आपने दूरदर्शन देखना छोड़ा, प्राइवेट ऑपरेटरों ने 500 रुपये महीने निकाल लिए।

BSNL छोड़ा, प्राइवेट वाले दोगुना लेने की तैयारी में ताल ठोकने लगे हैं।

आप सरकारी रेडियो आकाशवाणी नही सुनेंगे तो प्राइवेट FM वाले आपको गाना और सिर्फ गाना सुनाकर खुद करोडों कमाएंगे।
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आपने दूरदर्शन देखना छोड़ा, प्राइवेट ऑपरेटरों ने 500 रुपये महीने निकाल लिए।

BSNL छोड़ा, प्राइवेट वाले दोगुना लेने की तैयारी में ताल ठोकने लगे हैं।

आप सरकारी रेडियो आकाशवाणी नही सुनेंगे तो प्राइवेट FM वाले आपको गाना और सिर्फ गाना सुनाकर खुद करोडों कमाएंगे।
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आप लोग रोडवेज बसों में सफर नहीं करेंगे और दो पैसे बचाने के चक्कर में निजी बसों में यात्रा करेंगे तो रोडवेज बंद हो जाएगी। फिर निजी बस वाले मनमाना किराया वसूलेंगे और रोज सरकार का करोड़ों रूपये का टैक्स रूपी राजस्व चोरी करेंगे। उनमें सुरक्षा की भी कोई गारंटी नहीं।
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विश्वास नहीं तो मध्यप्रदेश में रोडवेज बंद होने के बाद अब हालात देखिये। आप जिस भी राज्य में हैं, जिन मार्गों पर रोडवेज की बसें नही चल रही उन पर जाकर देख लें, मनमाना किराया लिया जा रहा है। इसलिए सरकारी रोडवेज में यात्रा करें और सुरक्षित रहें।
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सरकारी रेल की बजाय "तेजस" जैसी कारपोरेट निजी ट्रेन के आने पर ताली पीटेंगे तो उसका महंगा किराया भी आप ही देंगे और धीरे धीरे सारी सरकारी रेल बन्द हो जायेगी.

BPCL, इंडियन ऑयल जिस दिन नहीं रहेंगे उस दिन यही रिलायंस महंगा तेल बेचेगा।
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सार्वजनिक बैंक नही रहेंगे तो प्राइवेट बैंक आपके ही पैसे रखने के आपसे चार्ज लेंगे।
सरकारी अस्पतालों पर भरोसा नहीं करेंगे तो प्राइवेट वाले मरते दम तक आपका खून चूसेंगे। अभी कोविड में उन लोगों को पूछें जो अच्छे इलाज के चक्कर में प्राइवेट अस्पताल में गये और लाखों रूपये लुटाये।
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लोग जो सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं को कमज़ोर करने की बहस या वकालत सोशल मीडिया पर करते हैं,
सरकारी संस्थाओं में भर्तियां न होने के कारण कई गुना काम के बोझ से दबे कर्मचारियों को गाली देते हैं और उन्हें नीचा साबित करते हैं, इन सभी में कहीं न कहीं नुकसान आपका ही है.
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इसलिए सरकारी संस्थाओं और उनके कर्मचारियों का सहयोग कीजिए। उन संस्थाओं को आगे बढ़ाने में मदद कीजिये।
सरकार पर दबाव बनाइये कि सरकारी संस्थाएं कर्मचारी बढ़ाएं, गुणवत्ता बढ़ाएँ। आखिर ये संस्थान आपके टैक्स के पैसे से ही चलते हैं!

इसी में राष्ट्रहित भी है, और आपका हित भी...!! 🙏
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2 Nov
मित्रों,

जब आपको लगने लगे कि आपकी रीच कम हो गई है, आपके घर पर पत्थर नहीं फेंके जा रहे हैं, या आपके मन में सवाल उठने लगे कि देश में से अंडभक्तों की संख्या चिंताजनक रूप से कम हो गई है तो एक मजेदार प्रयोग करें। 😄

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एक संदेहास्पद विश्वसनीयता वाली पोस्ट करें। देखिए तुरंत किसी बिल से नकल कर भक्तों की फौज हरिश्चंद्र की औलादों के सुर में तत्काल आपकी पोस्ट पर फुफकारने लगेगी। 😂
आपको चैलेंज किया जाने लगेगा, आपकी माता बहनों को याद किया जाने लगेगा, ..

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और आपको हलाला की औलाद वगैरह विशेषणों से नवाजते हुए सत्य की दुहाई दी जाने लगेगी। 😆

समस्त दूध से धुला हुआ भक्त संसार आपको झूठा, कपटी, चमचा आदि सिद्ध करते हुए दुनिया का निकृष्टम व्यक्ति साबित कर देंगे। 😁

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Read 4 tweets
30 Oct
क्या ‘धार्मिक कट्टरवाद बनाम धर्मनिरपेक्षतावाद’ की लड़ाई अब एक नए दौर ‘उदार धर्मनिरपेक्षतावाद ( सेक्युलरवाद) बनाम कट्टर धर्मनिरपेक्षतावाद’ में तब्दील होती जा रही है?

