💥एक निराश संघी स्वयंसेवक की कहानी💥
छोटे बच्चे थे हम जब दस साल के तभी से @epanchjanya और @eOrganiser
मे अरब फंडिंग से बेतहाशा बनते मदरसे, मस्जिद और उनमे चल रही देश विरोधी गतिविधियों पे लेख पढ़ चिंतित हो जाते थे।
अन्य राजनीतिक दलों पे क्रोध भी आता था++
hindi.opindia.com/national/bomb-…
संघ-भाजपा मे आशा की किरण दिखी। स्वयंसेवक भी बन गया। प्राथमिक और द्वितीय वर्ग भी किए। एक समय महरौली, दिल्ली मे संघ प्रचारक रहे श्री ब्रजेश जी जो मूलतः बिहार से हैं, वह हमारा वास्तविक नाम लेने पे अच्छी तरह पहचान जाएंगे। पूरे मोहल्ले को ही मैने स्वयंसेवक बना दिया था++
बाद मे जब नौकरी लगी तो BMS मे सम्मिलित हो गया जबकि मेरे कार्य क्षेत्र मे वामपंथी लेबर यूनियन का कब्जा था और मुझे BMS मे सम्मिलित होने पे अनेक प्रकार से प्रताड़ित किया गया।प्रताड़ना के विस्तार मे जाने पे विषयांतर होगा। आप सब समझ ही सकते हैं, बाकी दल अपने विरोधियों से कैसे निपटते+
हैं। मेरा तो immediate boss वामपंथी संगठन के कार्यकारिणी का सदस्य था। खैर हम भी कोई नाजुक छुई मुई तो थे नही और थोड़े अक्खड़ और बेपरवाह भी हैं तो तमाम प्रलोभनों और दबाव को दरकिनार कर दिया।
2 वर्षों मे उस क्षेत्र मे BMS की विंग को बहुमत मे ला दिया। ऐसा पिछले कुछ दशकों मे+
पहली बार हुआ था कि उस क्षेत्र मे BMS के विंग का बहुमत आया हो। श्री विराज टीकेकर, श्री सुनील उद्धव देशपांडे ऐसे BMS के शीर्षस्थ नेताओं के साथ संगठन के कार्यक्रमों के लिए भूख प्यास और नींद के वेग को सह के भी काम किया।पदोन्नति भी हुई।
मोदी जी के PM बनने के बाद तो लगा कि ++
अब संघर्ष सफल हुआ। अब भारत को दीमक की तरह खोखला कर रही शक्तियों पे प्रहार होगा, भ्रष्ट तंत्र को संरक्षण देने वाले नेताओं के काले करतूतों की पोल खुलेगी, वो जेल जाएंगे।
But alas! हुआ ठीक उल्टा, मदरसों पे लगाम कौन कहे, उनकी फंडिंग बढ़ा दी गयी। देश तोड़ने वालों पे लगाम तो नही +
लगी उल्टे पारंपरिक हिंदूओं पे लगाम लगने लगा। हिंदू एकता और सामाजिक न्याय के बैनर के तले समाज को विघटित करने वाली शक्तियां ने अपना विस्तार पिछले सात सालों मे सुरसा के मुख से भी तेज गति से किया है। हिंदू उत्पीड़न पहले से भी अधिक बढ़ा।
पांचजन्य, आर्गनाइजर और हृदय नारायण दीक्षित++
ऐसों के लेख पढ़ के इतिहास मे वाणपंथी विकृति और हिंदूओं के धार्मिक और शैक्षिक प्रकल्पों पे संवैधानिक बेड़ियों का बोध भी हुआ। बड़ी आशा थी कि भाजपा की संपूर्ण बहुमत की सरकार बनी तो यह सब सभ्यतागत बिंदुओं पे सरकार सकारात्मक कदम उठाएगी।
किंतु हर बिंदु पे छल ही मिला। संघ के लोगों+
से ये प्रश्न उठाने पे उनके दो उत्तर होते हैं
1- भर जिंदगी के कोढ़ दु दिन गंगा नहइला से थोड़े जाई- बोले तो,70 साल की बीमारी 7 साल मे कैसे दूर होगी।
यह एक बहाना मात्र है। क्योंकि भाजपा उपचार तो कर ही नही रही, भाजपा तो उल्टे उन्ही पुरानी जाति-धर्म आधारित तुष्टिकरण को प्रश्रय +
दे रही जिसका विपक्ष मे वह पुरजोर विरोध करती थी। यदि गाड़ी सही दिशा मे जा रही हो तब तो हम उसकी गति पे तर्क करेंगे, यहां तो गाड़ी उल्टी दिशा मे चलायमान है। यह गाड़ी तो 7 क्या 7000 सालों मे भी गंतव्य पे न पहुंचे।

