यह जानना आवश्यक है की रामायण की प्रसिद्ध नगर जैसे अयोध्या, चित्रकूट, किष्किंधा इन सभी का बाद में क्या हुआ? ऐसा इसलिए ताकि हम भी यहूदियों की तरह खुद पर हुए अत्याचारों को याद रखे।

1) अयोध्या - श्री राम की राजधानी, सन 1270 में इस पर मुस्लिम आक्रमणकारी बलबन ने आक्रमण किया। (1/8)
बलबन ने अयोध्या के सभी मंदिर नष्ट कर दिये, जिस नगरी में रामराज्य की नींव रखी गयी उसी नगरी के बीच चौराहे पर महिलाओ और बच्चों की आपत्तिजनक स्थिति में नीलामी हुई। इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा इन मंदिरों का पुनः निर्माण हुआ।

2) गंगा नदी का तट - यह वो तट था (2/8)
जिसके पास श्री राम ने ताड़का वध करके ऋषियों का उद्धार किया था। सन 1760 के समय जब अहमदशाह अब्दाली भारत मे घुस गया और भारत के मुसलमानो ने उसे गंगा नदी तक पहुँचाने में मदद की। तब मराठाओ को जलाने के लिये अब्दाली ने 1 हजार गायों का सिर काटकर इसी गंगा नदी में बहाया।
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3) चित्रकूट - वनवास के समय श्री राम चित्रकूट में रुके थे जिस पर 1298 में अलाउद्दीन खिलजी ने कब्जा कर लिया। 5 हजार पुरुष मार दिए गए, हजारों स्त्रियों को अलाउद्दीन खिलजी के हरम में भेजा गया और मंदिर नष्ट कर दिए गए। 1731 में राणोजी सिंधिया पुनः इस नगरी का उद्धार किया।
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4) नासिक - वह स्थान जहाँ लक्ष्मण जी ने शूर्पणखा की नाक काटी थी तथा जो श्री राम की कर्मभूमि थी। इस पर मुहम्मद बिन तुगलक ने हमला किया, तुलगक ने नासिक में स्थित प्रभु श्री राम द्वारा बनाये गए शिवालय में आग लगा दी और 12 दिनों तक भीषण संहार किया। नासिक वासियों से अपील की गयी (5/8)
कि वे इस्लाम अपना ले या मरने को तैयार रहे। बाद में छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र संभाजी महाराज ने इन मंदिरों को पुनः स्थापित किया।

5) किष्किंधा - वानरराज महाराज सुग्रीव का राज्य, जो आगे चलकर विजयनगर साम्राज्य कहलाया। 1565 में तालिकोटा के युद्ध मे विजयनगर साम्राज्य की (6/8)
हार हुई और मुसलमानो ने सारा राज्य जला डाला, आप आज भी गूगल में हम्पी सर्च करे इसका बहुत बड़ा अवशेष आज भी देखने को मिल जाएगा, जो बताता है कि मुसलमानो से पहले भारत कितना भव्य था। मगर मजहबी आग ने सबकुछ जलाकर राख कर दिया। बाद में मैसूर के यदुवंशियों ने इसका पुनः उद्धार किया।
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इस तरह हमारी रामायणकालीन नगरिया लूटी और दोबारा बनाई गई।
(8/8)

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26 Nov
क्या आप जानते हैं कि शैंपू की खोज भारत में हुई थी। पर वह शैंपू आजकल मिलने वाला #Chemical_Based_Shampoo या #आयुर्वेद के नाम पर धोखा देते हुए तथाकथित 99% Chemical Based हर्बल शैंपू नहीं थे। अगर आप किसी भी #हर्बल_शैंपू की बोतल उठा कर देखोगे, तो आप पाएंगे कि आंवला, रीठा, (1/13) Image
शिकाकाई के नाम पर बिकने वाले हर्बल शैंपू में केवल दिखावे के लिए #आंवला, #रीठा, #शिकाकाई आदि मिलाए जाते हैं।इनमें से किसी भी हर्बल शैंपू की एक किलो की बोतल में केवल और केवल कुछ ग्राम आंवला शिकाकाई और रीठा मिलाया जाता है। ताकि आप की आंखों में धूल झोंकी जा सके।

इन घटिया (2/13)
रसायनिक हर्बल शैंपू के स्थान पर

आप आसानी से घर में आयुर्वेदिक शैंपू बना सकते हैं। उसके लिए आपको चाहिए सिर्फ 100 ग्राम आंवला, 200 ग्राम रीठा, 300 ग्राम शिकाकाई। इनको अलग अलग करके पीस लेना है। ध्यान रहे आंवला, रीठा और शिकाकाई साबुत ही लेने हैं। अगर आप बाजार से इसे पिसे (3/13)
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26 Nov
इनसे मिलिये, ये उमा जी हैं..

