आखिर कौन हैं भारत देश के मूलनिवासी?

हम अतीत के आधार पर भविष्य के लिए वर्तमान में जीते हैं। इसीलिए यदि किसी का भविष्य बिगाड़ना हो तो यह काम उसके अतीत को बिगाड़ कर आसानी से किया जा सकता है। अतीत को सर्वथा मिटाना किसी प्रकार संभव नही, किंतु उसके स्वरुप को विकृत रूप में (1/22)
प्रस्तुत करके उसके प्रति विरक्ति या घृणा पैदा करना संभव है।

अंग्रेजो के भारत में आने का प्रयोजन इस देश में शासन करना और उनके द्वारा ईसाइयत का प्रचार प्रसार करना था। अपनी सत्ता को स्थायित्व प्रदान करने के लिए यहां के लोगों में फूट डालना आवश्यक समझा गया। इसके लिये उन्होंने (2/22)
यहां के कुछ लोगों के इस देश के मूलनिवासी होने और कुछ के विदेश से आकर यहां के मूल (आदि) निवासियों को पराजित कर इस देश पर अधिकार कर लेने के विचार को जन्म दिया।

फूट के इस बीजारोपण का ही है परिणाम है कि आज हमारे देश की छोटी से छोटी पाठशाला से लेकर विश्वविद्यालयों तक में (3/22)
यही पढ़ाया जा रहा है, कि इस देश के मूल निवासी कोल, द्रविण, भील संथाल आदि हैं। एक समय ईरान आदि देशों से आकर कुछ लोगों (आर्यो) ने इस देश पर आक्रमण किया। यहां के आदिवासियों में से कुछ को उन्होंने मार डाला, कुछ को बंदी बनाकर दास बना लिया, कुछ जान बचाकर जंगल और पहाड़ों में (4/22)
जा छुपे तथा कुछ दक्षिण की ओर भाग गए।

4 सितंबर 1977 को संसद में मनोनीत एंग्लो-इंडियन सांसद फ्रैंक एंथोनी ने मांग की थी...

"Sanskrit should be deleted from the 8th schedule of the constitution, because it is a foreign language brought to this country by foreign invaders (5/22)
the Aryans" (Indian Express, 5/9/1977)

सन 1978 के आरंभ में भारत ने अपना पहला उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़ा था और उसका नाम भारत के प्राचीन वैज्ञानिक आर्यभट्ट के नाम पर #आर्यभट्ट रखा गया था। इस अवसर पर 23 फरवरी 1978 को द्रमुक (द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम) के प्रतिनिधि लक्ष्मणन ने (6/22)
राज्यसभा में मांग की थी कि भारतीय उपग्रह का नाम #आर्यभट्ट नही रखा जाना चाहिए था, क्योंकि यह नाम विदेशी है।

कुछ वर्ष हुए, तमिलनाडु के सलेम नामक नगर में मर्यादा पुरुषोत्तम रामचंद्र के आर्य होने के कारण उनकी मूर्ति के गले में जूतों का हार पहनाकर बाजारों में जुलूस (7/22)
भी निकाला गया था।

चूंकि ऋषि क्रांतदर्शी होते हैं। सबसे पहले ऋषि दयानंद ने इस भ्रांत धारणा के विरुद्ध आवाज उठाई। उन्होंने घोषणा की...
"किसी ग्रंथ व इतिहास में नही लिखा कि आर्य ईरान से आये थे और यँहा के जंगलियों से लड़कर, उन पर विजय प्राप्त कर एवं उन्हें यँहा से खदेड़ कर (8/22)
इस देश के राजा हुए। पुनः विदेशियों का लेख कैसे माननीय हो सकता है?

बिल्कुल यही बात निष्पक्ष विद्वान म्यूर ने भी कही...
"I must, however, begin with candid admission that, so far as I know, none of the Sanskrit Books, not even the most ancient, contains any distinct (9/22)
reference or allusion to the foreign origin of the Aryans. There is no evidence or indication in the Rigveda of the words Dasa, Dasyu, Asura etc. having been used for non-aryans or original inhabitants of India."
Muir : Original Sanskrit Texts, Vol.।।

अथार्त : "यह (10/22)
निश्चित है कि किसी भी संस्कृत ग्रंथ में, चाहे वह कितना भी पुराना क्यों न हो, आर्यो के विदेशमूलक होने का उल्लेख नही मिलता। ऋग्वेद में जिन दास, दस्यु, एवं असुर जैसे शब्दों का उल्लेख हुआ है, वे अनार्यमूलक अथार्त आदिम जातियों के लिए प्रयुक्त हुए हों, इस प्रकार का कोई प्रमाण (11/22)
या संकेत कंही उपलब्ध नही हैं।"

