हिमाचल प्रदेश के स्पीति घाटी में यह एक प्रसिद्ध तिब्बती मठ है। यह बौद्ध मठ हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में स्पीति नदी के किनारे स्तिथ है। इस प्रसिद्ध बौद्ध मठ की ऊंचाई समुद्रतल से लगभग 13504 फीट है। यह मठ एक शंक्‍वाकार चट्टान पर निर्मित है।
पौराणिक मान्यताओ के अनुसार यह इस मठ का निर्माण रिंगछेन संगपो ने करवाया था। यह मठ महायान बौद्ध के जेलूपा संप्रदाय से संबंधित एक धार्मिक बौद्ध मठ है।
की गोम्पा हिमाचल प्रदेश में स्तिथ बहुत ही ऐतिहासिक स्थानों में से एक है।इस मठ का निर्माण 11 वीं शताब्दी का माना गया है। यह मठ लगभग एक हज़ार साल से भी पुराना माना जाता है। इसमें अभी भी प्राचीन बौद्ध स्क्रॉल और पेंटिंग हैं।
इस मठ में कुछ प्राचीन हस्‍तलिपियों तथा थंगकस का संग्रह कर के रखा गया है। इस धार्मिक मठ में बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु, नन और लामा यहां अपनी धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए इस मठ में आते रहते है।
की बौद्ध मठ की स्थापना लगभग 11वीं शताब्दी ई। में हुई थी जिस का निर्माण आस-पास बौद्ध शिक्षक अतिषा के मुख्य शिष्य ड्रोमटन ग्येल्वे जुंगे द्वारा की गई थी। यह स्पीति घाटी का सबसे बड़ा बौद्ध मठ और लामास के लिए सबसे बड़ा एक धार्मिक प्रशिक्षण केंद्र है।
इसकी सुन्दरता को ओर भी बढ़ा देती है। इस धार्मिक मठ की दीवारो में कई तरह के चित्रों और मूर्तियों चित्रित है। भारतीय पुरातत्व अध्यन से यह ज्ञात होता ही की यह चित्रों और मूर्तियों 14वीं सदी की मठवासी वास्तुकला का एक उदाहरण है। जो उस समय प्रचलित थी।
वर्ष 1855 में आई एक रिपोर्ट की जानकारी के अनुसार इस मठ में लगभग 100 भिक्षुओं को बौद्ध धर्म की शिक्षा दी गयी थी। वर्ष 1830 में लद्दाख और कुल्लू के बीच हुए युद्ध के कारण इस मठ और यहां के आस पास के क्षेत्रो को काफी क्षति पंहुची थी
यह क्षेत्र काफी सारे युद्धों के झेलने के बाद पुन: खड़ा हो ही रहा था। कहा जाता है 1840 के दशक में यहाँ पर आग लग गई जिसके कारण की मठ जलकर राख हो गया था। बाद में इस मठ को पुन:निर्मित किया गया था।

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15 Feb
રણછોડરાય અથવા રણછોડજી તે ભગવાન શ્રીકૃષ્ણનું જ એક સ્વરુપ છે. ગુજરાત રાજ્યમાં રણછોડરાયજીનું પ્રખ્યાત મંદિર ડાકોરમાં આવેલું છે જે શ્રદ્ધાળુઓ માટે યાત્રા ધામ છે. રણછોડની સંધિ છુટી પાડીએ તો રણ + છોડ એમ થાય, જેનો અર્થ છે કે રણ (યુદ્ધ મેદાન) છોડીને ભાગી જનાર.
ભગવાન કૃષ્ણને આ અનોખુ પણ ભક્તોનું ખુબ લાડીલું નામ મળ્યું કારણકે તેમના કાલયવન રાક્ષસ સાથેનાં યુદ્ધમાં, ભગવાન યુદ્ધ ત્યજીને મથુરા વાસીઓને લઈ દ્વારકા ભણી આવ્યાં, અને ગુજરાતમાં આવી વસ્યા. કદાચ આ જ કારણે ગુજરાતીઓને કૃષ્ણનાં અન્ય રૂપો કરતા રણછોડજીનું રૂપ વધુ પ્રિય છે
કેમકે કૃષ્ણએ ગુજરાતને અને ગુજરાતીઓને પોતાના કર્યા.દ્વાપરયુગમાં ભગવાન શ્રીકૃષ્ણનો સખો વિજયાનંદ હતો. હોળીના તહેવાર નિમિત્તે જ્યારે આખું ગામ ભગવાન શ્રીકૃષ્ણ સાથે રંગે રમી રહ્યું હતુ ત્યારે વિજયાનંદ કોઇક કારણસર રિસાઇને હોળી રમવા આવ્યો નહી.
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15 Feb
देश में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जो साल के 8 महीने पानी में डूबा रहता है और इसके नजारे इतने खूबसूरत हैं कि आप इसकी ओर खींचे चले आएंगे।
पंजाब के तलवाड़ा से करीब 34 किलोमीटर की दूरी पर पोंग डैम की झील के बीच बना एक अद‌्भुत मंदिर,जो साल में सिर्फ चार महीने (मार्च से लेकर जून तक)ही नजर आता है बाकी समय मंदिर पानी में ही डूबा रहता है साल के बाकी आठ महीने ये पानी में डूबे रहते हैं, जहां केवल नाव से ही पहुंचा जा सकता है
पानी उतरने के कारण अब ये मंदिर नजर आने लगा है, जिससे यहां पर टूरिस्ट का आना शुरू हो जाएगा।
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14 Feb
उदयपुर शहर के बाहरी इलाके में बांस डारा पर्वत पर स्थित सज्जनगढ़ किला मेवाड़ राजवंश से संबंधित एक पूर्व शाली निवास है। इस का निर्माण लगभग 1884 में महाराणा सज्जन सिंह द्वारा करवाया गया था। जिन्होंने दस्को तक इस रियासत पर शासन किया था।
सज्जन गढ़ पैलेस पिछोला झील के साथ समुंद्र तल से लगभग 1944 मीटर की ऊंचाई पर स्थित उदयपुर के सबसे लोप्रिय पर्यटक स्थलों में से एक है।

