#जय_जगदम्बा 🚩
#काम नहीं कारनामे: देखिए अखिलेश राज में अपराध के सबूत:-उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के राज में हत्या, लूट, बलात्कार, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराध का बोलबाला है। अपराध के आंकड़े देखने पर साफ हो जाता है कि यूपी में काम नहीं कारनामे बोल रहे हैं। अखिलेश
राज में उत्तर प्रदेश अपराध राज्य में बदल गया है। हत्या, अपहरण, महिलाओं और अनुसूचित जाति के लोगों के खिलाफ अपराध के मामले में यूपी देश में नंबर वन बन गया है। अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। राज्य महिलाओं के सुरक्षित नहीं रह गया है। आए दिन गैंगरेप की घटनाएं सामने आती रहती है। अखिलेश
यादव के शासन में सांप्रदायिक दंगा खूब फला-फूला है।अगर अपराध के मामले में बीजेपी शासित राज्यों की तुलना उत्तर प्रदेश से करें तो अखिलेश के राज्य की स्थिति काफी खराब है।राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश की तुलना में उत्तर प्रदेश में हत्या के मामले दोगुना से भी ज्यादा है।दंगा के मामले
में भी उत्तर प्रदेश बीजेपी शासित राज्य राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश से काफी आगे है।यहीं हाल अपहरण के मामले में भी है। उत्तर प्रदेश यहां भी बढ़त बनाए हुए है।
बीजेपी शासित राज्य राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश की तुलना में उत्तर प्रदेश में दस गुणा से भी ज्यादा अपराध के
शिकायत किए गए।अखिलेश के शासन काल में अपराधियों को जमकर संरक्षण मिला। राज्य के लोग अपराध से त्रस्त हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक अखिलेश यादव के शासनकान में सिर्फ 2015 में ही मौखिक और लिखित रुप में कुल 59,41,118 शिकायत दर्ज हुए। राज्य में
इस साल आईपीसी के तहत 2,41,920 और एसएलएल के तहत 25,49,421 केस दर्ज किए गए। आंकड़ों के हिसाब से राज्य में रोजाना पुलिस के पास 16,277 शिकायत दर्ज हुए।राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट देखने से साफ है कि अखिलेश प्रशासन बुरी तरह से फेल हो गया है। एनसीआरबी के आंकड़ों के
मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार बनने के बाद सिर्फ 2015 में 4732 लोगों की हत्या हुई और 4897 हत्या के प्रयास किए गए। इस हिसाब से यूपी में रोज 13 लोगों की हत्या हुई।अखिलेश के मुख्यमंत्रित्व काल में यूपी महिलाओं के सुरक्षित नहीं रह गया है। 2015 में महिलाओं के खिलाफ
अपराध में 35,527 केस दर्ज किए गए। इसी साल राज्य में दहेज से मौत के 2335 मामले दर्ज हुए। राज्य में आए दिन गैंग रेप की घटनाएं सामने आती रहती है। बुलंदशहर हाईवे गैंगरेप, बरेली, बदायूं, कानपुर, इटावा जैसे सैकड़ों उदाहरण है जो अपराध की पराकाष्ठा है। इन कांडों के आरोपियों के पीछे
प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सपा का वरदहस्त रहा है। 2015 में राज्य में रेप की 3025 घटनाएं हुई जबकि 422 रेप के प्रयास किए गए। इस हिसाब से राज्य में रोज रेप की आठ घटनाएं होती है। ये सरकारी आंकड़ा है। हालांकि इतर स्थिति और भी भयावह है। क्योंकि लोकलाज की वजह से रेप और रेप के
प्रयास के मामले दबा दिए जाते हैं।मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के शासनकाल में सांप्रदायिक दंगा भी खूब फला-फूला है।मुजफ्फरनगर, दादरी,कैराना, शामली,बरेली,आगरा और न जाने किन-किन शहरों में दंगे हुए।राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार 2015 में उत्तर प्रदेश में 6813 दंगे हुए।
उत्तर प्रदेश में फिरौती के मामले भी काफी बढ़े हैं। लोगों को दिन-दहाड़े उठा लिया जाता है। अपराधी कानून को हाथ में लेकर बेखौफ होकर अपरहण कर रहे हैं। राज्य में साल 2015 में किडनैप के 11,999 मामले दर्ज किए गए।मुख्यमंत्री गरीब, वंचितों और अनुसूचित जाति के कल्याण की बात करते हैं। लेकिन
अनुसूचित जाति के खिलाफ अपराध के मामले बढ़ रहे हैं। 2015 में अनुसूचित जाति के लोगों के खिलाफ अपराध में 8358 केस दर्ज किए गए।जाहिर है अखिलेश ने फैमिली ड्रामा करके अपराध की घटनाओं और अपनी नाकामी से ध्यान बंटाने की कोशिश की। बाप-बेटे और चाचा की
नाटकबाजी की पोल खुलने पर कांग्रेस से हाथ मिलाकर लोगों को बरगलाने की कोशिश की।
#आयेंगे_तो_योगी_ही

