सुनो लड़की।

गर्व हो रहा है तुम्हें देख कर, तुम्हें सुन कर, तुम्हें जानकर... सीना चौड़ा हो रहा है यह सोच कर कि तुम हमारे बीच की हो।

जानती हो, जिस न्यायालय ने मात्र दो पंक्तियों की एक पोस्ट के लिए तुम्हे यह अनैतिक सजा दी थी, वह पूरी तरह से अंधा है। इसी देश में रोज हजारों (1/12)
किताबें ऐसी छपती हैं जिनमे सनातन मान्यताओं की खिल्ली उड़ाई जाती है, हिन्दू देवी-देवताओं को गाली दी जाती है, हमारे पुरुखों को मूर्ख कहा जाता है। ऐसी किताबें रोज छपती हैं और उसी न्यायालय के सामने लोगों को बाँटी जाती हैं। देश को छोड़ो, जिस राँची में तुम्हें सजा दी गयी है न, (2/12)
उसी राँची में मिशनरियाँ रोज ऐसी हजारों अश्लील किताबें बाँटती हैं। क्या उससे हम आहत नहीं होते? क्या हमारी भावनाओं का कोई मूल्य नहीं? पर न्यायालय की इतनी भी हिम्मत नहीं है कि उन ईसाइयों से एक प्रश्न तक पूछ दे... स्वतंत्रता के पचहत्तर वर्षों बाद तक वेटिकन चर्च के भय में जीने (3/12)
वाले न्यायालय की यही औकात है।

हमारा न्यायालय कमजोर के लिए काल है। यह बड़े और सामर्थ्यवान अपराधियों को झुक कर सलाम करता है, और कमजोरों से गरज कर बात करता है। तुम्हें जो कुरान बाँटने की सजा दी गयी थी न, वह इसी गर्जना का एक छोटा उदाहरण है।

पर तुम अद्भुत हो लड़की। सच कहूँ (4/12)
तो तुम जानती भी नहीं कि तुमने किया क्या है? प्रेमचंद के प्रसिद्ध उपन्यास "रंगभूमि" में एक अंग्रेज पात्र है, मिस्टर क्लार्क। एक जगह वह अपनी जमीन के लिए सत्याग्रह कर रहे अंधे-भिखमंगे सूरदास के लिए कहता है, "हम बड़ी बड़ी सेनाओं से नहीं डरते, हम डरते हैं तो ऐसे जिद्दी लोगों (5/12)
से डरते हैं। सेनाएं हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं पर ऐसे जिद्दी लोग बड़े-बड़े साम्राज्यों को उखाड़ फेकते हैं।"

हम भी अपनी जमीन के लिए ही लड़ रहे हैं लड़की। हमारे पास कुल मिला कर जमीन का यही एक टुकड़ा है। हम यदि यहाँ से उखड़े तो धरा के किसी कोने में एक अंगुल भूमि भी नहीं (6/12)
मिलेगी हमें। इस्लाम के पास पचासों देश हैं, ईसाइयों के पास सैकड़ो देश हैं, पर हमारे पास केवल यही भूमि है। हमें सहिष्णुता का झूठा पाठ पढ़ाने वाले कभी नहीं बता पाएंगे कि हमें यदि यहाँ से हटाया गया तो हम कहाँ जाएंगे? हम यदि यहाँ से उखड़े तो उखड़ जाएंगे। तुम जो युद्ध लड़ रही (7/12)
हो वह इस दस हजार वर्ष पुरानी सभ्यता के अस्तित्व का युद्ध है।

तुमने जब कहा न कि "मैं कोर्ट का यह अवैध आदेश नहीं मानूँगी" तब मुझे तुम प्रेमचंद के उस महानायक सूरदास की तरह लगी। तुम्हारी यह जिद्द बड़े से बड़े साम्राज्य को उखाड़ सकती है।

इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी यदि (8/12)
मैं यह कहूँ कि तुम्हारा "मैं कुरान नहीं बाटूंगी" वाला संवाद महारानी झाँसी के "मैं अपनी झाँसी नहीं दूंगी" के संवाद के बराबर सम्माननीय है। यह तुम्हारी पीढ़ी का एक साहित्यकार कह रहा है।

आज जब यह घमंडी न्यायालय तुम्हारे आगे झुका है, तो यह देश समझ रहा है कि तुम्हारी इस जीत का (9/12)
मूल्य क्या है। यह केवल तुम्हारी जीत नहीं है, यह इस सभ्यता की जीत है, यह भारत की जीत है। लड़ी तुम थी, जीते हम सब हैं।

तो सुनो भारती! इसे इस विपन्न साहित्यकार का लालच समझो, धर्म के प्रति समर्पण समझो या राष्ट्रप्रेम, तुमसे निवेदन करता हूँ कि अपनी इस स्वाभिमानी जिद्द के (10/12)
साथ अड़ी रहना। तुम अकेली नहीं हो लड़की, हम जैसे असंख्य तुम्हारे पक्ष में खड़े हैं। तुम हमारे लिए ऋचा भारती नहीं, वेद की ऋचा जैसी हो... बेटियाँ तो यूँ भी ऋचाओं जैसी ही होती हैं।

अपने स्वाभिमान के साथ खड़ी रहना बेटी। तुम जैसी बेटियाँ पिता और भाइयों को छाती चौड़ी (11/12)
करने और मस्तक ऊँचा करने का सौभाग्य देती हैं। यशश्वी होवो...

#Repost

#साभार
(12/12)
🙏🙏

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Jul 18
स्तब्ध कर देने वाला खुलासा...