इन्हें ज़माटो से स्टार डायमंड अवार्ड मिला है क्योंकि लास्ट सालों से न इन्होंने एक भी ऑर्डर केंसल किया न ही डिलीवरी लेट की। इनके पति 10 साल पहले गुजर गये थे। सुबह 5 बजे जगती हैं और अपने बेटे को 15 किलोमीटर दूर बाइक पर क्रिकेट कोचिंग में (1/4) Image
छोड़कर आती हैं। उसके बाद घर का सारा काम खत्म कर दोपहर 12 बजे से रात 11 बजे तक फ़ूड डिलीवर करती हैं। 18 से 25 डिलीवरी रोज करती हैं मतलब लगभग 200 किलोमीटर से ऊपर ये रोज बाइक चलाती हैं, महज 5 घंटे ही सो पाती हैं। हमें गर्व है ऐसी महिलाओं पर दिल से सैल्यूट करते हैं इन्हें, (2/4)
फेक फेमिनिज्म की सनसनी फैलाने की जगह ईमानदार बन कर कमाओ दुनिया इज्जत देती है।

हमारे समाज का गौरव ये हैं, न कि वो अपने मर्द और पिता को कोसकर, उनको गाली देने वाली फेक फेमिनिस्टि औरतें। यह देश ऐसी देवियों का ऋणी है कि इन्होंने हार नही मानी। अपनी संतानों के लिए संघर्ष (3/4)
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यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका की एक एजेंसी है नाम है अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशन्स एंड गाइनेकॉलजिस्ट्स (ACOG), जो अमेरिका में प्रेगनेंसी और बच्चे के जन्म की देखभाल के लिए दिशा-निर्देश निर्धारित करता है, उनकी स्टडी में यह बात (1/9) Image
सामने आयी कि हॉस्पिटल में प्राकृतिक रूप से जन्मे बच्चे को नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) या स्पेशल केयर नर्सरी में रखने का कोई उच्च जोखिम नहीं था उन बच्चों की तुलना में जो कंट्रोल ग्रुप में बिना प्राकृतिक रूप की बजाय सर्जरी से जन्मे थे। इस स्टडी को ऑब्स्टेट्रिक्स (2/9)
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इस रिसर्च में प्राकृतिक रूप से डिलीवरी कराने को लेकर भी कुछ विशेष स्थितियों का वर्णन है जो आप सभी से साझा कर रहा हूँ -

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इस जगत में छोटी से छोटी चीज का मूल्य है। इतना मूल्य है जिसका कोई हिसाब नहीं। क्योंकि अंतिम निर्णय में, वह जो सर्वश्रेष्ठ निष्कर्ष होगा जिंदगी का, उसमें छोटी और बड़ी चीज में फर्क नहीं रह जाएगा। उसमें छोटी चीज ने अपने फर्ज अदा किए हैं। एक इतनी छोटी सी घटना का
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नेपोलियन छह महीने का था और एक बिस्तर पर लेटा हुआ है। एक जंगली बिल्ली आ गई और उसकी छाती पर चढ़ गई। आप सोच सकते हैं कि एक जंगली बिल्ली का दुनिया के इतिहास के बनाने में कोई हाथ हो सकता है? या एक छोटे से बच्चे की छाती पर एक (2/9)
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क्या महाभारत के इसी प्रकार के हथियार थे?

यह प्राचीन शस्त्र है। इनकी बनावट देखकर ही पता चल जाता है, यह हाथ से चलने वाले नही, बल्कि मशीनी यंत्र है। पहला चित्र कम्बोडिया का है, दूसरा चित्र पार्थियन म्यूजियम की एक गदा का। पार्थियन साम्राज्य अर्थात पार्थ अर्जुन का साम्राज्य। (1/4) ImageImageImage
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इस गदा को आप देखें। इस गदा क्या (2/4)
युद्ध लड़ा जा सकता है? एक आदमी की हत्या तो इस गदा से संभव है (वह भी मुश्किल से) लेकिन महाभारत जैसा युद्ध, या सेनाओं का युद्ध ऐसी गदाओ से नही लड़ा जा सकता।

यह निश्चित रूप से महाभारतकाल की किसी मिसाइल का प्रतिरूप चित्र है। जैसी मिसाइल आदि हथियार थी, उसका लघु चित्र मूर्ति (3/4)
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26 Nov
आए जाने दिगंबर जैन साधू की दिनचर्या।

1⃣
दिगंबर जैन साधू नग्न रहते हैं क्योंकि वो अपरिग्रह महाव्रत का पालन करते हुए अपने पास एक कपडा भी नहीं रखते। वो नग्न रहकर ठण्ड, बरसात आदि मौसम को भी सहन करते हैं।

2⃣
दिगंबर जैन साधू अपने पास केवल पिच्छी (मोर पंख से बनती है जो चींटी (1/9) Image
आदि कीड़ों को अहिंसा पूर्वक हटाने का उपकरण है), कमंडल (शौच के लिए पानी रखने का उपकरण) और शास्त्र रखते हैं। इसके अलावा दिगंबर जैन साधू अपने पास कोई भी वस्तु अथवा पैसे आदि नहीं रखते हैं।

3⃣
दिगंबर जैन साधू पैरों में चप्पल जूते आदि कुछ भी नहीं पहनते चाहे काँटे ही क्यों न (2/9)
लगे, चाहे पैरों में चल चल कर छाले ही क्यों न हो जाए वो धुप में तपती सड़कों पर नंगे पाँव ही चलते है और जीवन भर नंगे पाँव ही चलते हैं।

4⃣
दिगम्बर जैन साधू अपने सर और दाढ़ी के बाल हर २ से ४ महीनों में स्वयं के हाथों से पूरे उखाड़ देते हैं क्योंकि वो कैची आदि नहीं रख सकते। (3/9)
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