मोदी और शाह राजनीति के बहुत बड़े खिलाड़ी लेकिन धूर्तता में केजरीवाल, मोदी और शाह से बहुत आगे हैं।

मोदी और शाह राजनीति के बहुत बड़े खिलाड़ी हैं, पर जहां तक धूर्तता का सवाल है, जिसे अंग्रेजी में स्मार्टनेस कहते हैं, तो केजरीवाल उन दोनों से बहुत आगे हैं। (1/10)
इसका सबसे बड़ा सबूत तो यही है कि पिछले छह सालों में यह उन दोनों की जोड़ी को दो बार बुरी तरह पटखनी दे चुका है। पिछले एक साल में ही केजरीवाल ने मोदी-शाह की नाक में इस तरह दम कर दिया कि उन्हें एनजीसीटीडी ऐक्ट २०२१ जैसा विवादित कानून बनाने पर विवश होना पड़ा। मोदी (2/10)
सामान्यतया विवादों से दूर ही रहना पसन्द करते हैं और उन्हें ऐसे विवाद में पड़ना पड़ा है, यह केजरीवाल के लिए एक छोटी-मोटी जीत (minor victory) कही जा सकती है। शतरंज खेलने वाले इसे अच्छी तरह समझ सकते हैं। जब भी आप विपक्षी को अपनी योजना बदलने और उसे अपने सुरक्षित (3/10)
क्षेत्र (कम्फ़र्ट ज़ोन) से बाहर निकलने के लिए मजबूर होना पड़े, तो यह आपके लिए एक प्रकार की जीत ही है। इस बिल के द्वारा मोदी-शाह ने केजरीवाल को एक ऐसा मौका दिया है जिसका फ़ायदा उठा कर केजरीवाल सारा हिसाब एक झटके में बराबर कर सकते थे। लड़ाई का अगला चरण सुप्रीम कोर्ट में (4/10)
लड़ा गया जो संसद के विपरीत मोदी-शाह का सुरक्षित क्षेत्र नहीं है। यद्यपि यह ऐक्ट १९९१ के एनसीटी ऐक्ट की मूल भावना को ही व्यक्त करता है,पर २०१८ में दिल्ली हाईकोर्ट उसका अलग निरूपण (interpretation) दे चुका है, इसलिए इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि सुप्रीम कोर्ट (5/10)
भी ऐसा कर सकता है।

अगर कोर्ट का फ़ैसला सरकार के पक्ष में जाता है तो केजरीवाल की राजनीति हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगी, या कम से कम वह दिल्ली में ही फ॓स कर रह जाएंगे, लेकिन अगर फ़ैसला केजरीवाल के पक्ष में हुआ,।तो उससे उन्हें वह मजबूती प्राप्त होगी जिसे साधारण तरीकों से (6/10)
कमाने में उन्हें पांच साल लग जाते। इस तरह की आर-पार की लड़ाई मोदी के लिए नई नहीं है, पर केजरीवाल के लिए नई है। कहा जा सकता है कि वह भी अपने कम्फ़र्ट ज़ोन से बाहर हैं। लड़ाई ख़त्म होने से पहले ही केजरीवाल के मैदान छोड़ देने की सम्भावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
(7/10)
फ़िलहाल सबसे पहले तो केन्द्र सरकार को दिल्ली दंगों और जेएनयू-काण्ड के आरोपियों पर चल रहे मुकदमों में दिल्ली सरकार के वकीलों की टीम,जो फ़ीस तो सरकार से ले रही है, पर मुकदमे आरोपियों की ओर से लड़ रही है, को बदल कर आरोपियों को जल्द से जल्द सज़ा दिलाने पर ध्यान देना चाहिए (8/10)
जिससे जनता का कुछ समर्थन भी केन्द्र की सरकार को मिल सके, जिसकी इस महायुद्ध में महत्त्वपूर्ण भूमिका होने जा रही है। अभी शायद जनता की सहानुभूति केजरीवाल के साथ है, जिसे अपनी प्रचार-क्षमता से और अधिक हवा देने में केजरीवाल समर्थ है।
(9/10)
जो भी हो, लड़ाई दिलचस्प होगी।

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Mar 31
वे बौद्धिक भू-राजनीतिक विशेषज्ञ कहाँ हैं जो बता रहे थे कि रूस समाप्त हो गया है और रूबल में व्यापार नहीं हो सकता है?

