तहर्रूश (सार्वजनिक बलात्कार) चुस्लाम द्वारा
यह सम्पूर्ण सत्य है। विकिपीडिया में देख सकते !

यदि आप चुस्लाम को जानते हैं, तो इसके एक खेल हाँ खेल के बारे में नहीं जानते तो शायद चुस्लाम को कम जानते है। चलिये हम आपको इस चुस्लामिक खेल के सैर पर ले चलते हैं...! इस यात्रा में यदि (1/8)
कोई चुस्लाम का जानकार मिले तो उसके विचार का स्वागत होगा...!

#तहर्रूश_गेमिया

तहर्रूश (चुस्लामिक सार्वजनिक ब्लात्कार) अरब के देशों में खेला जाने वाला एक निहायत ही घिनौना व अमानवीय खेल हैं, वहाँ पर इसे "तहर्रूश गेमिया" के नाम से जाना जाता हैं, जिसमें परम्परा के नाम पर किया (2/8)
जाता हैं शिकार। यह कोई पशुओं का शिकार नहीं, इसमे किसी "गैर चुस्लिम लड़की का शिकार/बलात्कार" भीड़ में सामूहिक रूप में किया जाता हैं।

सार्वजनिक स्थलों पर एक अकेली गैर चुस्लिम लड़की पर २०० से २५० लोगों की भीड़ टूट पड़ती हैं। इसमें न केवल उसे यौन रूप से प्रताड़ित किया जाता (3/8)
हैं बल्कि बकातदा सामूहिक बलात्कार भी किया जाता हैं। अरब के देशों से निकल कर यह "यूरोप" में पूरी तरह से अपना पैर फैला चुका हैं और अब यत्र-तत्र भारत में भी इसकी घटनायें होने लगी हैं। जो लोग चुस्लाम को #अमन_चैन का मज़हब कहते हैं, उनको शायद चुस्लाम के बारे में पूरी जानकारी (4/8)
नहीं है। चुस्लाम परमंपरा के नाम पर इतना घिनौना काम करने की इजाज़त ही क्यो देता हैं....?

"तहर्रूश गेमियाँ"... को सिर्फ सार्वजनिक रूप से ही अंजाम दिया जाता हैं। एसा प्रदर्शन के दौरान या फिर बड़ी संख्या में जमा हुई भीड़ के बीच ही किया जाता हैं। इसमें पूरी भीड़ दो घेरा बना (5/8)
लेती हैं। एक घेरा अंदर होता हैं जिसके बीच में लड़की होती हैं, और अंदर वाले घेरे के लोग लड़की का यौन शोषण व बलात्कार करते हैं।

बाहर वाले घेरे के लोग बाहरी भीड़ को अंदर नहीं घुसने देते... और जब अंदर घेरे वाले लोग लड़की से बलात्कार कर लेते हैं तो क्रमशः बाहर के घेरे में चले (6/8)
जाते हैं तथा वाहरी घेरे का आदमी अंदर वाले घेरे में आ जाता हैं और यह क्रम चलता ही रहता हैं... जबतक की सभी लोग लड़की के साथ बलात्कार नहीं कर लेते।

इस दौरान लड़की बुरी तरीके से चोटिल हो जाती हैं या मर भी जाये तो ये खेल नहीं रुकता जब तक की सारी भीड़ का क्रम पूरा ना हो (7/8)
जाये...!! चुस्लाम को समझने का यह प्रथम कदम हैं... इस तरह की अनेको परम्पराएं भरी पड़ी है।
#Repost

#साभार
(8/8)
🙏🙏

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Apr 12
मुसलमान कहते है कि इस्लाम पहले से था... सवा लाख नबी अल्लाह ने भेजा था... अरे मियां जब इस्लाम पहले से ही था... तब मुहम्मद ने अरब के काबा की मूर्तियों को क्यों तोडा... जब इस्लाम पहले से था... तब मूर्तिया क्यों बनी थी... किस नबी का हाथ मूर्तिया बनाने में था... कौन नबी (1/10)
अल्लाह से गद्दारी करके मंदिर और मूर्तिया बनवाया था...

जब इस्लाम पहले से था तब मुहम्मद ने इस्लाम फ़ैलाने के लिए अरब में इतनी लडाईया लड़ी... खूनखराबा किया... लाखो लोगो की हत्याए की... सच्चाई यह है कि अरब में कोई अल्लाह कभी नहीं था... न तो इस्लाम था... एक भी नबी को (2/10)
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आप खुद देखिये... इस्लाम की किताबो में भी काबा में मूर्ति तोड़ने का जिक्र है...

प्रसिद्ध (3/10)
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Apr 12
कमलेश तिवारी की हत्या का असली गुनहगार गांधी है।।ईशनिंदा के नाम पर हत्या करने की परंपरा भारत में गांधी ने ही शुरू करवाई थी।

रंगीला रसूल का संपादन करने वाले महाशय राजपाल की हत्या 6 अप्रैल 1929 को हुई थी। रंगीला रसूल का प्रकाशन 1923 में लाहौर से हुआ था। लगभग डेढ़ साल तक ये (1/15) Image
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Apr 12
जो बोए हो वो काटो..!!

