इसके बावजूद कि न्यायपालिका आकण्ठ भ्रष्टाचार के गहरे दलदल में धँसी हुई है, न्याय की संभावना नगण्य ही है, थाने/पुलिस की तरफ मुड़ना मतलब आफत मोल लेना है, फिर भी किसी भी विवाद की स्थिति में लोग थाने कचहरी की तरफ ही रुख़ करते हैं। न्याय और सुरक्षा की आस उन्हें यहीं से है। (1/13)
लोगों को विश्वास है कि यदि थानेदार सहाब, जज साहब सही निकल गए तो उन्हें उनके कष्ट से मुक्ति अवश्य मिल जायेगी।

काँगी राजवंश में यूँ तो तमाम व्यवस्थाएँ ही भ्रष्टता की पराकाष्ठा को प्राप्त हुईं, फिर भी अपने कतिपय फैसलों से सर्वोच्च न्यायालय अपनी साख को धूल धूसरित होने से (2/13)
बचाये रखने में लगभग सफल ही रही। न्यायसर्वोच्च जाति धर्म देखकर फैसले दिया करेंगे, दलीय एजेंडे पर चला करेंगे, इसका विश्वास न के बराबर लोगों में था।

लेकिन कार्यपालिका में प्रधान सेवक रूप में एक घनघोर चरणदास मौनमोहन कठपुतली से लेकर पूरे न्यायतंत्र की बड़ी कुर्सियों पर उक्त (3/13)
राजवंश ने जो प्यादे बैठाये ताकि उनकी सत्ताच्युतता की स्थिति में भी तन्त्र उनके हाथ ही रहे, वही आज प्रकट और उद्दात्त रूप में हमें दिख रहा है जो अपने मालिकों पर आए संकट को देखकर मीलार्डगण समवेत लोकतंत्र के समाप्ति और तानाशाही के आप्तता की उद्घोषणा प्रेस कॉन्फ्रेंस करते कर (4/13)
रहे हैं।

देश के लिए इससे बड़े दुर्भाग्य की बात और क्या होगी कि आज जैसे ही कोई केस किसी बेंच को जाता है या किसी बेंच से कोई फैसला आता है, लोग न्यायपतियों के उपनाम पूछते हैं। हर फैसले के साथ लोगों का या विश्वास दृढ़ से दृढ़तर होता जा रहा है कि न्यायतन्त्र हिन्दू विरोधी (5/13)
था है और रहेगा ही।

कुछ महीनों के लिए प्रवक्ता पद से हटा कर अपने वरिष्ठ मन्त्री जी अभिसेक्स मनु सिंघवी के जज मेकिंग फॉर्मेट को यह राजवंश भूल सकती है लेकिन आमजन नहीं भूल सकता कि उक्त राजवंश की कार्यशैली क्या थी।

क्योंकि एवॉर्ड वापसी अभियान वाली जली और चुकी हुई हाँडी, (6/13)
फिर से उसी रूप में दुबारा तो ये सेकुलरी गैंग चूल्हे पर चढ़ा नहीं सकते, तो उसी माल को अब दूसरे बर्तन में (जजों के द्वारा) डाल गर्म होने चढ़ा दिया है। मोदी काम नहीं करने दे रहे, असहिष्णुता की सुनामी आ गयी है, सेकुलरिता मिटने वाली है, लोकतंत्र खतरे में आ चुका है, दलितों का (7/13)
उत्पीड़न चरम पर है, जैसे चिल्लारोहट बस अब कान न फाड़ दें तो कहिएगा।

बंधुओं, अगला सवा साल घनघोर विध्वंस काल होगा, साफ साफ दिख रहा यह। जातीय विद्वेष की आग में देश को झोंकने की तैयारी पूरी हो चुकी है। वामी मीडिया, वे तमाम शक्तियाँ जिनके लिए भ्रष्टाचार ही आचार तथा (8/13)
सुव्यवस्थित कार्यशैली थी, भारत की बर्बादी के जरिये अपने व्यक्तिगत घर की आबादी ही जिनका धर्म था, कुछ भी कर गुजरने को वे तैयार हो चुके हैं।

उन्हें पता है कि यदि यह अगला टर्म मोदी निकाल ले गए तो उनके हाथ से छींका इतनी दूर हो जाएगा, जो कि तबतक इनके हाथ नहीं आएगा जबतक मोदी (9/13)
बुरी तरह फेल और फ्लॉप नहीं हो जाते.. और यह होने में लम्बा समय लगेगा क्योंकि तब तक देश को उस पेड़ के मीठे फल मिलने लगेंगे जो कि पत्थर और बन्जर जमीन पर मोदी ने चारों ओर से पत्थर खाते हुए लगाए थे।

और एक बार जब आमजन को उस फल (सुव्यवस्था) की आदत पड़ जाएगी तो वे अपने नेता/नायक (10/13)
रूप में वैसा व्यक्तित्व चाहेंगे जो मोदी से दुगुना तिगुना नहीं भी नहीं भी तो डेढ़ गुणा प्रभावशाली,चमत्कारी और क्षमतावान तो जरूर ही हो।

