🏹🚩सनातन धर्म संस्कृति🚩🏹


🚩शक्तिपीठ तीर्थ यात्रा🚩

🛕 कामरूप कामाख्या देवी🛕
🛕🛕🛕शक्तिपीठ🛕🛕🛕

🛕कामरूप कामाख्या पीठ भारत का प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जो असम राज्य के गुवाहाटी में स्थित है। कामाख्या देवी का मंदिर गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से लगभग 10 किलोमीटर
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दूर नीलांचल पर्वत पर स्थित है। कामाख्या देवी का मन्दिर पहाड़ी पर है, अनुमानत: एक मील ऊँची इस पहाड़ी को नील पर्वत के नाम से भी जानते हैं। कामरूप का प्राचीन नाम धर्मराज्य था।

नीलांचल पर्वतमालाओं पर स्थित माँ भगवती कामाख्या का सिद्ध शक्तिपीठ सती के
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इक्यावन शक्तिपीठों में सर्वोच्च स्थान रखता है। शक्तिपीठ महात्म्य के अनुसार माता सती के अग्निकुंड में कूद कर प्राण त्यागने के बाद भगवान शिव ने विनाशकारी तांडव नृत्य धारण किया था।उन्होंने माता सती के अधजले शरीर को उठाकर धरती को नष्ट करने की चेतावनी दी थी।
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तब पालनहार भगवान विष्णु ने भगवान शिव के संताप को कम करने के लिए माता सती के शरीर के 51 टुकड़े कर दिए थे। जो पृथ्वी के अलग-अलग भागों में जाकर गिरे। तब माता सती का महामुद्रा (योनि) भाग कामरूप क्षेत्र में गिरा था..!!

✍️ यहाँ पर मंदिर में चट्टान के बीच बनी आकृति
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देवी की योनि भाग को दर्शाता है। जिसके पास में एक झरना बहता है। योनि भाग से जल की धार हल्की बहती रहती है।

यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की मानें तो इस जल का पान करने से हर प्रकार के रोग एवं कष्टो से मुक्ति मिलती है। कामरूप पीठ की शक्ति देवी कामाख्या और भैरव उमानन्द कहलाते हैं।
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इस शक्तिपीठ में देवी माँ 64 योगनियों और दस महाविद्याओं के साथ विराजित है। भुवनेश्वरी, बगला, छिन्न मस्तिका, काली, तारा, मातंगी, कमला, सरस्वती, धूमावती और भैरवी एक ही स्थान पर विराजमान हैं।
यूँ तो सभी शक्तिपीठों का अपना महत्व है, पर अन्य सभी में कामाख्या शक्तिपीठ को
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सर्वोत्तम माना जाता है। कलिका पुराण के अनुसार इसी स्थान पर कामदेव शिव के त्रिनेत्र से भस्म होने के बाद, अपने पूर्व रूप की प्राप्ति का वरदान पाया था..!!

✍️ ● मनाया जाता है अम्बूवाची महोत्सव

अम्बुवाची शब्द अम्बु और वाची/बाचि दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है,
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जिसमें अम्बु का अर्थ है - पानी और बाचि का अर्थ है - उत्फुलन। यह शब्द स्त्रियों की शक्ति और उनकी जन्म क्षमता को दर्शाता है। प्रतिवर्ष जून के महीने में यह मेला उस वक्त लगता है, जब मां कामाख्या ऋतुमती रहती हैं। अम्बुबाचि योग पर्व के दौरान माँ भगवती के गर्भ गृह के
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कपाट बंद हो जाते हैं और उनके दर्शन भी निषेध हो जाते हैं..!!