भाजपा-संघ के लोग दूसरा तर्क धारा 370 को हटाने का,श्रीरामलला+
के अयोध्या मे मंदिर बनवाने का देता हैं।
यह भी एक लीपापोती ही है।
भाजपा ने एक तरफ 370 हटाया, दूसरी तरफ पिछले दरवाजे से वहां नौकरी, घर इत्यादि के लिए 15 साल के निवास/domicile की अनिवार्यता कर दी। और भी कई ऐसे कदम उठाए गए जिससे पता चलता है कि भाजपा-संघ की रूचि- समस्या के मूलभूत+
समाधान- इस्लामी चरित्र मे बदलाव-है ही नही।
भाजपा-संघ किसी तरह लीपापोती चाहते हैं- यह कहने को तो हो जाएगा 370 हटा के घोषणापत्र को पूरा किया लेकिन जमीन पे स्थिति वही ढाक के तीन पात।
बिट्टा कराटे ऐसे दुर्दांत आतंकियों को न दंड मिला ना ही विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए कुछ ठोस हुआ+
जम्मू कश्मीर मे चुन चुन के हिंदू नेताओं और व्यापारियों के वध का क्रम निर्बाध गति से जारी है।
श्रीरामभद्र के अयोध्या मे मंदिर के निर्णय का श्रेय भाजपा-संघ परिवार द्वारा लूटना तो निकृष्ट राजनीति का परिचायक है।यदि भाजपा-संघ के लोग यह तर्क देते हैं कि पिछले दरवाजे से सरकार ने ++
न्यायालय को प्रभावित किया, तो फिर हारे हुए पक्ष को पांच एकड़ मस्जिद बनाने के लिए देने का श्रेय भी भाजपा-संघ को ही लेना होगा और चूंकि न्यायालय नए निर्णय पिछले निर्णयों को आधार बना के देता है, इसलिए यदि कल को काशी और मथुरा मे भी इस निर्णय की अनुकृति हुई तो उत्तर प्रदेश मे ही तीन+
नए पाकिस्तान की नीव रख दी जाएगी।
यदि न्यायालय को भाजपा-संघ ने प्रभावित किया तो मै यह पूछना चाहता हूं भाजपा-संघ से कि यह पांच एकड़ का उपहार - कोठारी बंधु और उन जैसे सैकड़ों सनातनी हिंदू वीरों को आपकी श्रद्धांजलि है या आप उनके बलिदान को अपमानित कर रहे?
जिन हिंदू लालों ने हंसते-2++
श्रीरामलला के लिए प्राण न्योछावर कर दिए उन्हे संगठित 1990 के बाद भले संघ परिवार ने किया हो किंतु उनके मूल मे संघी/आर्य समाजी विचारधारा- जो श्रीराम, श्रीकृष्ण के दैवीय अस्तित्व को नही मानती,उन्हे मात्र महामानव मानती है- तो थी नही।
एक महान मानव के लिए तो उन वीरों ने प्राणों का+
उत्सर्ग किया नही।उन्होने तो श्री हरि के अवतार श्री रामभद्र के मंदिर के लिए प्राण न्योछावर किए।हारे हुए पक्ष को पांच एकड़,तुच्छ राजनीति के लिए मंदिर प्रकल्प का राजनीतिकरण-म्लेच्छ फैज खान से शिला मंगवाना, अन्य शास्त्रीय विधानों का निरादर करना-उन वीरों के बलिदान को अपमानित करना है++
