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Most recents (7)

पुराणों में वर्णित है और यहां द्वार भी लिखा है कि

यह ऐसी #जगह है जहां #यमराज को भी
यहां से #पराजित होकर #लौटना पड़ा था।

आइये जानते हैं इसके पीछे कि कहानी:-

#मार्कंडेय_महादेव का मंदिर शैव-वैष्णव एकता के प्रतीक के रूप में प्रसिद्ध है। चौबेपुर के पास वाराणसी-गाजीपुर मार्ग के
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दाहिनी ओर स्थित कैथी गांव में #काशीराज_दिवोदास द्वारा बसाई गई है। इसे #दूसरी_काशी भी कहते हैं।

#शिव_पुराण की कथा के अनुसार, #मृकंड ऋषि पुत्रहीन थे। संतान के लिए उन्होंने सपत्नी #गंगा-गोमती के #संगम पर बालू का शिव विग्रह बनाकर भगवान शिव की आराधना शुरू की।
भगवान शिव ने प्रसन्न
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होकर वरदान मांगने को कहा तो उन्होंने पुत्र की कामना रखी। #पुत्र_योग न होने के बाद भी भगवान #शिव ने उन्हें अल्पायु पुत्र दिया। उनका नाम #मार्कंडेय ऋषि पड़ा। जब वे सात वर्ष के हुए तो उन्हें पता चला कि वह अल्पायु हैं। तब उन्होंने भी #शिवविग्रह बना कर भगवान शिव की आराधना की।
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#गियानीजी प्रवचन में बोल रहे थे..जिस पर #कालकूट विष का असर नहीं हुआ..!! "शरणं सदाशिवम्" के बाद उसे भी जगत कल्याण के भूषणरूप आत्मसात कर लिया. हो .!!
"यच्चकार गले नीलं तच्च साधोर्विभूषणम्"
उसका आप अपने गंदे पानी से क्या बिगाड़ लोगे......???
@Sabhapa30724463
@Bhargavi8888
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#मैथलीशरण गुप्त (साकेत) की पंक्ति है ..
मनुज दुग्ध से, दनुज रुधिर से
अमर सुधा से जीते हैं..
किन्तु हलाहल भव-सागर का
#शिव शंकर ही पीते हैं .!!
गोस्वामी #तुलसीदास रामचरितमानस (#किष्किन्धाकाण्ड, दूसरा सोरठा) में विषपायी शंकर के लिये कहते हैं .?
जरत सकल सुर बृंद ...
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बिषम #गरल जेहिं पान किय ।
तेहि न भजसि मन मंद को कृपाल संकर सरिस ।।
भगवान शंकर ऐसे ही थोड़ी भक्तों के #भुवनभयभंजन हैं..??? जो इनके श्रीचरण की शरण ग्रहण करता है, उसका भवविष भी वे #भवान्तक पी जाते हैं और साधक पुन: पुन: जननी-जठर में आने के मरणान्तक कष्ट से मुक्ति पाता है..!!
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उनाकोटी (Unakoti) : भारत के एक राज्य, #त्रिपुरा की राजधानी #अगरतला से 178 KM दूर #उनाकोटी ज़िले के कैलाशहर उपखंड में स्थित एक ऐतिहासिक व पुरातत्विक हिन्दू तीर्थस्थल है। यहाँ भगवान शिव को समर्पित 99 लाख, 99 हज़ार, 999 मूर्तियाँ हैं |
#incredibleindia #incredibles Image
जिनका निर्माण 7वीं – 9वीं शताब्दी ईसवी, या उस से भी पहले, बंगाल व पड़ोसी क्षेत्रों में पाल वंश के राजकाल में हुआ था | मूर्तियों की संख्या के आधार पर ही इस जगह का नाम "उनाकोटी" पड़ा क्योंकि यहाँ की भाषा के अनुसार 'कोटि' का मतलब होता है 'करोड़' और 'उना' का मतलब होता है 'एक कम' | Image
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान #शिव ने एक बार #काशी जाते समय 99,99,999 देवी-देवताओं के साथ विश्राम करने के लिए यहां एक रात बिताई थी। और उन्होंने सभी देवी देवताओं को सूर्योदय से पहले उठने और काशी की ओर चलने के लिए कहा था। दुर्भाग्य से, Image
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1.
मैं #भारत हूँ🇮🇳🚩❤️💪
🔶 मैं वह भारत हूँ, जिसने पिछले 5000वर्ष में कभी अपने किसी बेटे का नाम #दुशासन नहीं रखा,
"क्योंकि उसने एक स्त्री का अपमान किया था"
🔶 मैं वह भारत हूँ, जो कभी अपने बच्चों को #रावण या #कंस नाम नहीं देता,
"क्योंकि इन्होंने अपने जीवन में स्त्रियों के...
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2.
साथ दुर्व्यवहार किया था"
🔶 मैं वह भारत हूँ, जहाँ कोई #गांधारी , अपने सौ पुत्रों की मृत्यु के बाद भी #द्रौपदी पर क्रोध नहीं करती, बल्कि अपने बेटों की असभ्यता के लिए क्षमा मांगती है!
🔶 मैं वह भारत हूँ, जहाँ 99% बलात्कारियों को अपना गाँव छोड़ देना पड़ता है,
और उसे धक्का..
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3.
"कोई और नहीं, खुद उसके खानदान वाले देते हैं"
🔶 मैं वह भारत हूँ, जहाँ गुस्सा आने पर सामान्य बाप, #बेटे को भले लात से मार दे,
"पर #बेटी को थप्पड़ नहीं मारता"
🔶 मैं वह भारत हूँ, जहाँ एक सामान्य बाप अपने समूचे #जीवन की कमाई, अपनी बेटी के लिए "सुखी संसार रचने में खर्च कर...
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🌼ॐ नमः शिवाय🌼

