जब मायावती ने मुलायम से कान पकड़ कर उठक-बैठक करवाई तो सपाई गुंडे मायावती की हत्या पर आमादा हो गए।

तथ्य यह भी दिलचस्प है कि अपने को सेक्यूलर चैंपियन बताने वाले मुलायम सिंह यादव पहली बार 1977 में जब मंत्री बने तो जनता पार्टी सरकार में बने जिसमें जनसंघ धड़ा भी शामिल था। (1/20)
मुलायम सहकारिता मंत्री थे, कल्याण सिंह स्वास्थ्य मंत्री, रामनरेश यादव मुख्य मंत्री। फिर सेक्यूलर मुलायम सिंह यादव पहली बार भाजपा के समर्थन से ही मुख्य मंत्री बने थे। लेकिन बिहार में आडवाणी की रथ यात्रा रोकने और गिरफ़्तारी के बाद भाजपा ने केंद्र में विश्वनाथ प्रताप सिंह (2/20)
सरकार से भाजपा ने समर्थन वापस ले लिया। विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार गिर गई थी।

तथ्य यह भी महत्वपूर्ण है कि सेक्यूलर फ़ोर्स के ठेकेदार वामपंथी और भाजपा दोनों एक साथ थे विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार को समर्थन देने में। यह जनता दल की सरकार थी। मुलायम सिंह भी जनता दल सरकार (3/20)
के मुख्य मंत्री थे। तो जब भाजपा ने विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया तो जनता दल टूट गया और कांग्रेस के समर्थन से चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने। जबकि उत्तर प्रदेश में मुलायम सरकार से भाजपा ने समर्थन वापस लिया तो कांग्रेस ने मुलायम को समर्थन देकर मुलायम सरकार (4/20)
को गिरने से बचा लिया था। अयोध्या में कार सेवकों पर मुलायम सरकार द्वारा गोली चलवाने का परिणाम यह हुआ कि अगले चुनाव में भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बन गई। बाबरी ढांचा गिरने के बाद कल्याण सरकार बर्खास्त हो गई। फिर अगले चुनाव में भाजपा को हराने के लिए सपा-बसपा ने मिल (5/20)
कर चुनाव लड़ा फिर मिल कर सरकार भी बनाई। 265 सीट पर सपा लड़ी और 164 सीट पर बसपा। 109 सीट सपा ने जीती, 67 सीट पर बसपा। मुलायम दूसरी बार मुख्य मंत्री बने। तिलक, तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार के वह दिन थे। मिले मुलायम, कांशीराम, हवा में उड़ गए जय श्री राम जैसे नारों के (6/20)
वह दिन थे।

लेकिन तब बतौर मुख्य मंत्री मुलायम की हालत आज के महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री उद्धव ठाकरे से भी गई गुज़री थी। कांशीराम और मायावती ने मुलायम सरकार को लगभग बंधक बना कर रखा। न सिर्फ़ बंधक बना कर रखा, ब्लैकमेल भी करते रहे। हर महीने वसूली का टारगेट भी था। मायावती हर (7/20)
महीने आतीं। मुलायम को हड़कातीं और करोड़ो रुपए वसूल कर ले जातीं। मुलायम लगभग मुर्गा बने रहते कांशीराम और मायावती के आगे। मुलायम ने हार कर मायावती को उप मुख्य मंत्री बनाने का प्रस्ताव भी रखा। लेकिन मायावती को यह मंज़ूर नहीं था। वह मुख्य मंत्री बनना चाहती थीं। मुलायम इस पर (8/20)
राजी नहीं थे। सरकार किसी तरह चल रही थी।

