#सोमवती_अमावस्या #पितृदोष #पीपल #उपाय #नवग्रह
12 अप्रैल को सोमवती अमावस्या है।

अमावास्या तु सोमेन सप्तमी भानुना सह।
चतुर्थी भूमिपुत्रेण सोमपुत्रेण चाष्टमी।।
चतस्रस्तिथयो स्त्वेताः सूर्यग्रहण सन्निभाः।
स्नानं दानं तथा श्राद्धं सर्वं तत्राक्षयं भवेत्।।
अर्थात- सोमवारी अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी एवं बुधवारी अष्टमी ये चारो तिथीयां सूर्यग्रहण के समान कही गईं हैं, इनमे जो स्नान, दान, श्राद्ध किया जाता है वह सब अक्षय होता है ।
इस दिन पवित्र नदी सरोवर में स्नान करने का विशेष महत्व है।
अगर पवित्र तीर्थों में स्नान करना सम्भव न हो तो नहाते समय इन पवित्र नदियों का आवाहन करिये।

गंगा सिंधु सरस्वती च यमुना गोदावरी नर्मदा
कावेरी सरयू महेन्द्रतनया चर्मण्यवती वेदिका।
क्षिप्रा वेत्रवती महासुरनदी ख्याता जया गण्डकी
पूर्णाः पूर्णजलैः समुद्रसहिताः कुर्वन्तु मे मंगलम् ।।
इस श्लोक का अर्थ भी यही है कि उपर्युक्त सभी जल से परिपूर्ण नदियां, समुद्र सहित मेरा कल्याण करें ।
दान करें, जप करें गुरुमन्त्र या किसी भी मंत्र जप का इस दिन सामान्य से कई गुना फल मिलेगा।
जिन लोगों को कुंडली मे पितृदोष, सर्प दोष/कालसर्प की स्थिति कही गयी है बो भी इस दिन
इन दोषों के निवारण हेतु उपाय करें।

पितृदोष की स्थिति में पीपल वृक्ष को जनेऊ अर्पित करते हुए "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र जपें और पीपल की 108 परिक्रमा करें, लोटे में दूध/कालेतिल मिश्रित जल ले जाएं और श्री हरि से पितृदोष के निवारण और पितरों को सद्गति देने की प्रार्थना करें।
पीपल वृक्ष को श्री हरि का साक्षात स्वरूप कहा है।
मूल विष्णु:स्थितो नित्यं स्कन्धे केशव एव च
नारायणस्तु शाखासु पत्रेषु भगवान हरि:
फलेSच्युतो न सन्देह: सर्वदेवै: समन्वित:
स एव विष्णुर्द्रुम एव मूर्तो महात्मभि: सेवतिपुण्यमूल: यस्याश्रय: पापसहस्त्रहन्ता भवेन्नृणां कामदुधो गुणाढ्य:
इसका अर्थ है कि ‘पीपल की जड़ में विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में भगवान हरि और फलों में सब देवताओं से युक्त अच्युत सदा निवास करते हैं. यह वृक्ष श्री हरि का स्वरूप है। इसके पूजन/सेवा से सभी पापों का नाश होता है।
सोमवती अमावस्या पितर दोष दूर करने के लिये अति उत्तम है। सोमवती अमावस्या की पूजा से यह दोष समाप्त हो जाता है। महाभारतकाल में जब युधिष्ठिर युद्ध में खोए भाई बन्धुओं के शोक में डूब गए थे। तो पितामह भीष्म ने उन्हें सोमवती अमावस्या के दिन उनका पिण्डदान/यज्ञ इत्यादि का मार्ग बताया था।
पांडवों को उस समय 12 वर्ष तक प्रतीक्षा करनी पड़ी तब सोमवार युक्त परम पावन अमावस्या का दिन आया। इस दिन लोग कुरुक्षेत्र/प्रयाग/हरिद्वार/गंगासागर/नैमिसारण्य आदि तीर्थों में जाकर पितरों की सद्गति हेतु दानधर्म का पालन करते हैं और अपना कल्याण करते हैं।
कालसर्प/सर्पदोष में शिवलिंग पर दूध /कालेतिल युक्त जल से अभिषेक करें, आटे/गुड़/तिल की 108 नाग आकृति बनाएं और उन्हें शिवलिंग पर चढ़ायें। बाद में इन्हें पीपल के नीचे रख दीजिए। महादेव से प्रार्थना करें कि वो कुंडली में बन रहे कुयोगों का प्रभाव समाप्त करें।
अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस दिन सुहागन स्त्रियाँ तुलसी/पीपल की अलग अलग सामग्री से प्रदक्षिणा करती हैं। उस समान को सुहागन स्त्रियों में बांट दिया जाता है।
विशेष- एक बार अखंड सौभाग्य हेतु सोमवती अमावस्या का व्रत करने के बाद उसे छोड़ा नही जाता।
इस शुभ मुहूर्त का लाभ लें।
महादेव हम सब का कल्याण करें।
नमः शिवाय🚩🙏🏼

