जानिए क्या हुआ था 14 अगस्त 1947 की आधी रात को...

(नए मित्रों को जागरूक करने हेतु एक बार फिर ज्ञान की बात)

जनिए "ट्रांसफर ऑफ़ पावर एग्रीमेंट" क्या है?

आप सोच रहे होंगे कि 'सत्ता के हस्तांतरण की संधि' ये क्या है? आज पढ़िए सत्ता के हस्तांतरण की संधि (Transfer of Power (1/79)
Agreement) अर्थात भारत की स्वतंत्रता की संधि। ये इतनी भयावह संधि है कि यदि आप अंग्रेजों द्वारा सन 1615 से लेकर 1857 तक किये गए सभी 565 संधियों अथवा कहें कि षडयंत्र को जोड़ देंगे तो उस से भी अधिक भीषण और भयावह संधि है ये। 14 अगस्त 1947 की रात्रि को जो कुछ हुआ था वो (2/79)
वास्तव में स्वतंत्रता नहीं आई थी अपितु ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट हुआ था पंडित नेहरु और लोर्ड माउन्ट बेटन के बीच में। ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर और स्वतंत्रता ये दो अलग विषय हैं। स्वतंत्रता और सत्ता का हस्तांतरण ये दो अलग विषय हैं एवं सत्ता का हस्तांतरण कैसे होता है?
(3/79)
आप देखते होंगे क़ि एक पार्टी की सरकार है, वो चुनाव में पराजित जाये, दूसरी पार्टी की सरकार आती है तो दूसरी पार्टी का प्रधानमन्त्री जब शपथ ग्रहण करता है, तो वो शपथ ग्रहण करने के तुरंत पश्चात एक रजिस्टर पर हस्ताक्षर करता है, आप लोगों में से बहुतों ने देखा होगा, तो जिस (4/79)
रजिस्टर पर आने वाला प्रधानमन्त्री हस्ताक्षर करता है, उसी रजिस्टर को 'ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर' की बुक कहते हैं तथा उस पर हस्ताक्षर के पश्चात पुराना प्रधानमन्त्री नए प्रधानमन्त्री को सत्ता सौंप देता है एवं पुराना प्रधानमंत्री निकल कर बाहर चला जाता है।

यही नाटक हुआ था 14 अगस्त (5/79)
1947 की रात्रि को 12 बजे। लार्ड माउन्ट बेटन ने अपनी सत्ता पंडित नेहरु के हाथ में सौंपी थी, और हमने कह दिया कि स्वराज्य आ गया। कैसा स्वराज्य और काहे का स्वराज्य? अंग्रेजो के लिए स्वराज्य का अर्थ क्या था? और हमारे लिए स्वराज्य का आशय क्या था? ये भी समझ लीजिये। अंग्रेज कहते (6/79)
थे क़ि हमने स्वराज्य दिया, अर्थात अंग्रेजों ने अपना राज आपको सौंपा है जिससे कि आप लोग कुछ दिन इसे चला लो जब आवश्यकता पड़ेगी तो हम पुनः आ जायेंगे। ये अंग्रेजो की व्याख्या थी एवं भारतीय लोगों की व्याख्या क्या थी कि हमने स्वराज्य ले लिया तथा इस संधि के अनुसार ही भारत के दो (7/79)
टुकड़े किये गए एवं भारत और पाकिस्तान नामक दो Dominion States बनाये गए थे। ये Dominion State का अर्थ हिंदी में होता है एक बड़े राज्य के अधीन एक छोटा राज्य, ये शाब्दिक अर्थ है और भारत के सन्दर्भ में इसका वास्तविक अर्थ भी यही है। अंग्रेजी में इसका एक अर्थ है "One of the (8/79)
self-governing nations in the British Commonwealth" तथा दूसरा "Dominance or power through legal authority." Dominion State और Independent Nation में जमीन आसमान का अंतर होता है।

मतलब सीधा है क़ि हम (भारत और पाकिस्तान) आज भी अंग्रेजों के अधीन ही हैं। दुःख तो ये होता है कि (9/79)
उस समय के सत्ता के लालची लोगों ने बिना सोचे समझे अथवा आप कह सकते हैं क़ि पूरी मानसिक जागृत अवस्था में इस संधि को मान लिया, अथवा कहें सब कुछ समझ कर ये सब स्वीकार कर लिया एवं ये जो तथाकथित स्वतंत्रता प्राप्त हुई इसका कानून अंग्रेजों के संसद में बनाया गया और इसका नाम रखा (10/79)
गया Indian Independence Act अर्थात भारत के स्वतंत्रता का कानून तथा ऐसे कपट पूर्ण और धूर्तता से यदि इस देश को स्वतंत्रता मिली हो तो वो स्वतंत्रता, स्वतंत्रता है कहाँ? और इसीलिए गाँधी जी (महात्मा गाँधी) 14 अगस्त 1947 की रात को दिल्ली में नहीं आये थे। वो नोआखाली में थे (11/79)
और कोंग्रेस के बड़े नेता गाँधी जी को बुलाने के लिए गए थेकि बापू चलिए आप। गाँधी जी ने मना कर दिया था। क्यों ? गाँधी जी कहते थे कि मै मानता नहीं कि कोई स्वतंत्रता मिल रही है एवं गाँधी जी ने स्पष्ट कह दिया था कि ये स्वतंत्रता नहीं आ रही है सत्ता के हस्तांतरण का समझौता हो रहा (12/79)
है और गाँधी जी ने नोआखाली से प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी। उस प्रेस स्टेटमेंट के पहले ही वाक्य में गाँधी जी ने ये कहा कि मैं भारत के उन करोड़ों लोगों को ये सन्देश देना चाहता हूँ कि ये जो तथाकथित स्वतंत्रता (So Called Freedom) आ रही है ये मैं नहीं लाया। ये सत्ता के लालची (13/79)
लोग सत्ता के हस्तांतरण के चक्कर में फंस कर लाये है। मैं मानता नहीं कि इस देश में कोई आजादी आई है। और 14 अगस्त 1947 की रात को गाँधी जी दिल्ली में नहीं थे नोआखाली में थे। माने भारत की राजनीति का सबसे बड़ा पुरोधा जिसने हिन्दुस्तान की आज़ादी की लड़ाई की नीव रखी हो वो आदमी 14 (14/79)
अगस्त 1947 की रात को दिल्ली में मौजूद नहीं था। क्यों? इसका अर्थ है कि गाँधी जी इससे सहमत नहीं थे। (नोआखाली के दंगे तो एक बहाना था वास्तव में बात तो ये सत्ता का हस्तांतरण ही थी) और 14 अगस्त 1947 की रात्रि को जो कुछ हुआ है वो स्वतंत्रता नहीं आई... ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का (15/79)
एग्रीमेंट लागू हुआ था पंडित नेहरु और अंग्रेजी सरकार के बीच में। अब शर्तों की बात करता हूँ, सब का उल्लेख करना तो संभव नहीं है परन्तु कुछ महत्वपूर्ण शर्तों की उल्लेख अवश्य करूंगा जिसे एक आम भारतीय जानता है और उनसे परिचित है...

