तालचेर(ओडिसा) शहर का मुख्य ऐतिहासिक आकर्षण यहां खड़ा तालचेर पैलेस है। इस खूबसूरत और विशाल महल को सम्राट सदन महल के नाम से भी जाना जाता है। यह एक लग्जरी हेरिटेज प्रॉपटी है जिसका निर्माण 14वीं शताब्दी के आसपास किया गया था।
आकर्षक वास्तुकला के साथ बनाया गया यह महल पर्यटकों को काफी ज्यादा आश्चर्यचकित करने का काम करता है। इस पैलेस के प्रवेशद्वार पर बनी पत्थर की चक्र संरचना सबका ध्यान आकर्षित करती है, जिसे देख इस सरंचना के प्रति जिज्ञासा और बढ़ जाती है।
जानकारी के अनुसार यह राजा राजेंद्र चंद्र देव का शाही निवास हुआ करता था। राजा राजेंद्र चंद्र देव यहां अपनी पत्नी रानी साहेब पुष्पा देवी और दो बच्चे युवराज विजेंद्र देब और शैंलेंद्र चंद्र देब के साथ रहा करते थे।
तालचेर महल शहर का लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जहां पर्यटक जरूर भ्रमण के लिए आते हैं। तालचेर के पास आप रेंगली नामक डैम की सैर के लिए भी जा सकते हैं, जो यहां का दूसरा खास पर्यटन आकर्षण है। आगे जानिए इस महल से जुड़ी और भी कई महत्वपूर्ण बातें।
ग्रीष्मकाल के दौरान यह स्थल काफी ज्याद गर्म रहता है, इसलिए यहां आने का आदर्श समय अक्टूबर ले लेकर फरवरी के मध्य का है, इस दौरान यहां का मौसम काफी खुशनुमा रहता है और आप पैलेस के साथ-साथ अन्य पर्यटन स्थलों का भ्रमण आराम से कर पाएंगे।

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More from @sharma_Deepak45

18 Mar
मूर्ति के हाथ मे जो डमरू देख रहे हो ना, वो पत्थर का है। ये तो कुछ भी नही है,डमरू पर जो रस्सी देख रहे हो ना, वह भी पत्थर की है। ओर तो ओर आप पत्थर की रस्सी के निचे उंगली भी डाल सकते हो इतनी जगह है।हुआ ना आश्चर्य।
अब जरा सोचिए बिना किसी तकनीक के क्या केवल छेनी और हथौड़ी से यह सब कैसे संभव है।
एक हल्की सी गलत चोट क्या पूरी मूर्ति को खराब नहीं कर सकती थी।
और अगर छेनी -हतोड़े से संभव है तो आज इतनी तकनीक के बावजूद भी इतनी सटीकता से कोई इसकी प्रतिलिपि क्यों नहीं बना पाता है ।
ऐसे हजारों आश्चर्य है सनातन में लेकिन कुछ वामपंथी इतिहासकारों ने इनको आश्चर्य ही बनाकर रहने दिया किसी के सामने आने ही नहीं दिया और हमारी विडंबना देखिए कि हम बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन हमें हमारे पूर्वजों द्वारा बनाई गई इन महान कलाकृतियों का ज्ञान भी नहीं है।
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18 Mar
"वराह विष्णु"
गुफा मंदिर 2 6 वीं या 7 वीं शताब्दी के अंत में बनाया गया था ।

गुफा प्रवेश द्वार एक बरामदा है जो चार वर्ग के स्तंभों से विभाजित है, जिसमें आधे स्तंभों के रूप में समाप्त होता है, सभी एकांत पत्थर के चेहरे से तराशा जाता है ।
गुफा 2 में बड़ी राहत में से एक ने विष्णु की किंवदंती को ब्रह्मांडीय महासागर की गहराई से देवी (भुदेवी) को बचाने के लिए अपने वराह (एक सूअर) अवतार में दिखाया है।