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More from @Sanatan_Science

9 Apr
#प्रदोषव्रत #शुक्र
सभी प्रकार के ऐश्वर्य देने वाले परम पावन शुक्र प्रदोष व्रत की शुभ कामनाएं।

त्रयोदशी तिथि को व्रत करके प्रदोष काल मतलब सूर्यास्त चार घटि का समय लगभग 96 मिनट में भगवान शिव का सम्पूर्ण शिव परिवार सहित पूजन किया जाता है
श्रद्धा अनुसार पंचोपचार/षोडशोपचार पूजन करें। Image
त्रयोदशी तिथि और सप्तवारों के योग से क्रमशः सूर्य/सोम/भौम/बुध/गुरु/शुक्र/शनि प्रदोष व्रत की प्राप्ति होती है।
सांसारिक कोई भी वैभव ऐसा नही जो प्रदोष व्रत से प्राप्त न हो।
शनि प्रदोष संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वालों के लिए वरदान है।
मैंने स्वयं कई लोगों को इससे लाभ लेते देखा है। Image
शुद्ध मिट्टी से शिव परिवार का पूजन करके उन्हें जल में प्रवाहित कर दें।
शहरों में मिट्टी मिलना संभव नहीं तो पीतल/चाँदी/स्टील किसी भी थाली में हल्दी से शिवपरिवार का चित्र बनाले और पूजा के उसमे पानी लेकर किसी पौधे पर चढ़ा दें। Image
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6 Apr
#ज्योतिष #बुध_ग्रह #उपाय

ज्योतिष में बुध ग्रह को बुद्धि ज्ञान, तर्क, त्वचा व वाणी का कारक माना गया है। कुंडली मे बुध की लाभकारी स्थिति जातक को बुद्धिमान, तार्किक, गणित और अकाउंट्स पर प्रभाव, ज्योतिष में रुचि, वाक्पटु बनाता है।
काव्य संगीत में रुचि, भाषणों/बोली के द्वारा प्रभाव डालने वाला , हँसमुख, कल्पनाशील, लेखनमे रुचि लेने वाला, व्यंगप्रेमी और हाजिरजवाब बनाता है।
ये सेल्स/मार्केटिंग के क्षेत्र में अग्रणी बनाता है।
वहीं बुध के नकारात्मक प्रभाव व्यक्ति को संकोची, बोलने में तुतलाना/हकलाना, सूंघने की क्षमता पर प्रभाव, व्यापार/कार्यक्षेत्र में हानि और दांतों से सम्बंधित समस्याएं देता है।
अलग अलग भाव मे बुध का प्रभाव अलग ही होता है साथ ही दृष्टि संबंध और युति के भी परिणाम बदल जाते हैं।
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2 Apr
आक मंदार सड़क किनारे, खाली पड़ी जमीन पर, घरों के बाहर अक्सर आपको मिल जाता है। आक सूर्य के कारक पौधा है। इसकी मुख्यतः 3 प्रकार होते हैं जो सफ़ेद फूल, बैंगनी, फूल और बैंगनी सफेद दोनों रंग में पाए जाते हैं।
आक/मंदार की लकड़ी को सूर्य ग्रह की समिधा के रूप प्रयोग करते हैं।
अगर सौभाग्य से आपके घर के आस पास दिखता है तो
सफ़ेद फूल- से बुधवार और चतुर्थी को गणपति का अर्चन करें। रविवार और रविवारीय सप्तमी तिथि में सूर्य यंत्र/शिवलिंग का अर्चन करें।
बैंगनी फूल- इसके बैंगनी फूल से हनुमान जी का अर्चन करते हैं।
अमावस्या/मंगलवार/शनिवार को इन फूलों की माला बनाकर हनुमान जी को समर्पित करें।
ये उपाय सभी कर सकते हैं सभी को लाभ होगा। सूर्य से संबंधित बाधाएँ जॉब में बॉस से अनबन, सरकारी जाँच, सरकारी मामले/केस, सरकारी जॉब के लिए तैयारी करने वालों लोगों को लाभ मिलेगा।
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28 Mar
#केतु #अश्वगंधा #ज्योतिष

