#अंजना ओम कश्यप @anjanaomkashyap के इंटरव्यू में अखिलेश यादव ने एकदम साफ झूठ बोला कि आय से अधिक संपत्ति केस में उन्हें क्लीन चिट मिल गई है और केस खत्म हो चुका है
सुप्रीम कोर्ट ने यह माना है कि मामला गंभीर है और केस अभी भी चल रहा है और इतना ही नहीं मुलायम सिंह
@Sabhapa30724463
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यादव के खिलाफ सीबीआई की एक फर्जी रिपोर्ट फोटोशॉप पर बनाने में धोखाधड़ी का भी केस दर्ज किया है.
आइए देखते हैं अखिलेश सरकार की नाकामियों को-
1. दंगे जिन्हें अखिलेश रोक नहीं पाये
इसकी शुरूआत हुई मुजफ्फरनगर से. इन दंगों में 62 लोग मारे गये. जिस वक्त हजारों लोग विस्थापित होकर टेंट
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में रह रहे थे,अखिलेश सैफई में सलमान खान का डांस देख रहे थे.जब आवाज उठी तो बुलडोजर से सारे टेंट गिरा दिये गये. कि इमेज खराब हो रही है. दंगे बस इतने ही नहीं थे. ये तो बहुत बड़े पैमाने पर था. 2012 में यूपी में कुल 227 दंगे हुए. 2013 में 247. 2014 में 242. 2015 में 219. 2016 में
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भी 100 के ऊपर हो चुके हैं. दंगों के मामले में यूपी देश में एक नंबर पर है.ये केसों की बात थी.अगर सारे दंगे जोड़ दिये जायें तो डाटा कुछ और ही होगा.ये दंगे सिर्फ धार्मिक नहीं हैं.जमीन को लेकर, जाति को लेकर, छात्रों के दंगे सब शामिल हैं इनमें.दंगे का नाम आते ही हिंदू-मुस्लिम जेहन
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में आते हैं. पर यूपी में पब्लिक की हिंसा हर स्तर पर है.
2. मथुरा का रामवृक्ष कांड, जो अखिलेश को बबुआ बना गया
280 एकड़ सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने गई पुलिस टीम पर हमला हो गया.एसपी और एसएचओ मारे गये. 23 पुलिसवाले अस्पताल में भर्ती हुए.जवाहर पार्क में रामवृक्ष यादव ने कब्जा जमा
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रखा था. पूरी सेना बना रखी थी. पुलिस के साथ लड़ाई चली. कुल 24 लोग मारे गये. चारों ओर से खुसुर-फुसुर होने लगी कि रामवृक्ष को सपा नेताओं का आशीर्वाद प्राप्त था.क्योंकि बिना उसके इतनी बड़ी घटना नहीं हो सकती.सवाल ये है कि सरकार क्या कर रही थी इतने दिन तक. किसने उसे आश्रय दिया था.
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क्या सरकार अनजान थी.तब तो ये और ज्यादा खतरनाक हो जाएगा.क्या अखिलेश को इसके बारे में पता नहीं था
3.दादरी कांड जिसकी जिम्मेदारी अखिलेश ने नहीं ली
जब धर्मांध लोगों ने अखलाक को घर से खींचकर मार डाला तो अखिलेश सरकार ने ऐसे रिएक्ट किया जैसे सरकार कहीं से भी इस मामले से जुड़ी नहीं है
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ऐसा नहीं होता है. ऐसी घटनाएं शॉर्ट नोटिस पर नहीं होती. प्लानिंग होती है. सरकार के रवैये को भांपकर अंजाम दिया जाता है.क्या अखिलेश सरकार वोट के चक्कर में धर्मांध लोगों को शह दे रही थी. हर बार सपा के लोग सांप्रदायिक ताकतों से लड़ने की बात करते हैं.पर सवाल ये है कि कौन सांप्रदायिक
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है. क्या अखिलेश सरकार सांप्रदायिक नहीं है. क्या सांप्रदायिक ना होने का मतलब ये होता है कि किसी भी संप्रदाय को नहीं बचाना है?
अगर अखिलेश ये कहें कि ये ‘सांप्रदायिक ताकतों’ के चलते हुआ. हमाया कोई दोष नहीं है. तो कुछ और चीजें भी हैं-
4. बदायूं रेप कांड के बाद हुआ बुलंदशहर रेप,
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मुख्यमंत्री क्या सोच रहे थे?