उन दिनों कांशीराम और मायावती लखनऊ आते तो स्टेट गेस्ट हाऊस में ठहरते थे। जिस कमरे में वह चुने हुए लोगों से मिलते थे, उस कमरे में सिर्फ एक मेज और दो कुर्सी होती थी। जिस पर क्रमशः कांशीराम और मायावती बैठते थे। फिर जो भी आता वह खड़े- (9/20)
खड़े ही बात करता। बात क्या करता था, सिर्फ़ बात सुनता था और चला जाता था। तब के मुख्य मंत्री मुलायम सिंह यादव के लिए भी यही व्यवस्था थी। वह भी खड़े-खड़े ही बात सुनते थे। बैठने को कुर्सी मुलायम को भी नहीं मिलती। मुलायम इस बात पर खासे आहत रहते। पर मायावती की यह सामंती ठसक बनी (10/20)
रही। सुनते हैं मुलायम ने एक बार अपने बैठने के लिए कुर्सी की बात की तो मायावती ने कहा कि मुख्य मंत्री की कुर्सी क्या कम पड़ रही है, बैठने के लिए। मुलायम चुप रह गए थे। बाद में मायावती के वसूली अभियान में मुलयम ने कुछ ब्रेक लगाई और कहा कि हर महीने इतना मुमकिन नहीं है। तो (11/20)
मायावती ने सरकार से समर्थन वापसी की धमकी दे डाली। मुलायम ने फिर मांग पूरी करनी शुरू कर दी।

लेकिन तब के दिनों जब भी मायावती और कांशीराम लखनऊ आते तो मुलयम सरकार बचेगी कि जाएगी, की चर्चा सत्ता गलियारों और प्रेस में आम हो जाती। सरकार में हर काम के हिसाब-किताब के लिए कांसीराम (12/20)
ने आज के कांग्रेस नेता तब के आई ए एस पी एल पुनिया को मुलायम का सचिव बनवा रखा था। अपनी पार्टी के मंत्रियों को मलाईदार विभाग दिलवा रखे थे। तो मुलायम की नाकेबंदी पूरी थी। ऐसी ही किसी यात्रा में मायावती और कांशीराम लखनऊ आए। सर्वदा की तरह मुलायम को तलब किया गेस्ट हाउस में। (13/20)
मुलायम खड़े-खड़े बात सुनते रहे। डांट-डपट हुई। जाने किस बात पर मुलायम को कान पकड़-कर उठक-बैठक भी करनी पड़ी। मायावती ने मुलायम के इस उठक-बैठक की चुपके से फोटो भी खिंचवा ली और दैनिक जागरण में यह फ़ोटो छपवा दी। फ़ोटो ऐसी थी कि कुर्सी पर कांशीराम और मायावती बैठे हुए है और मेज (14/20)
के सामने मुलायम कान पकड़े झुके हुए हैं। अख़बार में यह फ़ोटो छपते ही हंगामा हो गया। होना ही था।

मुलायम सरकार से समर्थन वापसी की चर्चा पहले से गरम थी। इस चक्कर में ज़ी न्यूज़ की टीम संयोग से स्टेट गेस्ट हाऊस में पहले ही से उपस्थित थी। लेकिन सपाई गुंडों को टी वी कैमरा या (15/20)
प्रेस की परवाह कतई नहीं थी। उन्हें अपने टारगेट की परवाह थी। टारगेट था मायावती के साथ बलात्कार और फिर उनकी हत्या की। लेकिन भाजपा विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी भी संयोग से गेस्ट हाऊस में उपस्थित थे। वह पहलवान भी थे। मायावती की रक्षा में खड़े हो गए। सपाई गुंडों को एकतरफ धकेल कर (16/20)
मायावती को गेस्ट हाऊस के एक कमरे में बंद कर सुरक्षित कर दिया। यह 2 जून, 1995 की सुबह थी। सपाई गुंडों ने कमरे का दरवाज़ा तोड़ने का बहुत उपक्रम किया। लखनऊ पुलिस सपाई गुंडों के समर्थन में थी। लेकिन मायावती ने भी भीतर से युक्ति की। कमरे के दरवाज़े पर सोफा, मेज वगैरह खींच कर (17/20)
लगा दिया था। गैस के सिलिंडर में आग लगा कर मायावती को जलाने की भी कोशिश की गई। मायावती के कमरे के फोन के तार भी काट दिए सपाई गुंडों ने। उन दिनों मोबाइल नहीं था पर पेजर आ गया था। मायावती ने पेजर के जरिए बाहर की दुनिया से संपर्क बनाए रखा।

