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#गुमनाम_क्रान्तिकारी🚩🙏
#इतिहास_हमारा_गौरव🚩
"वीर खाज्या नायक" एवं "दौलतसिंह नायक" जी व उनके बेटे के बलिदान दिवस कोटि-कोटि नमन🙏
11 अप्रैल 1858

खाज्या नायक अंग्रेजों की भील पल्टन में एक सामान्य सिपाही थे। सेंधवा-जामली चैकी से सिरपुर चैक तक के 24 मील लम्बे मार्ग की
@SakshamGV 👇🏾 Image
निगरानी का काम सौंपा गया था। खाज्या ने 1831 से 1851 तक इस काम को पूर्ण निष्ठा से किया।

एक बार गश्त के दौरान उन्होंने एक व्यक्ति को यात्रियों को लूटते हुए देखा। इससे वह इतने क्रोधित हो गये कि बिना सोचे-समझे उस पर टूट पड़े। इससे उस अपराधी की मृत्यु हो गयी। शासन ने कानून अपने हाथ👇🏾
में लेने पर उन्हें दस साल की सजा सुनायी किन्तु कारावास में अनुशासित रहने के कारण उनकी सजा घटा कर पाँच साल कर दी गयी। जेल से छूट उन्होंने शासन से फिर अपने लिए नौकरी माँगी; पर उन्हें नौकरी नहीं दी गयी। इससे वह अंग्रेजी शासन से नाराज हो गये और उनसे बदला लेने का सही समय तलाशने लगे।👇🏾
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#इतिहास_हमारा_गौरव🚩
गणितज्ञ #लीलावती का नाम हममें से अधिकांश लोगों ने नहीं सुना है। उनके बारे में कहा जाता है कि वो पेड़ के पत्ते तक गिन लेती थी।

विदित हो कि आज यूरोप सहित विश्व के सैंकड़ो देश जिस गणित की पुस्तक से गणित को पढ़ा रहे हैं, उसकी रचयिता भारत की एक महान गणितज्ञ 👇🏾👇🏾
महर्षि भास्कराचार्य की पुत्री लीलावती है। आज गणितज्ञो को गणित के प्रचार और प्रसार के क्षेत्र में लीलावती #पुरूस्कार से सम्मानित किया जाता है।

आइए जानते हैं महान गणितज्ञ लीलावती के बारे में जिनके नाम से गणित को पहचाना जाता था।

दसवीं सदी की बात है, दक्षिण भारत में #भास्कराचार्य👇🏾
नामक गणित और ज्योतिष विद्या के एक बहुत बड़े पंडित थे। उनकी कन्या का नाम लीलावती था।

वही उनकी एकमात्र संतान थी। उन्होंने ज्यो‍तिष की गणना से जान लिया कि ‘वह विवाह के थोड़े दिनों के ही बाद विधवा हो जाएगी।’

उन्होंने बहुत कुछ सोचने के बाद ऐसा लग्न खोज निकाला, जिसमें विवाह होने पर👇🏾
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👉🏾#इतिहास_हमारा_गौरव🚩
जिसके मस्तक पर तिलक ना दिखे, उसका सर धड़ से अलग कर दो।*
*सम्राट पुष्यमित्र शुंग*

यह बात आज से लगभग 2100 वर्ष पहले की है। एक हिंदू किसान के घर एक पुत्र ने जन्म लिया, जिसका नाम रखा गया पुष्यमित्र या पुष्यमित्र शुंग और वह बना एक महान हिंदू सम्राट जिसने 👇🏾
भारत देश को बौद्ध देश बनने से बचाया।

अगर पुष्यमित्र शुंग जैसा कोई राजा कंबोडिया मलेशिया या इंडोनेशिया में जन्म लेता तो आज भी यह देश हिंदू देश होते।

जब सिकंदर राजा पोरस से मार खाकर अपना विश्व विजय का सपना तोड़कर उत्तर भारत से शर्मिंदा होकर मगध की ओर गया था तो उसके साथ आए हुए 👇🏾
बहुत से यवन वहां बस गए थे।
सम्राट अशोक के बौद्ध धर्म अपना लेने से उनके बाद उनके वंशजों ने भारत में बौद्ध धर्म लागू करवा दिया।

हिदूओ द्वारा इस नीति का विरोध होने पर उनका सबसे अधिक कत्लेआम हुआ, लाखों हिदूओ की हत्याएं हुईं, हजारों मंदिर गिरा दिए गए इसी समय पुष्यमित्र के माता-पिता👇🏾
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#इतिहास_हमारा_गौरव🚩
#महाराणा_सांगा 🙏
बाबर को हिंदोस्तान का ताज पानीपत जितने से नही मिला बल्कि जब खानवा में उसकी तोपों के सामने सांगा के राजपूत पीछे हटे और फिर कुछ समय बाद सांगा को किसी अपने ने ही विष देकर मार दिया तो बाबर " हिंदोस्तां" का शासक बन बैठा।

इतिहासकार मेवाड़ में 👇🏾
गुहिलोत राजपूतों के शासक बनने का वर्ष 734 ईस्वी को मानते हैं जब नागदा " मेवाड़" के गुहिलोतो की राजधानी बनी ।फिर 948 ईस्वी में राजधानी बनी " अहर" ।1213 ईस्वी में चित्तौड़ " मेवाड़" के गुहिलोतो की राजधानी हुई।

इनके शासन को पहली बड़ी पराजय 1303 ईस्वी में मिली जब अलाउद्दीन खिलजी के
हाथों रावल रतन सिंह को पराजय मिली।

पर हार क्षणिक ही थी और वहां गुहिलोतो ने संघर्ष जारी रखा और 1326 ईस्वी में सिसोदा गांव के गुहिलोत वंशी राणा हम्मीर ने तुर्को को पराजित कर मेवाड़ पुनः गुहिलोतो के लिए जीत लिया। राणा हम्मीर से गुहिलोतो की यह शाखा सिसोदिया के नाम से प्रसिद्ध हुई।👇🏾
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