नक्काशी एक मूर्तिकला राहत दिखाती है जो विष्णु के दस अवतारों में से तीसरे वराह अवतार की कहानी को दर्शाती है
जो मुखमंतपा (बरामदा) के बाएं किनारे पर तराशा गया है । संस्कृत में वराह अर्थात जंगली सूअर । इस अवतार में वह एक जंगली सूअर का रूप लेता है और भूदेवी को हिरण्याक्ष नामक दुष्ट राक्षस से बचाता है, जो उसे परेशान कर रहा था ।
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17 Mar
THE POWER OF MEDITATION
आर्यभट्ट(Aryabhata, जन्म: 476 ई. - मृत्यु: 550 ई.)
प्राचीन भारत के एक महान ज्योतिषविद्, खगोलशास्त्री और गणितज्ञ थे, जिनका जन्म कुसुमपुर (बिहार) में हुआ था। *नालन्दा विश्वविद्यालय में उन्होंने शिक्षा प्राप्त की थी।
23 वर्ष की आयु में उन्होंने खगोल विज्ञान पर एक लेख लिखा और गणित पर एक अविश्वसनीय ग्रंथ "आर्यभट्टीयम" कहा, उन्होंने ग्रहों की गति और ग्रहण के समय की गणना की प्रक्रिया तैयार की। आर्यभट्ट ने पहली बार घोषणा की थी कि पृथ्वी गोल है।
यह अपनी धुरी पर घूमती है, सूर्य की परिक्रमा करती है और अंतरिक्ष में निलंबित हो जाती है - कोपरनिकस ने अपने हेलियोसेंट्रिक सिद्धांत को प्रकाशित करने के हजारों साल पहले। उनका सबसे शानदार योगदान शून्य की अवधारणा थी, जिसके बिना आधुनिक कंप्यूटर प्रौद्योगिकी अस्तित्वहीन रही होती ।
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15 Feb
हिमाचल प्रदेश के स्पीति घाटी में यह एक प्रसिद्ध तिब्बती मठ है। यह बौद्ध मठ हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में स्पीति नदी के किनारे स्तिथ है। इस प्रसिद्ध बौद्ध मठ की ऊंचाई समुद्रतल से लगभग 13504 फीट है। यह मठ एक शंक्‍वाकार चट्टान पर निर्मित है।
पौराणिक मान्यताओ के अनुसार यह इस मठ का निर्माण रिंगछेन संगपो ने करवाया था। यह मठ महायान बौद्ध के जेलूपा संप्रदाय से संबंधित एक धार्मिक बौद्ध मठ है।
की गोम्पा हिमाचल प्रदेश में स्तिथ बहुत ही ऐतिहासिक स्थानों में से एक है।इस मठ का निर्माण 11 वीं शताब्दी का माना गया है। यह मठ लगभग एक हज़ार साल से भी पुराना माना जाता है। इसमें अभी भी प्राचीन बौद्ध स्क्रॉल और पेंटिंग हैं।
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15 Feb
રણછોડરાય અથવા રણછોડજી તે ભગવાન શ્રીકૃષ્ણનું જ એક સ્વરુપ છે. ગુજરાત રાજ્યમાં રણછોડરાયજીનું પ્રખ્યાત મંદિર ડાકોરમાં આવેલું છે જે શ્રદ્ધાળુઓ માટે યાત્રા ધામ છે. રણછોડની સંધિ છુટી પાડીએ તો રણ + છોડ એમ થાય, જેનો અર્થ છે કે રણ (યુદ્ધ મેદાન) છોડીને ભાગી જનાર.
ભગવાન કૃષ્ણને આ અનોખુ પણ ભક્તોનું ખુબ લાડીલું નામ મળ્યું કારણકે તેમના કાલયવન રાક્ષસ સાથેનાં યુદ્ધમાં, ભગવાન યુદ્ધ ત્યજીને મથુરા વાસીઓને લઈ દ્વારકા ભણી આવ્યાં, અને ગુજરાતમાં આવી વસ્યા. કદાચ આ જ કારણે ગુજરાતીઓને કૃષ્ણનાં અન્ય રૂપો કરતા રણછોડજીનું રૂપ વધુ પ્રિય છે
કેમકે કૃષ્ણએ ગુજરાતને અને ગુજરાતીઓને પોતાના કર્યા.દ્વાપરયુગમાં ભગવાન શ્રીકૃષ્ણનો સખો વિજયાનંદ હતો. હોળીના તહેવાર નિમિત્તે જ્યારે આખું ગામ ભગવાન શ્રીકૃષ્ણ સાથે રંગે રમી રહ્યું હતુ ત્યારે વિજયાનંદ કોઇક કારણસર રિસાઇને હોળી રમવા આવ્યો નહી.
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15 Feb
देश में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जो साल के 8 महीने पानी में डूबा रहता है और इसके नजारे इतने खूबसूरत हैं कि आप इसकी ओर खींचे चले आएंगे।
पंजाब के तलवाड़ा से करीब 34 किलोमीटर की दूरी पर पोंग डैम की झील के बीच बना एक अद‌्भुत मंदिर,जो साल में सिर्फ चार महीने (मार्च से लेकर जून तक)ही नजर आता है बाकी समय मंदिर पानी में ही डूबा रहता है साल के बाकी आठ महीने ये पानी में डूबे रहते हैं, जहां केवल नाव से ही पहुंचा जा सकता है
पानी उतरने के कारण अब ये मंदिर नजर आने लगा है, जिससे यहां पर टूरिस्ट का आना शुरू हो जाएगा।
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