संक्षेप मे कहें तो 370 हटाने और श्रीराम मंदिर निर्माण मे भाजपा की मंशा लीपापोती की अधिक और हिंदू हितों के संरक्षण की कम दिखती है।
हिंदू हितों का संरक्षण तो तब होगा जब हिंदूओं के साथ हो रहे संवैधानिक भेदभाव को समाप्त किया जाए, RTE ऐसे कानून निरस्त हों, हिंदू मंदिरों को सरकारी +
नियंत्रण से मुक्त कर उन्हे उनके विशिष्ट संप्रदायों को सौंपा जाए।
विभिन्न संप्रदायों द्वारा चलाए जा रहे पारंपरिक वेद विद्यालयों को सरकारी सहायता दी जाए। (उनपे सेकुलर नियम लादे बिना)।
हर जिले मे, कुछ निर्जन द्वीपों पे वेद लक्षणा देशी गोवंश के अभयारण्य हो जिनका संचालन धार्मिक पंथों+
के पास हो।
विघटनकारी शक्तियों की सरकारी फंडिंग रोकी जाए, उनके संरक्षकों को जेल हो। इनकी कमर तोड़ी जाए।
तबलीगी जमात-जिसकी स्थापना ही मुसलमानों से भारतीय संस्कृति के चिह्न मिटाने और हिंदूओं को धर्मांतरित करने के लिए हुई हो, यदि उसका महिमामंडन और उसे संरक्षण मिल रहा है तो रेलगाड़ी+
जा ही गलत दिशा मे रही है।इस गाड़ी से उतरने मे ही भलाई है।
दस साल का बालक जिसने जीवन के पंद्रह साल से भी अधिक संघ को दिए आज निराश और हताश है।
श्री सीताराम गोयल और धर्मसम्राट श्री करपात्री जी महाराज ऐसों को पढ़कर पता चला कि संघ परिवार की यह पुरानी बीमारी है। हिंदू हित एक चुनावी+
नारा मात्र है।
हिंदू- मुस्लिम वैवाहिक संबंध जोड़कर ये सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नयी आधारशिला रखेंगे।
ऐसा इनके विचारक दीनदयाल और वाजपेयी का मत था!
लव जिहाद पे घड़ियाली आंसू और ऐसे विचार..शाहनवाज और नकवी ऐसों को उनके राजनीतिक महत्व से बढ़कर out of turn promotion!+
एट्रोसिटी एक्ट का दुरूपयोग तो अब जगजाहिर है। इसके अतिरिक्त भी खेला है-आपको जान के आश्चर्य होगा कि हमारे देश मे हत्या, बलात्कार ऐसे जघन्य अपराधों से पीड़ित व्यक्तियों, परिवारों को जाति और धर्म के आधार पे क्षतिपूर्ति देने के संवैधानिक प्रावधान हैं। यदि भाजपा ऐसी विभाजनकारी+
अन्यायपूर्ण पूर्ववर्ती नीतियों को निरस्त करने की जगह उन्हे सशक्त करती है तो कहना पड़ेगा कि संघियों का यह तर्क कि सात साल मे सब कुछ नही हो सकता एक छल है।
वास्तव मे तो भाजपा विनाशकारी नीतियों को और तेजी से क्रियान्वित कर रही है।
हाथी के दांत खाने को और दिखाने को और वाली कहावत++
संघ परिवार पे सटीक बैठती है।
अंत मे @hesivh जी के इस लेख के साथ श्रृंखला को विराम देता हूं। इस लेख मे नीले रंग से हाईलाइटेड लिंक भी खोल के पढ़ें।
।।समाप्त। ।
🚩🙏नारायण नारायण 🙏🚩