सेंट्रल बैंक ऑफ रूस ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि, 28 मार्च, 2022 तक, रूसी रूबल मुद्रा अब सोना (gold) के लिए बाध्य है। सोने की बुलियन की दर 5,000 रूबल (1/4) Image
प्रति ग्राम है।

गोल्ड बुलियन की बात करें तो रूस ने दुनिया भर में अमेरिकी डॉलर के मूल्य का लगभग 30% ही मिटा दिया।

इससे भी बदतर, क्योंकि रूस केवल अपने तेल और गैस को रूबल में बेचेगा, अब 5,000 रूबल प्रति ग्राम पर तय किया गया है, जो कोई भी तेल या गैस खरीदना चाहता है, उसे या (2/4)
तो रूबल में भुगतान करना होगा या सोने में भुगतान करना होगा, और उन्हें यूएस डॉलर नहीं मिलेगा। भुगतान के रूप में वे सोने के लिए मूल्य देते हैं!

दुनिया भर के लोग सचमुच अपने पैसे रूबल और डंपिंग डॉलर और यूरो पर फेंक रहे होंगे।

रूस ने अभी जो किया वह परमाणु बम विस्फोट के (3/4)
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Mar 31
संसार में अगर इस्लाम सबसे पहले कहीं विदा होगा तो वह है ईरान और सऊदी अरब। ईरान और सऊदी अरब दोनों जगह इस्लाम से अलग होने की मुहिम बाकी दुनिया से ज्यादा तेज है।

सऊदी अरब में घोषित तौर पर कोई इस्लाम नहीं छोड़ रहा लेकिन जैसे जैसे साइंस और टेक्नॉलाजी का सामान्य जीवन में प्रभाव (1/9) Image
बढ रहा है इस्लामिक बिलिफ कमजोर पड़ती जा रही है। कहा ये जाता है कि सऊदी अरब में इस्लाम से अलग होने के बाद भी लोग मुसलमान बने रहते हैं। संभवत: उनके लिए ये मजहब से ज्यादा सांस्कृतिक जुड़ाव है। खैर, इस पर कभी विस्तार से अलग से बात करेंगे।

लेकिन ईरान में इस्लाम से अलग होने की (2/9)
दर बहुत तेज है। ईरान का जो सरकारी आंकड़ा है उसके अनुसार वहां 90 से 92 प्रतिशत शिया मुसलमान हैं। जबकि प्यू रिसर्च और अन्य स्वतंत्र एजंसियों के आंकड़े इसके उलट हैं। ऐसी ही एक स्वतंत्र एजंसी ने 2020 में आनलाइन सर्वे किया था। इस सर्वे में कई तरह के एनजीओ समूह शामिल थे। कुल (3/9)
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Mar 31
किसी भी देश की सेना के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है उसकी स्ट्राइक क्षमता। आप अगर युद्ध लड़ रहे हैं, तो ये जरूरी है कि आपके पास स्ट्राइक यानी हमला करने के लिए हथियार हों... वरना दुश्मन आप पर हमला कर देता है, और आप बस बचाव ही करते रह जाते हैं, जो युद्ध मे बहुत घातक (1/13) Image
होता है।

मुझे याद है तत्कालीन COAS वीके सिंह का बयान, जब उन्होंने कहा था कि हमारे पास युद्ध लड़ने के लिए जरूरी मात्रा में गोलाबारूद तक नही है...

क्या आज हालात सुधरे हैं?

