#Thread
इस तस्वीर को देखने और चिंतन करने के बाद आपको #गांधियों से और ज्यादा नफरत हो जाएगी, और हां ये तस्वीर तब की है जब नेहरू का कपड़ा और जूता विशेष विमान से आता था।

यह एक तस्वीर है 1948 के ओलंपिक की जो लंदन में हुआ था। हमारी फुटबॉल टीम ने फ्रांस के साथ मैच 1-1 से बराबर किया था।
हमारे खिलाड़ी इसलिए जीत न सके क्योंकि उनके पास जूते ही नहीं थे। और वह नंगे पैर पूरा मैच खेले थे, जिसके कारण बहुत ही खिलाडियों को दूसरी टीम के खिलाडियों के जूतों से चोट भी लगी थी,फिर भी मुकाबला बराबरी का रहा।

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इस टीम के कप्तान थे शैलेन्द्र नाथ मन्ना, वो विश्व के बेहतरीन खिलाडियों मैं से एक थे।
सरकार ने जूते क्यों नहीं दिए क्योंकि सरकार के पास इतने पैसे भी नही थे। यह वो वक्त था जब नेहरू के कपड़े पेरिस से ड्राइक्लीन हो कर आते थे।और साहब अपने कुत्ते के साथ प्राइवेट जेट मैं घूमते थे।

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नतीजा यह हुआ के फीफा ने 1950 वर्ड कप मैं इंडिया को बैन कर दिया क्योंकि बिना जूते के कोई भी टीम मैच नही खेल सकती थी।फिर कभी भारतीय टीम फीफा वर्ड कप मैं नही गई।
परंतु आज देश मैं कई स्टेडियम नेहरू गांधी परिवार के नाम पर है।

इस सच्चाई को अधिक से अधिक शेयर करे और हर भारतीय तक पहूँचाए

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15 Sep
#Thread
Dr. Muthulakshmi Reddy - An Inspirational Women

Muthulakshmi Reddy was born in 1886 in the princely state of Pudukottai in Tamilnadu. Her father was Narayanswami Iyer. Her mother was a Devadasi who, In case you don’t know, were women...

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who were ostensibly “dedicated” to temple deities tasked with passing on the baton of the art of dance to the next generation. The grim reality was different. They were often subjected to exploitation and were considered prostitutes by the British government...

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It was actually worse than prostitution- no one chose to be a devadasi. The prepubescent girl was initiated into the system by a religious ceremony which ensured her permanent status as a concubine. She would have a male patron, but no rights to his surname or inheritance.

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Read 24 tweets
14 Sep
हिंदी दिवस
पर
विशेष रूप से
✍ हिंदी की व्यथा ✍🏼

मैं इस हिन्द देश की बेटी हिंदी हूँ
कुछ भाई-बहिनों की वजह आज जिन्दी हूँ
मैं इस हिन्द......

आज हर घर में रुग्नावस्था में पड़ी हूँ
कहने को तो मैं राष्ट्र भाषा हूँ

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मगर, अंग्रजी के अधीन दीन-हीन हूँ
हाँ, गरीबों की बहुत बड़ी आशा हूँ
मेरी स्थिती को यूं समझ लीजिए
जैसे, बिन गहनों की दुल्हन के माथे की बिंदी हूँ

मैं इस हिन्द देश की बेटी हिंदी हूँ
कुछ भाई-बहिनों की वजह आज जिन्दी हूँ

👇👇
अपनों से ठुकराई जा रही हूँ मैं
गैरों से अपनाई जा रही हूँ मैं
विदेशों में सम्मान पा रही हूँ मैं
और अपने ही देश में भुलाई जा रही हूं मैं
मेरी स्थिति को यूं समझ लीजिए
जैसे, लूली-लंगड़ी,गूंगी-बहरी,अन्धी हूँ

मैं इस हिन्द देश की बेटी हिंदी हूँ
कुछ भाई-बहिनो की वजह जिन्दी हूँ

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Read 5 tweets
14 Sep
#Thread
विज्ञान चाहे कितनी भी तरक्की कर ले पर ईश्वर के सामने फेल है!!

ईश्वर द्वारा प्रकृति की संरचना ही सर्वश्रेष्ठ संरचना है। हमें ईश्वर ने जो जिस रूप में दिया वही हमारे लिए सर्वोत्तम है। हम भोग-विलास, दिखावे और लालसा में भले ही प्राकृतिक चीजों से दूर चले गए...