तीन दिनों के उपरान्त माँ भगवती की रजस्वला समाप्ति पर उनकी विशेष पूजा एवं साधना की जाती है।

चौथे दिन ब्रह्म मुहूर्त में देवी को स्नान करवाकर श्रृंगार के उपरान्त ही मंदिर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोला जाता है।
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इसके उपरांत कामरूप देवी का यह रक्त-वस्त्र भक्तों में माता के भेंट-स्वरूप बांट दिया जाता है। मान्यता ये भी है कि देवी के रक्त-सिक्त वस्त्र को धारण करके उपासना करने से भक्त की समस्त मनोकामनाएँ अवश्य पूर्ण होती हैं।
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🛕 ● कामरूप मन्दिर का इतिहास

कामरूप पर अनेक हिंदू राजाओं ने राज्य किया। लेकिन युग परिवर्तन के कुछ काल तक यह महामुद्रापीठ लुप्त-सा रहा, बाद में कामाख्या मंदिर का निर्माण तथा जीर्णोद्धार कराने वालों में कामदेव, नरकासुर, विश्वसिंह, नरनारायण, चिल्लाराय, अहोम राजा
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आदि के नामोल्लेख मिलते हैं। ये सभी लोग कामरूप के राजा थे। एक आख्यान के अनुसार १६वीं शताब्दी के प्रथमांश में कामरूप के राजाओं में युद्ध होते रहे, जिसमें राजा विश्वसिंह विजयी होकर संपूर्ण कामरूप के एकछत्र राजा हुए। एक बार संग्राम में बिछुड़ चुके साथियों की खोज में
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वह नीलांचल पर्वत पहुँचे और थककर एक वटवृक्ष तले बैठ गए। सहसा एक वृद्धा ने कहा कि हे राजन! जहां आप बैठे हैं, वह टीला जाग्रत स्थान है। देवी का साक्षात निवास है।

यहां जो भी मनोकामना मांगों पूर्ण होती है। (कहते हैं कि वो वृद्धा कोई और नहीं स्वयं आदिशक्ति भगवती थीं। )
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✍️ वृद्धा की बात सुनकर राजा विश्वसिंह ने मनौती मानी कि यदि उनके बिछुड़े साथी तथा बंधुगण मिल जाएँगे, तो वह यहाँ एक स्वर्ण-मंदिर बनवाएँगे। संयोगवश उनकी मनौती पूर्ण हुई, तब उन्होंने मंदिर निर्माण प्रारंभ किया..!!
इसके बाद खुदाई के दौरान यहाँ कामदेव के मूल कामाख्या
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पीठ का निचला भाग बाहर निकल आया। राजा ने उसी के ऊपर मंदिर बनवाया तथा स्वर्ण मंदिर के स्थान पर प्रत्येक ईंट के भीतर एक रत्ती सोना रखवाया। लेकिन उनकी मृत्यु के पश्चात् काला पहाड़ (हिन्दू सेनापति जिसने इस्लाम कबूल कर लिया था।) ने मंदिर ध्वस्त कर दिया,
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तब राजा विश्वसिंह के पुत्र नर नारायण (मल्लदेव) ने अपने अनुज शुक्लध्वज (चिल्लाराय) द्वारा शक संवत 1480 (1565 ईस्वी) में वर्तमान मंदिर का पुनर्निमाण कराया।

मंदिर में रखे शिलालेख के अनुसार इस भव्य मंदिर के पुनर्निर्माण में कोच वंश के राजा चिलाराय ने 1565 में खजाने से
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अच्छी खासी रकम दी थी। लेकिन कुछ समय बाद आक्रमणकारियों द्वारा इस मंदिर को क्षतिग्रस्त करने के बाद 1665 में कूच बिहार के राजा नर-नारायण ने दोबारा इसका निर्माण करवाया है।

यह मन्दिर भारत के ईशान कोण तथा योगिनी तंत्र में इसकी सीमा लगी है।
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पश्चिम में करतोया से दिक्करवासिनी तक, उत्तर में कंजगिरि, पूर्व में तीर्थश्रेष्ठ दिक्षु नदी, दक्षिण में ब्रह्मपुत्र और लाक्षानदी के संगम स्थल तक, त्रिकोणाकार कामरूप की सीमा-लंबाई 100 योजना, विस्तार 30 योजन है।