अफगानीयों ! तुम्हारे पास अल्लाह ताला का मुकम्मल दीन है, शरीया कानून है, पांचों वक्त की नमाज है, पर्दा और बुर्का है, ट्रिपल तलाक है, 4 निकाह और 84 मुताह है, हर रोज हलाला है, कभी रजिया कभी मलाला है, ऊपर वाले की गाज है, कोढ़ में खाज है, दूर-दूर तक कोई (1/10)
बुत या बुत परस्त नहीं है, तुम्हारे अड़ोस- पड़ोस में कोई काफिर नहीं है जिससे तुम्हें डर लगे, तुम्हारे कानों में मंदिर की आरती या गुरुद्वारे से गुरुवाणी नहीं पहुंचती, होली का हुड़दंग नहीं है, दिवाली की आतिशबाजी नहीं है, शिवरात्रि पर दूध की बर्बादी नहीं है, चकाचक पांचों (2/10)
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Apr 12
इस्लाम की वहिशयाना रिवायतें
मिस्यार निकाह

2016 से पहले हलाला भी आपको कहा पता था? मुताह निकाह तो आज भी बहुतों को नहीं पता, चलिए मुताह और हलाला, तीन तलाक इत्यादि तो आपने जान लिया। अब एक और चीज जानिये इसे कहते है "मिस्यार निकाह" अंग्रेजी में "MISYAR NIKAAH", ये मुख्य तौर पर (1/7)
मिस्यार निकाह सऊदी अरब में प्रचिलित है।

वहां बड़े पैमाने पर मिस्यार होती है, सऊदी के अलावा पाकिस्तान बांग्लादेश भारत और तमाम मुस्लिम देशों में मिस्यार निकाह होता है, इसे सबसे छुपाया जाता है, कोई भी मिस्यार के बारे में दूसरे लोगों को जानने नहीं देता क्यूंकि "पैसा दो संबंध (2/7)
बनाओ" का कांसेप्ट है। कई बार आपकी पहली बीवी होती है, उसे नहीं बताना है और आपको सेक्स भी करना है, वैश्यावृत्ति तो इस्लाम में हराम है, तो अब क्या करें? तो इसका समाधान है "मिस्यार निकाह।" ये मुताह की तरह ही एक टेम्परोरी निकाह होता है, नार्मल निकाह की तरह ही चीजें की जाती है (3/7)
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Apr 12
इस्लाम से मेरा आग्रह

हे इस्लाम, तुम मुझे मौलाना या खलीफा बना दो, मैं इस्लाम का उद्धार कर दूंगा।

काबा के काले कपड़े के नीचे निसंदेह शिवलिंग रखा है, मैं उस काले कपड़े को हटा दूंगा।

140 करोड़ हिन्दू फिर वहां तीर्थ पर जाएंगे, पर्यटन के पैसे से सारे मुसलमानों को काम मिल (1/3)
जाएगा।

महादेव के भगत फिर वहां कावड़ ले कर जाया करेंगे, वैसे भी तेल का इस्तमाल खत्म होने के बाद वहां सिस्टम बिगड़ जाएगा।

काबा को फिर खापों के अधीन कर देंगे, जाट उसके प्रहरी होंगे।

तुम भी सुरक्षित, दुनिया का रौला खत्म, इस्लाम खुशी खुशी महादेव के माथे सजा चाँद पूजेगा।
(2/3)
अन्य इस्लामिक सुधार भी मैं समय समय पर करता रहूंगा, मेरे पास खतने का भी इलाज है। वो खलीफा बनते ही बता दूंगा।
#खलीफा

#साभार
(3/3)
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Apr 12
इस्लाम में... विवाह का कोई प्रावधान ही नहीं है, मुस्लिम लौंडे / मर्द शारीरक सम्बन्ध बनाने हेतु लौंडियों से सुलह नामा करते हैं जिसे निकाह कहा जाता है!

यह कुछ घंटे या कुछ दिन का भी हो सकता है, अल्पकालिक निकाह को मुताह निकाह भी कहते हैं, शारीरिक सम्बन्ध बनाने हेतु सुलहनामा (1/5) Image
की अवधि के अनुसार लौंडियों को पैसा/किराया भी देय होता है जिसे "मेहर" भी कहा जाता है!

निकाह की समय सीमा समाप्त होने पर अथवा समयपूर्व अलगाव करने पर शारीरिक सम्बन्ध बनाने का किराया अर्थात मेहर का भुगतान किया जाता है जैसे नगरवधु अपने ग्राहको से लेती है यथा वेश्यावृति, निकाह (2/5)
सगे संबंधियों अर्थात चचेरे, ममरे, फुफेरे भाई, सगे चाचा,मामा, फूफा क्या... सौतेले भाई एवं सौतेले पिता से भी वैध है!

निकाह होने पर ससुर, जेठ, देवर आदि से भी शारीरिक सम्बन्धों को इस्लाम वैधता प्रदान करता है, इसलिए प्रायः मुस्लिम महिलाएं असुरक्षा की भावना से ग्रसित (3/5)
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