दोस्तों आज का ज्वलंत शीर्षक है
"जितिन प्रसाद"
वो सारी बातेँ जो आप तक पहुंच ना पायी!
प्रधानमंत्री मोदी की INDIA FIRST और टीम इंडिया की कसौटी से अनजान लोग ही कर रहे हैं ब्राह्मण... ब्राह्मण... ब्राह्मण... का हुड़दंग।
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यह राग अनर्गल और अर्थहीन क्यों है इसकीं चर्चा करने से पहले यह जान लीजिए कि जितिन प्रसाद के भाजपा में आने का कारण क्या है।

इस संदर्भ में चौंकाने वाला तथ्य यह भी जान लीजिए कि जितिन प्रसाद का चयन किसी और के बजाए स्वयं प्रधानमंत्री मोदी की सहमति के पश्चात ही किया गया।
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2019 में भी प्रधानमंत्री की ही इच्छा थी कि जितिन प्रसाद को भाजपा में लाया जाए। 2019 में पार्टी से अपने भावनात्मक लगाव, बहुत पुराने सम्बंधों व उनके कुछ महत्वपूर्ण सुझाव मानने के राहुल गांधी के उन वायदों के कारण जितिन प्रसाद ने पार्टी छोड़ने का अपना फैसला
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अंतिम क्षणों में बदल दिया था। यह अलग बात है कि उनसे किए गए संगठन संबंधित वायदे राहुल गांधी ने पूरे नहीं किए।
अब बात मुद्दे की...
सम्भवतः बहुत कम लोगों को या यूं कहिए कि चुटकी भर लोगों को यह ज्ञात होगा कि प्रधानमंत्री द्वारा लागू की गयी जिस उज्ज्वला योजना को
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पूरे देश में अभूतपूर्व सफलता और लोकप्रियता मिली वह उज्ज्वला योजना किसी और की नहीं बल्कि जितिन प्रसाद का ही ब्रेन चाइल्ड है। 2010 में तत्कालीन पेट्रोलियम राज्यमंत्री के रूप में* *उन्होंने यह योजना तैयार कर के उसकी शुरुआत की थी। इसके अलावा SMS के जरिए रसोई
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गैस सिलेंडर की बुकिंग की योजना तैयार कर जितिन प्रसाद ने तब शुरू किया था जब पेट्रोलियम राज्यमंत्री बनते ही उनका सामना रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग में डीलरों द्वारा की जाने वाली भारी धांधली और भ्रष्टाचार की शिकायतों के अंबार से हुआ था। अतः इसके खात्मे के लिए
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उन्होंने SMS से रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग करने की कम्प्यूटराइज्ड योजना केवल 4 महीनों में तैयार कर के सितंबर 2009 में उसे लागू कर दिया था। धीरे धीरे उसे विस्तार दिया जाने लगा था। जहां जहां योजना लागू हो रही थी, वहां से डीलरों की धांधली और भ्रष्टाचार का सफाया
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होता जा रहा था। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे पेट्रोल पंप और रसोई गैस की छोटी एजेंसियों को खोलने तथा उनका आबंटन दिल्ली में अपनी निगरानी में लॉटरी सिस्टम से करने की शुरूआत भी जितिन प्रसाद ने ही की थी। वह योजना भी इस प्रकार लागू की गयी थी कि पूरी तरह भ्रष्टाचार रहित थी।
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तत्कालीन यूपीए सरकार के कर्णधारों को यह रास नहीं आया था। केवल डेढ़ वर्ष बाद जनवरी 2011 में उनसे पेट्रोलियम मंत्रालय लेकर उन्हें दूसरे मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंप दी गयी थी। पेट्रोलियम मंत्रालय से उनके हटने के बाद SMS सेवा कई शहरों में अवश्य चलती रही, लेकिन
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बहुत आगे नहीं बढ़ सकी। लेकिन पेट्रोलियम मंत्रालय से उनके हटते ही अन्य दोनों योजनाओं ने दम तोड़ दिया। लोग उन योजनाओं को भूल गए।लेकिन एक व्यक्ति ना उन योजनाओं को भूला, ना ही जितिन प्रसाद को। वह व्यक्ति थे, गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी जो
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यूपीए सरकार की प्रत्येक नीति और योजना पर पैनी निगाह रखते थे। अतः भ्रष्टाचार रहित जनहित का कार्य करने की जितिन प्रसाद की मंशा और कोशिश को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में बहुत करीब से देखने के बाद से ही नरेन्द्र मोदी की INDIA FIRST और टीम इंडिया की उस कसौटी पर
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जितिन प्रसाद पूरी तरह खरे उतर चुके थे,
