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#किसान #सनातन #धरती #जीवन
हल खींचते समय यदि कोई बैल गोबर या मूत्र करने की स्थिति में होता था तो किसान कुछ देर के लिए हल चलाना बन्द करके बैल के मल-मूत्र त्यागने तक खड़ा रहता था ताकि बैल आराम से यह नित्यकर्म कर सके, यह आम चलन था।
हमनें यह सारी बातें बचपन में स्वयं अपनी आंखों
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से देख हुई हैं। जीवों के प्रति यह गहरी संवेदना उन महान पुरखों में जन्मजात होती थी जिन्हें आजकल हम अशिक्षित कहते हैं, यह सब अभी 25-30 वर्ष पूर्व तक होता रहा ।
उस जमाने का देशी घी यदि आजकल के हिसाब से मूल्य लगाएं तो इतना शुद्ध होता था कि 2 हजार रुपये किलो तक बिक सकता है।
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और उस देसी घी को किसान विशेष कार्य के दिनों में हर दो दिन बाद आधा-आधा किलो घी अपने बैलों को पिलाता था ।
टटीरी नामक पक्षी अपने अंडे खुले खेत की मिट्टी पर देती है और उनको सेती है।
हल चलाते समय यदि सामने कहीं कोई टटीरी चिल्लाती मिलती थी तो किसान इशारा समझ जाता था और उस अंडे
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#काँग्रेस_के_कुकर्म
आप सभी ने एक कहावत तो सुनी ही होगी कि"करे कोई(यानी #काँग्रेस😠)और भरे कोई(यानी #बीजेपी)"
☝लेकिन इस बात को हमारे देश में कुछ तो अपने #निजिस्वार्थ😠के चलते जानबूझकर समझना नहीं चाहते और कुछ बिना सोचे समझे बस #मोदीजी❤और #BJP का #विरोध जरूर करते हैं😠

Read👇👇👇 ImageImageImage
☝ये तक जानने की कोशिश नहीं करते क्या #सही✔है और क्या #गलत❌बस #विरोध करना शुरू कर देते हैं...
जैसे #विजय_माल्या,#मेहुल_चौकसी,#नीरव_मोदी अनगिनत #घोटालेबाज सभी घोटालों को #काँग्रेस😠के समय से ही #अंजाम दे रहे थे
☝वो भी #काँग्रेस😠के द्वारा दिए जा रहे #प्रत्यक्ष और #अप्रत्यक्ष
रूप में दिए जा रहे #सहयोग से😠
☝इस काँग्रेस के द्वारा इतने #घोटाले किये गए हैं कि कभी खत्म नहीं होंगेज़
☝ये अटल सत्य है अगर अपने देश में #घोटालेबाज न होते तो हमारा भारत देश कब❓का "सोने की चिड़िया"बन गया होता...
☝लेकिन #काँग्रेस_के_कुकर्म ही इतने थे कि आजतक होने ही नहीं दिया😠
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#काँग्रेस_के_कुकर्म

☝पहले #किसानों के नाम पर "खालिस्तानी एजेंड" #इंप्लीमेंट किया जा रहा था और अब #किसान के नाम पर "जाति के सम्मान" का #कार्ड खेला जा रहा है...

☝मुझे नहीं पता आप में से कितने भाई-बहनों को #मुजफ्फरनगर वाला "जाट नरसंहार😢"याद है या नहीं❌❌❌

पूरा पढ़िये👇👇👇
☝लेकिन मुझे भली प्रकार याद है,तब देश में #काँग्रेस_की_सरकार😠 थी,#चौधरी_अजीत_सिंह #काँग्रेस के सहयोगी थे और #सरकार में सम्मिलित भी थे।

☝तब #जाहिल_जिहादियों😠 द्वारा एक "जाट लड़की"से #छेड़खानी का #विरोध करने पर लड़की के दोनों भाईयों को मुस्लिमों की भीड़ द्वारा दौड़ाकर चक्की के
के पाटों से #कुचलकर😢 मारा गया था😠😠😠

☝उन दोनों लड़कों की #स्थिति ऐसी थी कि #चेहरा तक पहचानना #संभव नहीं हो पाया था...