दो नाबालिक लड़कियों का रेप और मर्डर हुआ. वो क्या सांप्रदायिक ताकतों ने किया था? आरोप तो सपा सांसद के नजदीकी लोगों पर लगा था. उन लोगों की हिम्मत कैसे हुई? क्या सांसद ने उन लोगों से पल्ला झाड़ा? अरविंद केजरीवाल के मंत्रियों पर जब आरोप लगे तो उनको
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पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया. अखिलेश ने क्या किया? क्या ऐसा नहीं लगता कि उन लोगों को पूरा यकीन था कि सपा सांसद के नजदीकी हैं तो कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता. क्या बदायूं में अब भी लड़कियां अकेले घूमने जाती हैं? पत्ते बीनने? पर इससे सबक नहीं लिया गया. इसके बाद बुलंदशहर के
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NH-91 पर 12 लोगों ने मां-बेटी से रेप किया. मंत्रियों के इन्सेंसिटिव बयान भी आए, जो इसके दर्द को बढ़ाने के लिए ही दिए गए थे. अपराध के लिए सरकार कह सकती है कि हमें पता नहीं था. पर क्या उसके बाद कोई सबक नहीं लेगी सरकार? एप्लिकेशन बना देने से हो जाएगा? पुलिस भर्ती में औरतों की
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भागीदारी, पुलिस में औरतों के प्रति संवेदनशीलता ये चीजें कैसे आएंगी? हमेशा रिपोर्ट में आता है कि यूपी औरतों के लिए सबसे खतरनाक जगह है.
5. पत्रकार को जिंदा जलाया गया, मरते हुए मंत्री का नाम लिया था, पर कौन पकड़ा गया?
शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह को जिंदा जलाया गया.इसमें भी
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सपा के एक मंत्री का नाम आया. क्या वो मंत्री अभी जेल में है? नहीं. ये मामला ही पता नहीं कहां चला गया. जबकि मरते हुए जगेंद्र ने बयान दिया था कि मंत्री राममूर्ति वर्मा की शह पर पुलिस ने जलाया था. इस बयान को आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने ही रिकॉर्ड किया था.राममूर्ति स्टेट बैकवर्ड क्लासेज
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मिनिस्टर थे. इस मामले की गवाह थी एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता. और विडंबना ये है कि उसी औरत ने मूर्ति और उनके लोगों पर रेप का इल्जाम लगाया था. जगेंद्र ने इसी औरत के लिए लड़ाई लड़ी थी. उस औरत ने ये भी कहा था कि मूर्ति के लोगों ने जगेंद्र के साथ उसे भी जलाने का प्रयास किया था. पर वह
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भाग निकली.बाद में वो औरत अपने बयान से मुकर गई. ये कैसे हुआ? किसने उस औरत को मजबूर किया बयान बदलने के लिए? किन परिस्थितियों में कोई ऐसा करता है?
6.माइनिंग माफिया को लेकर अखिलेश चुप रहे,शायद इनको समझ ही नहीं आया
अखिलेश के राज में माइनिंग को लेकर चर्चा हुई गौतमबुद्धनगर की कलेक्टर
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दुर्गाशक्ति नागपाल को लेकर. दुर्गा ने माफिया पर शिकंजा कसना शुरू किया तो उन्हें सस्पेंड कर दिया गया.हालांकि 2016 में अखिलेश ने माइनिंग मिनिस्टर गायत्री प्रजापति को बर्खास्त कर दिया था.पर ये याद रखना होगा कि ये 2016 था.चुनाव आ रहा था.
7. आईजी अमिताभ ठाकुर का मुद्दा
अमिताभ ठाकुर
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की पत्नी ने गायत्री प्रजापति के खिलाफ कंप्लेंट दर्ज कराई थी. इसके बदले अमिताभ को धमकियां मिलने लगीं. एक ऑडियो भी आया जिसमें पता चला कि खुद मुलायम सिंह यादव अमिताभ को धमका रहे थे. कि जैसे एक बार पहले पीटे गये थे, वैसे ही पीटे जाओगे. ठाकुर अक्टूबर 2015 से सस्पेंड हैं. अखिलेश ने
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क्या किया इस मामले में? आज अपनी गद्दी के लिए पिता के सामने खड़े हुए हैं. पर जनता के लिए कब खड़े हुए थे. 3 जनवरी को रिटायर हुए चीफ जस्टिस टी एस ठाकुर ने जम्मू-कश्मीर में अपने डिप्टी सीएम पिता के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. अखिलेश सिर्फ अपने स्वार्थ को लेकर अपने पिता के खिलाफ
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लड़े हैं.
