#समयचक्र( शिकारी आज खुद शिकार है )
मंगोल! मध्य एशिया की एक दुर्दांत बर्बर जाति, जिसे रक्त बहाना अतिप्रिय था। क्रूरता इतनी की मिनटों में हजारों लोगों का सर काट दें और कटे सरों की गेंद बना कर फुटबॉल खेलें। वे किसी गाँव पर आक्रमण करते तो समूचे गाँव को काट डालते... क्रूर और
विभत्स तरीके से... पुरुषों को तुरंत, स्त्रियों को अधिक कष्ट दे कर...
मंगोल मजा लेने के लिए कत्लेआम करते थे। सेना का नायक खड़ा देखता रहता, सैनिक निरीह ग्रामीणों को दौड़ा दौड़ा कर मारते... फिर सब मिल कर ठहाके लगाते। यह उनके देश का संस्कार था।
मध्यकाल में जब मंगोलों का
प्रसार हुआ तो उन्होंने हजार-हजार लड़ाकों का दस्ता बनाया, जिसे वे हजारा कहते थे। ये क्रूर लड़ाके मध्य एशिया से निकले और देखते देखते आधी दुनिया पर छा गए। धरती का कौन सा हिस्सा था जहाँ की मिट्टी को अपवित्र नहीं किया इन बर्बरों ने... हर देश रोया इनके कारण, हर जाति तड़पी इनके आतंक से.
भारत में आये मुगल इन्ही मंगोलों में से थे।
समय बदला, ये भी थोड़े बदले। क्रूरता तो नहीं गयी, हाँ शक्ति कम हो गयी। हजारा दस्ते के लोग जो आक्रमण और लूट के लिए इधर उधर देशों में गए, वे वहीं बस गए। उनकी जाति ही हो गयी हजारा। शिक्षा थी नहीं, शक्ति गयी तो धन भी चला गया। कभी समूची
दुनिया को दुख देने वाले मंगोल सैनिक अब स्वयं दुख काटने लगे
आज हजारा लोग अफगानिस्तान, ईरान पाकिस्तान, तुर्की आदि देशों में रहते हैं। ये शिया समुदाय में आते हैं
पाकिस्तान का हजारा समुदाय आजकल फिर चर्चा में है। सदियों तक निरपराधों को क्रूरता के साथ मारने वाले हजारा समुदाय
के वंशज अब क्रुरता से मारे जा रहे हैं। निरपराध...और मार भी कौन रहा है? उसी कौम के झंडाबरदार, जिस कौम के नाम पर मंगोलों ने समूची दुनिया को रुलाया था। यह समय का न्याय है।
मनुष्य क्षमा कर दे, सभ्यताएँ क्षमा कर दें, पर समय किसी के अपराध को क्षमा नहीं करता। उसका न्यायालय महीनों
या वर्षों में नही सदियों में सुनवाई पूरी करता है, और दण्ड देता है।
पूरे भारत को अपनी तलवार की नोक पर नचाने वाले अकबर और औरंगजेब का परपोता शाह आलम एक दिन अपनी जान बचाने के लिए अपने ही राजमहल में नादिरशाह के सामने लहंगा पहन कर हिजड़ों की तरह नाचा था। सन 1303 में जिस अलाउद्दीन
खिलजी के आतंक के कारण चित्तौड़ की हजारों देवियों ने जौहर कर लिया, मात्र सत्रह वर्ष बाद सन 1320 में उसी खिलजी की बेटियों पुत्रवधुओं को गयासुद्दीन तुगलक ने अपने सरदारों में बांट दिया था। समय हर आततायी के कर्मों का दण्ड उसकी संतानों को देता रहा है। पाकिस्तान के हजारा अपने पुरुखों के
कर्मों का दण्ड भोग रहे हैं।
हमारा क्या, हम संसार के किसी भी निरपराध को सताए जाने के विरोधी रहे हैं। भारत कभी अत्याचार या अत्याचारियों का समर्थक नहीं रहा। पाकिस्तान के गरीब हजारा मजदूरों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए... दुनिया को अब तो सभ्य हो ही जाना चाहिए।
दुनिया को अब तो सनातनी हो ही जाना चाहिए..

कुछ मेहनत हम करते है कुछ आप करें अपने धर्म का प्रचार करें सत्य के साथ🙏🏻

जय शिवशक्ति 🙏🏻🚩

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12 Jan
महाभारत काल में लोगों के घर
यह #यमन_का_पुराना_शहर है।
इन खंडहरों की समय अवधि का कोई अनुमान नही लेकिन फिर भी 3500-2500 वर्ष पुराने इन्हें मानते है

वास्तव में यह शहर और इसके मकान महाभारत काल के हैं, यह मकान एक पहाड़ की चट्टान को काटकर बनाया गया है, मतलब बड़े बड़े पहाड़ो को काटना
और उस एक ही पत्थर से पूरी बिल्डिंग बनाना।।
वैदिक एवं पौराणिक इतिहास के जानकार जानते हैं, ऐसी उन्नति केवल महाभारत काल मे ही थी, की पत्थरो को काटकर मकान या बिल्डिंग बना दी जाती ।
यह तो पत्थरो को काटकर बना पूरा का पूरा शहर आपकी आंखों के सामने है ...

यमन का नाम ही महाभारतकालीन एवं
वैदिक नाम है।
"यम" नाम स्पष्टतः यमराज का है। यमराज के नाम पर अफ्रीका खण्ड में बहुत से प्रदेशो के नाम हैं, जिसकी जानकारी प्राप्त होते ही आपको विश्वास हो जाएगा, की यह ओल्ड सीटी और श्यामा महाभारत काल की है...

