆ हिन्दुन अठारह पुराना ॥
यहि देह अँगिया तुरक गहि खपाऊँ ।
गऊ घात का दोख जग सिऊ मिटाऊँ ॥

अर्थात :- हिंदुस्तान की धरती से बाँग (अजान), सुन्नत (इस्लाम) और कुरान मिट जाये, हिन्दू धर्म का जागरण होकर अट्ठारह पुराण आदर को प्राप्त हों।
इस देह के अंगों से ऐसा काम हो कि सारे तुर्कों को मारकर खत्म कर दूँ और गोवध का दुष्कृत्य संसार से नष्ट कर दूँ ।

देही शिवा बर मोहे, शुभ कर्मन ते कभुं न टरूं ।
न डरौं अरि सौं जब जाय लड़ौं, निश्चय कर अपनी जीत करौं ॥
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7 Oct
*🛕कटारमल सूर्य मन्दिर, अल्मोड़ा(उत्तराखंड)*

*🔶 सनातन धर्म और सनातन संस्कृति में सूर्य पूजा का पूराना इतिहास है। तभी तो सनातन धर्म के आदि पंच देवों में एक सूर्यदेव भी है। जिन्हें कलयुग का एकमात्र दृश्य देव माना जाता है।* Image
*🔶 देवभूमि उत्तराखण्ड के अल्मोड़ा में कटारमल नामक स्थान पर भगवान सूर्य देव से संबंधित प्राचीन मंदिर ‘कटारमल सूर्य मन्दिर’ स्थित है। यह मंदिर उत्तराखण्ड में अल्मोड़ा जिले के अधेली सुनार नामक गांव में है।* Image
*🔶 2116 मीटर की ऊंचाई पर 9 वीं शताब्दी का कटारमल सूर्य मंदिर, जो खंडहर में है, अभी भी हमारे पूर्वजों के कृत्रिम और शिल्पकला के चमत्कार को प्रदर्शित करता है।*

*🔶 मुख्य मन्दिर के आस-पास ही भगवान गणेश, भगवान शिव, माता पार्वती, श्री लक्ष्मीनारायण, भगवान नरसिंह, भगवान कार्तिकेय Image
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7 Oct
*गौतमीपुत्र सातकर्णी*

*उसके घोड़े समुद्र का पानी पीते थे, अर्थात वह समुद्रों का भी स्वामी था , वह पूरी धरती ही नही, समुद्र पर भी राज करता था ।।*

*क्षत्रप शक विदेशी राजा नेहपान के हाथों उसके पिता की हत्या हुई, वह बालक इतना शिशु था, की राजपाठ भी माता #गौतमी ने संभाला ...* Image
*लेकिन उस वीरमाता ने अपने पुत्र को योग्य बनाया, ताकि वह बड़ा होकर अपने पिता के हत्यारे से प्रतिशोध ले सकें । ऐसा ही हुआ .... उस वीरपुत्र का नाम था _सातकर्णी_ ...*

*राजा बनने के बाद 16 वर्ष तक चुपचाप शांति से राजपाठ चलाते हुए अपनी सैनिक शक्ति बढ़ाता रहा,
पहला आक्रमण पूना पर किया,उसके अगले वर्ष तो सारे महाराष्ट्र को ही उन्होंने अपने नियंत्रण में ले लिया

अब बारी थी कच्छ भरूच के विदेशी शक शासक #नेहपान की 2 वर्ष तक सातकर्णी नेहपान को घेरकर बैठा रहा 2 वर्ष के कड़े संघर्ष के बाद #नेहपान का वध कर अपने पिता की हत्या का प्रतिशोध लिया
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