सज्जन गढ़ किले को बनवाने के पीछे कई किस्से है
जिन में से एक है कि महाराणा सज्जन सिंह एक ऐसा महल बनवाना चाहते थे कि जहां से उनका पैट्रिक घर या चितौड़गढ़ का किला दिखाई दे। और दूसरा कारण यह है कि महाराणा चाहते थे कि महल सेल के बाहर ऊंची जगह पर बने और जहां से बदल आसानी से देखने लगे,जिसके उदयपुर के मौसम का अंदाजा लगाया जा सके।
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14 Feb
* परम वीर जसवंतसिंह जी रावत *

देवभूमि उत्तराखंड का जिला पौडी गढवाल,
जन्म लेकर जसवंतसिंह ने गजब किया कमाल !
तीन सौ चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया,
नमन तुम्हें करते हैं हम ओ भारत माँ के लाल !
हुई भारत चीन बीच सन् 1962 में लडाई थी,
वीर जवान जसवंतने वीरता उसमें दिखाई थी।
वह बहादुर घंटों तक अकेला ही लडता रहा था,
उनके इस पराक्रम से चीनी सेना बौखलाई थी।

17 नवम्बर 1962 में जो आखिरी हमला हुआ था
अरुणाचल सीमा पर तब सैन्य तैनात हुआ था।
फायदा उसीका ऊठाकर चीन ने हमला बोल दिया
नूरा नांग युद्ध से ही तब भारत तबाह हुआ था ।

चार युद्ध बटालियन को वहाँ भेजा गया था,
लेकिन लडने को पर्याप्त साधन नहीं दिया था ।
उसी कारण से ही तो यह तब तय हुआ था--
गढवाल बटालियन को वापस बुला लिया था ।
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13 Feb
꧁सनातन संस्कृति꧂

- जापान चीन तथा विश्वभर के इंद्र

समस्त देवताओं के राजा इंद्र ही है, असुरो ( वेद विरोधीयो ) के तो इंद्र बैरी ही है । हिंदुओ में प्रत्येक 4th नाम मे इंद्र मिल जाता है :- नरेंद्र, दीपेंद्र, जितेंद्र, सुरेंद्र आदि ... Image
विचार करें, अगर इंद्र नेगेटिव करेक्टर होते, तो क्या प्रत्येक हिंदुओ के नाम इंद्र पर होते ? हम रावण या दुर्योधय नाम नही रखते, लेकिन इंद्र नाम रखते है, इसका अर्थ यही है, इंद्र का अपमान करवाना असुरो द्वारा सुनियोजित था ।
इंद्र का अपमान करने वाले भारत ने एक भी युद्ध नही जीता, ओर जिस समय राजा युद्ध से पहले प्रथम देवता इंद्र को मनाते थे, प्रत्येक युद्ध भारत ने जीते, क्यो की शत्रुओं के दुर्ग तोड़ने की कला इंद्र के पास ही है । इंद्र जब हाथी पर सवार होकर लड़ता है, तब कोई उसके आगे नही टिकता ।
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13 Feb
કચ્છ જિલ્લાના મુખ્ય મથક ભુજથી ૧૦૫ કિ.મી. ના અંતરે આશાપુરા માતાનું મંદિર આવેલું છે, જે ગુજરાતભરમાં તેમજ ગુજરાતીઓમાં માતાનો મઢ તરીકે પ્રસિદ્ધ છે.આ મંદિરની ચારેબાજુ નાની નાની ટેકરીઓ અને પર્વતો આવેલા છે. અહીં આશાપુરા માતાની છ ફુટ ઉંચી અને છ ફુટ પહોળી સ્વયંભુ મૂર્તિ બિરાજમાન છે. Image
માતાની મુર્તિ મનુષ્યના શરીર કરતાં પણ ઉંચી છે પરંતુ તે માત્ર ગોઠણ સુધી જ છે.

એવું કહેવાય છે કે, આજથી લગભગ દોઢ હજાર વર્ષ પહેલાં દેવચંદ નામનો મારવાડનો કરાડ વૈશ્ય (વાણિયો) કચ્છમાં વેપાર માટે ફરતો હતો.
તે દરમિયાન તાજેતરમાં જ્યાં આશાપુરા માતાનું મંદિર છે તે જગ્યાએ તે વાણિયાએ આસો મહિનાની નવરાત્રિ હોવાથી માતાજીની સ્થાપના કરી અને ખુબ જ ભક્તિભાવપુર્વક માતાની આરાધના કરી હતી. તેની ભક્તિને જોઈને માતા ખુશ થયાં અને તેને સ્વપ્નમાં દર્શન આપીને જણાવ્યું કે
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