शास्त्रों में कहा गया है इस धरती में उपलब्ध केवल वही पौधा या जड़ीबूटी अनुपयोगी है जिसके विषय मे हमें ज्ञान नहीं।
आयुर्वेद को अथर्ववेद का उपवेद कहा जाता है।
अथर्ववेद में विस्तारपूर्वक पौधों व उनके औषधीय/ज्योतिषीय प्रयोग बताए गए हैं।दुर्भाग्यवश कुछ पौधों को हम पहचान नही पा रहे हैं पर जिनको पहचानते हैं उनका उपयोग प्रमाणित और सटीक है
इसके सही उपयोग तो एक योग्य वैद्य ही बताएंगे पर आज अश्वगंधा के ज्योतिषीय प्रभाव पर चर्चा करते हैं।
अश्वगंधा केतु की कारक वनस्पति है। मैंअक्सर लिखती हूँ कि राहु माया/सोच/विचार/मोह/भ्रम है तो केतु उस विचार को धरातल देने वाला कर्म है। सोच (राहु) का क्रियान्वयन(केतु) है।
तो जब स्ट्रेस या अन्य कारणों से नींद न आने की समस्या हो, पूरी रात जागते गुज़रे तो भ्रम/चिंता का निवारण करें।
Read 8 tweets
27 Mar
मैंने पहले भी कहा है जो व्यक्ति परिवार और समाज के लिए अपने कर्तव्यों को सही से निभाता है अनायास ही उसे ग्रहों के शुभ परिणाम मिलने शुरू हो जाते हैं।
पहले घरों में सबके नाम की रोटी निकालने की रीत थी जो आस पास के पशु पक्षियों को दी जाती थी। ये जीव भी अलग अलग ग्रहों के कारक हैं।
अब न घर के आसपास इन पशुओं/पक्षियों की उपलब्धता है नहीं पहले जैसे नियमों को लोग निभा पाते हैं।
पर कभी कभी समय मिलने पर ये उपाय करने का प्रयास करें...... और इनके लाभ स्वयं महसूस करें।
1- गाय जो हरा चारा दें - मंदिरों गौशालाओं या सड़क पर घूमने वाले इन जीवों को हरा चारा, भीगी मूँग, घी रोटी और गुड़, अंकुरित जवारे(गेहूं) और चना खिलाएँ गाय सनातन धर्म मे पूज्यनीय है इन उपायों से आप अपने बुध, शुक्र, सूर्य और गुरु के अनुकूल परिणाम पा सकेंगे।
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24 Mar
#ज्योतिष_विज्ञान #मांगलिक_योग

आज मंगल ग्रह और मांगलिक दोष पर चर्चा करते हैं।

अक्सर मंगल और मांगलिक दोष के नाम पर लोग बहुत डराए जाते हैं। मंगल ग्रह और मांगलिक दोष/योग कैसे हमें प्रभावित करते हैं आज ये देखेंगे।
1
मंगल ग्रह ऊर्जा, आत्मविश्वास, निडरता, नेतृत्व के गुण, जल्दबाजी, जरूरत से ज्यादा इमोशनल होना, जल्दी गुस्सा आना, रक्त, भाई/मित्र, ज़मीन का कारक ग्रह है। ग्रहो में मंगल को सेनापति की संज्ञा दी गयी है अच्छे सेनापति के क्या गुण होने चाहिए ये अब आप सोच लीजिये।
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अब विवाह का कारक तत्व है कोमल, शीतल, प्रेम , लावण्य, सुन्दरता मधुरता का ग्रह शुक्र।

गुरु/मंगल पुरुष और शुक्र को स्त्री से तुलना की गयी है रज/रक्त और वीर्य दोनों के मिलने से ही संतति शुरू होती है।
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