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जब भी कोई #चोटी और #जनेऊ को देखता है तो उनके मन में एक धारणा होती है कि ये #ब्राह्मण है!और कई तो पूछ भी लेते है कि आप ब्राह्मण हो क्या?

*लेकिन उन्हें जब पता चलता है कि ये #जाट #रोड़ #गुर्जर #यदुवंशी #बनिया #क्षत्रिय #वाल्मीकि #वनवासी हैं तो वो पूछते हैं कि दूसरे कास्ट होकर 👇
#चोटी क्यों रखते हो?*

*अब यहाँ एक सवाल खड़ा होता है!*

*क्या आप कभी किसी #सरदार_जी से पूछते हो कि #पगड़ी क्यों बांधते हो?*

*किसी #मौलाना_जी से पूछते हो #गोल टोपी क्यों पहनते हो?*

*किसी #ईसाई से पूछते हो यीशु का #लोकेट क्यों पहनते हो?*

*सोच विचार कर देखिए आज कितने #हिन्दू👇
चोटी रखते हैं?
*कितने #जनेऊ पहनते हैं?

*कितने* *#वेद,#शास्त्र,#उपनिषद,#दर्शन,#रामायण,#महाभारत, #सत्यार्थ_प्रकाश #गीता आदि ग्रन्थ पढ़ते हैं?

*हमारे #पतन का कारण हम स्वयं है!
*समाज में मुश्किल से कुछ प्रतिशत लोग है जो अपनी पहचान बनाए हुए है! उन्हें भी लोग अलग ही नजरिए से देखते है
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(प्रश्न) वेद संस्कृतभाषा में प्रकाशित हुए और वे अग्नि आदि ऋषि लोग उस संस्कृतभाषा को नहीं जानते थे फिर वेदों का अर्थ उन्होंने कैसे जाना?

(उत्तर) परमेश्वर ने जनाया। और धर्मात्मा योगी महर्षि लोग जब-जब जिस-जिस के अर्थ को जानने की इच्छा करके ध्यानावस्थित हो

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#vedas #AryaSamaj
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परमेश्वर के स्वरूप में समाधिस्थ हुए तब-तब परमात्मा ने अभीष्ट मन्त्रें के अर्थ जनाये । जब बहुतों के आत्माओं में वेदार्थप्रकाश हुआ तब ऋषि मुनियों ने वह अर्थ और ऋषि मुनियों के इतिहासपूर्वक ग्रन्थ बनाये। उन का नाम ब्राह्मण

#veda #सत्य_को_छुपाती_मीडिया #smritiirani #Mayawati
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अर्थात् ब्रह्म जो वेद उसका व्याख्यान ग्रन्थ होने से ब्राह्मण नाम हुआ। और-

ऋषयो मन्त्रदृष्टयः मन्त्रन् सम्प्रादुः।

जिस-जिस मन्त्रर्थ का दर्शन जिस-जिस ऋषि को हुआ और प्रथम ही जिस के पहले उस मन्त्र का अर्थ किसी ने प्रकाशित नहीं किया था; किया और दूसरों को पढ़ाया भी।

#vedas #ved
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#WorldEnvironmentDay2020 #पर्यावरण दिवस
#environnement day

आजचे वृक्षारोपण आत्मघातकी आणि पर्यावरणाला धोका निर्माण करणार्‍या झाडांचे आहे.😳 😳

खोटे वाटते??

@Makao7iv7iv @aghori_moksha
@gajanan137 @BeyondMarathi
@aghori_moksha

अवश्य वाचा.. हा थ्रेड
#गुलमोहर : हे झाड मादागास्कर येथून भारतात आणले आहे. याची लालभडक फुले कुणालाही आकर्षित करून घेणारी असली, तरी ती सुगंधी नाहीत. पूजा किंवा पुष्पहार यांच्या उपयोगाची नाहीत. या झाडाचे आयुष्यही १० ते १५ वर्षांपेक्षा अधिक नसल्यामुळे दूरगामी कोणताच लाभ यात मिळत नाही. #fridaymorning
#निलगिरी : हे झाड ऑस्ट्रेलियातून १९५२ या वर्षी आयात केलेल्या गव्हासह आलेले आहे. मूळ निलगिरी झाडांच्या पानांचा जो सुगंध डोकेदुखी थांबवण्यासाठी वापरला जातो, तसा या झाडात नसून हे झाड जमिनीतून इतर झाडांच्या १५ टक्क्यांहून अधिक पाणी स्वत:कडे ओढून घेते. #FridayMotivation
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