विष्वविख्यात इतिहासविद एलफिंस्टन के कथन से भी ऋषि दयानंद के कथन की पुष्टि होती है। उन्होंने लिखा है
"Neither the code of Manu, nor in the Vedas, nor in any book which is older than the code of Manu, is there any allusion to the Aryans prior (12/22)
residence in any country outside India."
Elphinston : History of India, Vol.।

अथार्त : "न मनुस्मृति में, न वेदों में और न वेदों से प्राचीन किसी अन्य ग्रंथ में (भारत में आने से पूर्व) आर्यो के भारत के बाहर अन्य किसी देश में रहने का उल्लेख है।"

आर्य लोग बाहर से आये थे और (13/22)
उनसे पहले कोल, द्रविड़ आदि बसते थे, इसका प्रचार प्रसार करने के लिए बनारस और लाहौर को केंद्र बनाया गया। बनारस में ही टी एच ग्रिफिथ को बनारस कॉलेज का प्रिंसिपल बनाया गया और लाहौर ओरिएंटल कॉलेज के प्रिंसिपल पद पर ए सी वुलनर को नियुक्त किया गया। इन कॉलेजों से संस्कृत में (14/22)
एम ए करने वाले मेधावी छात्रों को उच्चतम छात्रवृत्ति देकर ऑक्सफोर्ड में नियत पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा दी जाती थी। अंग्रेजो ने यह भी अनुभव किया कि जब तक वैदिक धर्म की जड़ो को खोखला नही किया जायेगा तब तक वो अपने लक्ष्य में पूरी तरह सफल नही होंगे।

बोडेनपीठ के लार्ड मैकाले (15/22)
एवं मैक्समूलर इत्यादि के योजनाबद्ध प्रयास का यह परिणाम निकला कि धीरे-धीरे भारतीय विद्वान भी उनके रंग में रंगने लगे और पाश्चात्य विचारधारा के प्रचार-प्रसार में सहायक सिद्ध होने लगे। भारतीयों ने भी वही राग अलापना आरंभ कर दिया था जो अंग्रेज चाहते थे। लोकमान्य बालगंगाधर (16/22)
तिलक जैसे मनीषी और देशभक्त और भीमराव अंबेडकर भी इसी भ्रांत धारणा का शिकार हो गये थे। हालांकि बाद में लोकमान्य तिलक ने स्पष्ट कर दिया था कि उन्होंने कभी मूल वेद नही पढ़े, अपितु उन्होंने तो केवल साहिबो (पाश्चात्य विद्वानों) का किया अनुवाद ही पढ़ा है।

तिलक ने कहा था कि आर्य (17/22)
लोग उत्तरी ध्रुव से से भारत आये थे और सोमरस बनाने की कला में माहिर थे। जबकि उत्तरी ध्रुव में तो सोमलता होती ही नही, वह तो केवल हिमालय के एक भाग मुंज पर्वत पर होती है। ईरान के स्कूलों में भी खुमोनी के शासन से पहले तक पढ़ाया जाता रहा है कि आर्य लोग भारत से आकर ईरान में (18/22)
बस गये...
"चंद हज़ार साल पेशअज़ जमाना माजीरा बजुर्गी अजनिज़ाद आर्या अज़ कोहहाय कफ गुज़िश्त: बर सर जमीने कि इमरोज मस्कने मास्त कदम निहादंद। ब चूँ आबोहवाय ईं सर जमीरा मुआफ़िक तब'अ खुदयाफ्तन्द दरी जा मस्कने गुज़िदंद व आ रा बनाम खेश ईरान स्यादंद।"
जुगराफियां पंज कितअ बनाम (19/22)
तदरीस दरसाल पंजुम इब्तिदाई सफा 78, कालम 1, मतबअ दरसनहि तिहरान, सन हिजरी 1309, सीन अव्वल व चहारम आज तर्फ विज़ारत मआरिफ़ व शरशुद:

सारांश : कुछ हजार साल पहले आर्य लोग हिमालय से उतरकर आये और यँहा की जलवायु अनुकूल पाकर ईरान में बस गये।

राजनैतिक दृष्टि से स्वतंत्र होने के (20/22)
बाद भी पाश्चात्यों के मानसपुत्रों की आंखों पर उनका दिया चश्मा आज भी ज्यों का त्यों चढ़ा है। संस्कृत भाषा को सब भारतीय भाषाओं का स्रोत माना गया है। दक्षिण भारत, जँहा के लोगो को आर्यो के आने से पहले यँहा का मूलनिवासी बताया जाता है, की भाषाओं में में भी 70 से 90 प्रतिशत शब्द (21/22)
संस्कृत के हैं। करुणानिधि, भक्तवत्सलम, अनंतशयनम, सत्यमूर्ति, जयललिता, वैजयंती, श्रीदेवी, हेमा आदि नाम भी संस्कृत से लिये गये हैं। यदि संस्कृत उनके देश पर अधिकार करने वालो की भाषा थी तो फिर उस भाषा से इतना लगाव क्यों?
(22/22)