त्यागमयी मैया की समस्या यह है कि कितनी भी पीआर लगा, वह अपने लाल को प्रधानसेवक के पासंग बराबर भी खड़ा नहीं कर सकती, दंगे फसाद अव्यवस्था (11/13)
चाहे देशभर में लाख फैला ले। अपने जीते जी यदि अपने लाल को वह राजगद्दी पर सेट नहीं कर पायीं तो उनके बाद उनके इस पिलपिले लाल और राजवंश का क्या होगा, वे अच्छी तरह जानती हैं। इसलिए करो या मरो मोड में आ चुकी हैं।

अब इन कुचक्रों से हम कैसे बचेंगे, हमें गम्भीरता से सोचना होगा। (12/13)
हमारे लिए भी यही करो या मरो वाली स्थिति है। आज न सोचा और सम्हला तो केवल दुर्गति भोगना अपने हाथ में रहेगा।

#साभार
(13/13)

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16 Jan
नरेंद्र मोदी कौन है ? #न्यूयार्क_टाइम्स का मुख्य सम्पादक जोसफ होप ने इसपर एक सनसनीखेज टिप्पणी की है! इसका पूरा विवरण।

जोसफ होप मोदीजी पर टिप्पणी करते हुए कहता है कि इस आदमी का उत्थान, सारे संसार के लिए, खतरा है !! इसने केवल #भारत को एक महान् देश बनाने की इच्छा को प्रकट (1/14)
किया है। उसका एकमात्र उद्देश्य है भारत को सबसे शक्तिशाली बनाना है। यदि इस आदमी को न रोक गया तो भविष्य में, एक दिन #भारत संसार में बहुत शक्तिशाली हो जाएगा और इससे #अमेरिका को आश्चर्य होगा। वह एक विशेष रणनीति की अनुसार चलता है, और कोई नहीं जानता कि आगे वह क्या करने वाला है? (2/14)
उसके मुस्कराते हुए चेहरे के पीछे एक खतरनाक देशभक्त छिपा हुआ है !! वह, दुनिया के सभी देशों का उपयोग भारत के हितों के लिए करता है !! पाकिस्तान और अफगानिस्तान के साथ अमेरिका के सम्बंधों को, बिगाड़कर, और उसके दुश्मन देशों जैसे वियतनाम के साथ गठजोड़ करके, मोदी इन तीनों देशों (3/14)
Read 14 tweets
16 Jan
#मैरिटल_रेप..!!

विशुद्ध #नारीवाद वाली बौद्धिक बकवास है और कुछ नही। अब ये लिबरल्स /कम्युनिस्ट / नारीवादी #विवाह के औचित्य पर ही प्रश्न चिन्ह लगाने को आमादा है।

हमारे देश मे लगता है कि #मिलार्ड साहिब लोग दिन बैठकर मक्खियां मारते है। अरे निकम्मो करोडो केस पेंडिंग पडे है देश (1/15)
देश में। उनको निपटा लो बे।

क्यों लोगो के बेडरूम मे जबरदस्ती घुस जाने को आमादा हो बे? बेकार की बहस मुबाहिसो मे क्यों उलझे हो? क्या तुमने कोई सर्वे करवाया है देश मे? क्या महिलाओ से उनकी मर्जी पूछी है?

All India Democretic Women's Association की Locus standi क्या है? कौन (2/15)
से चुनाव होते है? कौन कौन महिला वोट करती है? चार पाँच वामपंथी चुडैलो ने बैठकर गाल बजाई कर ली और नाम रख लिया All India Democretic Woman's Association बस इतनी सी हैसियत है इनकी।

ये कथित संगठन घोषित रूप से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया का महिला विंग है। जो 1981 मे (3/15)
Read 15 tweets
16 Jan
जिन्ना, अबुल कलाम आजाद, सर सैय्यद अहमद खां को बड़े ध्यान से पढ़ता हूँ और तब मुझे घूम रहे असली शत्रु दिखते हैं...

जब ओवैसी को सुनता हूँ तो मुझे भविष्य में उससे या उसकी पीढ़ी से कोई डर नहीं लगता, उट पटाँग बोल रहे मौलानाओं से मुझे भारत के भविष्य को लेकर डर नहीं लगता..
(1/5)
लेकिन जब मैं आरफा खानम शेरवानी के साथ आरिफ मोहम्मद खान का इंटरव्यू सुनता हूँ तो मुझे उनसे डर लगता है,

उनका एक वाक्य है "आखिर मुसलमान जहां ज्यादा संख्या में थे वहां क्यों हार गए और जहाँ कम थे वहाँ क्यों जीत गए..?