इसका उत्तर 'हां' ही है... और मैं एक छोटा सा विश्लेषण आपको दिखाना चाहता हूँ, ताकि आप भी समझें कि (2/13)
आपका टैक्स का दिया हुआ पैसा कहां लगाया जा रहा है, और देश को कैसे मजबूत किया जा रहा है।

मान लीजिए आप एक युद्ध क्षेत्र में खड़े हैं, सामने आपके पाकिस्तान भी हो सकता है या चीन भी... अब आपकी स्ट्राइक कॉर्प्स क्या काम करेंगी, कैसे लड़ेंगी... उसकी एक बानगी देखिए।

इसमे केवल (3/13)
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Mar 31
#दुश्मन_का_दुश्मन_दोस्त

1991 में आडवाणी जी की रथयात्रा रोकने के बाद भाजपा ने वीपी सिंह से समर्थन वापस लिया। सरकार गिरी। फिर राजीव गाँधी एंड कम्पनी ने 63 वर्षीय 'युवा तुर्क' चंद्रशेखर को बाहरी समर्थन देकर प्रधानमंत्री बनवा दिया। नवम्बर 1991से जून 1992 तक... 8 महीने (1/12)
का दर्द झेलने के बाद कांग्रेस को सत्ताप्राप्ति की प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो राजीव गाँधी ने सरकार पर दो मामूली पुलिसवालों से अपनी जासूसी का आरोप लगाकर चंद्रशेखर सरकार से समर्थन वापस ले लिया। सरकार गिर गई और चुनाव की तैय्यारी शुरू।

अब राजीव गाँधी के सामने वीपी सिंह या (2/12)
चंद्रशेखर चुनौती नही थे। असली चुनौती थे... भाजपा और लालकृष्ण आडवाणी। मंदिर आंदोलन की लहर पर सवार आडवाणीजी को रोकने के लिये राजीव गाँधी फिर हेमवतीनंदन बहुगुणा वाला 1984 का इलाहाबाद दोहराना चाहते थे लेकिन इस बार तुरुप का इक्का अमिताभ बच्चन साथ छोड़ चुके थे। अमिताभ ने जिस (3/12)
Read 13 tweets
Mar 31
TATA ने अपने WHAP (Kestrel) 8 x 8 Armored Vehicle की डिलीवरी ITBP को करनी शुरू कर दी है। ये एक WHAP (Wheeled Armored Amphibious Platform) Kestrel है, जिसे पहाड़, पानी, उबड़खाबड़ जमीन, मरुस्थल में सेना चला सकती है। इसका मजबूत ARMOUR सैनिकों को दुश्मन के हमले से बचाता है, (1/3) ImageImageImage
वहीं इसमे लगे एडवांस्ड हथियार दुश्मन पर हमला करने में सहायक होते हैं।

इसे अब सीधा लद्दाख में डिप्लॉय किया जा रहा है, इसकी वजह से इन्फैंट्री ट्रूप्स को सुरक्षित तरीके और तेजी से LAC के आस पास तैनात किया जा सकता है। इन्फैंट्री की क्षमता इस WHAP की वजह से कई गुना बढ़ जाएगी।
(2/3)
Its 100% Make In India.

t.me/modified_hindu…

#साभार
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Mar 31
भारतीय मुसरमान दुनिया के सबसे दोगले मुसरमान हैं जिन्होंने धर्म के नाम पर दो देश लेकर भी अब कश्मीर, बंगाल, केरल और धीरे, धीरे कर के अपनी आबादी बढ़ा कर गज़वा ए हिन्द के सपने को पूरा करने की साजिश रच रहे हैं। और सत्ता के लालच में जयचंद रूपी हिन्दू नेता इनकी मदद कर रहे हैं। (1/4)
और क्यूँकि RSS इनकी इस साजिश के ख़िलाफ़ है इसीलिए पूरी कौम मोदी और योगी जी जैसे राष्ट्रवादी नेताओं के ख़िलाफ़ एक जुट होकर वोट करती है जिसका पुख्ता सबूत यूपी के विधानसभा चुनावों में देखने को मिल गया। जब योगी जी के गोरखनाथ मठ के आसपास रहने वाले सैकड़ों मुस्लिम परिवारों (2/4)
जिनकी रोज़ी रोटी उससे चलती है और जी टीवी पर योगी जी को मसीहा बताते थे उनमें से केवल 5 लोगों ने उनको वोट दिया। क्यूँकि मस्जिदों में उनको बीजेपी के ख़िलाफ़ वोट देने के लिए कुरान की कसम खिलाई गई थी, ऐसी धर्मांध और अंधभक्त कौम (3/4)
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