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भाग्य अच्छा था तो भाजपा जीत गई, 312 से 255 यानी 57 सीट कम आयी और सपा की 47 से 111 यानी 64 सीट ज्यादा आयी
मोदी योगी जैसे पॉपुलर नेता, टायलेट से लेकर घर बनवाए, पानी बिजली गैस की सुविधा दी, मुफ्त का डबल राशन दिया, किसान सम्मान निधि सही कई पेंशन
#ElectionResults2022 #उत्तरप्रदेश Image
योजना, महिलाओं बुजुर्गों मजदूरों को भी नगद राशि, कोरोना वैक्सीन दी, कानून व्यवस्था सर्वोपरि फिर विकास के लिए हाईवे, एयरपोर्ट, मेट्रो सहित अनगिनत कार्य लेकिन फिर भी आधे हिन्दुओं ने वोट नहीं दिया..
#BJPAgain
ठीक से देखें तो समझ आएगा की बसपा और कॉंग्रेस के वोट भी सपा को मिले,
अल्पसंख्यक समाज ने एकमुश्त वोट दिया सपा को ताकि भाजपा हार जाए,जातिवादी जयंत, मोर्या, राजभर, भाजपा के कुछ नाराज मंत्री विधायकों का पूरा जोर ताकत सपा के साथ था..
राम मंदिर, काशी, 370 के पुर वादे, युक्रेन से सभी को सुरक्षित लाना सहित हजारो कार्य पर फिर भी वोट नहीं देते आधे हिन्दु..
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लोग 5kg extra राशन से खुश क्यों हैं?
#उत्तरप्रदेश का प्रतिव्यक्ति आय औसतन 74440₹/सालाना है, मतलब लगभग 204₹/रोजाना कमाई।

#पंजाब का प्रतिव्यक्ति आय औसतन 168550₹/सालाना है,मतलब लगभग 462₹/रोजाना

इसलिए UP में 5Kg राशन भी बहुत ज्यादा मायने रखता था जबकि पंजाब में नहीं! (1/6) ImageImage
उत्तरप्रदेश में गरीबों को 5 kg राशन के लिए कम से कम 2-3 दिन काम करना पड़ेगा.
जबकि पंजाब के लोगों को इतना प्रतिव्यक्ति इनकम है की वे 10 kg #राशन हर रोज खरीद सकते हैं।

इसलिए मोदी सरकार का 5 kg राशन #PunjabElection2022 में अपना जादू नहीं चला पाया।
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सोचिए,
आपको गरीब बनाकर रखना राजनैतिक पार्टियों के लिए कितना जरूरी होता है!
मात्र 5kg राशन में आप किसी के अहसानों तले आ जातें हैं। मात्र 5किलो राशन इनके लिए भगवान मिलने के बराबर हो जाता है।

इससे बड़ी शर्मिंदगी की बात और क्या हो सकती है?
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#भारत की वो #एकलौती ऐसी घटना जब , अंग्रेज़ों ने एक साथ 52 क्रांतिकारियों को इमली के पेड़ पर लटका दिया था, पर वामपंथियों ने इतिहास की इतनी बड़ी घटना को आज तक गुमनामी के अंधेरों में ढकेल रखा।😡
#उत्तरप्रदेश के फतेहपुर जिले में स्थित बावनी इमली एक प्रसिद्ध इमली का पेड़ है, जो भारत में एक शहीद स्मारक भी है। इसी इमली के पेड़ पर 28 अप्रैल 1858 को गौतम क्षत्रिय, जोधा सिंह अटैया और उनके इक्यावन साथी फांसी पर झूले थे।
यह स्मारक उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के बिन्दकी उपखण्ड में खजुआ कस्बे के निकट बिन्दकी तहसील मुख्यालय से तीन किलोमीटर पश्चिम में मुगल रोड पर स्थित है।

यह स्मारक स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा किये गये बलिदानों का प्रतीक है।
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#ThanksDrAmbedkar
OBC चे जन्मदाता,कोण आणि कसे?
डॉ.बाबासाहेब आणि OBC च नात:या देशात ओबीसींचे 'संवैधानिक जन्मदाता' आणि 'संवैधानिक रक्षणकर्ते' दुसरं कोणी नसून डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर हे आहेत.१९२८ साली बॉम्बे प्रांताचे गर्वनर 'स्टार्ट' या ब्रिटिश अधिकाऱ्याच्या अध्यक्षतेखाली
(१/११)👇
एक मागासवर्गीय(OBC)समूहाची समिती नेमण्यात आली होती.या समितीत बाबासाहेबांनीच शुद्र वर्णातील काही समूहाला Other Backward Class या शब्दाचा सर्वप्रथम उपयोग केला होता.या शब्दाचा shortform OBC होतो.त्या समूहाला आपण आज सामाजिक व शैक्षणिक दृष्टीने मागासलेले ओळखतो.(२/११)👇
त्यांची आज ओळख ही OBC म्हणून आहे.डॉ बाबासाहेब आंबेडकर यांनी #स्टार्ट कमिटीसमोर बोलताना देशातील लोकसंख्येचे तीन भागात विभागले:
(१) अप्पर कास्ट
ज्या मध्ये ब्राह्मण,क्षत्रिय आणि वैश्य यांसारख्या उच्च वर्णीय जाती समूहाचा समावेश होता.
२)मागासवर्गीय(Backward Cast):
(३/११)
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