ગુજરાત મા આવેલ પાટણ શહેર ના પટોળા એટલે પાટણની વિશિષ્ટ રેશમી સાડીઓ. પટોળા વિષેની દંતકથા એવી છે કે રાજા કુમારપાળ 12મી સદીમાં દૈનિક પુજા કરવા માટે રોજ નવો ઝભ્ભો પહેરવા દક્ષિણ મહારાષ્ટ્રના જૈનાના પટોળા ઝભ્ભા મંગાવતા હતા.
જ્યારે રાજાને ખબર પડી કે, જૈનાના રાજા વાપરેલાં કપડાં પાટણ મોકલે છે, ત્યારે તેમણે દક્ષિણ પર હુમલો કર્યો, દક્ષિણના રાજાને હરાવ્યો અને ત્યાંથી પટોળાના 700 વણકર કુટુંબોને પાટણ લઈ આવ્યા. આ કુટુંબો પૈકીના માત્ર સાળવીઓએ આજે આ કારીગરી જાળવી રાખી છે.
પટોળા એ વિશ્વભરમાં વણાટ સ્વરૂપનો સૌથી મુશ્કેલ પ્રકાર છે. તેમાં બેવડી ઇક્કત શૈલીનો ઉપયોગ કરવામાં આવે છે. જેમાં તાણવાણાને વણતા પહેલાં અગાઉથી નક્કી કરી શૈલી મુજબ કાળજીપુર્વક રંગવામાં આવે છે. ત્યાર બાદ વણકર તેને ચોક્સાઇપુર્વક શાળ પર ગોઠવે છે
જેનાથી નાજુક, ઝાંખી રેખાઓ ધરાવતી ભૌમિતિક રેખાકૃતિઓવાળી વિશિષ્ટ ડીઝાઇન સહજ રીતે તૈયાર થાય છે. પાટણ ઉપરાંત, બાલી અને ઇન્ડોનેશીયામાં બેવડી ઇક્કત શૈલીનો ઉપયોગ થાય છે. એવું કહેવાય છે કે ઇન્ડોનેશિયાના રાજા ભારતની મુલાકાતે આવ્યા હતા અને પટોળાની કારીગરીથી અંજાઈ ગયા હતા
અને માત્ર ઇન્ડોનેશીયના રાજવી કુટુંબના લોકોને જ આ પટોળા પહેરવાની છૂટ આપવામાં આવશે તેમ કહીને તેમના વતન પટોળા લઈ ગયા હતા.

 રેશમી દોરાઓને રંગ કરવામાં સિત્તેરથી વધારે દિવસ અ વણાટકામમાં અંદાજે 25 દિવસ મળીને એક સાડી તૈયાર કરતા 4-6 મહિના થાય છે.
આ સાડી ચાર પ્રકારની શૈલીમાં મળે છેઃ 1) જૈનો અને હિન્દુઓ માટે ફૂલો, પોપટ, હાથી અને નાચતી આકૃતિઓવાળી, 2) મુસ્લિમ વોરાઓ માટે લગ્ન પ્રસંગોએ વપરાતી ભૌમિતિક અને ફૂલોવાળી ડીઝાઇનની, 3) મહારાષ્ટ્રીય બ્રાહ્મણો માટે નારી કુંજ તરીકે ઓળખાતી સાડીઓ
જે સ્ત્રીઓ અને પક્ષીઓની ભાતની ગાઢ કાળા રંગની બોર્ડરવાળી હોય છે, 4)પૂર્વના દેશોના પરંપરાગત નિકાસ બજારો માટેની સાડીઓ. ખાસ કરીને ઝિગઝેગ ડીઝાઇનમાં વણેલા તાણવાણા માટે રંગકામની પેટર્નને ઉપસાવવા અત્યંત કુશળ રંગારાની જરૂર પડેછે,અને એજ રીતેએકસરખી ઝડપથી કામ કરવા માટે કુશળ વણકર પણ આવશ્યક છે
જેથી રેશમના દોરાને તોડ્યા વગર ચોક્કસ જગ્યાએ તાણાવાણા વણી શકાય. કારીગરીનું આ અત્યંત ઊંચુ સ્તર પટોળા કારીગરોને તેમના કામનું ઊંચુ મૂલ્ય રાખવાનું અને તેમની પેટર્ન્સને ધંધાના રહસ્ય તરીકે જાળવી રાખવાનું પૂરતું કારણ પૂરું પાડે છે.

• • •

Missing some Tweet in this thread? You can try to force a refresh
 

Keep Current with दीपक शर्मा(सनातन सर्व श्रेष्ठ)

दीपक शर्मा(सनातन सर्व श्रेष्ठ) Profile picture

Stay in touch and get notified when new unrolls are available from this author!

