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इंग्रजांनी नोट छापण्याकरिता नाशिक ठिकाणचं का ठरवलं (#इतिहास)
पैसे छापणे हा नाशिकचा खुप जुना व्यवसाय आ। हे. आजही नाशकात भद्रकाली परिसरात एक टांकसाळ गल्ली आहे. इथल्या टांकसाळे वाड्यात मुठ्ठल नामक परिवार राहायचा. त्यांना पेशव्यांनी टांकसाळे हे आडनांव दिले होते.
#म #मराठी
बडोद्याचे गायकवाड नाशकातल्या टांकसाळीतून १७६९ ते सुमारे १७७२ या कालावधीत आपली नाणी पाडत असत. पेशवाईत नाणी पडण्याच्या भानगडीत सरकार पडत नसे. नाणी पाडणे हा खाजगी धंदा असायचा. हा व्यवसाय सुरु करायला सरकारची परवानगी मात्र घ्यावी लागे. अर्थात सरकार नाणी पडण्याचा मोबदला मात्र घेत असे.
१७५०च्या सुमारास दोन कासारांना नाणी पाडण्याची परवानगी मिळाली होती. तीन वर्षाच्या लायसन्ससाठी त्यांना १२५ रुपये फी भरावी लागली होती. शिवाय गिऱ्हाईकानी नाणी पाडण्यासाठी टांकसाळीत चांदी जमा करायची आणि दर शेकडा नाण्यांच्या मागे सरकारला काही करही द्यावा लागे.
#म #मराठी
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#इतिहास_ही_हमारी_धरोहर_है
#झाँसी के अंतिम संघर्ष में #महारानी की पीठ पर बंधा उनका बेटा #दामोदर_राव(असली नाम #आनंद_राव) सबको याद है!
#झाँसी_की_रानी_लक्ष्मीबाईजी🙏 के #बलिदान के बाद उनके बेटे का क्या हुआ???
वो कोई कहानी का #किरदार भर नहीं थे,#सन1857 के #विद्रोह की
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सबसे #महत्वपूर्ण_कहानी को जीने वाला #राजकुमार थे। जिसने उसी #गुलाम भारत में जिंदगी काटी थी😢
जहां उन्हें भुलाकर उनकी #माँ❤ के नाम की #कसमें खाई जा रही थीं😢😢😢

#अंग्रेजों ने #दामोदर_रावजी को कभी झांसी का #वारिस नहीं माना था,सो उन्हें #सरकारी_दस्तावेजों में कोई जगह नहीं मिली थी
अधिकतर #हिंदुस्तानियों ने #सुभद्रा_कुमारी_चौहान के कुछ #सही,कुछ #गलत आलंकारिक #वर्णन को ही #इतिहास मानकर #इतिश्री कर ली। ये तक भूल गए कि वो सिर्फ एक #कवयित्री हैं।

#सन1959 में छपी #वाई0एन0केलकर की मराठी किताब ‘#इतिहासाच्य_सहली’(इतिहास की सैर)में दामोदर राव का इकलौता वर्णन छपा है
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#नेहरू_के_कुकर्म
#आर्यसमाज_पेज से लेख✍✍✍
#भारतीय_शिक्षा का विकृतीकरण #नेहरू😠 की ही एक मुख्य देन है।
नेहरु के शिक्षा मंत्री-
#11नवम्बर1888 को पैदा हुए मक्का में,वालिद का नाम था "#मोहम्मद_खैरुद्दीन"और अम्मी मदीना(#अरब) की थीं।नाना #शेख_मोहम्मद_ज़ैरवत्री, मदीना
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के विद्वान थे,#मौलाना_आज़ाद अफग़ान उलेमाओं के ख़ानदान से ताल्लुक रखता था।
जो #बाबर😠 के समय हेरात से भारत आए थे,ये जब दो साल के थे तो इनके वालिद #कलकत्ता आ गए।
सब कुछ घर में पढ़ा और कभी स्कूल कॉलेज नहीं गए,बहुत ज़हीन मुसलमान थे।
इतने ज़हीन कि इन्हे मृत्युपर्यन्त"भारत रत्न" से भी
नवाज़ा गया।😠
इतने #काबिल😠कि कभी स्कूल कॉलेज का मुंह नहीं देखा और बना दिए गए #भारत के पहले #केंद्रीय_शिक्षामंत्री😠इस शख्स का नाम था "#मौलाना_अबुलकलाम_आज़ाद"😠

इसने इस बात का ध्यान रखा कि #विद्यालय हो या #विश्वविद्यालय कहीं भी #इस्लामिक_अत्याचार😠 को ना पढ़ाया जाए।
इसने भारत के
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