एक भीमटा बुद्ध का गुणगान किये जा रहा था मैंने भी अपने आदतानुसार उस भीमटे से बस यह कह दिया की बुद्ध और अंगुलीमाल वाला कहानी मुझे फर्जी लगती है.भला कोई व्यक्ति अंगुलियों की माला कैसे पहन सकता है,कुछ ही दिनों मे अंगुलिया सड़ने लगेगी और इंसान अंगुलियों की बदबू तथा बैक्टीरीया से बीमार
पड़ जायेगा.अतः मनुष्य की अंगुली काटकर अपने गले मे उसकी माला माला पहनना सम्भव नहीं है.फिर क्या था भीमटा भड़क गया.मुझे अनाप शनाप और जातिसूचक बातें भी बोलने लगा.आज मै उन तमाम भीमटो से कहता हूँ जो खुद तार्किक बनते है वे भी दस दिनों तक अपने गले मे मनुष्य की अंगुली की माला पहनकर दिखाए
फिर अंगुलीमाल वाली कथा मै सच मान सकता हूँ.भीमटो की एक आदत है ये खुद को बहुत तार्किक और ज्ञानी समझते है,पर इनका सारा तर्क और ज्ञान हिन्दू धर्मों पर ही निकलता है.जैसे ही बौद्धधर्म पर तर्क करो तो इनके तोते उड़ जाते है.
*जो भीमटे हिन्दुओं से पूछते है की फल और खीर खाने पीने से बच्चा
कैसे पैदा हो सकता है,यदि उन्ही भीमटो से यह पूछो की महामाया के गर्भ मे हाथी घुसने से बुद्ध कैसे पैदा हो गये तो उनकी असलियत सामने आ जाती है. कोई भीमटा बतायेगा की ये हाथी से गर्भ धारण करने वाली प्रक्रिया कब शुरू हुई.
*दूसरी बात भीमटे अन्य वर्ण का गोरा रंग देखकर चिल्लाते है की आर्य
विदेशी है जबकी शूद्र वंश के भी लोग यूरोपियन जैसे गोरे है.फिर भी भीमटो को जवाब तो देना होगा की बुद्ध के बाल देखकर लगता है की वे भी नाइजीरिया(अफ्रीका) के निवासी होंगे.क्योकि अफ्रीकी लोगों के ही बाल मे वैसी लट होती है जैसे बुद्ध की है.इसका कुछ जवाब है भीमटो के पास?
*तीसरी बात भीमटे
"बुद्धम शरणं गच्छामि" कहते है,जबकि मैंने भी बुद्ध को पढ़ा है.उन्होंने तो कभी नहीं कहा की मेरी शरण मे आओ.उल्टे तो कहते थे की "स्वयं की शरण मे जाओ"(अप्प दीपो भवः) जरा भीमटो ये बताओ की ये "बुद्धम शरणम् गच्छामि" क्या है? आखिर क्या मिलेगा बुद्ध की शरण मे, जो मनुष्य ऐसे प्राप्त नहीं कर
सकता, तुम्ही लोग कहते हो की मंदिर की घंटी बजाने से ज्ञान नहीं आता,तो बौद्धविहार मे लोटने से ज्ञान आ जायेगा क्या?सच तो यह है की इन मक्कार भीमटो ने एक वर्ग पर अपनी भड़ास निकालने के लिए बुद्ध का इस्तेमाल किया है.इन धुर्तो ने अपने कुकर्मो से बुद्ध को गाली दिलवाते है और उनका अपमान
करवाते है.भीमटो को लगता है की अम्बेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाकर बौद्धधर्म पर उपकार कर दिया होगा.पर सच यह की अम्बेडकर के बौद्ध बनने की वजह से बौद्धधर्म का सत्यानाश हो गया.

