एक प्रधानमंत्री को क्या विधान सभा चुनावों मे अपने गठबंधन के लिए प्रचार करना चाहिए ?

प्रधानमंत्री पद की एक गरिमा होती है क्योंकि वह देश का प्रधानमंत्री होता है न कि किसी दल गठबंधन का प्रधानमंत्री होता है।

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ऐसे में जब प्रधानमंत्री के लिए लोकसभा चुनाव होते हैं केवल तभी अपने गठबंधन हेतु चुनाव प्रचार करना चाहिए जो न्यायसंगत होता है. लेकिन प्रधानमंत्री होते हुए किसी राज्य मे विधान सभा चुनावों में गठबंधन हेतु प्रचार करना न्यायसंगत नहीं लगता।

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क्योंकि विधानसभा चुनाव में यदि विरोधी सत्ता में जीत कर आ जाये तो क्या प्रधानमंत्री उस विरोधी को कहे शब्द वापिस लेगा ?
क्या उस सत्ता पक्ष को स्वीकार नहीं करेगा ?
क्या उसे केन्द्र की ओर से असहयोग करेगा ?

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क्या यह न्यायसंगत है कि एक प्रधानमंत्री ऐसे संकेत लोगों को दे कि मेरी पार्टी संगठन सत्ता मे आई तो ही राज्य में विकास होगा और हम उसे ज्यादा मदद देंगे आदि।
क्या यह राजनीति एक प्रकार का ब्लैकमैलिंग नहीं होगी ?
क्या ऐसा बोलना करना लोकतंत्र की हत्या नहीं है ?
...4/7
क्या ऐसा करना एक फेड्रल सिस्टम के देश के प्रधानमंत्री को शोभा देता है जो लोकतंत्र की मूल भावनाओं से खिलवाड करता है?
मेरा मानना है ऐसा प्रधानमंत्री को नहीं करना चाहिए यदि करना ही है तो चुनावी प्रचार तक अपने पद से मुक्त होकर करना चाहिए।

...5/7
क्या आज तक किसी दूसरे प्रधानमंत्री को विधानसभा चुनाव में प्रचार करते देखा है ?
मैंने तो नहीं सुना।
सब कुछ मोदी जी द्वारा ही दिखाया जा रहा है।

...6/7
मेरे निजी मत में ऐसा करना प्रधानमंत्री पद की गरिमा के खिलाफ है। शायद उन्हें ऐसा नही करना चाहिए।
यह ठीक नहीं है विशेषकर राज्यों के समूह के तौर पर निर्मित देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में तो बिल्कुल नहीं।

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😂😂😂

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