8. यूपी पब्लिक सर्विस कमीशन के चेयरमैन अनिल कुमार यादव का मुद्दा
अनिल कुमार यादव चेयरमैन थे. और तब कमीशन पर करप्ट प्रैक्टिस का आरोप लगा. कमीशन अनिल कुमार की निजी कंपनी की तरह काम कर रहा था.अखिलेश आंख मूंदे रहे. जब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इसमें हाथ डाला,तब अनिल को हटाया
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गया
9. इससे बड़ा यादव सिंह का भ्रष्टाचार
नोएडा के चीफ इंजीनियर यादव सिंह पर सैकड़ों करोड़ की संपत्ति बनाने का आरोप लगा.पहले तो सरकार आना-कानी करती रही. फिर बाद में 2014 में सस्पेंड कर दिया गया. पर फरवरी 2015 में वन-मैन जुडिशियल इंक्वायरी बैठाई गई.क्योंकि इसे मैनेज करना आसान था
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इलाहाबाद हाई कोर्ट में पेटीशन फाइल की गई कि सीबीआई इंक्वायरी हो. अखिलेश सरकार ने इसका विरोध किया. पर कोर्ट ने ऑर्डर दे दिया. इसके बाद अखिलेश सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई. पर वहां पर भी हाई कोर्ट का ही फैसला माना गया. अखिलेश सरकार बेशर्मों की तरह काम कर रही थी. किसको बचा रही थी,
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कैसे छुपा है.
10. बुंदेलखंड की क्राइसिस
2015 में बुंदेलखंड में फरवरी और अप्रैल में बारिश हो गई. फसलें खराब हो गईं. किसान मरने लगे. बहुतों ने आत्महत्या कर ली और कई हार्ट अटैक से मर गये. क्योंकि सरकार ने फसल खराब होने को लेकर कोई फैसला नहीं दिया था. किसी भी तरह के मुआवजे की बात
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नहीं की थी. और मुलायम सिंह यादव किसान नेता चौधरी चरण सिंह के साये में बड़े हुए थे. साल खत्म होने पर अखिलेश सरकार ने चैक बांटने शुरू किये. लोगों को 23-23 रुपये के चैक बांटे गये. बुंदेलखंड में ये क्राइसिस अचानक नहीं हो गई थी.वहां तीन साल से सूखा भी पड़ा था.अप्रैल 2016 में अखिलेश
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ऑस्ट्रेलिया जाने वाले थे. इससे पहले वो बुंदेलखंड गये. वहां जाकर कुछ राहत का ऐलान किया.
11. साढ़े चार मुख्यमंत्रियों की सरकार बना जनतंत्र का फ्यूनरल निकाला
अखिलेश सपा सरकार के अकेले मुख्यमंत्री नहीं रहे. बेशक वो इसका ठीकरा बाकी लोगों के सिर पर फोड़ सकते हैं. कह सकते हैं कि इसी
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बात की तो लड़ाई लड़ रहा हूं. पर ये लड़ाई 5 साल पूरा होने के बाद ही याद आई है. तो क्या अखिलेश को इसके लिए माफ कर दिया जाए कि आपका कोई दोष नहीं था? 2012 से 2015 तक मुलायम सिंह यादव हर छह महीने में एक बार अखिलेश को डांटते रहे. ये पहली बार हो रहा था कि किसी मुख्यमंत्री को उसका
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पार्टी सुप्रीमो पब्लिकली डांट रहा था. इनके अलावा PWD मिनिस्टर चाचा शिवपाल अलग मुख्यमंत्री बने हुए थे. रामगोपाल यादव अभी तो अखिलेश के साथ हैं, पर उस वक्त ये भी आधे मुख्यमंत्री हुआ करते थे. फिर अर्बन डेवेलपमेंट मिनिस्टर आजम खान ने अलग सत्ता जमा रखी थी. अखिलेश कहां थे? घर के छोटे
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बच्चे थे? सीख रहे थे? तो क्या जनता एक्सपेरिमेंट करने के लिए है? संजय गांधी ने भी एक बार एक्सपेरिमेंट किया था.