1. इस संधि की शर्तों के अनुसार हम आज भी (16/79)
अंग्रेजों के अधीन ही हैं। वो एक शब्द आप सब सुनते हैं न Commonwealth nations अभी कुछ दिन पहले दिल्ली में Commonwealth Games हुए थे आप सब को याद होगा ही और उसी में बहुत बड़ा घोटाला भी हुआ है। ये Commonwealth का अर्थ होता है 'समान संपत्ति'। किसकी समान सम्पति? ब्रिटेन की रानी (17/79)
की समान सम्पति। आप जानते हैं ब्रिटेन की महारानी हमारे भारत की भी महारानी है और वो आज भी भारत की नागरिक है और हमारे जैसे 71 देशों की महारानी है वो। Commonwealth में 71 देश हैं और इन सभी 71 देशों में जाने के लिए ब्रिटेन की महारानी को वीजा की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि (18/79)
वो अपने ही देश में जा रही है, परन्तु भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को ब्रिटेन में जाने के लिए वीजा की आवश्यकता होती है क्योंकि वो दूसरे देश में जा रहे हैं अर्थात इसका अर्थ निकालें तो ये हुआ कि या तो ब्रिटेन की महारानी भारत की नागरिक है अथवा फिर भारत आज भी ब्रिटेन का (19/79)
उपनिवेश है इसलिए ब्रिटेन की रानी को पासपोर्ट और वीजा की आवश्यकता नहीं होती है। यदि दोनों बाते सही हैं तो 15 अगस्त 1947 को हमारी स्वतंत्रता की बात कही जाती है वो मिथ्या है एवं Commonwealth Nations में हमारी एंट्री जो है वो एक Dominion State के रूप में है ना क़ि Independent (20/79)
Nation के रूप में। इस देश में प्रोटोकोल है क़ि जब भी नए राष्ट्रपति बनेंगे तो 21 तोपों की सलामी दी जाएगी उसके अतिरिक्त किसी को भी नहीं। परन्तु ब्रिटेन की महारानी आती है तो उनको भी 21 तोपों की सलामी दी जाती है, इसका क्या अर्थ है? और पिछली बार ब्रिटेन की महारानी यहाँ आयी थी (21/79)
तो एक निमंत्रण पत्र छपा था और उस निमंत्रण पत्र में ऊपर जो नाम था वो ब्रिटेन की महारानी का था और उसके नीचे भारत के राष्ट्रपति का नाम था अर्थात हमारे देश का राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक नहीं है। ये है राजनितिक दासता, हम कैसे मानें क़ि हम एक स्वतंत्र देश में रह रहे हैं। एक (22/79)
शब्द आप सुनते होंगे High Commission ये अंग्रेजों का एक दास देश दुसरे दास देश के यहाँ खोलता है परन्तु इसे एम्बेसी नहीं कहा जाता। एक मानसिक दासता का उदाहरण भी देखिये... हमारे यहाँ के समाचार पत्रों में आप देखते होंगे क़ि कैसे शब्द प्रयोग होते हैं (ब्रिटेन की महारानी नहीं) (23/79)
महारानी एलिज़ाबेथ, (ब्रिटेन के प्रिन्स चार्ल्स नहीं) प्रिन्स चार्ल्स, (ब्रिटेन की प्रिंसेस नहीं) प्रिंसेस डायना (अब तो वो हैं नहीं), अब तो एक और प्रिन्स विलियम भी आ गए है।