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यह सवाल इसलिए क्योंकि धर्मनिरपेक्ष समाज और सत्ता तंत्र का पालन कहे जाने वाले फ्रांस में इस को लेकर तगड़ी बहस छिड़ी है कि धार्मिक और विशेषकर इस्लामिक कट्टरवाद से मुकाबला किस तरह से किया जाए।
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इस सवाल का उत्तर वाकई जटिल है कि धार्मिकता की हदें कहां तक होनी चाहिए और धर्मनिरपेक्षता को किस हद सहिष्णुता का मास्क पहनना चाहिए। कुछ लोग तर्क दे सकते हैं कि धर्मनिरपेक्षता में धार्मिक सहिष्णुता स्वत: निहित है।

यानी तुम्हारी भी जय-जय और हमारी भी जय-जय!
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Read 15 tweets
28 Oct
एक प्रधानमंत्री को क्या विधान सभा चुनावों मे अपने गठबंधन के लिए प्रचार करना चाहिए ?

प्रधानमंत्री पद की एक गरिमा होती है क्योंकि वह देश का प्रधानमंत्री होता है न कि किसी दल गठबंधन का प्रधानमंत्री होता है।

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ऐसे में जब प्रधानमंत्री के लिए लोकसभा चुनाव होते हैं केवल तभी अपने गठबंधन हेतु चुनाव प्रचार करना चाहिए जो न्यायसंगत होता है. लेकिन प्रधानमंत्री होते हुए किसी राज्य मे विधान सभा चुनावों में गठबंधन हेतु प्रचार करना न्यायसंगत नहीं लगता।

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क्योंकि विधानसभा चुनाव में यदि विरोधी सत्ता में जीत कर आ जाये तो क्या प्रधानमंत्री उस विरोधी को कहे शब्द वापिस लेगा ?
क्या उस सत्ता पक्ष को स्वीकार नहीं करेगा ?
क्या उसे केन्द्र की ओर से असहयोग करेगा ?

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Read 7 tweets
23 Oct
अंदेशा तो था ही, अब विज्ञान ने भी कह दिया है कि हम अपनी अक्कल दाढ़ खोते जा रहे हैं। अक्ल गंवाने का सबूत तो इंसान पहले भी कई बार दे चुका है, लेकिन डाढ़ के जाते रहने की पुष्टि अब हुई है।

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आप मानें न मानें, एक प्रजाति के रूप में हम मनुष्यों में कई बदलाव हो रहे हैं। ये बदलाव शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और भौतिक रूप में हैं। इसे माइक्रोइवोल्युशन कहा जा रहा है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक बीते 250 सालों में मनुष्य की संरचना में तेजी से परिवर्तन हो रहे हैं।
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हाल में ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा किया ‍िक एक तरफ मनुष्य की अकल दाढ़ विलुप्ति की कगार पर है तो दूसरी तरफ हमारी बांहों में एक अतिरिक्त आर्टरी (धमनी) पाई जा रही है।
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Read 7 tweets
16 Oct
एमपी के बिके हुए काँग्रेस विधायकों में 'सुरेश' वाकई 'धाकड़' निकले!
😂😂😂

अब भाजपा के उपचुनाव प्रत्याशी सुरेश धाकड़ ने पोहरी में अपनी चुनावी सभा में कबूलनामा पेश किया कि ‘हां, मैं बिका, लेकिन आपकी खातिर बिका।'
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सुरेश ने अपनी इस फरोख्त में उस आम जनता को भी भागीदार बना लिया है, जो हतप्रभ भाव से इस राजनीतिक सौदेबाजी का आख्यान सुन और देख रही है।

धाकड़ ने दबी जबान से यह भी कहा कि 'मैं (अपने नेता) सिंधिया के लिए बिका हूं।' इसके भी कई राजनीतिक और आर्थिक मायने निकाले जा रहे हैं।
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जाहिर है यह कोई आध्यात्मिक सौदा नहीं था, जो आत्मा से परमात्मा के बीच होता है। जिसका साध्य केवल ऐहिक बंधनो से मुक्ति होता है।

यह तो सियासत के प्रांगण में सत्ता का सौदा था, एक सत्ता को ठुकराकर सत्ता के नए शीशमहल में निवास के लिए ‘बिक’ जाना था।
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Read 11 tweets
14 Oct
शीर्षक :- पाँच स्त्रियाँ

पहली स्त्री है
जिसके दूध के दाँत नहीं टूटे
उसे चॉकलेट पसन्द है
उसका मुँह दबोचा गया एकांत में
और कहा गया "चुप रहना"
समय आने पर उसे दफ़ना दिया जाएगा
या जला दिया जाएगा
उसी एकांत में

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दूसरी स्त्री क़ैद है
रिश्तों की चारदीवारी में
उसकी जाँघें खरोंचकर
टाँगों के बीच भरी गईं
सुहाग की निशानियाँ
उसके गालों को खींचकर
चिपका दिया गया
मर्यादा की दीवारों से
ताकि बनी रहे उसके होठों पर
चिरकाल तक एक स्थिर मुस्कान

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तीसरी स्त्री वो है जो
उठा ली गयी राह चलते
उसे बांध दिया गया
जकड़कर
मजबूर किया गया उसे
साँस लेने को
जब तक उसके शरीर से
माँस का एक-एक क़तरा
न नोच लिया गया हो

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