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#काशी-मथुरा पाने की लड़ाई यह भी,SC में लड़ रहे अश्विनी उपाध्याय @AshwiniUpadhyay जी ने कहा:वर्शिप एक्ट जैसा कानून बनाने का केंद्र को अधिकार ही नहीं।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी विश्वेश्वर मंदिर को तोड़कर उसके खंडहर पर बनाए गए ज्ञानवापी विवादित ढाँचे की वीडियोग्राफी
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सर्वे में कई बातें स्पष्ट हो चुकी हैं।शिवलिंग और हिंदू प्रतीकों का मिलना इस बात की पुष्टि करता है कि वहाँ मंदिर था।हालाँकि मुस्लिम पक्ष पूजास्थल(विशेष प्रावधान)1991 की आड़ लेकर मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है।
तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस
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सरकार द्वारा साल 1991 में बनाए गए इस कानून को भाजपा नेता और सुप्रीम कोर्ट वकील ने चुनौती दी है। उन्होंने इस कानून को असंवैधानिक बताया है।
एडवोकेट उपाध्याय का कहना है कि हिंदू लॉ कहता है कि जहाँ एक बार मंदिर बन गया है, वहाँ अगर एक-एक ईंट भी तक उखाड़ दी जाए तो वह मंदिर ही रहेगा,
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इन्होंने केवल #मंदिर ही नही पूरा #काशी ही हड़प लिया है ।।
1194 ईस्वी में शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी ने काशी पर कब्जा किया, और अपने श्रेष्ठ अफसरों को वहां नियुक्त किया, जिससे कि काशी से मूर्ति पूजा पूर्ण रूप से हट सकें ।।इस अफसर का नाम सैयद जमालुद्दीन था, और इसी ने किसी
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जमालुद्दीनपूरा मोहल्ला बसाया था । आज भी बनारस में जमालुद्दीन पूरा मोहल्ला है ।।
लेकिन इसके कुछ समय बाद ही काशी मुसलमानो के हाथ से निकल गया, और 1197 ईस्वी में कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसे दुबारा जीता ।
कुतुबुद्दीन के बाद इल्तुतमिश गद्दी पर बैठा, उस समय अवध तथा काशी क्षेत्र की और
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हिन्दुओ ने बड़ी जबरदस्त जंग छेड़ दी, लेकिन हिन्दू जनता के बगावत को बड़ी निर्ममता से कुचल डाला, और बनारस पर मुसलमानो का अधिकार काफी मजबूत हो गया ।।
1197 से लेकर 1236 ईस्वी तक यानि कि 39 वर्ष तक काशी में ऐसा भीषण रक्तपात होता रहा कि, आज भी 1211 से लेकर 1236 ईस्वी तक का, काशी का
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ज्ञानव्यापी मस्जिद:
पृथ्वीवरील मुक्तीधाम म्हणून ज्याचा उल्लेख पुराणात आढळतो ती भगवान श्रीशिवशंकरांची भूमी, त्रिशूळाच्या टोकावर जी नगरी वसली आहे ती पुण्यभूमी म्हणजे #काशी #बनारस .....
काशीमध्ये एकूण सहा कूप होते,ज्याचा उल्लेख वेद, पुराणांमध्ये आढळतो.त्यातील तीन #कूप किंवा तलाव हे काळाच्या ओघात नष्ट झाले.त्यातीलच एक कूप किंवा तलाव म्हणजे #ज्ञानव्यापी......
इतिहासकार अनंत सदाशिव आळतेकर यांनी १९३७ साली लिहिलेल्या #Historys_Of_Banaras या पुस्तकात त्यांनी मांडलेल्या एकूण तर्काचा विचार केला तर ते पुस्तकच त्याठिकाणी ऐतिहासिक पुरावा म्हणून सिद्ध होते, म्हणूनच सध्या चालू असलेल्या ज्ञानव्यापी मशिदीच्या केसमध्ये हिंदू पक्षकारांनी या
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उनाकोटी (Unakoti) : भारत के एक राज्य, #त्रिपुरा की राजधानी #अगरतला से 178 KM दूर #उनाकोटी ज़िले के कैलाशहर उपखंड में स्थित एक ऐतिहासिक व पुरातत्विक हिन्दू तीर्थस्थल है। यहाँ भगवान शिव को समर्पित 99 लाख, 99 हज़ार, 999 मूर्तियाँ हैं |
#incredibleindia #incredibles Image
जिनका निर्माण 7वीं – 9वीं शताब्दी ईसवी, या उस से भी पहले, बंगाल व पड़ोसी क्षेत्रों में पाल वंश के राजकाल में हुआ था | मूर्तियों की संख्या के आधार पर ही इस जगह का नाम "उनाकोटी" पड़ा क्योंकि यहाँ की भाषा के अनुसार 'कोटि' का मतलब होता है 'करोड़' और 'उना' का मतलब होता है 'एक कम' | Image
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान #शिव ने एक बार #काशी जाते समय 99,99,999 देवी-देवताओं के साथ विश्राम करने के लिए यहां एक रात बिताई थी। और उन्होंने सभी देवी देवताओं को सूर्योदय से पहले उठने और काशी की ओर चलने के लिए कहा था। दुर्भाग्य से, Image
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1.