2. भारत का नाम INDIA रहेगा और पूरे संसार में भारत का नाम इंडिया प्रचारित किया जायेगा तथा सारे (24/79)
सरकारी दस्तावेजों में इसे इंडिया के ही नाम से संबोधित किया जायेगा. हमारे व आपके लिए ये भारत है परन्तु दस्तावेजों में ये इंडिया है। संविधान के प्रस्तावना में ये लिखा गया है "India that is Bharat" जब क़ि होना ये चाहिए था "Bharat that was India" परन्तु दुर्भाग्य इस महान देश (25/79)
का क़ि ये भारत के स्थान पर इंडिया हो गया। ये इसी संधि के शर्तों में से एक है। अब हम भारत के लोग जो इंडिया कहते हैं वो कहीं से भी भारत नहीं है। कुछ दिन पहले मैं एक लेख पढ़ रहा था अब किसका था याद नहीं आ रहा है उसमे उस व्यक्ति ने बताया था कि इंडिया का नाम बदल के भारत कर दिया (26/79)
जाये तो इस देश में आश्चर्यजनक बदलाव आ जायेगा तथा ये विश्व की बड़ी शक्ति बन जायेगा। अब उस व्यक्ति की बात में कितनी सत्यता है मैं नहीं जानता, परन्तु भारत जब तक भारत था तब तक तो संसार में सबसे आगे था और ये जब से इंडिया हुआ है तब से पीछे, पीछे और पीछे ही होता जा रहा है।
(27/79)
3. भारत की संसद में वन्दे मातरम नहीं गाया जायेगा अगले 50 वर्षों तक अर्थात 1997 तक। 1997 में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने इस समस्या को उठाया तब जाकर पहली बार इस तथाकथित स्वतंत्र देश की संसद में वन्देमातरम गाया गया। 50 वर्षों तक नहीं गाया गया क्योंकि ये भी इसी संधि की (28/79)
शर्तों में से एक है और वन्देमातरम को लेकर मुसलमानों में जो भ्रम फैलाया गया वो अंग्रेजों के दिशानिर्देश पर ही हुआ था। इस गीत में कुछ भी ऐसा आपत्तिजनक नहीं है जो मुसलमानों के मन को ठेस पहुचाये।

4. इस संधि की शर्तों के अनुसार सुभाष चन्द्र बोस को जीवित अथवा मृत अंग्रेजों (29/79)
के हवाले करना था। यही कारण रहा क़ि सुभाष चन्द्र बोस अपने देश के लिए लापता रहे और कहाँ मर खप गए ये आज तक किसी को ज्ञात नहीं है। समय समय पर कई अफवाहें फैली परन्तु सुभाष चन्द्र बोस का पता नहीं लगा और ना ही किसी ने उनको ढूँढने में रूचि दिखाई। अर्थात भारत का एक महान (30/79)
स्वतंत्रता सेनानी (जो वास्तव में भारत के 'राष्ट्रपिता' थे, गाँधी जी तो 'प्लांट' किये हुए राष्ट्रपिता थे, ये भी देश का दुर्भाग्य ही था) अपने ही देश के लिए बेगाने हो गए। सुभाष चन्द्र बोस ने आजाद हिंद फौज बनाई थी ये तो आप सब लोगों को ज्ञात होगा ही परन्तु महत्वपूर्ण बात ये (31/79)
है क़ि ये 1942 में आज़ाद हिंद फ़ौज बनाई गयी थी और उसी समय द्वितीय विश्वयुद्ध चल रहा था। सुभाष चन्द्र बोस ने इस काम में जर्मन और जापानी लोगों से सहायता ली थी जो कि अंग्रेजों के शत्रु थे और इस आजाद हिंद फौज ने अंग्रेजों को सबसे अधिक हानि पहुंचाई थी। जर्मनी के हिटलर और (32/79)
इंग्लैंड के एटली और चर्चिल के व्यक्तिगत विवादों के कारण से ये द्वितीय विश्वयुद्ध हुआ था और दोनों देश एक दूसरे के कट्टर शत्रु थे। एक शत्रु देश की सहायता से सुभाष चन्द्र बोस ने अंग्रेजों के नाकों चने चबवा दिए थे। एक तो अंग्रेज उधर विश्वयुद्ध में लगे थे दूसरी ओर उन्हें भारत (33/79)
में भी सुभाष चन्द्र बोस के कारण से कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा था। इसलिए वे सुभाष चन्द्र बोस के शत्रु थे।

5. इस संधि की शर्तों के अनुसार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, अशफाकुल्लाह, रामप्रसाद विस्मिल जैसे लोग आतंकवादी थे और यही हमारे पाठ्यक्रम में पढाया जाता था। बहुत दिनों (34/79)
तक तथा अभी कुछ समय पहले तक ICSE बोर्ड के किताबों में भगत सिंह को आतंकवादी ही बताया जा रहा था। वो तो भला हो कुछ लोगों का जिन्होंने नयायालय में एक केस किया और अदालत ने इसे हटाने का आदेश दिया है (ये समाचार मैंने इन्टरनेट पर ही अभी कुछ दिन पहले देखा था)।

6. आप भारत के सभी (35/79)
बड़े रेलवे स्टेशन पर एक पुस्तक की दुकान देखते होंगे "व्हीलर बुक स्टोर" वो इसी संधि के नियमों के अनुसार है। ये व्हीलर कौन था? ये व्हीलर सबसे बड़ा अत्याचारी था। इसने इस देश की हजारों माँ, बहन और बेटियों के साथ बलात्कार किया था। इसने किसानों पर सबसे अधिक गोलियां चलवाई थी। (36/79)
1857 की क्रांति के पश्चात कानपुर के निकट बिठुर में व्हीलर व नील नामक दो अंग्रजों ने यहाँ के सभी 24 हजार लोगों को हत्या करवा दी थी चाहे वो गोदी का बच्चा हो अथवा मरणासन्न स्थिति में पड़ा कोई वृद्ध। इस व्हीलर के नाम से इंग्लैंड में एक एजेंसी प्रारंभ हुई थी तथा वही भारत में आ (37/79)
गयी। भारत स्वतंत्र हुआ तो ये समाप्त होना चाहिए था, नहीं तो कम से कम नाम में ही परिवर्तन कर देते। परन्तु वो परिवर्तित नहीं किया गया क्योंकि ये इस संधि में है।