Read all threads

This Thread may be Removed Anytime!

PDF

Twitter may remove this content at anytime! Save it as PDF for later use!

Try unrolling a thread yourself!

how to unroll video
  1. Follow @ThreadReaderApp to mention us!

  2. From a Twitter thread mention us with a keyword "unroll"
@threadreaderapp unroll

Practice here first or read more on our help page!

More from @sharma_Deepak45

10 Apr
~नरक {NARAK}~

★हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार नरक का वर्णन★

इस ब्रह्माण्ड में चौदह भुवन (लोक) हैं -
सात ऊपर के लोक हैं - भू:, भुव:, स्व:, मह:, जन, तप, सत्य।
सात नीचे के लोक हैं - अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल, पाताल।

पृथ्वी (भू: लोक) की ऊँचाई सत्तर हजार योजन है। Image
पृथ्वी के भीतर ही नीचे के सात लोक स्थित हैं, जिनमें प्रत्येक की ऊँचाई 10-10 हजार योजन है। इनकी भूमि क्रमशः काली, सफेद, लाल, पीली, कँकरीली, पथरीली और सुवर्णमयी है।
नीचे के ये सातों तल (लोक/भुवन) बड़े-बड़े महलों से सुशोभित हैं। Image
उनमें दानवों और दैत्यों की सैकड़ों जातियाँ निवास करती हैं। विशालकाय नागों के कुटुम्ब भी उनके भीतर रहते हैं।
वहाँ सूर्य की किरणें दिन में केवल प्रकाश फैलाती हैं, धूप नहीं। इसी प्रकार चन्द्रमा की किरणें रात में केवल उजाला करती हैं, सर्दी नहीं।
पाताल के नीचे भगवान विष्णु का तमोमय Image
Read 7 tweets
9 Apr
भौतिक विज्ञान के नियमो की धज्जियां उड़ाती हजारो वर्ष पुरानी श्रीकृष्ण मक्खन गेंद --

यह पत्थर #श्रीकृष्ण_बटरबॉल के नाम से प्रसिद्ध है ।। आपको यह साधारण पत्थर लगता होगा, लेकिन यह पत्थर विज्ञान के सारे नियमो की धज्जियां उड़ाते हुए अडिग है :--
यह पत्थर ढलान वाली पहाड़ी पर, 45 डिग्री के कोण पर मात्र 4 फुट की जगह घेरकर बिना लुढ़के टिका हुआ है ।। इस पत्थर का वजन 250 टन है, इसे साथ हाथियों की मदद से यहां से हटाने का प्रयास किया गया था, लेकिन यह हिला तक नही ।
ढलान के ऊपर इस पत्थर का अपने आप टिका रहना ही किसी आश्चर्य से कम नही, उल्टे यह महान प्रयासों के बाद भी हिलाने से भी नही हिलता, यह महाआश्चर्य की बात है ।

देखने से यह पत्थर ऐसे लगता है की किसी भी क्षण यह पत्थर लुढ़ककर इस पहाड़ी को चकनाचूर कर देगा
Read 5 tweets
7 Apr
महाराजा सूरजमल जी जाट 🙏🙏
मुगलों के आक्रमण का प्रतिकार करने में उत्तर भारत में जिन राजाओं की प्रमुख भूमिका रही है, उनमें भरतपुर (राजस्थान) के महाराजा सूरजमल जाट का नाम बड़ी श्रद्धा एवं गौरव से लिया जाता है। उनका जन्म 13 फरवरी, 1707 में हुआ था। Image
ये राजा बदनसिंह ‘महेन्द्र’ के दत्तक पुत्र थे। उन्हें पिता की ओर से वैर की जागीर मिली थी। वे शरीर से अत्यधिक सुडौल, कुशल प्रशासक, दूरदर्शी व कूटनीतिज्ञ थे। उन्होंने 1733 में खेमकरण सोगरिया की फतहगढ़ी पर हमला कर विजय प्राप्त की।
इसके बाद उन्होंने 1743 में उसी स्थान पर भरतपुर नगर की नींव रखी तथा 1753 में वहां आकर रहने लगे।

महाराजा सूरजमल की जयपुर के महाराजा जयसिंह से अच्छी मित्रता थी। जयसिंह की मृत्यु के बाद उसके बेटों ईश्वरी सिंह और माधोसिंह में गद्दी के लिए झगड़ा हुआ।
Read 12 tweets
6 Apr
हिन्दू सिक्ख ..