नीलांचल पर्वत के दक्षिण में वर्तमान पाण्डु गौहाटी
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मार्ग पर जो पहाड़ियाँ हैं, उन्हें नरकासुर पर्वत कहते हैं। नरकासुर कामरूप के प्राग्जोतिषपुर का राजा था, जिसने त्रेता से द्वापर तक राज्य किया तथा वह कामाख्या माता का प्रमुख भक्त था..!!

✍️ प्राचीन काल में चारों दिशाओं में चार मार्ग थे- व्याघ्र द्वार, हनुमंत द्वार,
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स्वर्गद्वार, सिंहद्वार। शनैः शनैः उत्तरी तथा पश्चिमी मार्ग लुप्त हो गए। अब चारों ओर पहाड़ी सीढ़ियाँ बनी हैं, जो काफ़ी दुर्गम हैं।

कुछ ही भक्त इन सीढ़ियों से जाकर देवी पीठ के दर्शन करते हैं। अधिसंख्य यात्री नीचे से टैक्सियों द्वारा जाते हैं।
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नीचे मुख्य मार्ग से पहाड़ी मार्ग कामाख्या पीठ बना है, जिसे नरकासुर पथ कहते हैं।

✍️ ● नरकासुर पथ बनने की कथा

एक आख्यान के अनुसार, नरकासुर नाम का राक्षस देवी कामाख्या की सुंदरता पर मोहित होकर उनसे प्रेम करने लगा और फिर वह मां कामाख्या देवी से विवाह करना चाहता था।
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किन्तु देवी कामाख्या ने छुटकारा पाने के लिए नरकासुर के समक्ष एक शर्त रख दी। देवी ने नरकासुर से कहा कि यदि वह एक ही रात में नीलांचल पर्वत से मंदिर तक सीढि़यां बना पाएगा तो वह उससे विवाह कर लेगी।

और अगर सुबह मुर्गा के बांग देने से पहले ऐसा नहीं हुआ तो नरकासुर को
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अपने इस हठ का त्याग करना होगा। नरकासुर ने देवी की शर्त स्वीकार कर ली और पथ के निर्माण में लग गया। नरकासुर तीव्रगति से पथ निर्माण का कार्य कर रहा था। यह देख देवी को लगा कि अगर नरकासुर इस कार्य को पूरा कर लेगा तो अनर्थ हो जाएगा। तब देवी ने एक चाल चली,
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उन्होंने एक कौवे को मुर्गा बनाकर उसे प्रातःकाल से पहले ही आवाज देने को कहा। जब नरकासुर को लगा कि वह देवी से लगाई हुई शर्त हार गया तो दुःखी हुआ, किन्तु जब उसे यह पता चला कि उसके साथ छल किया गया है तो वह उस मुर्गे को मारने दौड़ा और अंततः उसकी बलि दे दी।
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जिस स्थान पर मुर्गे की बलि दी गई उसे कुकुराकता नाम से जाना जाता है। तत्पश्चात मां भगवती की आज्ञा से भगवान विष्णु ने असुर का वध कर दिया। विद्वानों का मानना है कि नरकासुर के नीच कार्यों के बाद एवं मुनि के अभिशाप से देवी अप्रकट हो गयी थीं और कामदेव द्वारा
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प्रतिष्ठित कामाख्या मंदिर ध्वंसप्राय हो गया था।जिसे बाद में राजा विश्वसिंह द्वारा खोजा गया।

✍️ ● कामाख्या पीठ के त्योहार*

वैसे तो यहाँ साल के 365 दिन भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन दुर्गा पूजा, पोहान बिया, दुर्गादेऊल, वसंती पूजा, मदानदेऊल, अम्बुवाची और
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मनसा पूजा पर इस मंदिर में दर्शन-पूजन करने का अलग ही महत्व है। यही कारण है कि इन प्रमुख दिनों में लाखों की संख्या में देश के कोने-कोने भक्त यहां पहुचते हैं।

