एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर के नेता ने कहा था - "इस्राइल को एक राष्ट्र के रूप में स्वीकारना, सदी की सबसे बड़ी मानवीय भूल होगी!"
क्या बिना इस्राइल के, विश्व के नक्शे में कोई कमी थी?

परिणाम हम दशकों से झेल रहे हैं।
याद कीजिए पिछले 30-40 वर्षों की अखबारों की हेडलाइन्स!
..1/4
दशकों से चल रहा अरब इस्राइल युद्ध, गाजा पट्टी पर काबू करने के कुत्सित प्रयास!
मोसाद की बदनाम साजिशें!
कॉंग्रेस सरकारों द्वारा दशकों तक इस्राइल से दूरी बनाए रखने का प्रयास!
फिर अटल बिहारी सरकार द्वारा पहली कोशिश, कि भारत में इस्राइल से राजनयिक संबंध बनें!
आखिर क्यों?
...2/4
अब #pegasus ?
आखिर क्यों?
उस छँटाक भर के इस्राइल से आखिर ऐसा क्या प्यार है?
डीएनए काम कर रहा है क्या?
"पितृभूमि" ?? 🙄

अपने ही देश के संवैधानिक अधिकारियों की जासूसी क्यों?
सुप्रीम कोर्ट का मुख्य जज,
चुनाव आयुक्त,
विपक्ष का नेता,
याने कोई भी सवाल पूछने वाला!
..3/4
#JaiAryavart
विश्लेषण:
मूलत: तुम तानाशाह हो!
लोकतंत्र तुम्हें बुरा लगता है,
ऐसा कोई कहे तो तुम्हें सिर्फ सुनने में बुरा लगता है!
मन में तो लड्डू फूटते हैं!
खैर,
बगैर नाड़े का पाजामा कितना ही खींचो, आखिर तो खुलना ही था!
अब खुल गई तो डरते क्यों हो?
...4/4
#PegasusSnoopgate
#PeepingTom

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More from @BramhRakshas

22 Jul
‘इस देश में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान आक्सीजन की कमी से किसी मरीज की मौत नहीं हुई।‘

संसद में केन्द्र सरकार के इस मासूम जवाब पर कौन न मर जाए ए खुदा!

और जवाब की वजह यह कि किसी राज्य ने ऐसी कोई जानकारी नहीं भेजी। सो हम भी क्या करें?
...1/28 Image
उस पर दलील ये कि केन्द्र सरकार का काम महज आंकड़े इकट्ठा कर उन्हें कम्पाइल करना है।

बाकी जिम्मेदारी राज्य सरकारों की हैं।

दूसरे शब्दों में कहें तो जब राज्य ही नंगी सच्चाई को झुठलाना चाहते हैं तो भई हम केन्द्र में बैठकर उसे कैसे सच बता दें?
...2/28
यानी खुद को शर्मसार करने वाली बेशर्मी।

राज्यसभा में मोदी सरकार के जवाब पर आम जनता को मलाल और राजनीति में बवाल मचा है।

कांग्रेस सांसद के.सी.वेणुगोपाल ने सवाल किया था कि क्या यह सच है कि कोविड की दूसरी लहर में कई मरीज अस्पतालों में आक्सीजन के अभाव में मर गए?
...3/28
Read 29 tweets
14 Jul
मित्रों एक क्रोनोलॉजी को समझ कर अपने विचार बताइए -

◼️ नवम्बर 2018 में मोदी सरकार ने फ़ैसला किया कि देश के हवाई अड्डों का निजीकरण होगा।

◼️ फरवरी 2019 में अड़ानी ने घोषणा की कि उनकी कम्पनी हवाई अड्डे के क्षेत्र में अपनी सुविधाएँ देगी।
..1/6
◼️ जून 2019 में मोदी सरकार ने 6 हवाईअड्डे बेचे और इत्तिफ़ाक़ से सभी 6 हवाई अड्डे अड़ानी की कम्पनी को मिल गए।

मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज हवाई अड्डा देश का सबसे बड़ा हवाई अड्डा है और वो पहले से ही GVK ग्रूप (GVK Industries Limited) के पास था।
..2/6
चूंकि अड़ानी को इस इंडस्ट्री में नम्बर वन बनना था इसलिए अड़ानी ने GVK ग्रूप को ऑफ़र दिया कि वो मुंबई ऐयरपोर्ट का कुछ स्टेक उन्हें बेच दे। GVK ने उन्हें कोई जवाब नहीं दिया।
..3/6
Read 7 tweets
14 Jul
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा लाई जाने वाली प्रस्तावित जनसंख्या नियंत्रण नीति देश के सर्वाधिक आबादी वाले राज्य में जनसंख्या पर लगाम लगाने की एक ईमानदार कोशिश है अथवा महज एक राजनीतिक शोशेबाजी है, जो प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभाचुनाव को ध्यान में रखकर की गई है?
1/18
यह देश की एक ज्वलंत समस्या के समाधान की दिशा में उठाया जा रहा जरूरी कदम है या फिर देश की दूसरी गंभीर समस्याओं से ध्यान हटाने भाजपा के धारणा प्रबंधन (परसेप्शन मैनेजमेंट) का नया चैप्टर है?
..2/18
यह देश की बेलगाम होती जनसंख्या के लोगों को सचेत करने की गंभीर पहल है या आगामी चुनावों में धार्मिक ध्रुवीकरण की नई चतुर चाल है?
..3/18
Read 20 tweets
12 Jul
कल एक मित्र ने डीएम के जरिए कड़ी टिप्पणी की, कि मेरी आलोचनाएं एक तरफा होती हैं, और विपक्ष, विशेषकर काँग्रेस में मुझे कोई कमियाँ नहीं दिखतीं।

तो सुनो बंधुवर, काँग्रेस अपनी गलतियों का भरपूर खामियाजा भुगत रही है।
..1/31
एक स्वतंत्र प्रेक्षक के तौर पर यद्यपि आलोचनाओं की बहुत गुंजाइश है, मगर विपक्ष की आलोचना से देश का भला नहीं होता।
आलोचना तो हम अपनी करें, जनता की करें, जिन्होंने जेबकतरों से छुटकारा पाने के लिए बंदूकधारी डकैतों को चुन लिया!
..2/31
भारतीय राजनैतिक परिप्रेक्ष्य में आप सिर्फ यह कर सकते हैं कि कम बुरे और अधिक बुरों के बीच चुनाव कर लें। यहाँ किसी दल विशेष के दूध से धुले होने की संभावना हो ही नहीं सकती।
शेष जनता की इच्छा, हरि इच्छा...
...3/31
Read 32 tweets
10 Jul
कॉंग्रेस ने हमेशा नमकहरामों, जयचंदों और गद्दारों को बढ़ावा दिया और बीजेपी ने हमेशा उन्हें सबक सिखाया।
कुछ उदाहरणों से समझाता हूँ -

नेहरू सरकार ने रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए आजीवन पेंशन का प्रावधान किया, पेंशनधारी अटल जी के समर्थन में आए और अटल जी ने पेंशन ही समाप्त कर दी।
1/8
अटल जी समझ गए थे कि यह पेंशनधारी जब नेहरू की कांग्रेस के ना हुए तो मेरे क्या होंगे इसलिए अटल जी ने पेंशनधारियों को नमक हरामी की सजा दे दी, अब पिछले 17 साल से पेंशनधारी दर दर की ठोकरें खा रहे हैं ।
अच्छा सबक मिला! 😉
..2/8
नेहरू सरकार में SC ST को आरक्षण मिला और वीपी सिंह की सरकार में मण्डल कमीशन लागू हुआ।
दलित और पिछड़े समाज के लोग बड़ी तादाद में कांग्रेस और समाजवादियों को छोड़कर मोदी जी के साथ आ गए।
मोदी जी ने आरक्षण का झगड़ा ही ख़त्म करने की ठान ली, उन्होंने एक एक करके संस्थान बेच दिए।
..3/8
Read 8 tweets
10 Jul
मोदी सरकार 2.0 के दूसरे विस्तार में निहित संदेश को राजनीतिक प्रेक्षक अलग-अलग ढंग से पढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।
लुब्बो लुआब यही है कि चुनाव जीतना! चुनाव जीतना और उसके लिए हर संभव रणनीति बनाते रहना मोदीजी की हर गतिविधि की प्राथमिकता रही है।
क्योंकि सत्ता है तो सब कुछ है!
🤷‍♂️
..1/12
मंत्रिमंडल के इस विस्तार में भी तीन दूरगामी लक्ष्य दिखते हैं। पहला पिछड़ों और दलितों में अपनी पैठ बढ़ाकर यूपी का चुनाव जीतना, दूसरा, 2024 के लोकसभा चुनाव जीतने के लिए जातीय, क्षेत्रीय गुणाभाग के साथ तैयारी शुरू करना तथा तीसरा नेतृत्व की दूसरी पीढ़ी को तैयार करना(?)!
..2/12
इसके अलावा अपनी ही पुरानी थ्योरी ‘मिनिमम गवर्मेंट, मेक्सिमम गवर्नेंस’ को खा‍रिज कर, ‘मेक्सिमम गवर्मेंट’ की ओर लौटना, जोकि देश की लोकतां‍त्रिक मजबूरी भी है।
तो क्या अब मोदी सरकार ‘मेक्सिमम गवर्नमेंट, मेक्सिमम गवर्नेंस’ की राह पर लौट रही है? पहले की सरकारें भी तो यही करती थीं।
3/12
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