अखिलेश कैसे मुख्यमंत्री बनेंगे, इसका अंदाजा उसी समय हो गया था जब ये जीतकर आए थे. उसी दिन सपा के लोगों ने गुंडई मचा दी थी. कई जगह तो थाने फूंक दिये गये थे. क्या अखिलेश
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इससे भी अनजान थे? हर जगह तो सीना ठोंककर बोले हैं कि 2012 का चुनाव मैंने ही जितवाया है सपा को. अपने दोस्तों के साथ मिलकर पूरी प्लानिंग की थी. तो ब्लेम लेने में सेलेक्टिव क्यों? क्या क्रेडिट लेने का ही काम करेंगे? 5 साल तो मिल गये. अब फिर मांगेंगे 5 साल. कहेंगे कि मेट्रो ला दिये
लखनऊ में. 1090 हेल्पलाइन लाये. डायल 100 लाये, पुलिस तुरंत आ जाती है. पर बड़ी घटनाओं ने क्या नजीर पेश की है? कभी-कभी तो ऐसा लग रहा है कि सारे प्रोजेक्ट सिर्फ सरकार की नाकामी छुपाने के लिए एनाउंस किये गये थे. जब दिल्ली के ‘आधे’ मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को हर बात पर धर लिया
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जाता है तो अखिलेश से सिंपैथी क्यों? क्या सिर्फ इसलिए कि वो युवा हैं. या, अपनी गद्दी के लिए. जनता के लिए क्या किया है? क्या जनता अखिलेश का सिनेमा देखे?

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15 Jan
एक घटना ऐसी भी 😌
राधिका और नवीन को आज तलाक के कागज मिल गए थे।दोनो साथ ही कोर्ट से बाहर निकले।दोनो के परिजन साथ थे और उनके चेहरे पर विजय और सुकून के निशान साफ झलक रहे थे।चार साल की लंबी लड़ाई के बाद आज फैसला हो गया था
दस साल हो गए थे शादी को मग़र साथ मे छः साल ही रह पाए थे
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चार साल तो तलाक की कार्यवाही में लग गए।
राधिका के हाथ मे दहेज के समान की लिस्ट थी जो अभी नवीन के घर से लेना था और नवीन के हाथ मे गहनों की लिस्ट थी जो राधिका से लेने थे।
साथ मे कोर्ट का यह आदेश भी था कि नवीन दस लाख रुपये की राशि एकमुश्त राधिका को चुकाएगा।
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राधिका और नवीन दोनो एक ही टेम्पो में बैठकर नवीन के घर पहुंचे।दहेज में दिए समान की निशानदेही राधिका को करनी थी।
इसलिए चार वर्ष बाद ससुराल जा रही थी।आखरी बार बस उसके बाद कभी नही आना था उधर।
सभी परिजन अपने अपने घर जा चुके थे। बस तीन प्राणी बचे थे।नवीन,राधिका और राधिका की माता जी।
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15 Jan
#नलिनी 16 साल की थी।(इस्तेमाल किया गया नाम उसका असली नाम नहीं है) वह अपने घर की ओर जा रही थी तभी कुछ लड़कों ने उसे पीछे से पकड़ लिया। जब तक उसके कपड़े जबरदस्ती नहीं उतारे गए तब तक उसे कुछ समझ नहीं आया। उसके साथ रेप किया गया। कोई मदद के लिए नहीं आ सका क्योंकि लड़की मदद के लिए
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चिल्ला भी नहीं सकती थी। भगवान ने उसे बोलने की क्षमता नहीं दी थी। वह न केवल बोलने में अक्षम थी बल्कि सुनने में भी अक्षम थी। केवल एक चीज जो वह कर सकती थी वह रोना था जबकि शैतान उसके साथ बलात्कार करता रहा। उसके आँसुओं का बलात्कारियों को कोई मतलब नहीं था।
इतना ही नहीं,उन शैतानों ने
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एक नुकीली चीज उठाई और उसके गुप्तांगों को बेरहमी से फाड़ दिया,संभवत: उसे मारने का प्रयास कर रहे थे। उसकी योनि और गुदा के बीच की त्वचा को बेरहमी से फाड़ दिया गया था। बाद में लड़की को चलती गाड़ी से बाहर फेंक दिया गया,जहां उसका खून बहता रहा जब तक कि किसी ने उसे देखा और उसे अस्पताल
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14 Jan
अपराजेय योद्धा #पेशवा_बाजीराव

80 साल की उम्र के राजपूत राजा छत्रसाल जब मुगलो से घिर गए,
और बाकी राजपूत राजाओं से कोई उम्मीद ना थी तो उम्मीद का एक मात्र सूर्य था "ब्राह्मण बाजीराव बलाड़ पेशवा"
एक राजपूत ने एक ब्राह्मण को खत लिखा:-

#जो_गति_ग्राह_गजेंद्र_की
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#सो_गति_भई_है_आज!

बाजी जात बुन्देल की बाजी राखो लाज!