जिस कसौटी पर खरा उतरने पर प्रधानमंत्री मोदी ने समाज के ऐसे लोगों को राष्ट्रपति भवन बुलाकर देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों, पद्म सम्मानों से सम्मानित करना शुरू किया था जिन्हें कोई नहीं जानता था, जो देश के आम नागरिक थे लेकिन
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देश के लिए कुछ विशेष कार्य कर रहे थे। पिछले 7 वर्षों से यह परंपरा लगातार जारी है।जितिन प्रसाद क्योंकि राजनीतिक व्यक्ति हैं अतः प्रधानमंत्री मोदी की उसी कसौटी पर खरा उतरने के पश्चात ही भाजपा ने अपने द्वार उनके लिए खोले और खुले दिल से उनका स्वागत किया है।पेट्रोलियम
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मंत्रालय में उनके उपरोक्त कार्यों के अलावा लगभग 22 महीने पहले कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का भयंकर विरोध कांग्रेस जब संसद से सड़क तक कर रही थी। उस विरोध की कमान खुद राहुल गांधी ने संभाली थी। तब भी जितिन प्रसाद कांग्रेस के अकेले ऐसे नेता थे जिन्होंने अपने साथी,
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कुछ युवा कांग्रेसी नेताओं के साथ मिलकर जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का खुलकर समर्थन और स्वागत किया था। हाल ही में सम्पन्न हुए बंगाल विधानसभा में कांग्रेस के चुनाव प्रभारी के रूप में उन्होंने फुरफुरा शरीफ के कट्टर धर्मान्ध मौलाना की शुद्ध रूप से शत
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प्रतिशत साम्प्रदायिक पार्टी के साथ गठबंधन करने के कांग्रेस हाईकमान के फैसले को खुलकर कटघरे में खड़ा किया था। सत्ता की जोड़ तोड़ के लिए महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ गठबंधन का भी जितिन प्रसाद ने पार्टी के भीतर मुखर विरोध किया था।
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जितिन प्रसाद के यह वो कुछ फैसले हैं जो समय समय पर मीडिया में उजागर होते रहे हैं, और जिन्होंने भाजपा में आने का इनका मार्ग प्रशस्त किया।
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8 Jun
वो आखिर है कौन ??
वो जो बस एक बार टीवी पर आता है और बाजी पलटकर चला जाता है!
महिनों की तैयारी से विपक्ष और देशद्रोही (हालाँकि दोनों एक ही हैं), लामबंदी करते हैं और ऐसा सभी को लगने लगता है कि पीएम नरेन्द्र मोदी जी पर ये लोग हावी हो गये हैं
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कुछ लोग मोदी जी की खामोशी को ही उनकी पराजय मान लेते हैं लेकिन उनकी यह खुशी तभी तक रह पाती है जब तक मोदी जी खामोश हैं .
वो ऐसा शिकारी है जो महिनों बाद अपनी खामोशी की गुफा से निकलता है और एक ही बार में अपने सारे विरोधियों को गरदन दबोच लेता है।
और सब तितर बितर हो जाते हैं।
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अखिलेश सुई ढूंढने लगते है टीका लगाने को,
उद्धव मिलने पहुंच जाते हैं, कुछ विरोधी खिसिया ते हुए ताली बजाने लगते है, और पर्दे के पीछे से झाँक झाँक कहते हैं कि अच्छी मजा आयी सुप्रीम कोर्ट से डांट पडी ना?? तब सुधरे,
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8 Jun
बहुत सारे मेरे देश के नागरिक हमेशा पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस इत्यादि का रोना रोते रहते हैं!
जब तक देश तुम्हें अपना परिवार सा नहीं लगेगा जब तक तुम्हें मैं अपने ही देश मे हूं किसी होटल में नहीं वाली भावनाएं नहीं होंगी, तुम रोते ही रहोगे,
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तुम्हारा व्यावहार किसी होटल में रहनेवाले के समान है अगर तो तुम्हें यही लगेगा कि, इतने पैसे दिए (tax) ये सुविधा नहीं वो सुविधा नहीं, ये इतना महंगा क्यों वगैरह वगैरह!!!! तुम्हें
जैसे जीना है जियो,
मेरे किए देश मेरा घर है और मुखिया देश (मेरा घर) चलाने वाला बुजुर्ग!!!!!
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अब आइए मुख्य बिंदुओं पर लौटते हैं!
कॉविड संकट के कारण बाकी टैक्स में कमी की भरपाई कर रही है सरकार दूसरी तरफ से (अर्थात घर चलाना है ना??? या भसा दें) कोरोना संकट की वजह से इस वित्त वर्ष में केंद्र सरकार के जीएसटी कलेक्शन और कस्टम
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8 Jun
एक एक चीज को बारीकी से देखिए, और समझिए!!!!