विशेष धर्मशिक्षा Twitter Thread

🙏#महाकाल की विशेष कृपाका प्राप्तिकाल है #Mahashivratri

दक्षिण भारतमें यह शक संवत् माघ कृष्ण चतुर्दशी,
तो उत्तर भारतमें विक्रम संवत् फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशीको होता है !

🙏इस समय #शिव जी ध्यानावस्थासे समाधि-अवस्थामें जाते है।

+
#Mahashivratri को

🙏शिवजी रात्रि एक प्रहर विश्राम करते हैं!
🌿अधिकाधिक शिवतत्त्व आकृष्ट करने हेतु बिल्वपत्र, श्वेतपुष्प इ. शिवपिंडीपर चढाते है।
🙏शिवार्चन व अभिषेकका विशेष महत्व है।

शिवजीके दर्शन एवं #महाशिवरात्रि व्रतका विधी, शास्त्रोक्त जानकारी हेतु सभी यह thread अवश्य पढे

+ श्री विश्वनाथ जी
#महाशिवरात्रि विशेष धर्मशिक्षा -शिवलिंगपर दूधका अभिषेक!

🔱दूध में शिवतत्त्व को आकर्षित करने की क्षमता अधिक होती है।
🔱दूध शक्तिका प्रतीक होने से शिवलिंग पर उसका अभिषेक किया जाता है।
🔱अभिषेक के बाद उस दूध को तीर्थ के रूप में पीने से पूजक को उसका आध्यात्मिक लाभ मिलता है।

+
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भगवान #शिव की अर्ध परिक्रमा क्यों.. ?

एक सूत्र।

Via इंस्टा
Credit: Sanatan Dharma Image
शिवजी की आधी परिक्रमा करने का विधान है। वह इसलिए की शिव के सोमसूत्र को लांघा नहीं जाता है। जब व्यक्ति आधी परिक्रमा करता है तो उसे चंद्राकार परिक्रमा कहते हैं। शिवलिंग को ज्योति माना गया है और उसके आसपास के क्षेत्र को चंद्र।
१/न
आपने आसमान में अर्ध चंद्र के ऊपर एक शुक्र तारा देखा होगा। यह शिवलिंग उसका ही प्रतीक नहीं है बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड ज्योतिर्लिंग के ही समान है।

"अर्द्ध सोमसूत्रांतमित्यर्थः शिव प्रदक्षिणीकुर्वन सोमसूत्र न लंघयेत ।। इति वाचनान्तरात।"
२/न
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मुरुदेश्वर मंदिर, भटकल, कर्नाटक

भगवान #शिव को समर्पित, यह मंदिर कन्दुका पहाड़ी पर, तीन ओर से पानी से घिरा हुआ है।
यह स्तिथ मूर्ति, विश्व की दूसरी सबसे ऊँची शिव मूर्ति है जिसकी ऊँचाई १२३ फीट है।

यहाँ भगवान शिव का आत्म लिंग स्थापित है, जिस की कथा रामायण काल से है।
#TemplesofIndia
एकंबरेश्वर मन्दिर, कांचीपुरम
छठी शताब्दी में निर्मित,"पंचभूत स्थलम" के पांच पवित्र शिव मंदिरों में से एक,यह #धरती तत्व का प्रतिनिधित्व करता है।
सहस्त्र स्तंभों के विशाल मंडप से युक्त इस मंदिर का गोपुरम 59 मीटर है।
मंदिर की भीतरी दीवारों पर 1008 शिवलिंग सज्जित हैं।
#TemplesofIndia
#मोढेरा_सूर्य_मंदिर, गुजरात
सन् १०२६ ई. में सोलंकी वंश के राजा भीमदेव द्वारा चालुक्य शैली में निर्मित, यह सूर्य मन्दिर भारतवर्ष में विलक्षण स्थापत्य एवम् शिल्प कला का बेजोड़ उदाहरण है।
मंदिर परिसर में गुढ़मंड़पा (बरामदा), गर्भगृह, रांगमंडप और एक पवित्र जलाशय हैं।

#TemplesOfIndia
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