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25 Nov
भारत बहुत जल्द अपने सबसे महत्वाकांक्षी स्वदेशी सैन्य विमानन परियोजना शुरू करने के लिए तैयार है। इसके तहत भारत पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू या उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (AMCA)बनाएगा, जिसमें उन्नत स्टील्थ सुविधाओं के साथ-साथ #सुपरक्रूज क्षमताएं भी होंगी। सूत्रों ने बताया कि दोहरे (1/6)
इंजन वाले एएमसीए प्रोटोटाइप के फुल स्केल पर इंजीनियरिंग विकास के मामले को अंतिम रूप दे दिया गया है। इसे अगले साल की शुरुआत में रक्षा और वित्त मंत्रालयों के बीच परामर्श के बाद कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

अभी तक के अनुसार 25-टन एएमसीए (2/6)
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25 Nov
HAL ने मलेशिया के लिए प्रस्तावित तेजस MK-1A सौदे के नए विवरण का खुलासा किया।

मलेशियाई वायु सेना 10 सिंगल सीटर कॉम्बैट रेडी फाइटर जेट्स और 8 लीड-इन फाइटर ट्रेनिंग (LIFT) खरीदना चाह रही है। चूंकि मलेशिया इस कार्यक्रम के लिए धन के साथ संघर्ष कर रहा है, RMAF रॉयल मलेशियन एयर (1/7)
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25 Nov
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भादरा के पचारवाली गांव में नाबालिग बच्ची के साथ लव जिहाद की घटना घटित हुई व बच्ची के पीड़ित परिवार को जेहादियों द्वारा यह धमकी दी गई कि लड़की का धर्म परिवर्तन कर निकाह कर लिया गया है, साथ ही मुक़दम्मा वापस लेने का (1/4)
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बहुत समय पहले की बात है, एक राजा (1/12)
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उसे रास्ता ढूंढते-ढूंढते रात्रि हो गई और भारी वर्षा पड़ने लगी।
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स्थान बना रखा था। अपने खाने के लिए जानवरों का मांस उसने झोंपड़ी की छत पर लटका रखा था। बड़ी गंदी, छोटी, अंधेरी और दुर्गंधयुक्त वह झोंपड़ी थी। उस झोंपड़ी को देखकर पहले तो राजा ठिठका, लेकिन पीछे उसने सिर छिपाने का कोई और आश्रय न देखकर उस बहेलिये से अपनी झोंपड़ी में रात भर (3/12)
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25 Nov
L&T एयर डिफेंस फायर कंट्रोल राडार सिस्टम :-

2014 मे जब मोदी जी की सरकार बनने के बाद 2015 मे मोदी जी ने सभी #प्राइवेट_इंजीनियरिंग कम्पनियों के साथ एक #मीटिंग करके कहा था, कि आप सब #भारत के लिये रक्षा संबधी हथियारों के निर्माण के क्षेत्र मे भी काम करिये।

इसी कडी मे (1/6)
बता दें कि :- लार्सन एंड टुब्रो कम्पनी ने बहुत बडा काम किया था। और वो काम था भारत के लिये एयर डिफैंस फायर कंट्रोल सिस्टम को बनाने का।

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इस सिस्टम में #निष्क्रिय_ट्रेकिंग करने के लिये भी इलेक्ट्रो आप्टिकल सेसंर भी लगे हुये हैं। यह राडार सिस्टम गरम ना हो, इसलिये इसमे विशेष प्रकार की एयर कंडीशन के सिस्टम को भी लगाया गया है। (3/6)
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25 Nov
क्या आप जानते हैं ओवैसी की पार्टी को भारत में जीवनदान इंदिरा गांधी ने दिया था?

इंदिरा गांधी भारत की एकमात्र ऐसी प्रधानमंत्री थी जो ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम यानी ऑल इंडिया मजलिस ए मुत्ताहिदा मुस्लिमीन के दफ्तर में गई थी।

इतना ही नहीं उन्होंने उस वक्त ओवैसी के पिता और (1/7)
पार्टी प्रमुख सलाहुद्दीन ओवैसी के साथ खाना भी खाया था।

क्योंकि एआईएमआईएम हैदराबाद को भारत से अलग करने के की पक्षधर थी और यह पार्टी हैदराबाद को एक इस्लामिक रियासत का दर्जा बरकरार रखना चाहती थी इसलिए आजादी के बाद जब हैदराबाद का भारत में विलय हुआ तब आंध्र प्रदेश में AIMIM (2/7)
पार्टी को राजनीतिक स्वीकार्यता नहीं मिली और यह पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाती थी।

फिर आंध्र प्रदेश में जब फिल्म अभिनेता एनटी रामा राव का उदय हुआ और उन्होंने आंध्र प्रदेश में कांग्रेस को बिल्कुल खत्म कर दिया तब इंदिरा गांधी को लगा कि एनटी रामा राव के विजय रथ को रोकने के (3/7)
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