चीन और Pfizer के षडयन्त्र को नरेन्द्र मोदी ने लंगड़ी लगा कर कल किया चित्त।
Drugs Lobby एक मिनट भी मोदी को उनके पद पर नहीं देखना चाहती।
मोदी की वजह से Drug Lobby का चीन के साथ मिल कर रचे गये कोरोना षडयन्त्र और
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वैक्सीन का धन्धा फ्लॉप हो गया।
Pfizer के मनसूबे थे कि
अमेरिका में कीमत 1,500 रु,
भारत में कीमत 2,500 रु।
दो शॉट की कीमत 5,000 रुपये।

भारत की आबादी 1,38,00,00,000
Pfizer का सपना 1,38,00,00,000×
5,000=69,00,00,00,00,00,000 रुपये या लगभग 92.5 बिलियन डॉलर ।
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भारत ने वेकसीन बना कर 92.5 बिलियन डॉलर की लात मारी है Pfizer और चीन के साझा उपक्रम पर जिसकी सिफारिश भूरी काकी की थी। उनकी बुद्धि का विलोम हो गया है।
समय मिलते ही फिर पंजाब, राजस्थान और महाराष्ट्र सरकारों ने Pfizer को सीधा आर्डर दिया जो केन्द्र के कारण निरस्त हो गया।
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Read 8 tweets
8 Jun
बारीकी से सड़ जी का प्लान समझिए जरा जो टूट कर चकनाचूर हो गया!!!!!
केजरीवाल की राशन योजना की एक कड़वी सच्चाई, जो आप ऐसे कभी सोच भी नहीं सकते थे!!!
केजरीवाल सरकार ने राशनकार्ड धारकों को सस्ते गल्ले की दुकान पर आकर राशन लेने की जगह सभी घरों में घूम घूमकर राशन पहुंचाने
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की योजना बनाई. दिल्ली में वहां के निवासी व बाहर से आये प्रवासी (जिसमें लाखों की संख्या में रोहिंग्या भी हैं) -कुल मिलाकर दो करोड़ से ऊपर होते हैं. मोटा मोटा 40 लाख परिवार.. अब एक व्यक्ति (सामान ढोने-पकडने के लिये एक सहायक सहित) अगर रोजाना दिन भर में पचास परिवारों तक भी
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यह राशन पहुंचाता है तो महीने भर में मुश्किल से 1000 से 1200 परिवारों में राशन पहुंचा पायेंगे. इस तरह 40 लाख परिवारों में राशन पहुंचाने के लिये लगभग 4000 आदमी + 4000 सहायक की आवश्यकता होती, स्वाभाविक ही इन 8000 जॉब में से अधिकतर अमानतुल्ला खान के जैसे खुजलीवाल के प्रिय
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7 Jun
विरोधी शाम सबेरे जपते हैं कि मोदी ने क्या किया?????
आओ नयी चीजें गिना दूँ!!!!
1. याद कीजिये, 1987 में केन्द्र सरकार ने स्वीडन की कम्पनी ‘बोफोर्स’ से तोपें ख़रीदी थीं। आज वही कम्पनी भारत से भारत के कानपुर की 'फील्ड गन फैक्ट्री' में बनी हुई 'धनुष' नामक तोप खरीद रही है।
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बोफोर्स केवल 139 कैलिबर की मात्र 27 किलोमीटर की मारक रेंज वाली तोप है, जिसको दुनिया में अभी तक सर्वश्रेष्ठ माना जाता था।
पर भारत की तोप ‘धनुष’ 155 कैलिबर की 42 किलोमीटर तक वार कर सकती है, जिसका सफलतापूर्वक परीक्षण मैदान, रेगिस्तान आदि के साथ सियाचिन जैसी सर्वाधिक
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ऊँची व दुर्गम पोस्ट पर भी कई बार किया जा चुका है।
पिछले साल के सीमा संघर्ष में चीन सबसे अधिक भयभीत इसी तोप से था।
2. इतना ही नहीं, यह स्वीडिश कम्पनी पहले सुपर रैपिड गन माउंट को इटली से खरीदती थी, जो कि सेना के बेड़े का अभिन्न हिस्सा माना जाता है।
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7 Jun
आदर और भरोसा ईश्वर पर !!!
एक बच्चा अपनी मां के साथ एक दुकान पर शॉपिंग करने गया तो दुकानदार ने उसकी मासूमियत देखकर उसको सारी टॉफियों के डिब्बे खोलकर कहा कि लो बेटा टॉफियां ले लो, पर उस बच्चे ने भी बड़े प्यार से उन्हें मना कर दिया।
इसके बावजूद उस दुकानदार और उसकी मां ने
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भी उसे बहुत कहा पर वह मना करता रहा। हारकर उस दुकानदार ने खुद अपने हाथ से टॉफियां निकाल कर उसको दीं तो उसने ले लीं और अपनी जेब में डाल लीं।"
वापस आते हुए उसकी मां ने पूछा, 'जब अंकल तुम्हारे सामने डिब्बा खोल कर टॉफियां दे रहे थे तब तुमने नहीं लीं और जब उन्होंने अपने हाथों
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से दीं तो ले लीं, ऐसा क्यों ?" तब उस बच्चे ने बहुत खूबसूरत जवाब दिया, "मां मेरे हाथ छोटे-छोटे हैं।
अगर मैं टॉफियां लेता तो 2-3 टॉफियां ही आतीं जबकि अंकल के हाथ बड़े हैं इसलिए ज्यादा टॉफियां मिल गईं।'
बिल्कुल इसी तरह जब भगवान हमें देता है तो वह अपनी मर्जी से देता है और
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