कामाख्या देवी मंदिर के परिसर में दस महाविद्याओं के मंदिर भी हैं। माता के उग्र रूप में काली, छिन्नमस्ता,
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धूमावती और बगलामुखी हैं। सौम्य में त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, मातंगी और महालक्ष्मी (कमला) देवी हैं। तारा तथा भैरवी को उग्र तथा सौम्य दोनों माना गया हैं। ऐसी मान्यता है कि कामाख्या देवी के दर्शन-पूजन का फल दस महाविद्याओं के दर्शन-पूजन किये बिना अधूरा है।
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यहाँ मान्यता है कि अगर किसी व्यक्ति ने कामरूप क्षेत्र में जन्म लिया है तो अवश्य ही पूर्व जन्म में वो कोई पुण्यात्मा रहा हो। साथ ही विद्वानों का मानना है कि कामरूप क्षेत्र से बाहर के भक्तगण यदि जीवन में तीन बार माता कामाख्या एवं दस महाविद्याओं का दर्शन कर लेते हैं
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तो उन्हें सांसारिक भव बंधन से मुक्ति मिल जाती है..!!

👉 रेलमार्ग पर कामाख्या टाउन में कामाख्या रेलवे स्टेशन है। लेकिन मन्दिर पहुंचने के लिए गुवाहाटी रेलवे स्टेशन पर उतरने में ही सहूलियत है क्यों कि गुवाहाटी रेलवे स्टेशन बड़े शहरों से प्रमुख रूप से जुड़ा हुआ है।
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रेलवे स्टेशन से मन्दिर तक कि लगभग 10 किमी की दूरी तय करने के लिए ऑटो या टैक्सी सेवा उपलब्ध रहती है। वहीं सड़क मार्ग से कामख्या शक्तिपीठ तक पहुंचने के लिए असम टूरजिम की बसें भी नियमित अंतराल पर उपलब्ध रहती है। इसके अलावा नीलांचल पर्वत तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु टैक्सी
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एवं निज़ी वाहन का भी उपयोग करते हैं..!!

कामाख्ये कामसम्पन्ने कामेश्वरि हरप्रिये ।
कामनां देहि मे नित्यं कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥

✍️ भगवती आदिशक्ति में 51 शक्तिपीठों की यात्रा का उल्लेख है। हालांकि देवी भागवत में जहां 108 और देवी गीता में 72 शक्तिपीठों का ज़िक्र मिलता है
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वहीं तन्त्रचूडामणि में आप 52 शक्तिपीठ के बारे में पढ़ेंगे। लेकिन देवी पुराण में 51 शक्तिपीठों की ही चर्चा की गई है। देवी पुराण में वर्णित इन 51 शक्तिपीठों में 42 शक्ति पीठ भारत में हैं। 1 शक्तिपीठ पाकिस्तान में और 4 बांग्लादेश में।
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शेष 4 पीठों में 1 श्रीलंका में, 1 तिब्बत में तथा 2 नेपाल में स्थित हैं। ये वो जगह हैं जहां माता के विभिन्न अंगों एवं वस्त्र, आभूषणों का निपात हुआ था। कालांतर में यही जगह शक्तिपीठ के रूप में जाने गए। हम उन देवी को नमस्कार करते हैं जो समस्त प्राणियों का कल्यान करती हैं।
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सम्मान और आदर से सज्जनों के हृदय में निवास करती हैं एवं दुर्जनों का संहार करती हैं। उस देवी से प्रार्थना हैं कि वह हमारे सारे कष्टों को हरे एवं हमें सुख समृद्धि का वरदान दें। सनातन धर्मियों का कल्याण करें एवं विधर्मियों का नाश करें।
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✍️ लेख के इस श्रृंखला में हम भारत में एवं उसके आसपास के शक्तिपीठों से संबंधित सभी उचित जानकारियां एकत्रित कर उसे आप सभी तक पहुंचाने की यथासंभव कोशिश कर रहे हैं।

