यह बड़ी आम सी बात है कि अब यूपी चुनाव आ रहा है तो हिन्दू धर्म को तोड़ने के लिए एसी ही मनगढ़ंत कहानियां बनाई जाएंगी, पर सच सभी को जानना चाहिए।

जानिए नाथ संप्रदाय के बारे में👇👇
#हर_कण_हिंदू
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हिंदू धर्म में मुख्य रूप से चार संप्रदाय हैं, वैष्णव जो विष्णु को ही परमेश्वर मानते हैं, शैव जो शिव को परमेश्वर ही मानते हैं, शाक्त जो देवी को ही परमशक्ति मानते हैं और स्मार्त जो परमेश्वर के विभिन्न रूपों को एक ही समान मानते हैं।
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इन सभी संप्रदाय में कुछ उपसंप्रदाय हैं। शैव संप्रदाय के अंतर्गत ही शाक्त, नाथ और संत संप्रदाय आते हैं।

'नाथ' शब्द का अर्थ होता है स्वामी। वैष्णवों में स्वामी और शैवों में 'नाथ' शब्द का महत्व है। आपने अमरनाथ, केदारनाथ, बद्रीनाथ आदि कई तीर्थस्थलों के नाम सुने होंगे।
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नाथ संप्रदाय में आदिनाथ (शंकर) और दत्तात्रेय के बाद सबसे महत्वपूर्ण मत्सयेंद्रनाथ का नाम आता है। नाथ संप्रदाय को गुरु मत्सयेंद्र नाथ और उनके शिष्य गोरखनाथ ने पहली बार व्यवस्था दी।
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गोरखनाथ ने इस सम्प्रदाय के बिखराव और इस सम्प्रदाय की योग विद्याओं का एकत्रीकरण किया।

इस संप्रदाय के योगियों के मुख्य अंग योगासन, नाड़ीज्ञान, षट्चक्र निरूपण तथा प्राणायाम द्वारा समाधि की प्राप्ति है।
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इस पंथ के योगी या तो जीवित समाधि लेते हैं या शरीर छोड़ने पर उन्हें समाधि दी जाती है। वे जलाये नहीं जाते। यह माना जाता है कि उनका शरीर योग से ही शुद्ध हो जाता है, उसे जलाने की आवश्यकता नहीं। इस संप्रदाय में मांस आदि तामसी भोजनों का निषेध है।
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नाथ संप्रदाय का उल्लेख विभिन्न क्षेत्र के ग्रंथों में जैसे-योग (हठयोग), तंत्र (अवधूत मत या सिद्ध मत), आयुर्वेद (रसायन चिकित्सा) और बौद्ध अध्ययन में मिलती है. यौगिक ग्रंथों में नाथ सिद्धः- हठप्रदीपिका के लेखक स्वात्माराम और
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इस ग्रंथ के प्रथम टीकाकार ब्रह्मानंद ने हठ प्रदीपिका ज्योत्स्ना के प्रथम उपदेश में 5 से 9 वे श्लोक में 33 सिद्ध नाथ योगियों की चर्चा की है‌। इनके बारे में कहा गया है कि ये नाथसिद्ध कालजयी होकर ब्रह्माण्ड में विचरण करते हैं।
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नाथ योगियों में प्रथम नाथ आदिनाथ को माना गया,जो स्वयं शिव है जिन्होंने हठयोग की विद्या प्रदान की जो राजयोग की प्राप्ति में सीढ़ी के समान है। आयुर्वेद ग्रंथों में नाथ सिद्धों की चर्चा:- रसायन चिकित्सा के उत्पत्ति करने वाले के रूप में होती है।
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जिन्होंने इस शरीर रूपी साधन को जो मोक्ष में माध्यम है इस शरीर को रसायन चिकित्सा पारद और अभ्रक आदि रसायनों की उपयोगिता सिद्ध की.
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नाथ संप्रदाय को 12 शाखाओं में बंटा है, जिसे बारह पंथ कहते हैं। इसके कारण नाथ संप्रदाय को 'बारह-पंथी' योगी भी कहा जाता है।
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प्रत्येक पंथ एक पौराणिक देवता अथवा सिद्ध योगी को अपना आदि प्रवर्तक मानता है।