साभार....
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23 Nov
#जय_जगदम्बा 🚩
#ब्रिटिश सेना में सार्जेंट मेजर थे मोहनदास गाँधी, अंग्रेजी सेना में शामिल होकर करते थे अत्याचार:-ब्रिटिशों ने सिर्फ भारत ही नहीं दुनिया के लगभग 70 देशों पर अत्याचार किया
वहां के धन को लूटा, और भारी अत्याचार किये
ब्रिटैन लुटेरों का ही देश था जो दुनिया पर
अत्याचार कर अपना खजाना भरा करता था. भारत की तरह ब्रिटिश सरकार ने साउथ अफ्रीका पर भी अत्याचार किया वहां के लोगों को लुटा मारा
हर जगह ब्रिटिशों ने अपनी सेना का गठन किया

मोहनदास गाँधी, जी हां भारत के कथित राष्ट्रपिता
वो भी अंग्रेजी सेना में थे

ये बात कांग्रेस या अन्य गाँधी
भक्तों ने आपको नहीं बताई होगी चूँकि बताने लायक नहीं है
पर ये सच है
साउथ अफ्रीका में मोहनदास गाँधी अंग्रेजी सेना में सार्जेंट मेजर थे. इतना ही नहीं, अंग्रेजो ने एक युद्ध भी लड़ा था जिसे Boer War के नाम से जाना जाता है
मोहनदास गाँधी ने इस युद्ध में अंग्रेजी सेना की ओर से
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22 Nov
#जय_जगदम्बा 🚩
#भिंडरावाले: एक सनकी आतंकी:-ऐसा क्या था उस 37 साल के युवा में कि सरकार को उसके सफाए के लिए सेना भेजनी पड़ी. दूसरी ओर कुछ लोग आज भी उसे संत जी कहते हैं. वह पीढ़ी जो गूगल के दौर में जवान हुई है, उसके लिए जरनैल सिंह भिंडरावाले एक रहस्यमयी किरदार हो सकता है.
भिंडरावाले को इतिहास में आतंकी के रूप में दर्ज किया गया है, जिसने सिख उग्रवाद को चरम तक पहुंचाया. और स्वर्ण मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाने के लिए सरकार को मजबूर किया. लेकिन इस शख्स से जुड़ी एक और हकीकत है, जिससे पर्दा उठाती हैं ताजा खबरें. अमृतसर से लेकर जम्मू
तक झड़पें हुई हैं. सिर्फ इसी खबर से कि ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी मनाए जाने के दौरान पुलिस ने भिंडरावाले का पोस्टर हटा दिया था. पंजाब में एक तबका अब भी भिंडरावाले को सम्मान के साथ मन में बसाता है.80 के दशक में वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता और उस दौर के कई पत्रकारों ने भिंडरावाले से
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22 Nov
#जय_जगदम्बा 🚩
#नवपाषाण काल (Neolithic age):-नवपाषाण काल (Neolithic age) : खाद्य उत्पादक (7000 से 3000 वर्ष पू.)