7. इस संधि की शर्तों के अनुसार अंग्रेज देश छोड़ के चले जायेंगे परन्तु इस देश में कोई भी नियम चाहे वो किसी क्षेत्र (38/79)
में हो परिवर्तित नहीं जायेगा। इसलिए आज भी इस देश में 34735 नियम वैसे के वैसे चल रहे हैं जैसे अंग्रेजों के समय चलता था। Indian Police Act, Indian Civil Services Act (अब इसका नाम है Indian Civil Administrative Act), Indian Penal Code (Ireland में भी IPC चलता है और Ireland (39/79)
में जहाँ "I" का अर्थ Irish है वहीँ भारत के IPC में "I" का अर्थ Indian है शेष सब के सब कंटेंट एक ही है, कोमा और फुल स्टॉप का भी अंतर नहीं है) Indian Citizenship Act, Indian Advocates Act, Indian Education Act, Land Acquisition Act, Criminal Procedure Act, Indian Evidence (40/79)
Act, Indian Income Tax Act, Indian Forest Act, Indian Agricultural Price Commission Act सब के सब आज भी वैसे ही चल रहे हैं बिना फुल स्टॉप और कोमा बदले हुए।

8. इस संधि के अनुसार अंग्रेजों द्वारा बनाये गए भवन जैसे के तैसे रखे जायेंगे। नगर का नाम, सड़क का नाम सब के सब वैसे (41/79)
ही रखे जायेंगे। आज देश का संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, राष्ट्रपति भवन कितने नाम गिनाऊँ सब के सब वैसे ही खड़े हैं और हमें मुंह चिढ़ा रहे हैं। लार्ड डलहौजी के नाम पर डलहौजी नगर है, वास्को डी गामा नामक शहर है (वैसे वो पुर्तगाली था) रिपन रोड, कर्जन रोड, मेयो रोड, (42/79)
बेंटिक रोड, (पटना में) फ्रेजर रोड, बेली रोड, ऐसे हजारों भवन और रोड हैं, सब के सब वैसे के वैसे ही हैं। आप भी अपने नगर में देखिएगा वहां भी कोई न कोई भवन, सड़क उन लोगों के नाम से होंगे। हमारे गुजरात में एक नगर है सूरत, इस सूरत में एक बिल्डिंग है उसका नाम है कूपर विला। (43/79)
अंग्रेजों को जब जहाँगीर ने व्यापार का लाइसेंस दिया था तो सबसे पहले वो सूरत में आये थे और सूरत में उन्होंने इस बिल्डिंग का निर्माण किया था। ये दासता का पहला अध्याय आज तक सूरत शहर में खड़ा है।

9. हमारे यहाँ शिक्षा व्यवस्था अंग्रेजों की है क्योंकि ये इस संधि में लिखा है और (44/79)
हास्यप्रद ये है क़ि अंग्रेजों ने हमारे यहाँ एक शिक्षा व्यवस्था दी और अपने यहाँ अलग प्रकार की शिक्षा व्यवस्था रखी है। हमारे यहाँ शिक्षा में डिग्री का महत्व है और उनके यहाँ ठीक विपरीत है। मेरे पास ज्ञान है और मैं कोई अविष्कार करता हूँ तो भारत में पूछा जायेगा क़ि तुम्हारे (45/79)
पास कौन सी डिग्री है? यदि नहीं है तो मेरे अविष्कार और ज्ञान का कोई महत्व नहीं है। इसके विपरीत उनके यहाँ ऐसा कदापि नहीं है। आप यदि कोई अविष्कार करते हैं और आपके पास ज्ञान है परन्तु कोई डिग्री नहीं हैं तो कोई बात नहीं आपको प्रोत्साहित किया जायेगा। नोबेल पुरस्कार पाने के लिए (46/79)
आपको डिग्री की आवश्यकता नहीं होती है। हमारे शिक्षा तंत्र को अंग्रेजों ने डिग्री में बांध दिया था जो आज भी वैसे के वैसा ही चल रहा है। ये जो 30 नंबर का पास मार्क्स आप देखते हैं वो उसी शिक्षा व्यवस्था की देन है, अर्थात आप भले ही 70 नंबर में फेल है परन्तु 30 नंबर लाये है तो (47/79)
पास हैं, ऐसे शिक्षा तंत्र से क्या उत्पन्न हो रहे हैं वो सब आपके सामने ही है और यही अंग्रेज चाहते थे। आप देखते होंगे क़ि हमारे देश में एक विषय चलता है जिसका नाम है अन्थ्रोपोलोग्य। जानते है इसमें क्या पढाया जाता है? इसमें दास लोगों क़ि मानसिक अवस्था के बारे में पढाया जाता (48/79)
है और ये अंग्रेजों ने ही इस देश में प्रारंभ किया था और आज स्वतंत्रता के 64 वर्षों के पश्चात भी ये इस देश के विश्वविद्यालयों में पढाया जाता है और यहाँ तक क़ि सिविल सर्विस की परीक्षा में भी ये चलता है।

10. इस संधि की शर्तों के अनुसार हमारे देश में आयुर्वेद को कोई सहयोग (49/79)
नहीं दिया जायेगा अर्थात हमारे देश की विद्या हमारे ही देश में समाप्त हो जाये ये षडंत्र किया गया। आयुर्वेद को अंग्रेजों ने नष्ट करने का भरसक प्रयास किया था परन्तु ऐसा कर नहीं पाए। संसार में जितने भी पैथी हैं उनमे ये होता है क़ि पहले आप रोगग्रस्त हों तो आपका इलाज होगा परन्तु (50/79)
आयुर्वेद एक ऐसी विद्या है जिसमे कहा जाता है क़ि आप रोगग्रस्त ही मत पड़िए। आपको मैं एक सच्ची घटना बताता हूँ, जोर्ज वाशिंगटन जो क़ि अमेरिका का पहला राष्ट्रपति था वो दिसम्बर 1799 में रोग शैय्या पर पड़ा और जब उसका बुखार ठीक नहीं हो रहा था तो उसके डाक्टरों ने कहा क़ि इनके शरीर (51/79)
आयुर्वेद एक ऐसी विद्या है जिसमे कहा जाता है क़ि आप रोगग्रस्त ही मत पड़िए। आपको मैं एक सच्ची घटना बताता हूँ, जोर्ज वाशिंगटन जो क़ि अमेरिका का पहला राष्ट्रपति था वो दिसम्बर 1799 में रोग शैय्या पर पड़ा और जब उसका बुखार ठीक नहीं हो रहा था तो उसके डाक्टरों ने कहा क़ि इनके शरीर (51/79)
का रक्त दूषित हो गया है। जब इसको निकाला जायेगा तो ये बुखार ठीक होगा और उसके दोनों हाथों क़ि नसें डाक्टरों ने काट दी और रक्त निकल जाने के कारण से जोर्ज वाशिंगटन का देहांत हो गया। ये घटना 1799 की है और 1780 में एक अंग्रेज भारत आया था और यहाँ से प्लास्टिक सर्जरी सीख कर गया (52/79)
था अर्थात कहने आशय ये है क़ि हमारे देश का चिकित्सा विज्ञान कितना विकसित था उस समय और ये सब आयुर्वेद के कारण से था और उसी आयुर्वेद को आज हमारी सरकार ने हाशिये पर पंहुचा दिया है।