उसी दिन संसद में यह मामला उठा कर (18/20)
अटल बिहारी वाजपेयी ने मायावती को सुरक्षा दिलवा दी। लेकिन मायावती उस दिन कमरे से बाहर नहीं निकलीं। रात में भी उनको गाली-वाली दी जाती रही। बहरहाल मायावती जब दो दिन बाद निकलीं तो मुलायम सरकार से समर्थन वापसी के ऐलान के साथ ही। अटल बिहारी वाजपेयी ने भाजपा का समर्थन देकर (19/20)
मायावती को मुख्य मंत्री बनवा दिया। किस्से इस बाबत और भी बहुतेरे हैं। फिर कभी।
#Repost

#साभार
(20/20)
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Apr 9
साल था 1973। निर्देशक वेद राही एक फिल्म ले कर आये, "प्रेम परबत"। गीत लिखे थे जाँनिसार अख़्तर साहब ने और कश्मीरी कवयित्री पद्मा सचदेव ने। स्वर था भारत कोकिला, लता मंगेशकर जी का। और संगीत था, अपनी किस्म के अलग ही संगीतकार जयदेव का।

फिल्म की कथा थी कि हालात के चलते एक (1/5) Image
ग्रामीण नवयुवती का विवाह एक वृद्ध धनिक से हो जाता है। विवाह तो हो जाता है, लड़की जैसे तैसे अपने मन को मनाती है। मन को तो वो समझा लेती है लेकिन देह? देह की भी तो अपनी माँगें होती हैं। वो न रीति रिवाज समझती है न नैतिक सिद्धांत। ऐसे में एक युवा जंगल अधिकारी आता है और लड़की (2/5)
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फिल्म के कलाकार थे रेहाना सुल्तान, सतीश कौल और नाना पलसीकर। फिल्म में स्वर्गिक संगीत था और गीत थे 'रात पिया के संग', 'मेरा छोटा सा घर द्वार' और 'ये नीर कहाँ से बरसे'।

फिर वो गीत था जो खुद लता जी को अपने गाये हुये में सर्वाधिक पसंद है, "ये दिल (3/5)
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Apr 9
राज्यपाल जगमोहन के वे 127 दिन...

14 सितंबर, 1989 को श्रीनगर में सुबह 9:30 बजे श्री टीकालाल टपलू की उनके घर पर हत्या की गई। नवंबर, 1989 को श्रीनगर के महाराज बाजार में आतंकवादी मकबूल बट्ट को फांसी की सजा देने वाले जज न्यायमूर्ति नीलकंठ को छह आतंकियों ने घेर कर मार डाला और (1/9)
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वहां की सरकार और राज्य की राज्यपाल हाथ पर हाथ धरे बैठी रह गई।

अगर दोष राज्यपाल को ही देना है तो जानते हैं उस समय कश्मीर के राज्यपाल कौन थे? स्वर्गीय जगमोहन? जी नहीं! उस समय वहां के राज्यपाल थे केवी कृष्णराव, जिनको साजिशन जगमोहन को कश्मीर से हटाकर लाया गया था और वो न केवल (3/9)
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Apr 9
इतिहास में हमने खूब पढ़ा है कि हजार डेढ़ हजार वर्ष पहले का भारत अत्यधिक समृद्ध था। विश्व के जीडीपी में हमारा योगदान भी आज की तुलना में कई गुना अधिक था। हम शिक्षा, धर्म, दर्शन, अध्यात्म, कला, स्थापत्य, वाणिज्य, नौवहन आदि में भी अग्रणी थे।

फिर भी हम हारे और हजार वर्षों तक (1/3)
गुलाम रहे। हमारी संपत्ति लूट गई, आत्म-सम्मान नष्ट हो गया, व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गईं और हम विश्व में सर्वत्र अपमानित हुए। हमने अपनी भूमि भी खोई, भाषाएं भी, संस्कृति भी, परंपराएं भी और पहचान भी।

