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भगवान महादेव के भक्त विष्णु अंशावतार #परशुराम जी व भगवान दत्रातेय के परम् भक्त सुदर्शनचक्र पुर्णावतार #सहस्त्रबाह अर्जुन जी की सत्य प्रमाणित जानकारी

सहस्त्रार्जुन जी एक धर्मपरायण,कर्तव्यनिष्ठ #वैदिक सनातन धर्म के पालक व श्रेष्ठ #प्रजा पालक व राष्ट्र व धर्म के महान रक्षकथे
👇(1)
ऐसा मै नही अपितु स्वयं #भगवान परशुराम जी ने कहा है ,अब परशुराम जी तो गलत कह नही सकते वो भगवान है।
मै परशुराम जी की भक्त हु ,जो परशुराम जी ने कहा वही मानती हु।
जो सहस्त्रबाहु जी को पापी,अधर्मी या गौ हत्यारा कहता है वह भगवान परशुराम जी का विरोध करता है व पाप करता है ।
शेष (2)👇
सहस्त्रबाहु जी से युध्द के दौरान स्वयं भगवान परशुराम कहते है कि , राजन् - मनुष्यों कि जय पराजय मे काल ही कारण है,आपने विधि पुर्वक #वेदों,शास्त्रो का अध्ययन किया है।दान-पुण्य किया है ,सारी पृथ्वी पर उत्तम रिति से शासन किया ! संग्राम में यशोवर्धक कार्य किया है।
शेष (3)👇
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1. #जीवन ....
#महात्माबुद्ध का जब #दुखः से पहली बार परिचय हुआ तो वो बेहद दुखी हुए,
लेकिन बाद में जब उन्होंने जाना कि जीवन दुखः का ही दूसरा नाम है, तो वो फिर ऐसे शांत हो गए कि उनकी प्रतिमा को देखकर आज भी लोग एक अनन्त शांति का अनुभव करते हैं😌
👉 हाल ही में अभी तीन...
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2.
#आत्महत्याएँ नजर में आई,
🔶एक बेटे ने अपनी कनपटी पर गोली मार ली क्योंकि उसके पिता को चार दिन से #पुलिस ने एक हत्या के शक में अवैध कस्टडी में लिया हुआ था,
वो अपने पिता को पुलिस द्वारा मिल रही थर्ड डिग्री की #कल्पना करके इतना टूट गया था कि उस दुखः को झेल पाना उसके लिए...
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3.
#असंभव हो गया....
🔶 दूसरी आत्महत्या एक पति ने की,
उसने अपने #सुसाइड नोट में लिखा कि साबिया तुम मेरे प्यार को समझ नहीं पाई, मैंने तुम्हारे लिए क्या नहीं किया फिर भी तुम मुझे छोडकर अपने घर चली गई😓
🔶 तीसरी आत्महत्या कल #महंत_नरेन्द्र_गिरि जी की बताई जा रही है....🤔
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#स्थलांतर
#आत्महत्या
#विकास
#मराठवाडा_खान्देश_विदर्भ
#नक्षलवाद
शाळेत असताना आपल्याला 'कोलंबसाचे गर्वगीत' हि कुसुमाग्रजांची कविता कधीतरी अभ्यासाला होती. त्या कवितेतील खवळलेल्या महासागराला आव्हान देणाऱ्या शेवटच्या दोन ओळी माझ्या अंतर्मनाला नेहमीच स्पर्श करतात;👇
अनंत आमुची ध्येयासक्ती,अनंत अन आशा, किनारा तुला पामराला! निसर्गावर मात करण्याची जिद्द मनात चेतवणाऱ्या या ओळी दुष्काळासमोर हाय खाणाऱ्या मराठवाड्यातील पोरांच्या डोळ्यातले अश्रू बघितले कि या कोलंबसाच्या गर्वगीताकडून ८०-९० सालच्या दुःखद गीतांकडे मोर्चा न्यावासा वाटतो.👇
आणि मग "पराधीन आहे जगती पुत्र मानवाचा" हे अवतरण अधिकच पटायला लागते. मराठवाडा,खान्देश,विदर्भ या भागातील दुष्काळी प्रदेशातील हजारो मुलं-मुली पुण्या-मुंबईसारख्या शहरात जीवाचं रान करताना दिसतात.पण आम्ही पुण्या-मुंबईची पोरं कधी हा विचार करतो का कि;👇
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