अथ श्री #ज्ञानवापी कथा...
कथा है ये विध्वंश की! #खूनी_संघर्ष की! #हिन्दुओ के #कत्लेआम की....
🏵️ ई० सन 1669..
#क्वार(अश्विन) का महीना,
तनिक आलस के साथ, धान की फूटती बालियों से उलझ रहा था, कि अचानक उसने देखा-
#गंगा का पानी लाल होने लगा था, वह चौंक उठा !
कुछ ही वर्ष...
Cont...2.
2.
पहले उसने #गंगा को तब लाल होते देखा था, जब #मुगल सैनिकों ने, #विंध्याचल के #विंध्यवासिनी_मंदिर को तोड़ कर वहां के हिन्दुओं का सामूहिक #नरसंहार किया था!
उसे फिर किसी अनहोनी की आशंका हुई,
वह कांपते हुए गंगा की उल्टी दिशा में दौड़ा।
🏵️ गंगा के पाट पर दौड़ता क्वार अभी...
Cont...3.
3.
#काशी से तीन कोस दूर था,
कि चीखों से उसके कान फटने लगे😢
उसके रोंगटे खड़े हो गए,
और मुँह से निकला- तो क्या #बाबा_विश्वनाथ भी😱
काँपता क्वार दूने वेग से दौड़ा!
काशी पहुँचते ही उसने देखा- विश्वनाथ #ज्योतिर्लिंग पर चढ़ाये जाने वाले जल को पुनः गंगा में मिलाने वाली....
Cont....4.
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#तुलसीदासजी का जन्म संवत्‌ 1554 की श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन #सरयूपारीण #ब्राह्मण के परिवार में हुआ था
जन्मते समय बालक तुलसीदास रोए नहीं, किंतु उनके मुख से
#राम का शब्द निकला। उनके मुख में बत्तीसों दाँत मौजूद थे जिसे देखकर पिता अमंगल की शंका से भयभीत हो गए थे।
तुलसीदास लगभग साढ़े पाँच वर्ष अनाथ हो गए थे। ऐसी मान्यता है #माता #पार्वती ब्राह्मणी का वेश धारण कर प्रतिदिन उसके पास जातीं और उसे अपने हाथों से भोजन करा जातीं। संवत्‌ 1561 माघ शुक्ल पंचमी श्री नरहरि ने उसका यज्ञोपवीत संस्कार कराया और उनका नाम #रामबोला रखा।
बिना सिखाए ही बालक रामबोला ने #गायत्री-मंत्र का उच्चारण किया, जिसे देखकर सब लोग चकित हो गए।
अयोध्या में ही रहकर उसे विद्याध्ययन कराने लगे।
बालक रामबोला की बुद्धि बड़ी प्रखर थी। एक बार गुरुमुख से जो सुन लेते थे, उन्हें वह कण्ठस्थ हो जाता था।
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर
काशी का मूल विश्वनाथ मंदिर बहुत छोटा था। 17वीं शताब्दी में इंदौर की रानी अहिल्याबाई होल्कर ने इसे सुंदर स्वरूप प्रदान किया। कहा जाता है कि एक बार रानी अहिल्या बाई होलकर के स्वप्न में भगवान शिव आए। वे भगवान शिव की भक्त थीं।
इसलिए उन्होंने 1777 में यह मंदिर निर्मित कराया। सिख राजा रंजीत सिंह ने 1835 ई. में मंदिर का शिखर सोने से मढ़वा दिया। तभी से इस मंदिर को गोल्डेन टेम्पल नाम से भी पुकारा जाता है। यह मंदिर बहुत बार ध्वस्त हुआ। आज जो मंदिर स्थित है उसका निर्माण चौथी बार हुआ है।
1585 ई. में बनारस से आए मशहूर व्यापारी टोडरमल ने इस मंदिर का निर्माण करवाया। 1669 ई. में जब औरंगजेब का शासन काल तब भी इस मंदिर को बहुत हानि पहुँचाया गया।

गंगा तट पर सँकरी विश्वनाथ गली में स्थित विश्वनाथ मंदिर कई मंदिरों और पीठों से घिरा हुआ है।
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