nayaindia.com/guest-columnis…
क्या आप जानते हैं कि जघन्य अत्याचार पीड़ित जेनरल,ओबीसी पीड़ितों को दलित पीड़ितों की तुलना मे कम सहायता क्यों मिलती है?
क्योंकि-💥सरकारी नीति यह है कि अत्याचार, बलात्कार-पीड़ित नागरिकों की सहायता भी जाति देख कर की जाए!
भाजपा ने जाति आधारित क्षतिपूर्ति को और बढ़ाया!!🤨🤔

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10 Jun
Recently many influential twitter handles as well as media houses   especially @SureshChavhanke ji led @SudarshanNewsTV raised the issue of Abrahmic agents viz-Murari Bapu, Chitralekha etc- larping as hindoo कथावाचक/saints.

Issue of Adhokschjanand is zillion times more++
worrisome than these Kathavachaks who used to glorify and promote  Abrahmic faiths while masquerading as himdoo saints.
Adhokschjanand not only glorifies Abrahmic faiths but also Kashmiri terrorists and is alleged to have links with them.
Interestingly even after multiple requests by Puri Shankaracharya as well as devotees of Math NONE OF THE MEDIA HOUSES or administration has taken this issue up yet!
Appeal by Jagadguru Govt
#ArrestAdhokschjanand
++
Read 5 tweets
1 Jun
उत्तर प्रदेश चुनाव की अधिसूचना जनवरी मे आ सकती है।
पंचायत चुनावों के परिणाम देखकर लगता है, कि भाजपा विधानसभा चुनाव हार सकती है।
क्या इन 7 महीनो मे योगी जी बाजी पलट सकते हैं?

बाजी पलटने की नगण्य संभावना है। क्यों?
आगे पढ़ें-
हर दल का एक कोर वोट बैंक होता है।उत्तर प्रदेश मे1/n
भाजपा का इनर कोर वोट बैंक ब्राह्मण,बनिया और क्षत्रिय हैं।इन तीनो ने एकाध अपवादों को छोड़ कर भाजपा का मजबूती से साथ दिया है।
इस आंतरिक कोर मे से दो पिलर- ब्राह्मण, बनिया भाजपा से संतुष्ट नही हैं।यह असंतुष्टि मात्र योगी जी तक ही सीमित नही वरन् मोदी जी की political currency 2/n++
का भी तेजी से क्षरण हुआ है।
यदि इनर कोर के इन दो पिलरों-ब्राह्मण और बनिया ने अपने रोष को अभिव्यक्त कर दिया तो भाजपा की विदाई तय है।
क्योंकि भाजपा के बाहरी कोर के जो मतदाता हैं- गैर यादव पिछड़ा वर्ग- वह सुविधानुसार पाला बदलते रहते हैं।(हवा हो गए सीताराम से जय श्रीराम तक की..3/n+
Read 17 tweets
30 May
Anyone speaking of long term strategy to protect UC+OBC from draconian SC ST ATROCITY ACT may have an agenda..

They are not concerned about innocent poor families destroyed due to SC ST act instead their concern is BJP should reach podium in 2022 and 2024.

Few Qstns:
Which 1/n
constitutional provision bars govts including that of BJP in rehabilitating and supporting families destroyed by ATROCITY ACT?
Modi ji is so sensitive that he gets hugely upset if some MP criticizes Gandhi or some cow smuggler or thief is manhandled by angry mob+
#Think
A.Why is he not upset over his own party MLAs who are running ATROCITY ACT RACKET?
Action against MLA Sonkar who destroyed life of young engineer?

B.Bheemtas demanded reinstating old SC-ST act. What was the itch to bring draconian PROVISIONS that were not even asked🤔+ ImageImageImageImage
Read 6 tweets
29 May
Varna by Karma propoganda by Anarya Namaji influenced deformers is an absurd proposition.
One need not be an expert of Shastras to understand this bogus propganda of Macaulayized Anarya Namaji influenced deformers and their foot soldiers...A mere common sense and a plastic1/n +
approach is sufficient to see through this fraud.

1 Ravana was a king by profession. Why was he considered a Brahmin?
2 Why Pushyamitra Sung,who was a king,called a Brahmin?
#Think
Why the Varna of Ravana and Pushyamitra didn't change due to their profession/Guna/Karma? 2/n+
Such examples(🚩Satvahana,Pallavas,Kadambs🚩 were Brahmins in spite of being rulers/Kings...the Varna did not change to Kschatriya 😅) are in abundance but their ego and blind allegiance to Anarya Namaji philosophy acts like blinkers and hinder their vision.
3/n++
Read 21 tweets
29 May
Outrage of Varna by Karma gang is shallow, fake and loaded with agenda.
They are crying about a non existent problem.

Real problem-when you are assumed guilty without trial and jailed in SC ST ACT ON BASIS OF YOUR BIRTH.
Aggressor who lodged fake case will be FINANCIALLY 1/n +
REWARDED by govt on BASIS OF HIS BIRTH.
Have you seen Varna by Karma Gang speaking against this?
Thread: 2/n +
3/n
Read 25 tweets

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