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#7जुन

दिन खास है क्योंकि आज के ही दिन एक अदने से अश्वेत को एक ट्रेन से धकिया कर प्लेटफार्म पर पटक दिया गया। साफ शब्दों में अश्वेतों को उनकी औकात याद दिलाई गयी।

फिर वही छोटू #दीवार बन गया। शोषितों और शोषकों के बीच, दुनिया की सबसे मजबूत दीवार। आज भी #संघर्ष देख लो, उसके तरीके ही
पूरे दुनिया में कापी पेस्ट हो रहे। आगे अलग अलग देशों के राष्ट्रनायकों से लेकर अल्बर्ट आइन्सटीन तक '#हीरो' मानने लगे, "#मसीहा" बोलने लगे। अरे उसने कब कहा कि उसे ये सब बोलो?

तुम नहीं जानते, मत जानो।
जो तुम नहीं मानते, तो मत मानो।
#बोस ने "#राष्ट्रपिता" बोल दिया।पाप तो नहीं किया कोई पर ये बात दूसरे पक्ष के बर्दाश्त के एकदम बाहर।

तुम्हें पिछले 5-10 सालों में #व्हाटसएप्प और #फेसबुक के माध्यम से अपना राजनीतिक हित साधने के उद्देश्य से ये बताया गया कि वो #बंटवारे का जिम्मेदार है और सारी परेशानियों की जड़ है.
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वतन की फ़िक्र कर नादाँ, मुसीबत आने वाली है
तिरी बर्बादियों के मशवरे हैं आसमानों में..!
~ अल्लामा इक़बाल

#कश्मीरी जर्नलिस्ट #Mir_Suhail ने ख़ुद से बनाए इस चित्र को 8 मई 2021 को #फेसबुक पर साझा किया था .. यह वह समय था जब हम लोग #लॉकडाउन के बाद '#अनलॉक - 1' से गुज़र रहे थे ..
#कोरोना महामारी का कहर जारी था.. अभी भी रोजाना हज़ारों लोग #ऑक्सीजन, #वेंटीलेटर जैसी ज़रूरी चीज़ों की गैर मौजूदगी में अपनी जानें गंवा रहे थे..

जबकि लॉकडाउन के दौरान ही #देश की #इकोनॉमी को बनाए रखने और कोविड से निपटने के लिए #सोनियागांधी समेत और
कई #विपक्षी_नेताओं ने #प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर सलाह दी थी कि #संसद भवन निर्माण से लेकर देश में और जो भी '#विकास कार्य' हो रहे हैं, उसे फ़िलहाल रोककर उस मद का पैसा लोगों की ज़िंदगियों पर ख़र्च किया जाए ..

लेकिन #तानाशाह लोगों की फ़िक्र कब करता है..
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आजकल के लड़के #नौकरी लगने के तुरंत बाद शादी करके दुलहन को सीधे नौकरी पर ले जाते हैं तथा सारा पढ़ाई का कर्ज , खेती का काम सब झंझट माता पिता के पास छोड़ जाते हैं । वो सबसे पहले शहर में #प्लाट लेने की सोचते हैं तथा माता पिता की ओर कम ध्यान देते हैं जो बहुत दुखदाई है । 👇
#फेसबुक पर माता पिता को भगवान ज्यादा वो ही लोग लिखते हैं जिनके माता पिता दयनीय स्थिति मे होने के बाद भी उनसे आशा नही करते ।कभी वो लोग गाँव आते हैं तो अपनी जेब पैसा नही देने हेतु माता पिता से खेती , भैंस आदि की कमाई का हिसाब अपनी पत्नी के सामने लेते हैं तथा उन्हें बहुत सुनाते है
पत्नी भी उनमें कमी निकालकर अपना धर्म पूरा करती है।
यह माजरा करीब 90% लोगों का है जो शहर मे लोगों को #जन्मदिन की पार्टी देकर अपनी झूठी शान का बखान करते हैं । वो अपने पत्नी बच्चों के अलावा किसी पर एक पैसा खर्च नही करते ।
क्या इस हालत मे #समाज_सुधार की ओर अग्रसर माना जा सकता है।गाँव
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थ्रेड... Must read...

जब कोई चीज #मुफ्त मिल रही हो, तो समझ लेना कि आपको इसकी कोई बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।

नोबेल विजेता डेसमंड टुटू ने एक बार कहा था कि ‘जब मिशनरी अफ्रीका आए, तो उनके पास बाईबल थी, और हमारे पास जमीन। उन्होंने कहा 'हम आपके लिए प्रार्थना करने आये हैं।’
हमने आखें बंद कर लीं,,, जब खोलीं तो हमारे हाथ में बाईबल थी, और उनके पास हमारी जमीन।’
इसी तरह जब सोशल नैटवर्क साइट्स आईं,
तो उनके पास #फेसबुक और #व्हाट्सएप थे,
और हमारे पास #आजादी और #निजता थी।

उन्होंनें कहा 'ये मुफ्त है।’ हमने आखें बंद कर अंधाधुंध उपयोग शुरू कर दिया,
और जब आंखें खोली तो #हमारे_पास फेसबुक और व्हाट्सएप थे, और #उनके_पास हमारी आजादी और निजी जानकारियां।

जब भी कोई चीज मुफ्त होती है, तो उसकी कीमत हमें हमारी आजादी दे कर चुकानी पड़ती है।
“ज्ञान से शब्द समझ आते हैं, और अनुभव से अर्थ”
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