#ज्योतिष #बुध_ग्रह #उपाय

ज्योतिष में बुध ग्रह को बुद्धि ज्ञान, तर्क, त्वचा व वाणी का कारक माना गया है। कुंडली मे बुध की लाभकारी स्थिति जातक को बुद्धिमान, तार्किक, गणित और अकाउंट्स पर प्रभाव, ज्योतिष में रुचि, वाक्पटु बनाता है।
काव्य संगीत में रुचि, भाषणों/बोली के द्वारा प्रभाव डालने वाला , हँसमुख, कल्पनाशील, लेखनमे रुचि लेने वाला, व्यंगप्रेमी और हाजिरजवाब बनाता है।
ये सेल्स/मार्केटिंग के क्षेत्र में अग्रणी बनाता है।
वहीं बुध के नकारात्मक प्रभाव व्यक्ति को संकोची, बोलने में तुतलाना/हकलाना, सूंघने की क्षमता पर प्रभाव, व्यापार/कार्यक्षेत्र में हानि और दांतों से सम्बंधित समस्याएं देता है।
अलग अलग भाव मे बुध का प्रभाव अलग ही होता है साथ ही दृष्टि संबंध और युति के भी परिणाम बदल जाते हैं।
द्वितीय भाव मे ये बेबी फेस, चेहरे पर लावण्य और व्यक्ति को उसकी आयु से कम दिखाता है।
वैसे तो बुद्ध ग्रह का फ़लित व उपचार हर कुंडली के अनुसार अलग अलग होगा पर यहां कुछ ऐसे उपाय लिख रही हूँ जो सभी कर सकते हैं।
बुधवार को गाय को अंकुरित मूँग खिलाएँ।
बुध की दान सामग्री दान करें।
किन्नरों को हरे कपड़े और चूड़ियाँ दें।
छोटी कन्याओं का पूजन कर उन्हें हरे कपड़े/चूड़ियाँ और मिठाइयां देकर दक्षिणा दें।
माँ दुर्गा की आराधना करें
बहन बुआ बेटियों का सम्मान करें।
बहन को नाक का आभूषण(नाक की लौंग) दें।
तुलसी की सेवा करें सूखने पर तुरंत दूसरी लगा दें।
विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें।
दूर्वा से गणपति जी का पूजन/अर्चन करें।

दान इत्यादि उपाय कुंडली के अनुसार ही किये जाते हैं इसलिए अपनी मर्जी से दान न करें किसी योग्य ज्योतिषी से मार्गदर्शन लें।

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2 Apr
आक मंदार सड़क किनारे, खाली पड़ी जमीन पर, घरों के बाहर अक्सर आपको मिल जाता है। आक सूर्य के कारक पौधा है। इसकी मुख्यतः 3 प्रकार होते हैं जो सफ़ेद फूल, बैंगनी, फूल और बैंगनी सफेद दोनों रंग में पाए जाते हैं।
आक/मंदार की लकड़ी को सूर्य ग्रह की समिधा के रूप प्रयोग करते हैं।
अगर सौभाग्य से आपके घर के आस पास दिखता है तो
सफ़ेद फूल- से बुधवार और चतुर्थी को गणपति का अर्चन करें। रविवार और रविवारीय सप्तमी तिथि में सूर्य यंत्र/शिवलिंग का अर्चन करें।
बैंगनी फूल- इसके बैंगनी फूल से हनुमान जी का अर्चन करते हैं।
अमावस्या/मंगलवार/शनिवार को इन फूलों की माला बनाकर हनुमान जी को समर्पित करें।
ये उपाय सभी कर सकते हैं सभी को लाभ होगा। सूर्य से संबंधित बाधाएँ जॉब में बॉस से अनबन, सरकारी जाँच, सरकारी मामले/केस, सरकारी जॉब के लिए तैयारी करने वालों लोगों को लाभ मिलेगा।
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28 Mar
#केतु #अश्वगंधा #ज्योतिष