माता के भक्तों का ऐसा विश्वास आदिशक्ति मां के 51 शक्तिपीठों के नित नाम लेने से ही माता की भक्ति का
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वरदान प्राप्त होता है और होती है उनके भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती हैं।

जय महिषविमर्दिनि शूलकरे, जय लोकसमस्तकपापहरे।

जय देवि पितामहविष्णुनते, जय भास्करशक्रशिरोवनते।।

🚩 शक्तिपीठ तीर्थ यात्रा🚩

🚩 ।। जय माता दी ।।🚩

🔚🏹🇮🇳⛳🔱🌞⚜️🐚🕉️🙏🏻

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More from @Yogshukla

29 Nov
👹थूकना एक वैश्विक महामारी बन गया है🕋👹

लिफ्ट से बाहर निकल रहे पुरुष पर मुस्लिम महिला ने चुपके से थूक दिया।

हो सकता है कि उन्हें मदरसों और मस्जिदों में ऐसा करने का निर्देश दिया जा रहा हो।

फूलमाला बना रहा व्यक्ति फूलों पर थूक लगा रहा है,,,एक और नान पर थूक रहा है, 1/6

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अब तो मुस्लिम से सामान लेना मुश्किल हो रहा है क्यों की मुस्लिम नेता इसकी भर्त्सना भी नहीं करते।।
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28 Nov
🚩काशी-मथुरा हिंदुओं के हैं, मुस्लिम उन्हें दोनों जगह सौंप दे,
केके मुहम्मद,
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण..!

🚩भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक केके मुहम्मद ने अयोध्या राम मंदिर को लेकर आए फैसले के बाद एक इंटरव्यू में कहा कि डाकुओं को समझाना आसान है,
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लेकिन कम्युनिस्टों को नहीं। इस दौरान उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि चंबल घाटी स्थित बटेश्वर मुख्य मंदिर समेत अन्य मंदिरों का संरक्षण डाकू निर्भय गुर्जर के सहयोग से हुआ था। निर्भय गुर्जर के मारे जाने के बाद मंदिर पर फिर से खतरा मंडराने लगा था।
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इसके दोबारा संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन प्रमुख केएस सुदर्शन आगे आए थे।

उन्होंने बताया कि जब वो चंबल गए तो वहाँ पर डाकुओं का बोलबाला था। उन्होंने निर्भय सिंह गुर्जर नाम के डाकू से भारतीय धरोहरों की सुरक्षा करने और मंदिर बनाने की बात की।
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Read 18 tweets
28 Nov
🚩🚩हिन्दू राष्ट्र की ओर हिन्दू🚩
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वाराणसी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से एक निमंत्रण पत्र को तैयार करवाने की कवायद में इन दिनों उत्तर प्रदेश की सरकार जुटी हुई है

ये निमंत्रण पत्र देशभर के संतों को भेजा जाएगा और उनको एक जगह पर बुलाया जाएगा
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दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण पर देश भर के संतों को निमंत्रण देने की योजना बनाई जा रही है. यदि ऐसा होता है तो काशी में आने के लिए 25 हजार संतों को निमंत्रण पत्र भेजा जाएगा.
इस दौरान संत महात्माओं को काशी में हुये
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बदलाव से रू-ब-रू करवाया जाएगा.
संतों को ये बताया जाएगा कि कैसे संकरी गलियों से निकालकर बाबा विश्वनाथ का भव्य और दिव्य धाम बनाया गया है. साथ ही इसको बनाने के दौरान आई चुनौतियों और निर्माण को लेकर शहर में किए गए बदलावों की जानकारी भी दी जाएगी.
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28 Nov
यही रिजल्ट पूरे देश में चाहिए 🚩🙏