#27अगस्त2013 को #जानसठ कोतवाली क्षेत्र के गांव #कवाल में ये "दोहरा हत्याकांड"हुआ था,
☝जिसके बाद वहां #दंगे भड़क उठे थे,इसमें 62 लोगों की #जान गई थी...
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#काँग्रेस_के_कुकर्म😠 और #वामपंथियों_के_कुकर्म😠
समझदारों को #इशारा काफी है और आप सभी को बहुत से उदाहरण के जरिये #बेरोजगारी क्यों है???
इसकी बहुत बड़ी #वजह भी बताता हूँ।
आज के समय #कॉम्युनिस्ट😠 के साथ #काँग्रेस😠भी #शामिल हो गई है। ये अब से नहीं बहुत पहले से देश को दीमक की तरह👇 Image
खा रहे हैं😠😠😠
☝जब तक इन्हें #परास्त और #खत्म नहीं किया जायेगा हमारे देश की #तरक्क़ी नामुमकिन है
☝एक जमाना था #कानपुर की"#कपड़ा_मिल" #विश्वप्रसिद्ध थीं
😠ये साल 1875 में शुरु हुई और 2002 में बंद हो गई थी
☝अभी कुछ चल रही हैं!*
मिल बंद होने के समय इसमें 1200 मज़दूर काम करते थे
जानकारी के अनुसार,#लाल_इमली का #कपड़ा पहले #सेना को #सप्लाई किया जाता था और यह इस मिल की #आय का एक बड़ा स्त्रोत था।
कानपुर को"#ईस्ट_का_मैन्चेस्टर"बोला जाता था।
लाल इमली जैसी फ़ैक्टरी के कपड़े प्रेस्टीज सिम्बल होते थे. वह सब कुछ था जो एक #औद्योगिक_शहर में होना चाहिए।

मिल का साइरन
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#कृषिबिल के विरोध में बैठे
#विपक्षी_दल😠😠😠 और #राजनेताओं😠😠😠