इन सबके कई कारण हैं लेकिन सबसे बड़ा कारण एक ही है : डेढ़ हजार वर्ष पहले के (2/3)
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आज भी हम और हमारे शासक लगभग उसी हाल में जी रहे हैं।

#साभार
(3/3)
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Apr 9
यह है आकार पटेल। एमनेस्टी इंटरनेशनल के भारतीय चैप्टर के पूर्व प्रमुख। यह घोर हिन्दू विरोधी, भारत विरोधी, मोदी विरोधी शख्स है। इसका काम हमारे देश का नाम बदनाम करना और मोदी को गालियाँ देना रहा है।

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आतंकियों को स्वतंत्रता सेनानी बताता था। खैर यह भूतपूर्व हो गया लेकिन सरकार की नजर इस पर हमेशा रही। इसी बीच जाँच के क्रम में पता चला कि इसने यू के एमनेस्टी इंटरनेशनल से 75 करोड़ रुपए लिए हैं बिना भारत सरकार को बताए... आकार पटेल फँस गए। दो दिन पहले अमेरिका जा रहे थे कोई (2/6)
भाषण देने। सी बी आई ने नोटिस जारी कर रखा था, दिल्ली एयरपोर्ट पर रोक दिया गया। तुरंत दिल्ली कोर्ट चले गए। कोर्ट ने अजीबोगरीब फैसला सुनाया। Look out circular को हटाने का आदेश दिया... आकार पटेल को अमेरिका जाने की अनुमति दी... साथ ही सी बी आई के डायरेक्टर को माफ़ी माँगने को (3/6)
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Apr 9
न्यूज चैनल या सुपारी न्यूज सेन्टर!!

"यूक्रेन का पलटवार!"
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"यूक्रेन की बहादुर सेना ने रूसी सेना को धूल चटा दिया!"
"जेलेन्स्की के डर से पुतिन ने अपने परिवारजनों को भूमिगत किया!"
"बुरी तरह घबराये पुतिन ने अपने हजारों निजी प्रहरी हटाये!"

उपरोक्त (1/24)
वाक्य और समाचार आपको किसी भारतीय न्यूज चैनल के मालूम होते हैं या जेलेन्स्की के सैन्य प्रोपेगैंडा चैनल के?

जी नहीं, ये समाचार यूक्रेन के किसी न्यूज चैनल से नहीं बल्कि हमारे देश के ही तमाम चैनलों से प्रतिदिन प्रसारित किये जा रहे हैं।

जरा सोचिए कि... हर समय स्वयं को (2/24)
'सर्वश्रेष्ठ' सिद्ध करते नहीं अघाते ये भारतीय न्यूज चैनल 'ब्रेकिंग' और 'एक्सक्लूसिव' अर्थात् 'ज्वलंत' एवं 'सर्वप्रथम' समाचार प्रसारित करने के चक्कर में क्या-क्या दिखा रहे हैं और समाज को कैसे-कैसे दिग्भ्रमित कर रहे हैं!

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Read 26 tweets
Apr 9
विश्वस्त सूत्रों के द्वारा यह महत्वपूर्ण सूचना मिली है जोकि शत् प्रतिशत सत्य है... हिंदू युवतियों के घर हिंदी अनुदित कुरान भेजी जा रही हैं... युवतियों के यहाँ ही क्यों?

भेजने वाले का पता और फोन नम्बर गलत लिखा है... कुरियर वाले भी असमंजस में हैं! कुरान रखे इन पैकेटों को (1/2) ImageImage
खोलने के बाद जब इसमे कुरान मिलती हैं तो कुरियर वाले कुरान वापस लेने से इनकार कर देते है...

भाइयों! यह सब चल क्या रहा है... जो लोग कुरान भेज रहे हैं उन्हें मोबाइल नम्बर और घरों के बिल्कुल सही सही पते कौन उपलब्ध करा रहा है?

#साभार
(2/2)
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