11. इस संधि के अनुसार हमारे देश में गुरुकुल संस्कृति को कोई प्रोत्साहन नहीं दिया जायेगा। (53/79)
हमारे देश के समृद्धि और यहाँ उपस्थित उच्च तकनीक के कारण ये गुरुकुल ही थे और अंग्रेजों ने सबसे पहले इस देश की गुरुकुल परंपरा को ही तोडा था, मैं यहाँ लार्ड मेकॉले की एक उक्ति को यहाँ बताना चाहूँगा जो उसने 2 फ़रवरी 1835 को ब्रिटिश संसद में दिया था, उसने कहा था...

“I have (54/79)
traveled across the length and breadth of India and have not seen one person who is a beggar, who is a thief, such wealth I have seen in this country, such high moral values, people of such caliber, that I do not think we would ever conquer this country, unless we break (55/79)
the very backbone of this nation, which is her spiritual and cultural heritage, and, therefore, I propose that we replace her old and ancient education system, her culture, for if the Indians think that all that is foreign and English is good and greater than their own, (56/79)
they will lose their self esteem, their native culture and they will become what we want them, a truly dominated nation”।

गुरुकुल का अर्थ हम लोग केवल वेद, पुराण,उपनिषद ही समझते हैं जो कि हमारी मूर्खता है यदि आज की भाषा में कहूं तो ये गुरुकुल जो होते थे वो सब के सब उच्च (57/79)
they will lose their self esteem, their native culture and they will become what we want them, a truly dominated nation”।

गुरुकुल का अर्थ हम लोग केवल वेद, पुराण,उपनिषद ही समझते हैं जो कि हमारी मूर्खता है यदि आज की भाषा में कहूं तो ये गुरुकुल जो होते थे वो सब के सब उच्च (57/79)
शिक्षा संस्थान हुआ करते थे।

12. इस संधि में एक और विशेष बात है, इसमें कहा गया है क़ि यदि हमारे देश के (भारत के) न्यायालय में कोई ऐसा केस आ जाये जिसके निर्णय के लिए कोई कानून न हो, इस देश में या उसके निर्णय को लेकर संविधान में भी कोई जानकारी न हो तो साफ़ साफ़ संधि में (58/79)
लिखा गया है क़ि वो सारे केसों का निर्णय अंग्रेजों की न्याय पद्धति के आदर्शों के आधार पर ही होगा, भारतीय न्याय पद्धति का आदर्श उसमें लागू नहीं होगा। कितनी लज्जास्पद स्थिति है ये क़ि हमें अभी भी अंग्रेजों का ही अनुसरण करना होगा।

13. भारत में स्वतंत्रता की लड़ाई हुई तो (59/79)
वो ईस्ट इंडिया कम्पनी के विरूद्ध था और संधि की गणनानुसार ईस्ट इंडिया कम्पनी को भारत छोड़ कर जाना था और वो चली भी गयी। परन्तु इस संधि में ये भी है क़ि ईस्ट इंडिया कम्पनी तो जाएगी भारत से पर शेष 126 विदेशी कंपनियां भारत में रहेंगी और भारत सरकार उनको पूरा संरक्षण देगी और उसी (60/79)
का परिणाम है क़ि ब्रुक बोंड, लिप्टन, बाटा, हिंदुस्तान लीवर (अब हिंदुस्तान यूनिलीवर) जैसी 126 कंपनियां स्वतंत्रता के पश्चात भी इस देश में बची रह गयी और लूटती रही और आज भी वो सब लूट रही है।

14. अंग्रेजी का स्थान अंग्रेजों के जाने के बाद वैसे ही रहेगा भारत में जैसा क़ि अभी (61/79)
(1946 में) है और ये भी इसी संधि का भाग है। आप देखिये क़ि हमारे देश में, संसद में, न्यायपालिका में, कार्यालयों में हर कहीं अंग्रेजी, अंग्रेजी और अंग्रेजी है जब क़ि इस देश में 99% लोगों को अंग्रेजी नहीं आती है तथा उन 1% लोगों को देखो क़ि उन्हें मालूम ही नहीं रहता है क़ि (62/79)
उनको पढना क्या है और UNO में जा कर भारत के स्थान पर पुर्तगाल का भाषण पढ़ जाते हैं।

15. आप में से बहुत लोगों को स्मरण होगा क़ि हमारे देश में स्वतंत्रता के 50 साल के पश्चात तक संसद में वार्षिक बजट संध्या को 5:00 बजे पेश किया जाता था। जानते है क्यों? क्योंकि जब हमारे देश (63/79)
में संध्या के 5:00 बजते हैं तो लन्दन में सुबह के 11:30 बजते हैं और अंग्रेज अपनी सुविधा से उनको सुन सके और उस बजट की समीक्षा कर सके। इतनी दासता में रहा है ये देश. ये भी इसी संधि का भाग है।