शास्त्रों में कहा गया है इस धरती में उपलब्ध केवल वही पौधा या जड़ीबूटी अनुपयोगी है जिसके विषय मे हमें ज्ञान नहीं।
आयुर्वेद को अथर्ववेद का उपवेद कहा जाता है।
अथर्ववेद में विस्तारपूर्वक पौधों व उनके औषधीय/ज्योतिषीय प्रयोग बताए गए हैं।दुर्भाग्यवश कुछ पौधों को हम पहचान नही पा रहे हैं पर जिनको पहचानते हैं उनका उपयोग प्रमाणित और सटीक है
इसके सही उपयोग तो एक योग्य वैद्य ही बताएंगे पर आज अश्वगंधा के ज्योतिषीय प्रभाव पर चर्चा करते हैं।
अश्वगंधा केतु की कारक वनस्पति है। मैंअक्सर लिखती हूँ कि राहु माया/सोच/विचार/मोह/भ्रम है तो केतु उस विचार को धरातल देने वाला कर्म है। सोच (राहु) का क्रियान्वयन(केतु) है।
तो जब स्ट्रेस या अन्य कारणों से नींद न आने की समस्या हो, पूरी रात जागते गुज़रे तो भ्रम/चिंता का निवारण करें।
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27 Mar
मैंने पहले भी कहा है जो व्यक्ति परिवार और समाज के लिए अपने कर्तव्यों को सही से निभाता है अनायास ही उसे ग्रहों के शुभ परिणाम मिलने शुरू हो जाते हैं।
पहले घरों में सबके नाम की रोटी निकालने की रीत थी जो आस पास के पशु पक्षियों को दी जाती थी। ये जीव भी अलग अलग ग्रहों के कारक हैं।
अब न घर के आसपास इन पशुओं/पक्षियों की उपलब्धता है नहीं पहले जैसे नियमों को लोग निभा पाते हैं।
पर कभी कभी समय मिलने पर ये उपाय करने का प्रयास करें...... और इनके लाभ स्वयं महसूस करें।
1- गाय जो हरा चारा दें - मंदिरों गौशालाओं या सड़क पर घूमने वाले इन जीवों को हरा चारा, भीगी मूँग, घी रोटी और गुड़, अंकुरित जवारे(गेहूं) और चना खिलाएँ गाय सनातन धर्म मे पूज्यनीय है इन उपायों से आप अपने बुध, शुक्र, सूर्य और गुरु के अनुकूल परिणाम पा सकेंगे।
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24 Mar
#ज्योतिष_विज्ञान #मांगलिक_योग

आज मंगल ग्रह और मांगलिक दोष पर चर्चा करते हैं।

अक्सर मंगल और मांगलिक दोष के नाम पर लोग बहुत डराए जाते हैं। मंगल ग्रह और मांगलिक दोष/योग कैसे हमें प्रभावित करते हैं आज ये देखेंगे।
1
मंगल ग्रह ऊर्जा, आत्मविश्वास, निडरता, नेतृत्व के गुण, जल्दबाजी, जरूरत से ज्यादा इमोशनल होना, जल्दी गुस्सा आना, रक्त, भाई/मित्र, ज़मीन का कारक ग्रह है। ग्रहो में मंगल को सेनापति की संज्ञा दी गयी है अच्छे सेनापति के क्या गुण होने चाहिए ये अब आप सोच लीजिये।
2
अब विवाह का कारक तत्व है कोमल, शीतल, प्रेम , लावण्य, सुन्दरता मधुरता का ग्रह शुक्र।

गुरु/मंगल पुरुष और शुक्र को स्त्री से तुलना की गयी है रज/रक्त और वीर्य दोनों के मिलने से ही संतति शुरू होती है।
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23 Mar
#उपाय #होली
होली को रात को दारुण रात्रि कहते हैं। फाल्गुन मास में शिवरात्रि और होली दो रात जागरण किया करते थे पुराने लोग।हमारे त्योहार ग्रह नक्षत्रों की चाल और योग से बनते हैं।इन विशेष योगों का बहुत महत्व है।
तो आज वर्ष में केवल एक बार करने वाले होली के प्रयोग पर बात करते हैं।
1
नारियल, सुपारी, पान के पत्ते, काले तिल, अलसी का तेल, बताशा, लौंग, मौली धागा की व्यवस्था रखें।
जलती होली की परिक्रमा करके पान, सुपारी, कपूर, घी में डूबा बताशा/लौंग, मौली लिपटा नारियल लेकर होलिका की सात परिक्रमा करें और नरसिंह भगवान से अपने कष्टों के निवारण की प्रर्थना करके
2
जलती होलिका में डाल दें। साथ ही काले तिल भी समर्पित करें।
राहु के दुष्प्रभावों के उपाय का समय है होली, जम कर ढोलक मंजीरे व अन्य वाद्य यंत्रों का प्रयोग कर फ़ाग/फगुआ/गीत संगीत का आनंद लें।
राहु माया है और माया से केवल ज्ञान बचाता है
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22 Mar
कुंडली में 12 भाव होते हैं। कैसे ज्योतिष द्वारा रोग के आंकलन करते समय कुंडली के विभिन्न भावों से गणना करते हैं आज इस पर चर्चा करेंगे।
कुण्डली को कालपुरुष की संज्ञा देकर इसमें शरीर के अंगों को स्थापित कर उनसे रोग, रोगेश, रोग को बढ़ाने घटाने वाले ग्रह
रोग की स्थिति में उत्प्रेरक का कार्य करने वाले ग्रह, आयुर्वेदिक/ऐलोपैथी/होमियोपैथी में से कौन कारगर होगा इसका आँकलन, रक्त विकार, रक्त और आपरेशन की स्थिति, कौन सा आंतरिक या बाहरी अंग प्रभावित होगा इत्यादि गणना करने में कुंडली का प्रयोग किया जाता है।
मेडिकल ज्योतिष में आज के समय में Dr. K. S. Charak का नाम निर्विवाद रूप से प्रथम स्थान रखता है। उनकी लिखी कई पुस्तकें आज इस क्षेत्र में नए ज्योतिषों का मार्गदर्शन कर रही हैं।
प्रथम भाव -
इस भाव से हम व्यक्ति की रोगप्रतिरोधक क्षमता, सिर, मष्तिस्क का विचार करते हैं।
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