👇👇
पर आज मानव निर्मित चीजों के दुष्प्रभावों, दुष्परिणामों के कारण मनुष्य को वापिस प्राकृतिक चीजों की तरफ लौटना पड़ रहा है क्योंकि वहीं सर्वश्रेष्ठ है।

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जानिए इस विषय में कुछ उदाहरण:

1) पहले मनुष्य मिट्टी के बर्तन प्रयोग करता था। फिर वहां से भिन्न भिन्न धातुओं और स्टील तथा प्लास्टिक के बर्तनों तक पहुँच गया है। पर इनके प्रयोग से कैंसर होने का खतरा हो गया है इसलिए मनुष्य दोबारा मिट्टी के बर्तनों तक आ रहा है।

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Read 16 tweets
14 Sep
भारतीय इतिहास के एक और स्वतंत्रता सेनानी जिनके बारे में बहुत कम लोगो को पता होगा #राजा_महेंद्र_प्रताप_सिंह

मथुरा से जब आप हाथरस की ओर चलेंगे तो हाथरस जिले में प्रवेश करते ही एक कस्बा पड़ेगा मुरसान। मुरसान एक छोटा सा कस्बा है। वहां के राजा थे राजा महेंद्र प्रताप सिंह। 1/3
राजा महेंद्र प्रताप उन विलक्षण और प्रतिभाशाली स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों में से एक रहे हैं जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ भारत के बाहर आज़ादी की मशाल और स्वतंत्र चेतना को जगाये रखा। उनका जन्म 1 दिसंबर 1886 को और मृत्यु 29 अप्रैल 1979 को हुयी थी। 2/3
वे मथुरा से आज़ादी के बाद सांसद भी रहे हैं। वे स्वाधीनता संग्राम के सेनानी के साथ-साथ पत्रकार, लेखक और समाज सुधारक भी थे। मुरसान एक छोटी सी रियासत रही है। 3/3

#जय_हिंद 🇮🇳
Read 4 tweets
13 Sep
#Thread
ऐतिहासिक गलतियां दोबारा ना हो...

1. अगर पोरस ने सिकंदर को भागने देने के बजाए... उसे मार दिया होता, तो आज इतिहास दूसरा होता

2. अगर जयचंद ने मुहम्मद गोरी का साथ ना दिया होता..तो आज भारत का इतिहास दूसरा होता

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3. अगर पृथ्वीराज चौहान ने गोरी को माफ न कर के पहले ही युद्ध में मार दिया होता, तो भी इतिहास दूसरा होता

4. अगर राणा सांगा ने युद्ध में बाबर को मार दिया होता, तो भी इतिहास दूसरा होता

5. अगर सुभाषचंद्र बोस ने अंग्रेजों से युद्ध जीत लिया होता, तो भी इतिहास दूसरा होता

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6. देश के बंटवारे के बाद अगर गांधी जी ने समझौते के अनुसार सभी मुसलमानों को पाकिस्तान भेज दिया होता और वहां से सारे हिन्दुओं को भारत बुला लिया होता, तो आज ये मुसीबत नहीं हुई होती

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Read 15 tweets
12 Sep
#Thread
सुबह उठते ही 'कर (हथेली) दर्शन' का महत्त्व क्यों ?

हमारी संस्कृति हमें धर्ममय जीवन जीना सिखाती है। हमारा जीवन सुखी, समृद्ध, आनंदमय बने इसके लिए संस्कार रचे गए और दिनचर्या तय की गई। दिनचर्या का आरंभ नींद खुलने के तत्काल बाद शुरू हो जाता है।

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दिन की शुरुआत का पहला कदम है- कर दर्शनम् अर्थात हथेलियों को देखना। सुबह उठते ही सबसे पहले हमें हथेलियों के ही दर्शन करना चाहिए। यहां जानिए क्या होता है सुबह-सुबह हथेलियों के दर्शन करने से...

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सुबह सुहानी हो तो दिन अच्छा गुजरता है। दिन अच्छा हो इसके लिए हम सुबह अपने अंदर और बाहर अर्थात मन में और घर में शांति और प्रसन्नता चाहते हैं। हम आंख खुलते ही कोई ऐसी चीज देखना पसंद नहीं करते जिससे हमारा दिन खराब हो।

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