नवपाषाण काल को जॉन लुबाक ने नवपाषाण संस्कृति की संज्ञा दी है। तथा गॉर्डन चाइल्ड ने भी यह कहा है। इसका कारण यह है कि इस काल में मानव खाद्य संग्राहक से खाद्य उत्पादक
की श्रेणी में आ गया था। इस काल में कृषि व पशुपालन का विकास हुआ। कृषि का प्राचीनतम साक्ष्य मेहरगढ (ब्लूचिस्तान, पाकिस्तान) से प्राप्त हुए हैं। इस काल में स्थाई निवास के प्रमाण मिले हैं। गेहूँ तथा जौ भी इसी काल में मिले हैं तथा खजूर की एक किस्म भी प्राप्त हुई है। कृषि के लिए अपनाई
गई सबसे प्राचीन फसल गेहूँ व जौ हैं। पहिए का आविष्कार नवपाषाण काल में हुआ। इस काल से ही पता चलता है कि मनुष्य ने सबसे पहले कुत्ते को पालतू बनाया। कृषि कर्म से अनाज के संग्रह, भोजन की पद्धति हेतु मृदभाण्डों का निर्माण प्रारंभ हुआ। कृषि कार्य के लिए पत्थर के उपकरण अधिक धारदार व
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22 Nov
#जय_जगदम्बा 🚩
#इतिहास: जन गण मन किसके लिए लिखा गया था ?:-" जन गण मन गीत जार्ज पंचम के स्तुतिगान के रूप में लिखा गया। गुरुदेव स्वयं यह स्वीकार करते हैं कि सम्राट के आगमन के अवसर पर एक सरकारी अधिकारी ने उनसे सम्राट की प्रशंसा में एक गीत लिखने को कहा था। उन्होंने ऐसा गीत लिखने से Image
इनकार नहीं किया था।"
#अब आगे का कथाक्रम देखें:-यह गीत 1911 में लिखा गया। यह वही वर्ष था, जिस वर्ष जार्ज पंचम अपनी महारानी के साथ भारत आए और यहां पर उनके राज्याभिषेक का दरबार सजा। यह भारत के ब्रिटिश इतिहास की एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना थी। ठाकुर रवीन्द्रनाथ ने 27 दिसम्बर 1911 के
कांग्रेस की महासभा में पहली बार यह गीत प्रस्तुत किया। अधिवेशन का यह दूसरा दिन था जो सम्राट के अभिनंदन के लिए समर्पित था। इस दिन का केवल एक एजेंडा (कार्यक्रम) था सम्राट के सम्मान में प्रस्ताव पारित करना। उसी दिन रवीन्द्रनाथ ने यह बंगला गीत प्रस्तुत किया। उस दिन सम्राट के सम्मान
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21 Nov
#जय_जगदम्बा 🚩
#क्या वास्तव में मनुस्मृति जातिवादी है ?:-मनुस्मृति पर जातिवादी होने का आक्षेप लगता है, जैसे :-
१. मनु ने जन्म के आधार पर जातिप्रथा का निर्माण किया ?
२. मनु ने शूद्रों के लिए कठोर दंड का विधान किया और ऊँची जाति खासकर ब्राह्मणों के लिए विशेष प्रावधान रखे ? Image
#सत्य क्या है?
मनुस्मृति जन्म से जातिवाद को नहीं अपितु वर्ण आश्रम व्यवस्था की प्रतिपादक है।

मनुस्मृति में वर्णों में परिवर्तन का विधान है!
मनुस्मृति १०.६५: ब्राह्मण शूद्र बन सकता और शूद्र ब्राह्मण हो सकता है। इसी प्रकार क्षत्रिय और वैश्य भी अपने वर्ण बदल सकते हैं।
मनुस्मृति ९.३३५: शरीर और मन से शुद्ध- पवित्र रहने वाला, उत्कृष्ट लोगों के सानिध्य में रहने वाला, मधुरभाषी, अहंकार से रहित, अपने से उत्कृष्ट वर्ण वालों की सेवा करने वाला शूद्र भी उत्तम ब्रह्म जन्म और द्विज वर्ण को प्राप्त कर लेता है।
मनुस्मृति के अनेक श्लोक कहते हैं कि उच्च
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13 Oct
एक भीमटा बुद्ध का गुणगान किये जा रहा था मैंने भी अपने आदतानुसार उस भीमटे से बस यह कह दिया की बुद्ध और अंगुलीमाल वाला कहानी मुझे फर्जी लगती है.भला कोई व्यक्ति अंगुलियों की माला कैसे पहन सकता है,कुछ ही दिनों मे अंगुलिया सड़ने लगेगी और इंसान अंगुलियों की बदबू तथा बैक्टीरीया से बीमार
पड़ जायेगा.अतः मनुष्य की अंगुली काटकर अपने गले मे उसकी माला माला पहनना सम्भव नहीं है.फिर क्या था भीमटा भड़क गया.मुझे अनाप शनाप और जातिसूचक बातें भी बोलने लगा.आज मै उन तमाम भीमटो से कहता हूँ जो खुद तार्किक बनते है वे भी दस दिनों तक अपने गले मे मनुष्य की अंगुली की माला पहनकर दिखाए
फिर अंगुलीमाल वाली कथा मै सच मान सकता हूँ.भीमटो की एक आदत है ये खुद को बहुत तार्किक और ज्ञानी समझते है,पर इनका सारा तर्क और ज्ञान हिन्दू धर्मों पर ही निकलता है.जैसे ही बौद्धधर्म पर तर्क करो तो इनके तोते उड़ जाते है.
*जो भीमटे हिन्दुओं से पूछते है की फल और खीर खाने पीने से बच्चा
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