गुरु गोरक्षनाथ ने राप्ती तट पर जिस जगह तपस्या की और अपनी दिव्य समाधि लगाई उस जगह गोरखनाथ मंदिर की स्थापना की गई। गोरखनाथ मंदिर नाथ संप्रदाय का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र और पीठ है।
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नाथ संप्रदाय परंपरा के अनुसार इस स्थान की ऐतिहासिकता त्रेता युग तक जाती है। भगवान शिव के साक्षात अवतार कहे जाने वाले गुरु गोरक्षनाथ ने त्रेता युग में इसी स्थान को अपनी तपोस्थली बनाया।
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योगी आदित्यनाथ गोरक्ष पीठ के महंत है. जो नाथ संप्रदाय का सबसे बड़ा पीठ है। भाजपा का नाथ संप्रदाय से कोई लेना-देना नहीं है, नाथ संप्रदाय और गोरखनाथ पीठ का भाजपा से जुड़ाव राम मंदिर आंदोलन के कारण हुआ।
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असल में गोरक्षपीठ के महंत रहे दिग्विजय नाथ का नाम उन लोगों में प्रमुखता से शामिल है, जिन्हें अयोध्या में मंदिर निर्माण की परिकल्पना का सूत्रधार कहा जाता है. दिग्विजय नाथ 1935 से 1969 तक पीठाधीश्वर रहे।अयोध्या मामले के विषय में कहा जाता है कि तबके गोरक्षपीठाधीश्वर
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रहे महंत की अगुवाई में ही विवादित स्थल के भीतर भगवान राम की प्रतिमा रखवाई गई थी. यह वाक्य 22 दिसंबर 1949 का है। दिग्विजय नाथ के निधन के बाद उनके शिष्य महंत अवैद्यनाथ पूरे दमखम से आगे आये।
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मठ का उत्तराधिकारी होने के नाते उन्हें महंत पदवी मिली साथ ही विरासत में मिली राम मंदिर आंदोलन की कमान। 21 जुलाई 1984 को अयोध्या के वाल्मीकि भवन में महंत अवेद्यनाथ को श्रीराम जन्म भूमि मुख्य आंदोलन का अध्यक्ष चुना गया।
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उसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन राम मंदिर आंदोलन में व्यतीत कर दिया। मंदिर आंदोलन के लिए राजनीति से लेकर कूटनीति तक, उन्होंने हर स्तर प्रयास किए। उनके निधन के बाद उनके शिष्य महंत योगी आदित्यनाथ ने आखिरकार उनके सपने को साकार किया।
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परंतु सवाल ये है कि सनातन धर्म के इतने मजबूत अंग को सनातन विरोधी कैसे घोषित कर दिया गया। अभिषेक भाई जो कटिंग लेकर आएं हैं जरा उसके बारे में भी आपको बता देता हूं।
असल में यह आर्टिकल BBC न्यूज का लिखा हुआ है 👇👇
bbc.com/hindi/india/20…
और इसके लेखक मशहूर वामपंथी बद्री नारायण हैं जो विभिन्न विभन्न तरीके से हिंदू धर्म के इतिहास को मरोड़ने में माहिर हैं। इनकी विचारधारा इन दो किताबों से आपको जानने को मिल सकती है। ImageImage
@AzadSenaChief भाई अपनी राजनीति चमकाने के लिए ऐसी चीज़ों का तो सहारा मत लीजिए कम से कम। बेवजह हिंदू धर्म को तोड़ने के असफल प्रयास मत कीजिए 🙏🙏
@MominHunter

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20 Jul
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