बस यही सोच और यही वाक्य डराते हैं, शायद और हिंदुओं ने (2/5)
शत्रु की बुराई सुनकर तालियाँ बजायी पर इस बात ने मुझे गंभीर कर दिया,

मुझे भय शत्रु से नहीं लगता बल्कि मुझे, समाज को दिखाकर शत्रु की बुराई करने वाले से अधिक डर लगता है..

इंडिया विंन्स फ्रीडम लिखने वाले मौलाना अबुल कलाम आजाद अपने मरने के बाद अपनी असलियत बता कर जाते हैं.. (3/5)
Read 5 tweets
16 Jan
#OneStepThinking
डॉ थॉमस सॉवेल ने अपनी पुस्तक "Applied Economics" में एक कहानी बताई है,

जब वे हॉवर्ड में अंडरग्रेजुएट स्टूडेंट थे तो इकोनॉमिक्स की एक क्लास में प्रोफेसर आर्थर स्मिथीज ने किसी इकोनॉमिक पॉलिसी पर कोई प्रश्न किया। युवा टॉम ने खूब उत्साह और कन्विक्शन से अपना (1/13)
ऑपिनियन दिया कि उक्त पॉलिसी क्यों लाभदायक होगी। उन्होंने फिर आगे पूछा, और उसके बाद क्या होगा? जब टॉम सॉवेल ने उसके आगे के परिणामों की चर्चा की तो उन्हें उतना फेवरेबल नहीं पाया। फिर प्रोफेसर ने आगे पूछा, और उसके बाद? तो इस तरह से जैसे जैसे आगे के परिणामों की एनालिसिस की (2/13)
गई, उनके फाइनल या दीर्घकालिक परिणाम शॉर्ट टर्म परिणामों के बिल्कुल विपरीत दिखाई दिए.. और शिक्षा की इस सिम्पल एक्सरसाइज ने हमें एक थॉमस सॉवेल दिया।

लेकिन ज्यादातर लोग फर्स्ट स्टेप से आगे नहीं सोचते। उन्हें एक समस्या बताई जाती है, उसे क्राइसिस बनाकर दिखाया जाता है और (3/13)
Read 13 tweets
16 Jan
जब कोई मिसाइल जमीन से महज 100-150 फ़ीट की ऊंचाई पर उड़ रही हो तो, उसे दुनिया का कोई भी “एयर डिफेंस सिस्टम या राडार”, न ट्रैक कर सकते हैं और न उसे निशाने पर पहुँचने से रोका ही जा सकता है.!!

हाल ही में जब भारत सरकार ने पर्यावरण संबंधी एक फर्जी PIL के जवाब में सुप्रीम कोर्ट (1/11) Image
में हलफनामा देते हुए कहा कि, वह सीमावर्ती इलाकों में सड़कों के चौड़ीकरण का काम हर हाल में जारी रखेगी और इसे पूरा करेगी ताकि जरूरत के वक्त #ब्रह्मोस सहित अन्य जंगी सामान तेजी से LAC तक लाकर तैनात किये जा सकें, तो यह सुन कर चिंकियों के कान खड़े हो गए हैं.!!

अब चीनी रक्षा (2/11)
विशेषज्ञ इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि, भारत के पास 14000 से अधिक ब्रह्मोस मौजूद हैं और वह इन्हे चीन से लगती सीमा / LAC पर तैनात कर रहा है.!!

चीन के पास ब्रह्मोस से निपटने का कोई इफेक्टिव तरीका मौजूद नहीं है, और बॉर्डर आउटपोस्ट्स पर किसी संघर्ष की स्थिति में ब्रह्मोस (3/11)
Read 11 tweets
16 Jan
हमारे पिताश्री कहते थे भाई जैसा कोई सज्जन नहीं और भाई जैसा कोई दुश्मन नहीं।

फिर उन्होंने हमें राम-लक्ष्मण और रावण- विभीषण का उदाहरण देकर अपनी बात समझाई।

बस तभी से यह नजरिया कायम है कि भाई अगर दुश्मन बन जाय तो सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। एकदम साक्षात यमराज।

रूस और (1/8)
चीन दोनों कम्युनिस्ट देश हैं। यानी भाई भाई हैं। दोनों की अमेरिका से जमकर लगती भी है। रूस पर अमेरिका ने प्रतिबन्ध लगा रखें हैं जिसके चलते रूस आर्थिक तौर पर बहुत कमजोर हो चुका है और उसे चीन जैसी आर्थिक महाशक्ति की जरूरत है।

पर रूस का एक जापान सी से लगता नार्थ कोरिया और (2/8)
चीन के बीच गोल्डन हॉर्न खाड़ी पर अत्यंत महत्वपूर्ण शहर व्लादिवोस्तोक (पोर्ट) है जिसको लेकर इन दोनों की आपस में बहुत लगती है। रूस का व्लादिवोस्तोक शहर को असल में चीन अपना मानता है और यदा कदा उसपर अपना दावा ठोकता रहता है। बस यहीं से भाईयों में दुश्मनी वाली बात शुरू (3/8)
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