16. 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध प्रारंभ हुआ तो अंग्रेजों ने भारत में राशन कार्ड का (64/79)
सिस्टम बनाया क्योंकि द्वितीय विश्वयुद्ध में अंग्रेजों को अनाज की आवश्यकता थी और वे ये अनाज भारत से चाहते थे। इसीलिए उन्होंने यहाँ जनवितरण प्रणाली और राशन कार्ड प्रारंभ किया। वो प्रणाली आज भी लागू है इस देश में क्योंकि वो इस संधि में है और इस राशन कार्ड को पहचान पत्र के (65/79)
रूप में इस्तेमाल उसी समय प्रारंभ किया गया और वो आज भी जारी है। जिनके पास राशन कार्ड होता था उन्हें ही वोट देने का अधिकार होता था। आज भी देखिये राशन कार्ड ही मुख्य पहचान पत्र है इस देश में।

17. अंग्रेजों के आने के पहले इस देश में गायों को काटने का कोई कत्लखाना नहीं था। (66/79)
मुगलों के समय तो ये कानून था क़ि कोई यदि गाय को काट दे तो उसका हाथ काट दिया जाता था। अंग्रेज यहाँ आये तो उन्होंने पहली बार कलकत्ता में गाय काटने का कत्लखाना प्रारंभ किया, पहला मदिरालय प्रारंभ किया, पहला वेश्यालय प्रारंभ किया और इस देश में जहाँ जहाँ अंग्रेजों की छावनी हुआ (67/79)
करती थी वहां वहां वेश्याघर बनाये गए, वहां वहां मदिरालय खुला, वहां वहां गाय के काटने के लिए कत्लखाना खुला। ऐसे पूरे देश में 355 छावनियां थी उन अंग्रेजों की। अब ये सब क्यों बनाये गए थे ये आप सब सरलता से समझ सकते हैं। अंग्रेजों के जाने के पश्चात ये सब समाप्त हो जाना चाहिए (68/79)
था परन्तु नहीं हुआ क्योंक़ि ये भी इसी संधि में है।

18. हमारे देश में जो संसदीय लोकतंत्र है वो वास्तव में अंग्रेजों का वेस्टमिन्स्टर सिस्टम है। ये अंग्रेजो के इंग्लैंड की संसदीय प्रणाली है। ये कहीं से भी न संसदीय है और ना ही लोकतान्त्रिक है। परन्तु इस देश में वही सिस्टम (69/79)
है क्योंकि वो इस संधि में कहा गया है।

ऐसी हजारों शर्तें हैं। मैंने अभी जितना आवश्यक समझा उतना लिखा है। सारांश यही है क़ि इस देश में जो कुछ भी अभी चल रहा है वो सब अंग्रेजों का है हमारा कुछ नहीं है। अब आप के मन में ये प्रश्न उठ रहा होगा क़ि पहले के राजाओं को तो अंग्रेजी (70/79)
नहीं आती थी तो वो भयावह संधियों (षडयंत्र) के जाल में फँस कर अपना राज्य गवां बैठे परन्तु स्वतंत्रता के समय वाले नेताओं को तो अच्छी अंग्रेजी आती थी फिर वो कैसे इन संधियों के जाल में फँस गए। इसका कारण थोडा भिन्न है क्योंकि स्वतंत्रता के समय वाले नेता अंग्रेजों को अपना आदर्श (71/79)
मानते थे, इसलिए उन्होंने जानबूझ कर ये संधि की थी। वो मानते थे क़ि अंग्रेजों से बढियां कोई नहीं है इस संसार में। भारत की स्वतंत्रता के समय के नेताओं के भाषण आप पढेंगे तो आप पाएंगे क़ि वो केवल देखने में ही भारतीय थे पर मन, कर्म और वचन से अंग्रेज ही थे। वे कहते थे क़ि सारा (72/79)
आदर्श है तो अंग्रेजों में, आदर्श शिक्षा व्यवस्था है तो अंग्रेजों की, आदर्श अर्थव्यवस्था है तो अंग्रेजों की, आदर्श चिकित्सा व्यवस्था है तो अंग्रेजों की, आदर्श कृषि व्यवस्था है तो अंग्रेजों की, आदर्श न्याय व्यवस्था है तो अंग्रेजों की, आदर्श कानून व्यवस्था है तो अंग्रेजों (73/79)
की। हमारे स्वतंत्रता के समय के नेताओं को अंग्रेजों से बड़ा आदर्श कोई दिखता नहीं था और वे ताल ठोक ठोक कर कहते थे क़ि हमें भारत अंग्रेजों जैसा बनाना है। अंग्रेज हमें जिस मार्ग पर चलाएंगे उसी मार्ग पर हम चलेंगे। इसीलिए वे ऐसी मूर्खतापूर्ण संधियों में फंसे। यदि आप अभी तक (74/79)
उन्हें देशभक्त मान रहे थे तो ये भ्रम मन से निकाल दीजिये तथा आप यदि समझ रहे हैं क़ि वो abc पार्टी के नेता बढ़िया नहीं थे अथवा हैं तो xyz पार्टी के नेता भी दूध के धुले नहीं हैं। आप किसी को भी बढ़िया मत समझिएगा क्योंक़ि स्वतंत्रता के पश्चात के इन 65 सालों में सब ने चाहे (75/79)
वो राष्ट्रीय पार्टी हो अथवा प्रादेशिक पार्टी, प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता का स्वाद तो सबो ने चखा ही है।

