India is near to crack satelite based Quantem Communication.

जो मित्र मेरा ट्वीट पढ़ते रहते हैं उन्हें पता होगा कि कुवांटेम कंप्यूटिंग के बारे में मैं अक्सर लिखता रहता हूँ। बहुत डिटेल में तो नहीं पर हाँ इतना जरूर पता है कि कुवांटेम कंप्यूटिंग नार्मल कंप्यूटिंग से करोड़ों (1/4)
गुना तेजी से काम करते हैं क्योंकि यह हर बिट की वैल्यू को समय अनुसार बदलते रहते हैं। इसे किसी एक लेख में समझना बहुत मुश्किल है। फिर भी आसान भाषा में यह समझ लो कि कंप्यूटर में हर बिट की एक फिक्स वैल्यू होती है जो 1 या 0 में या उनके मल्टीप्ल कॉम्बिनेशन्स में दर्शायी जाती है (2/4)
जबकि कुवांटेम कंप्यूटिंग में ये वैल्यू समयानुसार बदलती रहती है और यह फिक्स न होकर चलायमान होती है जो कभी 1 भी हो सकती है औए 0 भी या यह अपना स्थान बदल भी सकती है। क्योंकि यह निश्चित नहीं होती अतः यह सेफ और तेज होती है। अब भारत अपने सेटेलाइट बेस्ड कम्युनिकेशन को कुवांटेम (3/4)
भाषा में करेगा।

जिन भाइयों को कुवांटेम के बारे में ज्यादा जानना है उनके लिए मैं लिंक दे रहा हूँ।

microwavejournal.com/articles/print…
(4/4)

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24 Nov
Ayodhya In Future The Vedic City ~

राम मंदिर के निर्माण के साथ-साथ अयोध्या का एक प्रस्तावित नया रूप प्रमुख परिदृश्य और नदी के सामने के विकास को लाएगा, जिसमें विशेष सुविधाओं से युक्त 1,200 एकड़ में फैले एक ग्रीनफील्ड शहर और इमारतों के लिए एक अलग रंग योजना होगी जो नई (1/5)
परियोजना के हिस्से के रूप में आएगी। हम देखेंगे कि कैसे शहर पारंपरिक स्वास्थ्य सुविधाओं, वैदिक शिक्षा और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बन सकता है। प्रारंभिक योजना के अनुसार शहर में नियमित जोनिंग नहीं होगी। योजनाकार वेटिकन सिटी और वेनिस जैसे सर्वश्रेष्ठ #अनुभवात्मक (2/5)
अंतरराष्ट्रीय शहरों के केस स्टडी और अमृतसर, वाराणसी, मदुरै और तिरुपति जैसे भारतीय उदाहरणों का उल्लेख करते हैं। शहर की विरासत संपत्तियों पर बहुत अधिक ध्यान दिया जाएगा, जिसमें मुख्य शहर क्षेत्र और मंदिर प्रभाव क्षेत्र की रेट्रोफिटिंग और पुनर्विकास शामिल होगा।

निर्बाध (3/5)
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24 Nov
🔴 भारत: गांधी-नेहरू की छाया में !

वर्ष 1926 में स्वामी श्रद्धानंद जी की हत्या कर दी गई। हत्या करने वाला एक मुसलमान था और उनकी हत्या का एकमात्र कारण स्वामी जी का मतांतरित मुसलमानों की शुद्धि का कार्य था। यह बात स्पष्ट है कि आर्य-समाजी कभी भी किसी अहिंदू को बल, छल अथवा (1/11)
प्रलोभन से हिंदू बनाते हुए नहीं देखे गए। इस पर भी स्वामी जी की हत्या की गई और कांग्रेसी स्वामी जी के काम की निंदा करते रहे। उस समय मोहनदास करमचंद गांधी कांग्रेस के अधिवेशन में गुवाहाटी गए हुए थे। जब उनको स्वामी श्रद्धानंद जी की हत्या का समाचार मिला तो अनायास ही उनके मुख (2/11)
से निकल गया कि ऐसा तो होना ही था!

गांधी के मुंह से इन शब्दों के निकलने का अर्थ उनके हिसाब से यही था कि मानो स्वामी श्रद्धानंद जी कोई भारी पाप कर रहे थे और उन्हें उस पाप का ऐसा फल मिलना ही था। इस घटना के विषय में मोतीलाल नेहरू ने अपने पुत्र जवाहर लाल नेहरू को, जो उस समय (3/11)
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24 Nov
संपूर्ण भारत वर्ष में कथावाचक के रूप में ख्याति अर्जित कर चुके डोंगरेजी महाराज एकमात्र ऐसे कथावाचक थे जो दान का रूपया अपने पास नही रखते थे और न ही लेते थे।
जिस जगह कथा होती थी लाखों रुपये उसी नगर के किसी सामाजिक कार्य, धर्म व्यवस्था, जनसेवा के लिए दान कर दिया करते थे।
(1/5)
उनके अन्तिम प्रवचन में गोरखपुर में कैंसर अस्पताल के लिये एक करोड़ रुपये उनके चौपाटी पर जमा हुए थे।