दशमेश पिता गुरू गोविंद सिंह जी सैनिको में उत्साह भरने के लिये जो भाषण देते थे, उनका संग्रह 'चंड़ी दी वार' कहलाता है । उसमें लिखे दोहे पर सेक्युलर गौर करें :-

मिटे बाँग सलमान सुन्नत कुराना ।
जगे धमॆ हिन्दुन अठारह पुराना ॥
यहि देह अँगिया तुरक गहि खपाऊँ ।
गऊ घात का दोख जग सिऊ मिटाऊँ ॥

अर्थात :- हिंदुस्तान की धरती से बाँग (अजान), सुन्नत (इस्लाम) और कुरान मिट जाये, हिन्दू धर्म का जागरण होकर अट्ठारह पुराण आदर को प्राप्त हों। इस देह के अंगों से ऐसा काम हो कि सारे तुर्कों को मारकर खत्म कर दूँ
और गोवध का दुष्कृत्य संसार से नष्ट कर दूँ ।

देही शिवा बर मोहे, शुभ कर्मन ते कभुं न टरूं ।
न डरौं अरि सौं जब जाय लड़ौं, निश्चय कर अपनी जीत करौं ॥

अर्थात :-
हे परमशक्ति माँ(शिवा) ऐसा वरदान दो कि मैं अपने शुभ कर्मपथ से कभी विचलित न हो पाऊँ
Read 6 tweets
6 Apr
संस्कृत बोलने से दिमाग तेज होता है
संस्कृत विश्व की एकमात्र वैज्ञानिक भाषा है। स्वर-विज्ञान के सिद्धांतों का इसमें पूरा-पूरा उपयोग किया गया है। कंप्यूटर के लिए भी यह सर्वाधिक उपयुक्त भाषा मानी जाती है, हालांकि इस दिशा में कोई सार्थक प्रयास नहीं हुआ है।
संस्कृत के उच्चारण से मन और मस्तिष्क पर भी सकारात्मक प्रभाव होता है। स्पेन के 'बास्क भाषा एवं मस्तिष्क संस्थान' में शोध-रत स्नायु-विज्ञानी डॉ. हार्टजेल ने सिद्ध किया है कि संस्कृत के लगातार शुद्ध उच्चारण से मस्तिष्क की क्षमता बढ़ जाती है।
डॉ हार्टजेल प्रसिद्ध स्नायु वैज्ञानिक (न्यूरो साइंटिस्ट) हैं तथा उन्होंने वर्षों तक संस्कृत के प्रभाव का अध्ययन किया है।
2 जन. 2018 को प्रकाशित अपने शोध-पत्र में उन्होंने लिखा है - " मैंने पाया कि जितना अधिक मैंने संस्कृत का अध्ययन किया उतनी ही अधिक मेरी याददाश्त बढ़ गई।
Read 5 tweets
6 Apr
अग्नि में किए जाने वाले होम - अर्थात् अग्नि में घी, समिधा, चावल अर्पित करने को ही 'अग्निहोत्र' कहते हैं।
विशेष कर, सूर्योदय-सूर्यास्त समय के ठीक क्षण में गायत्री मंत्र हो या "अग्नये स्वाहा, अग्नये इदं न मम" इस मंत्र का उच्चारण करते हुए, अग्नि को घी - समिधा - चावल समर्पित करने के
विधान को ही अग्निहोत्र कहते हैं।
इस प्रकार संध्या समय में निरंतर अग्निहोत्र करने हेतु तांबे से बनाए गए होमपात्र में - प्रातः पूर्व दिशा तथा सायंकाल पश्चिम दिशा की ओर मुख करते हुए बैठ कर, ठीक उसी क्षण को मंत्रोच्चार करते हुए द्रव्य समर्पित करने चाहिए ।
इस होम का आचरण पुरुष
महिलाएँ, बच्चे, चाहे जो कोई कर सकता है । ठीक उसी समय पर करना चाहिए।

*अग्निहोत्र से होने वाले लाभ *

 इसका आचरण करने से करने वालों की बुद्धि - विवेक सवंर्धित होती है। अच्छी संतान प्राप्ति होती है। तेज- कांति बढ़ती है। परिसर शुद्ध होता है। आसपास के कृमि-किट अंदर नहीं आ सकते।
Read 6 tweets

Did Thread Reader help you today?

Support us! We are indie developers!


This site is made by just two indie developers on a laptop doing marketing, support and development! Read more about the story.

Become a Premium Member ($3/month or $30/year) and get exclusive features!

Become Premium

Too expensive? Make a small donation by buying us coffee ($5) or help with server cost ($10)

Donate via Paypal Become our Patreon

Thank you for your support!

Follow Us on Twitter!