अब तुम्हारी ही #याददाश्त को #10वर्ष पीछे ले जाकर
सत्ता में रहने के दौरान आपका #कालखंड ही याद दिलाना चाहता हूँ
कृपया पोस्ट के साथ ये दोनों #संलग्न_पत्र ध्यान से देखिए
एवं पढ़िये👇👇👇
जिनमें से एक पत्र दिल्ली की भूतपूर्व मुख्यमंत्री #स्व0शीला_दीक्षितजी को एवं दूसरा पत्र #मध्य_प्रदेश के मुख्यमंत्री #शिवराजसिंह_चौहानजी को लिखा गया था।
जो #काँग्रेस😠 के सत्ता में रहते हुए #वर्ष2010 में तत्कालीन #कृषिमंत्री #शरदपवार😠द्वारा देश भर के मुख्यमंत्रियों को लिखा गया था।
जिसमें तत्कालीन #कृषिमंत्री एपीएमसी(#APMC) में #संशोधन कर #निजी_सेक्टर को #किसानों से सीधे खरीद करने का समर्थन करते दिखाई दे रहा है।
#काँग्रेस😠 के संग सत्ता में रहते हुए #राजनीतिकदल😠और #नेता😠 जो आज #विपक्ष में बैठकर इस #कृषिबिल का #विरोध कर रहे हैं...😠😠😠
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कथित #किसान_आंदोलनकारियों की मांग में अब
#शर्जिल_इमाम😠,#उमर_खालिद😠 आदि और इन जैसे और भी #देशद्रोही😠😠😠
शहरी #माओवादियों😠 की #रिहाई भी जुड़ गई है! 😠😠
लोग कहते हैं, ये #अन्नदाता हैं?😠😠😠
अरे यह #अलगाववादी #देशद्रोही हैं!अब तो पहचानो!😠😠
जो हमारे किसान भाईयों को भी..👇👇👇
#भड़का रहे हैं।😠😠😠
हमारे किसान भाई तो अपने खेतों पर कार्य कर रहे हैं।🙏🙏🙏 और जो हमारे किसान #भाई,#बड़े_बुजुर्ग अगर चले भी गए हैं तो आपसे हम सभी भाई-बहन हाथ जोड़कर #प्रार्थना करते हैं, आप सभी विरोध मत कीजिये...
आपकी जो भी भ्रांतिया हैं उनको #सरकार और हम सभी मिलकर खत्म करेंगे।
लेकिन इन #देशद्रोही 😠 #गद्दारों 😠का साथ मत दीजिये आप🙏🙏🙏
#किसान_आंदोलन के नाम पर ये हमारे सभी #किसान भाईयों को #भड़का रहे हैं,😠😠😠
इनकी #मंशा तो सिर्फ अपना मतलब निकालना है।😠😠😠
इनकी दिन ब दिन #देशद्रोही_गतिविधियां😠😠😠 बढ़ती ही जा रही हैं।
अब तो समझ जाइये आप सभी🙏
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जिन मूर्खों को लगता है ये #आंदोलन किसानों की भलाई के लिए किया जा रहा है वो विशुद्ध गंवार हैं।😠😠😠
ये सब कुछ #काँग्रेस😠 के इशारे पर किया जा रहा है।
#सन1962 में भी यही किया था #फौजियों की रसद और
गाड़ियां नही जाने दी थीं।😠
इन्ही वामपंथी घटिया लोगों ने बॉर्डर पर क्योंकि अगर
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इनको किसानों का भला करना होता तो #70सालों में कर चुके होते।😠😠😠
ये आंदोलन सिर्फ #मोदीजी के खिलाफ है😠😠😠 #जिहादियों😠 और #देशद्रोहियों😠 की लड़ाई है
जिसे वो काम के नाम पर धार दे रहे हैं😠😠😠
इनकी फंडिंग कर रहे हैं सभी मोदी विरोधी😠😠😠
क्योंकि इनको भी पता है 2024 में भी इनकी
दाल नही गल रही है और ना अब गलेगी।
जो मूर्ख ये कहकर आंदोलन का समर्थन कर रहे है।
#मोदीजी किसान विरोधी है😠,तो वो ये बात समझ लें☝
आपके खड़े रहने के लिए इससे मज़बूत युग कभी नही आएगा,पिछले 1000साल से सिर्फ लूटा गया था*
कभी मुगलों के द्वारा😠
कभी अंग्रेजों के द्वारा😠
कभी #कांग्रेस😠
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क्या यह #किसान हो सकते हैं? इनके #मुस्कुराते चेहरे देखिए?

ये गन्दी राजनीति का नमूना है। किसी किसान के ट्रैक्टर को जलाने वाले कभी भी किसान नहीं हो सकते।

क्या किसान की मेहनत के सुख-दुख के पल पल के साथी ट्रैक्टर को आग के हवाले करने वाले
किसी किसान के सपने को चूर चूर करने (1/3)
वाले क्या किसी खेत की शान को आग लगाने वाला कोई किसान हो सकता है?

यह केवल और केवल विपक्ष की सत्ता के लालच में एक राजनीतिक षड्यंत्र है।

इसके अलावा कुछ नहीं

किसान आज भी खेत में अपने बाजरे और ग्वार की फसल निकालने में और कपास को बिनने में लगे हुए हैं।
सड़कों पर तो केवल (2/3)
सत्ता के लालची विपक्षी राजनेता उतरे हुए हैं।
#किसान #सडकों पर नही #खेत में व्यस्थ हैं।

किसान भागता नहीं बचाता है।
यह तो कपड़ों के छिटे भी नहीं लगने दे रहे।
शायद बंद ऐसी रूम में रहने वाले हैं शायद किसान नहीं देखा इन्हे कभी। तभी तो किसानों पर राजनीति कर रहे हैं (3/3)
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