(जिस प्रकार गजेंद्र हाथी मगरमच्छ के जबड़ो में फँस गया था ठीक वही स्थिति मेरी है, आज बुन्देल हार रहा है, बाजी हमारी लाज रखो) ये खत पढ़ते ही बाजीराव खाना छोड़कर उठे उनकी पत्नी ने पूछा खाना तो खा लीजिए तब बाजीराव ने कहा...
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अगर मुझे पहुँचने में देर हो गई तो इतिहास लिखेगा कि एक क्षत्रिय_राजपूत ने मदद माँगी और ब्राह्मण भोजन करता रहा"-

ऐसा कहते हुए भोजन की थाली छोड़कर बाजीराव अपनी सेना के साथ राजा छत्रसाल की मदद को बिजली की गति से दौड़ पड़े। दस दिन की दूरी बाजीराव ने केवल पाँच सौ घोड़ों के साथ
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12 Jan
#वो_लडकी 💃😍
हमारे हॉस्टल के बगल में एक काका रहते थे! उनकी कोई दूर के रिश्ते से #भांजी लगती थी शायद। 😍
जिस दिन शाम को काका उसे बाईक से लेकर आए, उसी दिन से हॉस्टल के छत पर जमावड़ा बनाए हुए #लड़कों के बीच चर्चा का केंद्र बन गई थी वो लड़की।
अभी किसी को उसका नाम मालूम नहीं था,
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पर सबने उसे अपनी इच्छानुसार नाम दे दिए थे। कोई उसे "सुंदरता की देवी" कहता तो कोई "कटरीना कैफ"।
किसी पुरानी फिल्मों के #आशिक को उसमे रेखा जी नजर आतीं , तो किसी हॉलीवुड के प्रेमी को टाइटेनिक वाली "केट विंसलेट"। कुल मिलाकर आलम यह था कि आते ही हॉस्टल में चर्चा का केंद्र
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बन गई थी वो लड़की, और बनती भी क्यों न.अभी बॉयज हॉस्टल के नए खून वाले लड़कों ने वर्षों से कोई सुंदरी नहीं देखी थी। हॉस्टल के आसपास दूर-दूर तक कोई स्त्री जाति का दर्शन नहीं होता था!
सभी उससे बात करने,उसे एक #झलक देख लेने की फिराक में रहते।वो बन ठनकर छत पर आए,इस उम्मीद से कि काश!
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Read 31 tweets
12 Jan
#प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 12 जनवरी, 2022 को आज शाम 4 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पूरे तमिलनाडु में 11 नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों और चेन्नई में केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान के नए परिसर का उद्घाटन करेंगे।
नए मेडिकल कॉलेज लगभग 4,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से
👇 ImageImage
स्थापित किए जा रहे हैं,जिसमें से लगभग 2,145 करोड़ रुपये केंद्र सरकार और बाकी तमिलनाडु सरकार द्वारा प्रदान किए गए हैं।जिन जिलों में नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं उनमें विरुधुनगर, नमक्कल, नीलगिरी, तिरुपुर, तिरुवल्लूर, नागपट्टिनम डिंडीगुल,कल्लाकुरिची,अरियालुर,रामनाथपुरम
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और कृष्णागिरी जिले शामिल हैं।
केंद्र प्रायोजित योजना - 'मौजूदा जिला/रेफरल अस्पताल से जुड़े नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना' के तहत कुल मिलाकर 1450 सीटों की क्षमता वाले नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं।इस योजना के तहत उन जिलों में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाते हैं, जिनमें न
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Read 9 tweets
5 Jan
आइये याद करें, महान अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री का वो स्वर्णिम दौर ... 🧐
➡ 10 साल के शासन में 12 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के घोटाले करवाए, अभी तक रह रह कर कुकर्म बाहर आ रहे हैं ; पर कुछ न कहो, बहोत महान अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री रहे हैं साहब !
➡ जहाँ 60 साल में 18 लाख करोड़
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रूपये का लोन दिया गया था वही सिर्फ 2006 से 2013 में 34 लाख करोड़ का लोन बड़े उद्योगपतियों को बाँट दिया ; पर कुछ न कहो, बहोत महान अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री रहे हैं साहब !
➡ 34 लाख करोड़ से ज्यादा के लोन को कई बार री-स्ट्रक्चर किया गया और अंततः उसमें से 10.7 लाख करोड़
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NPA में बदल गया ; पर कुछ न कहो, बहोत महान अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री रहे हैं साहब !
➡ साल दर साल महंगाई एक बार को बढ़ते बढ़ते 12.31% पार कर गई थी 2009 में, महंगाई डायन खाये जात है वाला गाना चलने लगा था ; पर कुछ न कहो, बहोत महान अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री रहे हैं साहब !
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