हमारी बात पर गम्भीरतापूर्वक चिंतन करें।

भारत में "य" तथा "ज" शब्द की
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11 Jan
राम धनुष टूटने की सत्य घटना......
*
बात 1880 के अक्टूबर नवम्बर की है बनारस की एक रामलीला मण्डली रामलीला खेलने तुलसी गांव आयी हुई थी... मण्डली में 22-24 कलाकार थे जो गांव के ही एक आदमी के यहाँ रुके थे वहीं सभी कलाकार रिहर्सल करते और खाना बनाते खाते थे...पण्डित Image
कृपाराम दूबे उस रामलीला मण्डली के निर्देशक थे और हारमोनियम पर बैठ के मंच संचालन करते थे और फौजदार शर्मा साज-सज्जा और राम लीला से जुड़ी अन्य व्यवस्था देखते थे...एक दिन पूरी मण्डली बैठी थी और रिहर्सल चल रहा था तभी पण्डित कृपाराम दूबे ने फौजदार से कहा इस बार वो
शिव धनुष हल्की और नरम लकड़ी की बनवाएं ताकि राम का पात्र निभा रहे 17 साल के युवक को परेशानी न हो पिछली बार धनुष तोड़ने में समय लग गया था...
.
इस बात पर फौजदार कुपित हो गया क्योंकि लीला की साज सज्जा और अन्य व्यवस्था वही देखता था और पिछला धनुष भी वही बनवाया था...
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27 Dec 20
राजा दाहिर: सिंध पर हुकूमत करने वाला आख़िरी कश्मीरी पंडित

'राजा दाहिर सेन' भारतीय इतिहास का एक अनकहा पन्ना ।।

जमाने ने मारे जंवा कैसे कैसे ।
जमीं खा गई आसमां कैसे कैसे ।।
आंखिरकर क्या कारण था जो इतिहास और स्कूल के पाठ्यक्रम से सिंध राजा दाहिर सेन को गायब कर दिया गया???

राजा दाहिर कौन थे?
राजा दाहिर ने कई दशकों तक दुर्दान्त, वहशी धर्मान्ध लुटेरो से भारतवर्ष की सीमाओं की रक्षा की और उन्हें भारतवर्ष की सीमाओं से दूर
रखा? जरा सोचिए, क्या उनका एक हिन्दू वीर होना ही दोगले इतिहासकारो की आंख खटकता रहा ?

20 जून राजा दाहिर का बलिदान दिवस है आइये जानते है इस अंतिम हिन्दू राजा के विषय मे ....

राजा दाहिर सेन 8 वीं सदी ई० सिंध प्रांत के राजा चच के सबसे छोटे पुत्र एवम
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26 Dec 20
जिसके माथे पर तिलक ना दिखे, उसका सर धड़ से अलग कर दो👉 पुष्यमित्र शुंग

एक महान क्रांतिकारी हिन्दू राजा

यह बात आज से 2100 साल पहले की है। एक किसान ब्राह्मण के घर एक पुत्र ने जन्म लिया, नाम रखा गया पुष्यमित्र...........

पूरा नाम पुष्यमित्र शुंग........... Image
और वो बना एक महान हिन्दू सम्राट जिसने भारत को बुद्ध देश बनने से बचाया। अगर ऐसा कोई राजा कम्बोडिया, मलेशिया या इंडोनेशिया में जन्म लेता तो आज भी यह देश हिन्दू होते।

जब सिकन्दर ब्राह्मण राजा पोरस से मार खाकर अपना विश्व विजय का सपना तोड़ कर उत्तर भारत से शर्मिंदा
होकर मगध की और गया था उसके साथ आये बहुत से यवन वहां बस गए। अशोक सम्राट के बुद्ध धर्म अपना लेने के बाद उनके वंशजों ने भारत में बुद्ध धर्म लागू करवा दिया। ब्राह्मणों के द्वारा इस बात का सबसे अधिक विरोध होने पर उनका सबसे अधिक कत्लेआम हुआ। हज़ारों मन्दिर गिरा दिए गए।
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25 Dec 20
प्रतिवर्ष 25 दिसंबर को तुलसी पूजन दिवस मनाया जाता है. तुलसी केवल एक पौधा ही नहीं बल्कि धरा के लिए वरदान है और इसी वजह से हिंदू धर्म में इसे पूज्यनीय माना गया है. आयुर्वेद में तुलसी को अमृत कहा गया है क्योंकि ये औषधि भी है और इसका नियमित उपयोग आपको उत्साहित, खुश और शांत रखता है! Image
भगवान विष्णु की कोई भी पूजा बिना तुलसी के पूरी नहीं मानी जाती!

पूजन विधि:

सुबह अपने नैतिक कार्यों से निवृत होकर मां तुलसी की पूजा करनी चाहिए. पहले कुमकुम से उनका टीका करना चाहिए और उसके बाद उनकी आरती करके जल चढ़ाना चाहिए!

जल चढ़ाते वक्त आपको निम्नलिखित मंत्र पढ़ने चाहिए-
महाप्रसादजननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी
आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते!!

इसके बाद आप तुलसी की परिक्रमा कीजिए, आप अपनी सुविधानुसार 7, 11, 21 या 111 परिक्रमा कर सकते हैं!
और उसके बाद मां तुलसी का ध्यान कीजिए इसके बाद तुलसी के पत्ते डालकर प्रसाद वितरित करें!

तुलसी के आठ नाम:
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