कर्नल पुरोहित का पाक में जासूसी नेटवर्क इतना मजबूत था कि आतंकी हाफिज सईद और लख्वी तक उनसे डरते थे।

कर्नल पुरोहित 9 साल बाद नवी मुंबई की तालोजा जेल से रिहा हो गए हैं। उनकी रिहाई के बाद कई खुलासे सामने आ रहे हैं जिसे डाटा वैज्ञानिक गौरव प्रधान (1/24)
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सोनिया गाँधी और हाफिज सईद की मुलाकात:-

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Jul 18
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विनती की। TC ने भी गाड़ी आने पर कोशिश करने का आश्वासन दिया... एक दूसरे को शाश्वती देते दोनों गाड़ी का इंतज़ार करने लगी। आख़िरकार गाड़ी आ ही गयी और दोनों जैसे तैसे कर गाड़ी में एक जगह बैठ गई... अब सामने देखा तो क्या!

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Jul 18
युद्ध में सबसे महत्वपूर्ण क्या होता है...

महाभारत का युद्ध चल रहा है, अर्जुन जयद्रथ का पीछा कर रहे है, अचानक कृष्ण रथ रोक देते है और उतर कर घोड़ो के पैर की मालिश करने लगते है, अर्जुन कहता है ये क्या कर रहे हो, हमे जयद्रथ तक पहुचना है वो भाग रहा है आप ये सब अभी क्यों (1/12)
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पानीपत की तीसरी लड़ाई मराठो का दबदबा था वो आराम से जीत रहे थे, पर खाने की सप्लाई रुक जाती है भूखे पेट ज्यादा लड़ नहीं पाये हार गए...?

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Jul 18
क्या हम हिन्दू वाकई सावरकर जैसे राष्ट्रभक्त के लायक हैं? हमने वीर सावरकर और उनके परिवार को हर संभव तरीके से धोखा दिया और अपमानित किया है।

1. स्वतंत्रता समारोह में उन्हें आमंत्रित न करके।

2. आजादी के बाद दो बार गिरफ्तार करके।

3. मृत्यु के बाद भी उसे अपमानित करके।

आज भी (1/5)
हम अपने सच्चे राष्ट्रभक्त का सम्मान नहीं करते।

आज देश में बहुत कुछ हो रहा है पर जो निकम्मे हैं उनके लिए कुछ नहीं।

सड़कें बनाने के मामले में सरकार ने सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले हों... डीजल रेगुलेशन बिल पास हो गया, सरकारी नीलामी पारदर्शी कर दी गई... इन्फ्रा, बिजली और रेलवे के (2/5)
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Jul 18
कितने लोगों को पता है की पिछली कांग्रेस सरकार ने "ऑयल बॉन्ड" के रूप में 1.44 लाख करोड़ रुपए का ऋण लिया था, जिसको मोदी सरकार ने 2 लाख करोड़ से अधिक रुपए के रूप मे चुकाया है जिसमे 70 हजार करोड़ रुपए ऋण पर ब्याज भी शामिल है...

कांग्रेस सरकार ने अपनी भ्रष्ट नीति और देश को (1/9)
लूटने की वंशवादी प्रवत्ति के चलते ऑयल बॉन्ड के रूप में ऋण लिया और उसको अपने कार्यकाल में चुकाया भी नहीं, ना ही बजट में ऐसी कोई व्यवस्था कर के गए थे...

सोचिए इन्होंने नरेंद्र मोदी जी को किस प्रकार का देश सौंपा था 2014 में, 12 लाख करोड़ से ज्यादा के घोटाले, 6.5 बिलियन डॉलर (2/9)
ईरान का बकाया, 10 लाख करोड़ से अधिक एनपीए, और अब ये 2 लाख करोड़ का ऑयल बॉन्ड (ब्याज सहित)...

देश के संसाधनों और जनता के पैसों की भारी लूट की गई है कांग्रेस सरकार द्वारा, राहुल गांधी और चमचे किस मुंह से मोदी सरकार पर पेट्रोल की बढ़ी कीमतों पर सवाल खड़े करते है...

जो चमचे (3/9)
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Jul 18
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, (NHRC) एक सफ़ेद हाथी नहीं है क्या? कोई भी चेयरमैन आये, आयोग राजस्थान के लिए चुप रहता है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का ढर्रा समझ से परे है, वर्तमान चेयरमैन जस्टिस अरुण मिश्रा के आने के बाद उम्मीद हुई थी कि आयोग के काम में कुछ बदलाव नज़र आएगा मगर (1/9)
ऐसा होता लग नहीं रहा है।

आपको याद होगा करीब डेढ़ वर्ष पहले हाथरस में एक नाबालिग से बलात्कार की वारदात हुई थी और तब ये आयोग दौड़ कर मामले में कार्रवाई के लिए कूद पड़ा था।

ये आयोग उत्तर प्रदेश के CAA के विरोध में हुए दंगो में भी कूदा था जब कुछ मुस्लिम छात्रों पर हुई (2/9)
कार्रवाई पर नाराज़ हुआ था।

उसके पहले अगस्त 2018 में ये आयोग उन शहरी नक्सलों की गिरफ्तारी पर स्वतः संज्ञान ले कर तड़प उठा था और उनकी गिरफ़्तारी को नाजायज कहा था जिन्होनें प्रधानमंत्री मोदी की हत्या की भी साजिश की थी।

उस समय जानते हौ, कौन अध्यक्ष थे आयोग के, वो ही थे, (3/9)
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