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#TripuraMunicipal
Results (193/224)

BJP : 190
LEFT : 1
TMC : 1
TIPRA : 1
INC : 0 (सूपड़ा साफ)

कुछ भी हो जनता मोदीजी के साथ है 🙏🏻👍🏻🌹

#TripuraMunicipalPoll
त्रिपुरा रिजल्ट अपडेट..🚩🚩🙏👇👇👇 Image
ऐतिहासिक जीत🏆
Biggest Victory 🙏🙏🚩🚩

Final trends- BJP swept Tripura winning almost 99% Seats

#TripuraMunicipalResults

Total wards - (334/334)

BJP- 329
LF- 03
TMC- 01
TIPRA- 01
INC- 00

#Agartala Municipal corporation-(51/51)

BJP- 51
Oth- 00
Read 5 tweets
28 Nov
🚩🇮🇳🎊💕🎊🇮🇳🚩🇮🇳🎊💕🎊🇮🇳🚩🇮🇳🎊💕🎊🇮🇳🚩🇮🇳

🧐👉भक्त और कमबख्त👹👹

😊👉चौकीदार-चोर होता..?
तो -गुजराती जनता भी, इतनी -बेवकुफ़ नहीं थी..,
कि :-4बार CM बनाये रखती..?🤔👇

😊👉चौकीदार को चोर कहने वालो ने :- अभी तक बताया नहीं कि :- इस चौकीदार ने चुराया क्या है?🤔👇
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😊👉ये लड़ाई..,बीजेपी और कांग्रेस की नहीं रही..,
ये लड़ाई अब भक्तो और कम्बख्तों के बीच है..!!🤔👇

😊👉ये पहला चुनाव है..,
जिसमें अब तक कांग्रेसी जामा मस्जिद के शाही इमाम का सजदा करने नहीं गए..,
और न ही,
इमाम ने कोई-फतवा जारी किया..?🤔🧐
मोदी है, तो मुमकिन है।💪👊👇
👇👇3⃣
😊👉मोदी जी के 4 भाई, 5 चाचा, ओर 18 पारिवारिक बच्चे..,🤔👉👉सभी मेहनत करके खाते है..l💪कोई नेता नहीं,
किसी को टिकिट नहीं !!
🧐 बताओ मोदी भक्ति क्यों न करें ??💪

😊👉मोदी जी अगर 2029 तक, बने रहे..? 
तो
भारतीय सेना विश्व की सबसे शक्तिशाली सेना होगी 💪👊

जनरल बिपिन रावत🚩
👇👇4⃣
Read 9 tweets
28 Nov
🌞🌷 परिवार में सुख- शांति के लिए उपाय
👨‍👨‍👧‍👦 परिवार के सदस्यों में वाद-विवाद होता रहता है, लेकिन जब ये रोज होने लगे तो घर के वातावरण में अशांति फैल जाती है।

कभी-कभी ये विवाद कोई बड़ी घटना का रूप भी ले लेते है। इस समस्या से निपटने के लिए नीचे लिखा उपाय करें-
👇👇2⃣
🌷 उपाय
*प्रतिदिन सुबह सूर्योदय के समय घर के उस मटके या बर्तन में से एक लोटा जल लें जिसमें से घर के सभी सदस्य पानी पीते हों और उस जल को अपने घर के प्रत्येक कमरे में, घर की छत पर तथा हर स्थान पर छिड़कें।
👇👇3⃣
🌷 उपाय
प्रतिदिन सुबह सूर्योदय के समय घर के उस मटके या बर्तन में से एक लोटा जल लें जिसमें से घर के सभी सदस्य पानी पीते हों और उस जल को अपने घर के प्रत्येक कमरे में, घर की छत पर तथा हर स्थान पर छिड़कें।
👇👇3⃣
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