उनकी पत्नी आबू में रहती थीं। पत्नी की मृत्यु के पांचवें दिन उन्हें खबर लगी। बाद में वे अस्थियां लेकर गोदावरी में विसर्जित करने मुम्बई के सबसे बड़े धनाढ्य व्यक्ति रति भाई (2/5)
पटेल के साथ गये। नासिक में डोंगरेजी ने रतिभाई से कहा कि रति हमारे पास तो कुछ है ही नही, और इनका अस्थि विसर्जन करना है। कुछ तो लगेगा ही क्या करें?
फिर खुद ही बोले - "ऐसा करो कि इसका जो मंगलसूत्र एवं कर्णफूल हैं, इन्हे बेचकर जो रूपये मिले उन्हें अस्थि विसर्जन में लगा (3/5)
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24 Nov
देश के ऐसे प्रथम व्यक्ति जिनके निधन पर उनके पार्थिव शरीर को तीन देशों के राष्ट्रीय ध्वज में लपेटा।

भारत के एकमात्र ऐसे व्यक्ति बीजू पटनायक हैं, जिनके निधन पर उनके पार्थिव शरीर को तीन देशों के राष्ट्रीय ध्वज में लपेटा गया था। भारत, रूस और इंडोनेशिया ये तीन देश है। जब (1/8)
द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ गया था तब सोवियत संघ संकट में घिर गया था। तब उन्होंने लड़ाकू विमान डकोटा उड़ा कर हिटलर की सेनाओं पर काफी बमबारी की थी जिससे हिटलर पीछे हटने को मजबूर हो गया था।

आपको बता दें, उनकी इस बहादुरी पर उन्हें सोवियत संघ का सर्वोच्च पुरस्कार भी दिया गया (2/8)
था। उन्हें सोवियत संघ ने अपनी नागरिकता प्रदान की थी। दूसरी ओर कश्मीर पर जब कावालियों ने आक्रमण किया था। तब बीजू पटनायक थे जिन्होंने प्लेन उड़ा कर दिन में कई चक्कर दिल्ली से श्रीनगर का लगाए थे और सैनिकों को श्रीनगर पहुंचाया था।

इंडोनेशिया कभी डच यानी हालैंड का उपनिवेश था (3/8)
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24 Nov
मोदी जी द्वारा कृषि कानून वापस लेने के बाद किसानो के वेश मे बैठे देशविरोधियों ने तीन और नई मांगो को सामने रख कर साफ कर दिया है कि उनका उद्देश्य किसान हित तो बिल्कुल न था और अभी भी नही है। इन्हे असली किसानो को पहचान कर दुत्कारना चाहिये। अगर कृषि कानून वापस लेने के बाद भी (1/15)
आंदोलन खत्म नहीं हो रहा है तो निश्चित रूप से अजित डोभाल जी की बात सत्य साबित होगी कि देश मे मोदी के आने के बाद से ही सिविल सोसाइटी के नाम पर पहले की सरकारो मे मलाई चाट कर देश खेखला करने वाले देशद्रोहियों का गिरोह मीरजाफर, दलालों, जेहादियों और खालिस्तानियों के साथ मिलकर (2/15)
देश में कुछ बड़ा गुल खिलाने के चक्कर में हैं। सरकार तो सतर्क है आप भी सजग रहिए सरकार के साथ रहिए।

बहरहाल कृषि कानून की वापसी पर उत्तेजित होने वालो को योगीराज के #रणछोण वाली भूमिका के बारे में पढ़ना चाहिये, जिन्होने पढा उनका चित्त शांत हो गया। याद करिये जरासंध जब अपनी (3/15)
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24 Nov
#धीरज_धर्म_भक्त
लठ्ठ जब तेल में डुबाया जाए तो उसका ये मतलब नहीं के छिपाया जा रहा है।

ये तो है सीधी सपाट बात।

जिनके के हित में कानून बना वो ही समर्थन में खड़े होने की हिम्मत न दिखा पाए। तो दो महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव को देख सरकार क्यों रिस्क ले।

बड़ा सवाल लगभग मर (1/4)
चुके आंदोलन और कुछ सौ लोगों के धरने को सरकार ने क्या दबाव माना होगा? क्या जाट सिख वोट को सरकार अपने पक्ष में लाने की गलतफहमी पालेगी?

दोनों संभावनाएं नही के बराबर हैं।

लेकिन एक सवाल सबसे बड़ा है क्या ये आंदोलन प्रधानमंत्री की बात के बाद खत्म होगा?
इसका जवाब में दे देता (2/4)
हूँ, बिल्कुल नहीं होगा, सवाल ही नहीं उठता। पूरे आंदोलन की जड़ में बाहरी पैसा है और गेम कुछ और।

तो अब क्या किया जाएगा? सारी राम कहानी में यही महत्वपूर्ण है के बिना जाट सेंटीमेंट्स को सुलगाये क्या होना चाहिए!

मुझे उम्मीद थी वो सीधे अचानक आंदोलन स्थल जाकर चौंकाएंगे। (3/4)
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