तो भारत की दासता जो अंग्रेजों के ज़माने में थी, अंग्रेजों के जाने के 64 वर्ष के पश्चात आज 2013 में भी जस क़ि तस है क्योंकि हमने संधि कर रखी है (76/79)
और देश को इन भयानक संधियों के मकड़जाल में फंसा रखा है। बहुत दुःख होता है अपने देश के बारे जानकार और सोच कर। मैं ये सब कोई प्रसन्नता से नहीं लिखता हूँ ये मेरे मन की पीड़ा है जो मैं आप लोगों से शेयर करता हूँ।

ये सब बदलना आवश्यक है परन्तु हमें सरकार नहीं व्यवस्था में (77/79)
परिवर्तन करना होगा एवं आप यदि ये सोच रहे हैं क़ि कोई 'अवतार' आएगा और सब बदल देगा तो आप भ्रम में जी रहे हैं। कोई शिवजी, कोई हनुमान जी, कोई राम जी, कोई कृष्ण जी नहीं आने वाले। आपको और हमको ही ये सारे अवतार में आना होगा, हमें ही सड़कों पर उतरना होगा और इस व्यवस्था को जड़ (78/79)
मूल से समाप्त करना होगा। भगवान भी उसी की सहायता करते हैं जो अपनी सहायता स्वयं करता है।

इतने लम्बे लेख को आपने धैर्यपूर्वक पढ़ा इसके लिए आपका कोटि कोटि धन्यवाद। मेरा उद्देश्य बस इतना ही है कि ज्ञान का प्रवाह होते रहने दीजिये।

#Repost

#साभार
(79/79)
🙏🙏

• • •

Missing some Tweet in this thread? You can try to force a refresh
 

Keep Current with सनातनी हिन्दू 100% Follow Back

सनातनी हिन्दू 100% Follow Back Profile picture

Stay in touch and get notified when new unrolls are available from this author!

Read all threads

This Thread may be Removed Anytime!

PDF

Twitter may remove this content at anytime! Save it as PDF for later use!

Try unrolling a thread yourself!

how to unroll video
  1. Follow @ThreadReaderApp to mention us!

  2. From a Twitter thread mention us with a keyword "unroll"
@threadreaderapp unroll

Practice here first or read more on our help page!

More from @Modified_Hindu8

Aug 14
सलमान रुश्दी पर जानलेवा हमला 1989 का फतवा पूरा करने के लिए किया गया? इल्हान ओमर “इस्लामोफोबिया” से ऐसे लड़ेगी?

न्यूयोर्क में लेखक सलमान रुश्दी पर जान लेवा हमला करने वाला तब पैदा भी नहीं हुआ जब ईरानी सुप्रीम धार्मिक नेता Ayatollah Ruhollah Khomeini ने 14 फरवरी, 1989 को (1/6)
रुश्दी की जान लेने के लिए 60 लाख डॉलर का फतवा जारी किया था।

ये हमला करने वाला कैलिफ़ोर्निया में जन्मा New Jersy का रहने वाला 24 वर्षीय हादी मतार है। रुश्दी पर फतवा उसकी किताब “Satanic Verses” के लिए जारी किया गया जिसे इस्लाम के खिलाफ माना गया।

इस किताब के लिए ईरान ने (2/6)
फतवा जारी कर दिया मगर ना बैन ईरान ने लगाया और ना किसी इस्लामिक देश ने मगर सबसे पहले बैन लगाया राजीव गांधी ने जिसके बाद सूडान, बांग्लादेश, श्रीलंका और साउथ अफ्रीका ने लगाया।

ऐसा बताया गया है कि 1998 में ईरान सरकार ने खुद को फतवे से अलग कर लिया था और कहा था कि इसे पूरा न (3/6)
Read 8 tweets
Aug 14
14 अगस्त : विभाजन विभीषिका दिवस

15 अगस्त : संकल्प दिवस

14 अगस्त मेरे लिये पीड़ा और विभाजन के दंश का दिन है और 15 अगस्त, भारत के स्वतंत्रता दिवस के साथ साथ 'अखंड भारत' के संकल्प का दिन।

मैं पामीर के पठारों पर रूखे पहाड़ों का दृश्य देखता हूँ तो ढूंढता हूँ वह (1/9) Image
विष्णुपद पर्वत जहाँ हमारे चंद्रगुप्त विक्रमादित्य 'महान' ने अपना लौहस्तंभ रोपा था, जो खड़ा है आज महरौली में, उनकी परंपरा और संकल्प के संवाहक महाराज अनंगपाल तोमर के इस संकल्प के साथ कि मैं इस भूमि को सच्चे अर्थों में आर्यावर्त बनाऊँगा।

मैं देखता हूँ काबुल व जाबुल को तब (2/9)
मुझे दिखाई देते हैं जीवित ही चिता में प्रवेश करते हुये महाराज जयपाल और वह चिता ह्रदय में अपनी पूर्ण ज्वालाओं के साथ धधकती प्रतीत होती है।

मैं देखता स्वात व चित्राल की घाटी को, प्राचीन गंधर्वों की भूमि जिसके वंशज 'हिंदू कलश समुदाय' के रूप में आर्यों की सुंदर संतानों (3/9)
Read 11 tweets
Aug 14
भगवान राम हिंगलाज माता के मंदिर गये, यह वहां की लोकस्मृति है।

भगवान राम ने भरत के सेनापतित्व में गंधर्वों को दंडित करने के लिए सेनाएं भेजीं, यह रामायण में दर्ज है।

सम्राट श्रीराम ने अफगानिस्तान को भारत की सुरक्षा दीवार मानते हुए भरत के नेतृत्व में आनवों की सहायता के लिए (1/3) Image
भरत के नेतृत्व में सेना भेजी और पूरे अभियान का निरीक्षण हिंगलाज माता के 'शक्ति स्थल' से किया, यह मेरी ऐतिहासिक दृष्टि है।