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13 Oct
#जय_जगदम्बा 🚩
#सोमरस क्या है? – सही तथ्य जानिये :- सनातन धर्म को लेकर इससे ईर्ष्या-द्वेष करने वाले विधर्मी कई बातों को लेकर सामान्य लोगों में भ्रम और झूठ फैलाने का प्रयास सतत करते रहते हैं। जैसे कि यह झूठ फैलाया जाता है कि प्राचीन वैदिक काल में गौमांस खाया जाता था, अथवा वैदिक
काल में सनातन धर्मी ऋषि-मुनियों ने सारा ज्ञान अपने पास छिपाकर रखा, गरीबों-वंचितों को नहीं दिया इत्यादि।
#बारम्बार ऐसे झूठों का पर्दाफ़ाश किया जाता रहा है:-
इसी प्रकार का एक भ्रम “सोमरस” (Somras) शब्द को लेकर भी फैलाया जाता है। हमारे वेद, पुराण आदि धार्मिक ग्रंथों में सोमरस
का वर्णन आता है। अधिकांश लोग सोमरस को शराब (Wine) या मदिरा (Liquor) समझते है, हालांकि यह तथ्य बिलकुल गलत है। सोमरस, मदिरा और सुरापान तीनों में फर्क है।विधर्मियों द्वारा फैलाए गए दुष्प्रचार के अनुसार वैदिक काल में देवता, राजा-महाराजा अथवा बड़े-बड़े विद्वान लोग “सोमरस” का सेवन करते
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12 Oct
आज मेरे घर से 10 किलोमीटर दूर गया देवी माँ के दर्शन के लिए🙏🏻🥰🚩माँ का पूजा अर्चना किया और आशीर्वाद लेकर🙏🏻🚩सभी भाइयों के साथ मेला घूमने निकला जैसे ही मेले मे कदम रखा सबसे पहले नजर पड़ गई एक फ़ास्ट फूड के दुकान पर जहाँ पर उसने अंडे रखें हुए था हम सभी वहां गये पहले तो ये पूछा की
दुकानदार से की तुम्हारा धर्म क्या है बोला हिन्दू हमनें आधार कार्ड चेक किया फिर मैंने बोला ये दुर्गा माता का मेला है यहां पर तुम्हे अंडे रखने की अनुमति किसने दी उसने बोला किसी ने नहीं फिर हमने बोला की रुको पूजा समिति को बुलाते है तो पैर पड़ने लगा की भैया गलती हो गई तो मैंने बोला
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11 Oct
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#वामपंथी सागरिका घॊस के वामपंथी पिता भास्कर घोस ने आधे में ही रुकवानी चाही थी रामानंद सागर की रामायण:- हिन्दुओं के हृदय में बस थे हैं प्रभु राम और श्री कुष्ण। भारत के कण-कण में उनका अस्तित्व है। ६०० मुगलों की और २०० साल अंग्रेज़ॊं की गुलामी ने हिन्दुओं को मानसिक Image
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नेहरू-गांधी और वामपंथी विचारधारा वाले लॊगॊं ने मिलकर हिन्दू राष्ट्रवाद का गला घॊट दिया। हिन्दुत्व जैसे अपना दम तॊडनेवाला ही था की रामानंद सागर रामायण लेकर आए। दूरदर्शन के इतिहास में रामायण और महाभारत का नाम स्वर्णिम अक्षरॊं मे लिखा गया है। रामायण मानॊं आँधी की तरह आई और सारे
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9 Oct
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#बौधायन कौन थे ? :- ज्यामिति के विषय में प्रमाणिक मानते हुए सारे विश्व में यूक्लिड की ही ज्यामिति पढ़ाई जाती है। मगर यह स्मरण रखना चाहिए कि महान यूनानी ज्यामितिशास्त्री यूक्लिड से पूर्व ही भारत में कई रेखागणितज्ञ ज्यामिति के महत्वपूर्ण नियमों की खोज कर चुके थे, उन
रेखागणितज्ञों में बौधायन का नाम सर्वोपरि है। उस समय भारत में रेखागणित या ज्यामिति को शुल्व शास्त्र कहा जाता था।
#बौधायन के सूत्र ग्रन्थ :- बौधायन के सूत्र वैदिक संस्कृत में हैं तथा धर्म, दैनिक कर्मकाण्ड, गणित आदि से सम्बन्धित हैं। वे कृष्ण यजुर्वेद के तैत्तिरीय शाखा से
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बौधायन सूत्र के अन्तर्गत निम्नलिखित ६ ग्रन्थ आते हैं-

1. बौधायन श्रौतसूत्र - यह सम्भवतः १९ प्रश्नों के रूप में है।
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8 Oct
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में इसे दीपावली के दूसरे दिन भी मनाया जाता है।हिन्दू धर्म में विश्वकर्मा को निर्माण एवं सृजन का देवता माना जाता है। मान्यता है कि सोने की लंका का निर्माण उन्होंने ही किया था। विश्वकर्मा हस्तलिपि कलाकार थे। जिन्होंने हमें सभी कलाऔ का ज्ञान दीया।

हमारे देश में विश्वकर्मा जयंती
बडे़ धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन देश के विभिन्न राज्यों में, खासकर औद्योगिक क्षेत्रों, फैक्ट्रियों, लोहे की दुकान, वाहन शोरूम, सर्विस सेंटर आदि में पूजा होती है। इस मौके पर मशीनों, औजारों की सफाई एवं रंगरोगन किया जाता है। इस दिन ज्यादातर कल-कारखाने बंद रहते हैं और लोग
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