प्रमाण है- भरत के पुत्रों तक्ष व पुष्कल के नेतृत्व में अफगानों पर निगरानी के लिए बनाई गई छावनियाँ जो पुष्कलावती और तक्षशिला के नाम से प्रसिद्ध नगर (2/3)
बनीं और सम्पूर्ण अभियान का हिंगलाज से निरीक्षण कर रहे श्रीराम ने अपने पुत्रों लव व कुश के नेतृत्व में तक्ष व पुष्कल की सहायता व प्रबलीकरण के लिए दो अतिरिक्त छावनियों का निर्माण किया जो आज लाहौर (लवपुर) और कसूर (कुशपुर) के नाम से प्रसिद्ध हैं।

#साभार
(3/3)
Read 5 tweets
Aug 14
1951 में कांग्रेस सरकार ने "हिंदू धर्म दान एक्ट" पास किया था। इस एक्ट के जरिए कांग्रेस ने राज्यों को अधिकार दे दिया कि वो किसी भी मंदिर को सरकार के अधीन कर सकते हैं।

इस एक्ट के बनने के बाद से आंध्र प्रदेश सरकार नें लगभग 34,000 मंदिर को अपने अधीन ले लिया था। कर्नाटक, (1/7)
महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु ने भी मंदिरों को अपने अधीन कर दिया था। इसके बाद शुरू हुआ मंदिरों के चढ़ावे में भ्रष्टाचार का खेल। उदाहरण के लिए तिरुपति बालाजी मंदिर की सालाना कमाई लगभग 3500 करोड़ रूपए है। मंदिर में रोज बैंक से दो गाड़ियां आती हैं और मंदिर को मिले चढ़ावे की (2/7)
रकम को ले जाती हैं। इतना फंड मिलने के बाद भी तिरुपति मंदिर को सिर्फ 7 % फंड वापस मिलता है, रखरखाव के लिए।

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री YSR रेड्डी ने तिरुपति की 7 पहाड़ियों में से 5 को सरकार को देने का आदेश दिया था। इन पहाड़ियों पर चर्च का निर्माण किया जाना था। मंदिर (3/7)
Read 9 tweets
Aug 14
किसी भी देश को मुसलमान बनाने में मुसलमानों ने 20 वर्ष नहीं लिए और भारत में 800 वर्ष संघर्ष करने के बाद भी मेवाड़ के शेर महाराणा राजसिंह ने अपने घोड़े पर भी इस्लाम की मुहर नहीं लगने दी!

महाराणा प्रताप, दुर्गादास राठौड़, मिहिरभोज, रानी दुर्गावती, अपनी मातृभूमि के लिए (1/9) Image
प्राण त्याग दिया!

एक समय ऐसा आ गया था, लड़ते लड़ते राजपूत केवल 2% पर आकर ठहर गए! एक बार पूरा विश्व देखें, और आज अपना वर्तमान देखें! जिन मुसलमानों ने 20 वर्ष में विश्व की आधी जनसंख्या को मुसलमान बना दिया, वह भारत में केवल पाकिस्तान बाङ्ग्लादेश तक सिमट कर ही क्यों रह गए?
(2/9)
राजा भोज, विक्रमादित्य, नागभट्ट प्रथम और नागभट्ट द्वितीय, चन्द्रगुप्त मौर्य, बिन्दुसार, समुद्रगुप्त, स्कन्द गुप्त, छत्रसाल बुन्देला, आल्हा उदल, राजा भाटी, भूपत भाटी, चाचादेव भाटी, सिद्ध श्री देवराज भाटी, कानड़ देव चौहान, वीरमदेव चौहान, हठी हम्मीर देव चौहान, विग्रह राज (3/9)
Read 11 tweets
Aug 14
पुर्तगाल में एक कानून है कि यदि कोई विदेशी दंपति का बच्चा पुर्तगाल में पैदा होता है तब पुर्तगाल सरकार उस बच्चे को तुरंत पुर्तगाल की नागरिकता देती है और 7 दिन में बच्चे को पुर्तगीज पासपोर्ट मिल जाता है।

जबकि यूरोप के दूसरे देशों में यह नियम है कि यदि उनके देश में कोई (1/4)
विदेशी दंपति से बच्चा पैदा होता है तब वह बच्चे के ऊपर निर्भर करता है कि वह बालिग होने के बाद कौन से देश की नागरिकता लेना चाहेगा, यानी 18 साल की उम्र में जाकर बच्चे को यह निर्णय करना होता है कि वह भारतीय नागरिक रहेगा या फिर उस देश की नागरिकता लेगा।

फिनलैंड नॉर्वे स्वीडन (2/4)
डेनमार्क में नौकरी करने वाले या पढ़ने वाले बहुत से भारतीय डिलीवरी के लिए अपनी पत्नी को पुर्तगाल ले कर जाते हैं।

मेरे को कई गुजराती मित्र, जिनके सोसायटी में मैं रुका था, बोलने लगे इंशाल्लाह जेपी भाई अभी आप माशा आला जवान है कोई ज्यादा उम्र नहीं है भाभी जी को लेकर पुर्तगाल (3/4)
Read 6 tweets

Did Thread Reader help you today?

Support us! We are indie developers!


This site is made by just two indie developers on a laptop doing marketing, support and development! Read more about the story.

Become a Premium Member ($3/month or $30/year) and get exclusive features!

Become Premium

Don't want to be a Premium member but still want to support us?

Make a small donation by buying us coffee ($5) or help with server cost ($10)

Donate via Paypal

Or Donate anonymously using crypto!

Ethereum

0xfe58350B80634f60Fa6Dc149a72b4DFbc17D341E copy

Bitcoin

3ATGMxNzCUFzxpMCHL5sWSt4DVtS8UqXpi copy

Thank you for your support!

Follow Us on Twitter!

:(